कान: ध्वनि पकड़ने का तंत्र
ध्वनि हवा में एक अनुदैर्ध्य दबाव तरंग है। कान के तीन भाग हैं।
- बाहरी कान: कर्ण-पल्लव (pinna) ध्वनि इकट्ठा करता है। लगभग 2.5 cm लंबी कान की नली उसे कान के पर्दे (tympanic membrane) तक ले जाती है। नली लगभग 3 kHz पर अनुनाद करती है।
- मध्य कान: तीन छोटी हड्डियाँ — अस्थिकाएँ (मैलियस/हथौड़ा, इंकस/निहाई, स्टेपीज़/रकाब) — पर्दे को कोक्लिया की अंडाकार खिड़की से जोड़ती हैं। ये लीवर की तरह बल को लगभग 1.3 गुना करती हैं।
- भीतरी कान: कोक्लिया घोंघे जैसी, द्रव से भरी नली है। इसकी बेसिलर झिल्ली पर बाल कोशिकाएँ होती हैं। झिल्ली हिलती है तो ये मुड़कर श्रवण तंत्रिका में विद्युत संकेत बनाती हैं।
दबाव क्यों बढ़ता है
दबाव = बल ÷ क्षेत्रफल। पर्दा (लगभग 55 mm²) अंडाकार खिड़की (लगभग 3.2 mm²) से लगभग 17 गुना बड़ा है। वही बल छोटे क्षेत्र पर = ज़्यादा दबाव। लीवर लाभ 1.3 के साथ: दबाव लाभ ≈ 17 × 1.3 ≈ 22। इसे प्रतिबाधा मिलान (impedance matching) कहते हैं। इसके बिना हवा-द्रव सीमा पर लगभग 99.9% ध्वनि लौट जाती।
तारत्व का स्थान सिद्धांत
बेसिलर झिल्ली आधार (अंडाकार खिड़की के पास) पर पतली और कड़ी, और शिखर पर चौड़ी और ढीली है। ऊँची आवृत्ति आधार को सबसे ज़्यादा हिलाती है, नीची आवृत्ति शिखर को। दिमाग़ समझ जाता है कि कौन-सी बाल कोशिकाएँ संकेत दे रही हैं।
संवेदनशीलता और आवृत्ति अनुक्रिया
श्रवण दहलीज़ वह सबसे छोटी तीव्रता है जो बस सुनाई दे। 1 kHz पर यह I₀ = 1.0 × 10⁻¹² W m⁻² है। पीड़ा की दहलीज़ लगभग 1 W m⁻² — यानी 10¹² गुना! इतनी बड़ी परास के लिए लघुगणकीय (log) पैमाना लेते हैं।
तीव्रता स्तर: L = 10 log₁₀(I ÷ I₀), डेसिबल (dB) में।
- तीव्रता 10 गुना → स्तर +10 dB।
- तीव्रता 2 गुना → स्तर लगभग +3 dB।
कान हर आवृत्ति पर बराबर संवेदनशील नहीं। स्वस्थ युवा कान लगभग 20 Hz से 20 kHz सुनता है और 2–5 kHz पर सबसे संवेदनशील है। दहलीज़ बनाम आवृत्ति (log) का ग्राफ़ U-आकार का है।
प्रबलता, फ़ोन और dBA पैमाना
प्रबलता (loudness) यह है कि ध्वनि सुनने वाले को कितनी तेज़ लगती है — यह तीव्रता और आवृत्ति दोनों पर निर्भर है। समान प्रबलता वक्रों की इकाई फ़ोन (phon) है। dBA पैमाना हर आवृत्ति को कान की तरह तौलता है, ताकि ध्वनि मीटर का पाठ हमारे सुनने से मेल खाए। प्रबलता दुगनी लगने के लिए लगभग 10 dB बढ़ाना पड़ता है।
श्रवण दोष
श्रवण परीक्षण (ऑडियोग्राम) कई आवृत्तियों पर दहलीज़ नापता है। श्रवण हानि में दहलीज़ वक्र ऊपर उठ जाता है (सुनने के लिए तेज़ आवाज़ चाहिए)।
- उम्र से हानि (प्रेस्बिक्यूसिस): आधार की बाल कोशिकाएँ पहले घिसती हैं, इसलिए ऊँची आवृत्तियों पर दहलीज़ सबसे ज़्यादा बढ़ती है। बुज़ुर्गों को स, फ़ जैसे व्यंजन समझने में दिक़्क़त होती है।
- शोर से हानि: घंटों तक लगभग 85 dBA से ज़्यादा शोर बाल कोशिकाओं को नुक़सान पहुँचाता है। इसकी पहचान 4 kHz के पास गड्ढा है। यह अस्थायी (कॉन्सर्ट के बाद सीटी) या स्थायी हो सकती है।
- संचालन हानि: ध्वनि कोक्लिया तक ठीक से नहीं पहुँचती (मैल, मध्य कान में द्रव, कड़ी अस्थिकाएँ)। अक्सर इलाज हो जाता है।
श्रवण यंत्र चुनी हुई आवृत्तियों को बढ़ाता है; कॉक्लियर इम्प्लांट सीधे तंत्रिका को विद्युत संकेत देता है।
खुद करो: अपनी सुनने की परास जाँचो
किसी बड़े की मदद से ईयरफ़ोन में धीमी आवाज़ पर कोई मुफ़्त टोन जनरेटर चलाओ। आवृत्ति 1 kHz से धीरे-धीरे 20 kHz तक बढ़ाओ। सबसे ऊँचा सुर लिखो जो अभी भी सुनाई दे। घर के किसी बुज़ुर्ग से भी करवाओ और तुलना करो। फिर 3D के आख़िरी चरण में 12 kHz और 20 dB रखकर देखो किन कानों को सुनाई देता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- तीव्रता I = P ÷ A (W m⁻²)
- तीव्रता स्तर L = 10 log₁₀(I ÷ I₀) dB, I₀ = 1.0 × 10⁻¹² W m⁻²
- दबाव लाभ ≈ (पर्दे का क्षेत्रफल ÷ अंडाकार खिड़की का क्षेत्रफल) × लीवर अनुपात ≈ 17 × 1.3 ≈ 22
- स्तर में बदलाव ΔL = 10 log₁₀(I₂ ÷ I₁)
- श्रव्य परास ≈ 20 Hz – 20 kHz; सबसे संवेदनशील 2–5 kHz
हल किए गए उदाहरण
1. किसी ध्वनि की तीव्रता 1.0 × 10⁻⁶ W m⁻² है। तीव्रता स्तर निकालो।
L = 10 log₁₀(10⁻⁶ ÷ 10⁻¹²) = 10 log₁₀(10⁶) = 60 dB।
2. एक ड्रिल 90 dB देती है। उसकी तीव्रता क्या है?
90 = 10 log₁₀(I/I₀) → I/I₀ = 10⁹ → I = 10⁹ × 10⁻¹² = 1.0 × 10⁻³ W m⁻²।
3. दो एक जैसी मशीनें, हर एक 80 dB। दोनों साथ में?
तीव्रता दुगनी। ΔL = 10 log₁₀2 = 3.0 dB। कुल = 83 dB (160 dB नहीं)।
4. 55 mm² के पर्दे पर 0.020 N बल। अस्थिकाएँ बल 1.3 गुना करती हैं, अंडाकार खिड़की 3.2 mm²। दोनों जगह दबाव निकालो।
पर्दे पर: p = 0.020 ÷ (55 × 10⁻⁶) = 364 Pa। खिड़की पर बल = 0.026 N; p = 0.026 ÷ (3.2 × 10⁻⁶) ≈ 8.1 kPa। लाभ ≈ 22।
5. एक स्पीकर 2.0 W ध्वनि सब दिशाओं में बराबर देता है। 10 m दूर तीव्रता स्तर?
I = P ÷ 4πr² = 2.0 ÷ (4π × 100) = 1.59 × 10⁻³ W m⁻²। L = 10 log₁₀(1.59 × 10⁹) = 92 dB।
6. एक मज़दूर के ऑडियोग्राम में दहलीज़: 1 kHz पर 10 dB, 4 kHz पर 45 dB, 8 kHz पर 20 dB। क्या संकेत है?
4 kHz पर सबसे ज़्यादा बढ़ी है और दोनों ओर बेहतर — यह 4 kHz का गड्ढा है, शोर से हुई श्रवण हानि की पहचान।
आम गलतियाँ
- डेसिबल को सीधे जोड़ना: दो 80 dB स्रोत = 83 dB, 160 dB नहीं।
- 0 dB को "कोई आवाज़ नहीं" समझना। इसका अर्थ है I = I₀, 1 kHz पर दहलीज़।
- आधार और शिखर उलटना: ऊँची आवृत्ति आधार (अंडाकार खिड़की के पास) पर पकड़ी जाती है।
- यह सोचना कि दबाव मुख्यतः लीवर से बढ़ता है। ज़्यादातर लाभ (लगभग 17 गुना) पर्दे और खिड़की के क्षेत्रफल अनुपात से आता है।