मानव नेत्र की संरचना
नेत्र गोलक लगभग गोल होता है, व्यास लगभग 2.3 cm। प्रकाश जिस क्रम में भागों से मिलता है:
- कॉर्निया (स्वच्छ मंडल): आगे की पारदर्शी उभरी झिल्ली। प्रकाश का ज़्यादातर अपवर्तन यहीं होता है।
- परितारिका (आइरिस): रंगीन घेरा, जो पुतली का आकार बदलता है – अँधेरे में बड़ी, तेज़ रोशनी में छोटी।
- नेत्र लेंस (अभिनेत्र लेंस): पारदर्शी, जैली जैसा उत्तल लेंस; फोकस को बारीकी से ठीक करता है।
- पक्ष्माभी पेशियाँ: लेंस को थामती हैं और उसकी वक्रता बदलती हैं।
- दृष्टिपटल (रेटिना): पीछे का प्रकाश-सुग्राही पर्दा, जिसमें शलाका और शंकु कोशिकाएँ प्रकाश को विद्युत संकेत में बदलती हैं।
- दृक् तंत्रिका: संकेत मस्तिष्क तक ले जाती है; मस्तिष्क उल्टे प्रतिबिंब को सीधा करके दिखाता है।
इस तरह आँख एक लेंस-तंत्र है: कॉर्निया + लेंस रेटिना पर वास्तविक, उल्टा, छोटा प्रतिबिंब बनाते हैं।
समंजन क्षमता
लेंस से रेटिना की दूरी नहीं बदल सकती, इसलिए आँख अपने लेंस की फोकस दूरी बदलती है।
- दूर की वस्तु → पेशियाँ ढीली → लेंस पतला → फोकस दूरी सबसे अधिक।
- पास की वस्तु → पेशियाँ सिकुड़ती हैं → लेंस मोटा → फोकस दूरी कम।
इसी क्षमता को समंजन क्षमता कहते हैं। इसकी सीमाएँ हैं:
- निकट बिंदु (सुस्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी): सामान्य आँख के लिए लगभग 25 cm।
- दूर बिंदु: सामान्य आँख के लिए अनंत।
पुतली का आकार क्यों बदलता है
अँधेरे कमरे में पुतली फैलकर ज़्यादा प्रकाश लेती है; धूप में आते ही सिकुड़ जाती है। यह काम परितारिका अपने आप करती है।
दृष्टि दोष और उनका संशोधन
निकट दृष्टि दोष (मायोपिया)
पास की चीज़ें साफ़, दूर की धुंधली। दूर बिंदु अनंत से पास आ जाता है। कारण: नेत्र गोलक का लंबा होना या लेंस का बहुत अधिक वक्र होना। दूर की वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना के आगे बनता है। सुधार: उचित क्षमता का अवतल (अपसारी) लेंस, जिसकी फोकस दूरी = −(दूर बिंदु)।
दीर्घ दृष्टि दोष (हाइपरमेट्रोपिया)
दूर की चीज़ें साफ़, पास की धुंधली। निकट बिंदु 25 cm से दूर चला जाता है। कारण: नेत्र गोलक का छोटा होना या लेंस की फोकस दूरी बहुत अधिक होना। पास की वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता। सुधार: उत्तल (अभिसारी) लेंस।
जरा-दूरदृष्टिता (प्रेसबायोपिया)
उम्र बढ़ने पर पक्ष्माभी पेशियाँ कमज़ोर और लेंस कम लचीला हो जाता है, निकट बिंदु दूर खिसक जाता है। बुज़ुर्गों को पढ़ने के लिए उत्तल लेंस चाहिए। जिन्हें दोनों दोष हों वे द्विफोकसी लेंस पहनते हैं: ऊपर अवतल (दूर देखने को), नीचे उत्तल (पढ़ने को)।
अन्य उपाय
कॉन्टैक्ट लेंस और शल्य चिकित्सा से भी ये दोष ठीक होते हैं। बुढ़ापे में लेंस का धुंधला होना मोतियाबिंद है, जिसका इलाज ऑपरेशन से होता है।
दो आँखें क्यों, और बोर्ड परीक्षा के सुझाव
दो आँखों से देखने का क्षेत्र चौड़ा होता है और गहराई (दूरी) का अंदाज़ा मिलता है, क्योंकि दोनों आँखें थोड़ी अलग तस्वीर देखती हैं।
परीक्षा में: निकट/दीर्घ दृष्टि दोष और उनके सुधार के नामांकित किरण आरेख (2–3 अंक), लेंस क्षमता पर संख्यात्मक प्रश्न (P = 1/f, f मीटर में), और निकट बिंदु, दूर बिंदु, समंजन, परितारिका/पुतली के कार्य पर 1 अंक के प्रश्न।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- लेंस की क्षमता: P = 1 / f (f मीटर में), मात्रक डाइऑप्टर (D)
- निकट दृष्टि दोष सुधार: अवतल लेंस, f = −(दोषयुक्त आँख का दूर बिंदु)
- दीर्घ दृष्टि दोष सुधार: 1/f = 1/0.25 − 1/(निकट बिंदु मीटर में), उत्तल लेंस
- सामान्य आँख: निकट बिंदु ≈ 25 cm, दूर बिंदु = अनंत
- अवतल लेंस → ऋणात्मक क्षमता; उत्तल लेंस → धनात्मक क्षमता
हल किए गए उदाहरण
1. एक निकट दृष्टि दोष वाला व्यक्ति 2 m से आगे साफ़ नहीं देख पाता। कौन-सा लेंस और कितनी क्षमता चाहिए?
दूर बिंदु = 2 m, तो f = −2 m। P = 1/f = −0.5 D। −0.5 D का अवतल लेंस।
2. एक छात्र का दूर बिंदु 80 cm है। संशोधक लेंस की क्षमता ज्ञात कीजिए।
f = −80 cm = −0.8 m। P = 1/(−0.8) = −1.25 D (अवतल)।
3. डॉक्टर ने −2.5 D का लेंस लिखा। दोष कौन-सा है और दूर बिंदु कितना है?
ऋणात्मक क्षमता = अवतल लेंस, अतः निकट दृष्टि दोष। f = 1/(−2.5) = −0.4 m, दूर बिंदु 40 cm।
4. दीर्घ दृष्टि दोष वाली आँख का निकट बिंदु 1 m है। 25 cm पर पढ़ने के लिए कौन-सा लेंस चाहिए?
u = −25 cm, v = −100 cm। 1/f = 1/v − 1/u = −1/100 + 1/25 = 3/100, f = 33.3 cm = 0.333 m। P = +3 D (उत्तल)।
5. एक बुज़ुर्ग का निकट बिंदु 50 cm है। पढ़ने के चश्मे की क्षमता?
u = −25 cm, v = −50 cm। 1/f = −1/50 + 1/25 = 1/50, f = 0.5 m, P = +2 D।
6. एक महिला को दूर के लिए −1.5 D और पढ़ने के लिए +2 D चाहिए। कैसा चश्मा?
उसे निकट दृष्टि दोष और जरा-दूरदृष्टिता दोनों हैं, इसलिए द्विफोकसी लेंस: ऊपर अवतल (−1.5 D) दूर के लिए, नीचे उत्तल (+2 D) पढ़ने के लिए।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि आँख लेंस और रेटिना की दूरी बदलती है। असल में लेंस की मोटाई यानी फोकस दूरी बदलती है।
- लेंस उलट देना: निकट दृष्टि दोष में अवतल (ऋण), दीर्घ दृष्टि दोष व जरा-दूरदृष्टिता में उत्तल (धन)।
- P = 1/f लगाने से पहले cm को मीटर में न बदलना।
- यह मानना कि दूर देखने पर पक्ष्माभी पेशियाँ सिकुड़ती हैं। दूर के लिए वे ढीली होती हैं, पास के लिए सिकुड़ती हैं।