अल्ट्रासाउंड इमेजिंग
अल्ट्रासाउंड 20 kHz से ऊपर की ध्वनि है। चिकित्सा में लगभग 1–15 MHz। ऊँची आवृत्ति से बारीक विवरण मिलता है (छोटी तरंगदैर्ध्य), पर वह जल्दी अवशोषित होती है, इसलिए गहराई कम।
पीज़ोइलेक्ट्रिक ट्रांसड्यूसर
पीज़ोइलेक्ट्रिक क्रिस्टल पर वोल्टता लगाने से उसका आकार बदलता है, और दबाने पर वह वोल्टता बनाता है। छोटी वोल्टता पल्स से वह कंपन कर अल्ट्रासाउंड पल्स भेजता है। पल्सों के बीच वही क्रिस्टल रिसीवर बनकर लौटी गूँज को वोल्टता में बदलता है। पीछे लगा ब्लॉक कंपन जल्दी रोकता है ताकि पल्स छोटी रहे।
ध्वनिक प्रतिबाधा और परावर्तन
ध्वनिक प्रतिबाधा Z = ρc (घनत्व × ध्वनि की चाल), इकाई kg m⁻² s⁻¹। सीमा पर परावर्तित तीव्रता का भाग:
R = I_r ÷ I₀ = (Z₂ − Z₁)² ÷ (Z₂ + Z₁)²
Z में बड़ा अंतर = तेज़ परावर्तन। कोमल ऊतक से कोमल ऊतक पर केवल लगभग 1% लौटता है, इसलिए ज़्यादातर ध्वनि आगे जाकर गहरी परतें दिखाती है। हवा लगभग 100% लौटा देती है — इसीलिए त्वचा पर जेल (Z त्वचा के क़रीब) लगाते हैं। हड्डी बहुत परावर्तित और अवशोषित करती है, उसके पीछे देखना कठिन है।
A-स्कैन और B-स्कैन
- A-स्कैन (आयाम): एक किरण; गूँज की तीव्रता बनाम समय। गहराई d = c t ÷ 2। दूरी नापने में, जैसे आँख की लंबाई।
- B-स्कैन (चमक): कई क्रिस्टल या घुमाया गया प्रोब; हर गूँज सही गहराई पर एक चमकीला बिंदु, जिससे 2D चित्र बनता है — जैसे गर्भावस्था स्कैन।
लाभ: आयनकारी विकिरण नहीं, सस्ता, ले जाने योग्य, तुरंत (real-time)। सीमाएँ: हवा (फेफड़े, आँत की गैस) और हड्डी के पार ठीक नहीं; विवरण तरंगदैर्ध्य से सीमित।
प्रकाशीय तंतु और एंडोस्कोपी
प्रकाशीय तंतु (optical fibre) में ऊँचे अपवर्तनांक का काँच का कोर और उसके चारों ओर कम अपवर्तनांक का आवरण (cladding) होता है। कोर-आवरण सीमा पर क्रांतिक कोण c से बड़े कोण पर टकराया प्रकाश पूरा लौटता है: पूर्ण आंतरिक परावर्तन (TIR)। sin c = n₂ ÷ n₁। आवरण कोर की सतह बचाता है और प्रकाश को छूते तंतु में जाने से रोकता है।
एंडोस्कोप शरीर में डाली जाने वाली पतली लचीली नली है। इसमें:
- अव्यवस्थित (incoherent) गुच्छा: तंतु किसी भी क्रम में; केवल अंदर रोशनी पहुँचाने के लिए।
- व्यवस्थित (coherent) गुच्छा: हर तंतु दोनों सिरों पर एक ही जगह, ताकि चित्र सही क्रम में पहुँचे। पतले तंतु = बारीक विवरण।
- सिरे पर ऑब्जेक्टिव लेंस, ऊपर आईपीस या कैमरा, और पानी, हवा व छोटे औज़ारों के रास्ते (की-होल सर्जरी)।
चुंबकीय अनुनाद (MR) स्कैनर
शरीर ज़्यादातर पानी है, जिसमें बहुत से हाइड्रोजन नाभिक (प्रोटॉन) हैं। हर प्रोटॉन घूमता है और छोटे चुंबक जैसा है।
- अतिचालक चुंबक तेज़, एकसमान क्षेत्र (लगभग 1.5–3 T) बनाता है। प्रोटॉन उसकी दिशा में या उल्टे सीध में आते हैं और लार्मर आवृत्ति पर पुरस्सरण (precession, क्षेत्र के चारों ओर डगमगाना) करते हैं — लगभग 42.6 MHz प्रति टेस्ला (1.5 T पर 64 MHz)।
- ठीक उसी आवृत्ति की रेडियो तरंग की पल्स भेजी जाती है। प्रोटॉन उसे सोखते हैं (अनुनाद) और झुक जाते हैं।
- पल्स रुकने पर प्रोटॉन शिथिल (relax) होकर लौटते हैं और रेडियो तरंगें देते हैं, जिन्हें कुंडलियाँ पकड़ती हैं। अलग ऊतक अलग गति से लौटते हैं, इसलिए अलग दिखते हैं।
- ग्रेडिएंट कुंडलियाँ हर बिंदु पर क्षेत्र थोड़ा अलग करती हैं, तो आवृत्ति से पता चलता है संकेत कहाँ से आया। कंप्यूटर स्लाइस और 3D चित्र बनाता है।
लाभ: आयनकारी विकिरण नहीं; कोमल ऊतक (दिमाग़, मेरुरज्जु, जोड़) का शानदार विवरण; किसी भी कोण की स्लाइस। सीमाएँ: महँगा, धीमा, शोर वाला, रोगी स्थिर रहे; कुछ धातु इम्प्लांट या पेसमेकर वालों के लिए नहीं।
खुद करो: गूँज का समय नापो
किसी ऊँची दीवार से लगभग 50 m दूर खड़े होकर ताली बजाओ। एक दोस्त स्टॉपवॉच से ताली से गूँज तक का समय नापे। v = 340 m s⁻¹ लेकर d = v t ÷ 2 से दूरी निकालो और क़दम गिनकर जाँचो। यही हाथों वाला A-स्कैन है! तंतु के लिए: पानी भरी पारदर्शी बोतल में नीचे छेद करो और पीछे से टॉर्च डालो; गिरती धार के अंदर प्रकाश TIR से बँधा रहता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- गूँज से गहराई: d = c t ÷ 2
- ध्वनिक प्रतिबाधा: Z = ρ c
- परावर्तित भाग: R = (Z₂ − Z₁)² ÷ (Z₂ + Z₁)²
- क्रांतिक कोण: sin c = n₂ ÷ n₁ (n₁ > n₂)
- हाइड्रोजन की लार्मर आवृत्ति ≈ 42.6 MHz × B (टेस्ला)
हल किए गए उदाहरण
1. पल्स के 65 µs बाद गूँज लौटती है। c = 1540 m s⁻¹। सीमा कितनी गहरी है?
d = 1540 × 65 × 10⁻⁶ ÷ 2 = 0.050 m = 5.0 cm।
2. मांसपेशी: ρ = 1075 kg m⁻³, c = 1590 m s⁻¹। Z निकालो।
Z = 1075 × 1590 = 1.71 × 10⁶ kg m⁻² s⁻¹।
3. वसा (Z = 1.38 × 10⁶) से मांसपेशी (Z = 1.70 × 10⁶) सीमा पर परावर्तित भाग?
R = (0.32)² ÷ (3.08)² = 0.1024 ÷ 9.49 = 0.011, लगभग 1.1%।
4. जेल क्यों चाहिए? हवा Z = 430, त्वचा Z = 1.7 × 10⁶।
R ≈ 0.999। लगभग पूरी ध्वनि त्वचा से लौट जाती। जेल का Z त्वचा के क़रीब है, तो कम लौटता है।
5. तंतु का कोर n = 1.52, आवरण n = 1.40। क्रांतिक कोण?
sin c = 1.40 ÷ 1.52 = 0.921, c = 67°।
6. 3.0 T स्कैनर में प्रोटॉन की लार्मर आवृत्ति?
f = 42.6 MHz × 3.0 = 128 MHz (रेडियो तरंग)।
आम गलतियाँ
- d = c t ÷ 2 में ÷ 2 भूलना: समय आने-जाने का है।
- सोचना कि बड़ा Z = ज़्यादा परावर्तन। असल में दोनों ओर के Z का अंतर मायने रखता है।
- गुच्छे उलटना: व्यवस्थित गुच्छा चित्र लाता है, अव्यवस्थित केवल रोशनी।
- कहना कि MRI में X-किरणें हैं। इसमें केवल चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगें हैं।