आँख एक प्रकाशीय तंत्र
आँख उत्तल लेंस वाले कैमरे जैसी है। रोशनी कॉर्निया (आगे की पारदर्शी खिड़की), जलीय द्रव (aqueous humour), पुतली (आइरिस का छेद, जो रोशनी की मात्रा तय करता है), लेंस और जेली जैसे काचाभ द्रव (vitreous humour) से होकर रेटिना पर पहुँचती है।
कुल लगभग +60 D में से करीब +40 D मोड़ कॉर्निया पर होता है, क्योंकि हवा से कॉर्निया में अपवर्तनांक का सबसे बड़ा बदलाव है। लेंस बाकी जोड़ता है और अपना आकार बदल सकता है।
किरण आरेख और लेंस समीकरण
आँख को एक पतला उत्तल लेंस मानते हैं। वास्तविक-धनात्मक नियम से: 1/f = 1/u + 1/v और P = 1/f (डायोप्टर, f मीटर में)। रेटिना पर प्रतिबिंब वास्तविक, उल्टा और छोटा होता है; दिमाग उसे सीधा कर देता है।
समंजन, निकट बिंदु और दूर बिंदु
समंजन (accommodation) यानी अलग-अलग दूरी पर फ़ोकस के लिए आँख का अपनी क्षमता बदलना। सिलियरी मांसपेशियाँ ढीली हों तो लेंस पतला: कम क्षमता, दूर के लिए अच्छा। सिकुड़ें तो लेंस मोटा: ज़्यादा क्षमता, पास के लिए अच्छा।
दूर बिंदु: सबसे दूर का बिंदु जो साफ़ दिखे (सामान्य आँख में अनंत)। निकट बिंदु: सबसे पास का (युवा वयस्क में लगभग 25 cm)। उम्र के साथ लेंस सख़्त होता है और निकट बिंदु दूर खिसकता है (जरा-दूरदर्शिता)।
संवेदनशीलता, रंग और बारीकी (विभेदन)
रेटिना में दो तरह के प्रकाश-संसूचक हैं:
- छड़ें (rods): लगभग 12 करोड़, ज़्यादातर किनारों पर। बहुत संवेदनशील, कम रोशनी में काम करती हैं। एक ही प्रकार, इसलिए रंग नहीं।
- शंकु (cones): लगभग 60 लाख, बीच के फ़ोविया में घने। तीन प्रकार, जिनकी सबसे ज़्यादा प्रतिक्रिया लगभग 420 nm (नीला), 530 nm (हरा) और 560 nm (लाल) पर। दिमाग तीनों के संकेत मिलाकर हर रंग देखता है — यही त्रिवर्णी विचार है। इन्हें तेज़ रोशनी चाहिए।
छड़ों से बारीकी कम क्यों?
कई छड़ें एक ही तंत्रिका तंतु साझा करती हैं, तो दिमाग नहीं जानता कौन-सी छड़ पर रोशनी पड़ी। फ़ोविया के हर शंकु का अपना तंतु है। दो बिंदु अलग दिखते हैं तभी जब उनके प्रतिबिंब दो ऐसे शंकुओं पर पड़ें जिनके बीच कम से कम एक बिना-उत्तेजित शंकु हो। इससे सबसे अच्छा विभेदन लगभग 1 आर्क-मिनट (करीब 3 × 10⁻⁴ rad) है।
दृष्टि-स्थायित्व
प्रतिबिंब लगभग 1/10 s तक टिका रहता है, इसलिए प्रति सेकंड करीब 20 से ज़्यादा फ़्रेम चलती तस्वीर लगते हैं।
दृष्टि दोष और लेंस से उनका सुधार
निकट-दृष्टि (मायोपिया)
दूर बिंदु अनंत से पास आ जाता है। दूर की किरणें रेटिना के आगे मिलती हैं। उपाय: अवतल (अपसारी) लेंस जो दूर की चीज़ों को दूर बिंदु पर दिखाए। f = −(दूर बिंदु की दूरी).
दूर-दृष्टि (हाइपरमेट्रोपिया)
निकट बिंदु 25 cm से दूर चला जाता है। उपाय: उत्तल (अभिसारी) लेंस जो 25 cm पर रखी चीज़ का आभासी प्रतिबिंब व्यक्ति के निकट बिंदु पर बनाए। 1/f = 1/u + 1/v में u = +0.25 m और v = −(निकट बिंदु)।
दृष्टिवैषम्य (astigmatism)
कॉर्निया एक दिशा में दूसरी से ज़्यादा मुड़ा होता है, इसलिए एक दिशा की रेखाएँ धुँधली दिखती हैं। उपाय: सही कोण पर रखा बेलनाकार लेंस। पर्ची में क्षमता और अक्ष का कोण दोनों होते हैं।
लेंसों का संयोजन
सटे पतले लेंस: P = P₁ + P₂.
करके देखो
एक पेंसिल हाथ भर दूर रखो और धीरे-धीरे एक आँख के पास लाओ। जहाँ वह पहली बार धुँधली हो, वही तुम्हारा निकट बिंदु है। अँधेरे कमरे में छपे शब्द को देखो — रंग पहले गायब होते हैं। 3D में निकट-दृष्टि चुनो, फिर चश्मा दबाओ और फ़ोकस को रेटिना पर लौटते देखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- P = 1/f (P डायोप्टर D में, f मीटर में)
- 1/f = 1/u + 1/v (वास्तविक धनात्मक; आभासी प्रतिबिंब की दूरी ऋणात्मक)
- सटे लेंस: P = P₁ + P₂ + …
- निकट-दृष्टि सुधार: f = −(दूर बिंदु की दूरी)
- दूर-दृष्टि: u = 0.25 m, v = −(निकट बिंदु) → 1/f = 1/0.25 − 1/(निकट बिंदु)
- सामान्य आँख: निकट बिंदु ≈ 25 cm, दूर बिंदु = ∞, कुल क्षमता ≈ +60 D
हल किए गए उदाहरण
1. एक लेंस की फ़ोकस दूरी 25 cm है। उसकी क्षमता?
P = 1/f = 1/0.25 = +4 D.
2. निकट-दृष्टि वाले व्यक्ति का दूर बिंदु 2.0 m है। सुधारक लेंस की क्षमता निकालो।
लेंस को अनंत की चीज़ें 2.0 m पर दिखानी हैं, तो f = −2.0 m. P = 1/(−2.0) = −0.5 D (अवतल)।
3. दूर-दृष्टि वाले का निकट बिंदु 1.0 m है। 25 cm पर पढ़ने के लिए कौन-सा लेंस?
u = 0.25 m, v = −1.0 m (आभासी)। 1/f = 4 − 1 = 3. P = +3 D, f ≈ 0.33 m (उत्तल)।
4. निकट-दृष्टि आँख का दूर बिंदु 50 cm, बिना चश्मे निकट बिंदु 15 cm. सही चश्मे के साथ नया निकट बिंदु?
f = −0.50 m. आभासी प्रतिबिंब v = −0.15 m पर: 1/u = 1/f − 1/v = −2 + 6.67 = 4.67, u ≈ 0.21 m. नया निकट बिंदु ≈ 21 cm.
5. +2.5 D और −1.0 D के दो पतले लेंस सटे हैं। संयुक्त फ़ोकस दूरी?
P = 2.5 − 1.0 = +1.5 D. f = 1/1.5 ≈ 0.67 m.
6. आँख 3 × 10⁻⁴ rad विभेदित कर सकती है। 25 cm पर दो बिंदुओं के बीच सबसे छोटा अंतर?
अंतर = कोण × दूरी = 3 × 10⁻⁴ × 0.25 ≈ 7.5 × 10⁻⁵ m ≈ 0.08 mm.
आम गलतियाँ
- P = 1/f में f को सेंटीमीटर में रखना। 20 cm = 0.20 m, यानी 5 D, 0.05 D नहीं।
- उपाय उलट देना: निकट-दृष्टि को अवतल (−), दूर-दृष्टि को उत्तल (+) लेंस चाहिए।
- दूर-दृष्टि के प्रश्नों में आभासी प्रतिबिंब की दूरी का ऋण चिह्न भूलना।
- यह कहना कि छड़ें रंग देखती हैं या शंकु कम रोशनी में अच्छे हैं। बात उल्टी है।