संचार तंत्र के सिद्धांत
संचार तंत्र सूचना एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाता है।
- ट्रांसमीटर: संदेश (आवाज़, लिखावट, वीडियो) को संकेत में बदलकर भेजता है।
- चैनल: वह रास्ता जिससे संकेत चलता है।
- रिसीवर: संकेत पकड़कर फिर संदेश बनाता है।
रास्ते में संकेत कमज़ोर होता है (क्षीणन) और अनचाहे संकेत जुड़ते हैं (रव या नॉइज़)। रिपीटर और प्रवर्धक उसे बढ़ाते हैं।
एनालॉग और डिजिटल
एनालॉग संकेत कोई भी मान ले सकता है। डिजिटल संकेत में कुछ ही स्तर होते हैं, आमतौर पर 0 और 1। डिजिटल संकेत हर रिपीटर पर फिर से साफ़ बनाया जा सकता है, इसलिए नॉइज़ जमा नहीं होता। सैंपलिंग दर संकेत की सबसे बड़ी आवृत्ति से कम से कम दोगुनी होनी चाहिए।
बिट दर = प्रति सेकंड भेजे गए बिट (bit/s)।
संचरण माध्यम
- ताँबे का तार (ट्विस्टेड पेयर, कोएक्सियल): सस्ता, जोड़ना आसान। संकेत जल्दी कमज़ोर, नॉइज़ ज़्यादा। कोएक्सियल में ढाल है, तो नॉइज़ कम।
- ऑप्टिकल फ़ाइबर: पतले काँच में प्रकाश-स्पंद पूर्ण आंतरिक परावर्तन से चलते हैं। बहुत बड़ी बैंडविड्थ, बहुत कम हानि, बिजली का नॉइज़ नहीं, सुरक्षित। जोड़ना कठिन, बिछाना महँगा।
- रेडियो तरंगें: तार नहीं चाहिए, चलते लोगों के लिए अच्छा। कम आवृत्ति ज़मीन के साथ या आयनमंडल से लौटकर जाती है; माइक्रोवेव को सीधी दृष्टि-रेखा या उपग्रह चाहिए।
तार और फ़ाइबर में चाल लगभग 2×10⁸ m/s, हवा में रेडियो लगभग 3×10⁸ m/s।
समय-विभाजन मल्टीप्लेक्सिंग (TDM)
मल्टीप्लेक्सिंग = कई संकेत एक चैनल बाँटें। TDM में हर डिजिटल संकेत को बारी-बारी छोटा समय-खाना मिलता है। हर संकेत का एक-एक खाना मिलकर एक फ़्रेम बनता है। दूसरी ओर रिसीवर, भेजने वाले के साथ ताल मिलाकर (सिंक्रोनाइज़), खाने अलग करता है।
n संकेत, हर एक की दर R, तो चैनल की दर कम से कम n × R।
उदाहरण: 64 kbit/s की 30 कॉल को 30 × 64 = 1920 kbit/s चाहिए।
आयाम (AM) और आवृत्ति (FM) मॉडुलन
मॉडुलन = संदेश को ऊँची आवृत्ति वाले वाहक पर चढ़ाना, क्योंकि ऊँची आवृत्ति दूर जाती है और छोटे एंटीना से काम चलता है।
AM
वाहक का आयाम संदेश के साथ बदलता है। fm संदेश और fc वाहक से पार्श्व आवृत्तियाँ fc ± fm बनती हैं। बैंडविड्थ = 2fm।
FM
वाहक की आवृत्ति संदेश के साथ बदलती है। सबसे बड़ा बदलाव आवृत्ति विचलन Δf है। कार्सन नियम: बैंडविड्थ ≈ 2(Δf + fm)।
तुलना
- AM: कम बैंडविड्थ, सरल रिसीवर, लंबी दूरी, पर नॉइज़ ज़्यादा।
- FM: बेहतर आवाज़, कम नॉइज़, पर ज़्यादा बैंडविड्थ और कम दूरी।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- AM बैंडविड्थ = 2 fm
- AM पार्श्व आवृत्तियाँ = fc ± fm
- FM बैंडविड्थ ≈ 2(Δf + fm)
- TDM चैनल दर ≥ n × R
- सैंपलिंग दर ≥ 2 × सबसे बड़ी आवृत्ति
- v = d / t
हल किए गए उदाहरण
1. 5 kHz की धुन 900 kHz वाहक पर AM से भेजी। पार्श्व आवृत्तियाँ और बैंडविड्थ?
895 kHz और 905 kHz; बैंडविड्थ = 10 kHz।
2. FM स्टेशन: Δf = 75 kHz, fm = 15 kHz। बैंडविड्थ?
2(75 + 15) = 180 kHz।
3. 64 kbit/s के 24 संकेत एक TDM लाइन बाँटते हैं। न्यूनतम दर?
24 × 64 = 1536 kbit/s।
4. 20 kHz तक की आवाज़ को डिजिटल करना है। न्यूनतम सैंपलिंग दर?
2 × 20 = 40 kHz।
5. संकेत 3000 km फ़ाइबर में 2×10⁸ m/s से चलता है। देरी?
t = 3×10⁶ / 2×10⁸ = 15 ms।
6. 36 000 km ऊँचे उपग्रह तक जाकर लौटने का समय?
t = 7.2×10⁷ / 3×10⁸ = 0.24 s।
आम गलतियाँ
- AM और FM उलटना: AM में ऊँचाई बदलती है, FM में तरंगों की दूरी (आवृत्ति)।
- AM बैंडविड्थ को fm मानना। यह 2fm है, क्योंकि दो पार्श्व आवृत्तियाँ हैं।
- सोचना कि TDM में सब संकेत एक ही पल भेजे जाते हैं। वे बहुत तेज़ी से बारी लेते हैं।
- फ़ाइबर या तार में चाल 3×10⁸ m/s लेना; वहाँ लगभग 2×10⁸ m/s है।