रेडियो तरंगें और वाहक तरंग की ज़रूरत
रेडियो तरंगें विद्युत चुंबकीय तरंगें हैं, जिनकी आवृत्ति कुछ किलोहर्ट्ज़ से कई गीगाहर्ट्ज़ तक होती है। ये एंटीना में आवेशों के आगे-पीछे चलने से बनती हैं। ये प्रकाश की चाल c = 3 × 10⁸ m/s से चलती हैं, और f × λ = c।
आवाज़ या संगीत की आवृत्ति कम होती है, रेडियो में लगभग 20 Hz से 5 kHz। इसे सीधे नहीं भेजते, तीन कारणों से:
- एंटीना का आकार। अच्छा एंटीना लगभग λ/4 लंबा होता है। 5 kHz पर λ = 60 km, तो एंटीना 15 km लंबा चाहिए! 1 MHz पर λ = 300 m और एंटीना केवल 75 m का।
- कमज़ोर विकिरण। कम आवृत्ति की तरंगें बहुत कमज़ोर विकिरित होती हैं।
- मिलावट। अगर हर स्टेशन सीधे ध्वनि भेजे तो सब एक ही आवृत्तियों पर आएँगे और अलग नहीं किए जा सकेंगे।
इसलिए ध्वनि (संदेश संकेत) को उच्च आवृत्ति की वाहक तरंग पर चढ़ाया जाता है। हर स्टेशन की अपनी वाहक आवृत्ति होती है।
मॉड्युलेशन: वाहक पर ध्वनि चढ़ाना
मॉड्युलेशन का मतलब है वाहक का कोई एक गुण संदेश के अनुसार बदलना। आयाम मॉड्युलन (AM) में वाहक का आयाम संकेत के अनुसार बदलता है; आवृत्ति वही रहती है। आवृत्ति मॉड्युलन (FM) में वाहक की आवृत्ति संकेत के अनुसार बदलती है; आयाम वही रहता है।
AM में, वाहक का आयाम Ac और संकेत का आयाम Am हो तो:
मॉड्युलन सूचकांक μ = Am / Ac, और मॉड्युलित आयाम Ac(1 + μ cos ωmt) होता है।
अच्छी ध्वनि के लिए μ का मान 1 या उससे कम होना चाहिए। μ > 1 हो तो तरंग ज़रूरत से ज़्यादा मॉड्युलित हो जाती है और आवाज़ बिगड़ जाती है।
वाहक आवृत्ति fc और संकेत आवृत्ति fm वाली AM तरंग में तीन आवृत्तियाँ होती हैं: fc − fm, fc और fc + fm। दो अतिरिक्त आवृत्तियाँ पार्श्व बैंड कहलाती हैं। एक स्टेशन जितनी आवृत्तियों की पट्टी घेरता है (बैंडविड्थ) वह 2fm होती है। इसीलिए AM में स्टेशन कुछ kHz (9 या 10 kHz) दूर रखे जाते हैं।
प्रेषण
प्रेषित्र (ट्रांसमीटर) में वाहक बनाने वाला दोलित्र होता है, माइक्रोफ़ोन की ध्वनि को वाहक से मिलाने वाला मॉड्युलेटर, संकेत को मज़बूत करने वाला प्रवर्धक और एक प्रेषी एंटीना। एंटीना मॉड्युलित तरंग को विद्युत चुंबकीय तरंग बनाकर बाहर भेज देता है। रेडियो तरंगें सब दिशाओं में फैलती हैं और दूर जाने पर कमज़ोर होती जाती हैं।
माध्यम तरंग के AM संकेत ज़मीन के साथ चलते हैं और रात में आयनमंडल से लौटते भी हैं, इसलिए सूर्यास्त के बाद दूर तक सुनाई देते हैं। FM और टीवी संकेत लगभग सीधी रेखा में चलते हैं, इसलिए उनके टावर ऊँचे होते हैं।
ग्रहण और ट्यूनिंग
ग्राही एंटीना सभी स्टेशनों की तरंगों को बहुत छोटे मिले-जुले वोल्टेज की तरह पकड़ता है। हमें अपना मनपसंद स्टेशन चुनना है। इसे ट्यूनिंग कहते हैं।
ट्यूनिंग परिपथ एक कुंडली L और एक परिवर्ती संधारित्र C को जोड़कर बनता है। उसकी अपनी आवृत्ति है
f₀ = 1/(2π√(LC))
यह परिपथ आवृत्ति f₀ की तरंगों पर बहुत ज़ोर से प्रतिक्रिया देता है (अनुनाद) और दूसरी आवृत्तियों पर बहुत कम। घुंडी घुमाने से C बदलता है, f₀ बदलती है और परिपथ दूसरे स्टेशन से मिल जाता है। C बढ़ाने पर f₀ घटती है।
चुना हुआ संकेत बहुत छोटा होता है। अगले चरण से पहले प्रवर्धक इसे बड़ा करता है।
डिमॉड्युलेशन: ध्वनि को वापस निकालना
डिमॉड्युलेशन (संसूचन) वाहक को हटाकर संदेश वापस निकालता है। AM में इसके दो छोटे भाग होते हैं:
- डायोड धारा को केवल एक दिशा में जाने देता है। वह तरंग का नीचे का आधा भाग काट देता है (दिष्टकरण)।
- फ़िल्टर (संधारित्र और प्रतिरोध) वाहक के तेज़ कंपन को चिकना कर देता है। वह तरंग की बाहरी रेखा के साथ चलता है, और वही ध्वनि है।
निकला हुआ फिर से कम आवृत्ति का संकेत है। इसे बड़ा करके लाउडस्पीकर को दिया जाता है, जो इसे ध्वनि बना देता है।
रेडियो का सार: एंटीना → ट्यूनर → प्रवर्धक → संसूचक → ऑडियो प्रवर्धक → स्पीकर।
करके देखो: प्रयोग
करके देखो: 3D में तरंगें दबाओ। आवाज़ की गहराई का स्लाइडर 1 पर और फिर 0.1 पर ले जाओ। क्या वाहक की रेखा अब भी ध्वनि के आकार की है? फिर ट्यूनिंग दबाओ और C चलाओ। वह मान ढूँढो जिस पर स्टेशन A सबसे तेज़ आता है। पहले अंदाज़ा लगाओ: बड़े C से f₀ बड़ी होगी या छोटी? (छोटी।) घर पर: AM रेडियो को दो स्टेशनों के बीच में चलाकर सरसराहट सुनो। फिर डायल धीरे-धीरे घुमाओ और देखो कि कोई स्टेशन अचानक साफ़ क्यों हो जाता है। ट्यून किया परिपथ उसकी आवृत्ति से मिल जाता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- f × λ = c (c = 3 × 10⁸ m/s)
- एंटीना की लंबाई ≈ λ/4
- AM: μ = A_m / A_c; आयाम = A_c (1 + μ cos ω_m t)
- AM की आवृत्तियाँ: f_c − f_m, f_c, f_c + f_m; बैंडविड्थ = 2 f_m
- ट्यूनिंग: f₀ = 1 / (2π√(LC))
- मात्रक: f हर्ट्ज़ (Hz), L हेनरी (H), C फ़ैरड (F) में
हल किए गए उदाहरण
1. एक AM स्टेशन 1000 kHz पर प्रसारण करता है। इसकी रेडियो तरंग का तरंगदैर्घ्य और उचित एंटीना लंबाई (λ/4) निकालो।
λ = c/f = 3 × 10⁸ / 1 × 10⁶ = 300 m। एंटीना ≈ λ/4 = 75 m।
2. 4 kHz की आवाज़ को सीधे उचित एंटीना से क्यों नहीं भेज सकते?
λ = 3 × 10⁸ / 4000 = 75 000 m, इसलिए λ/4 ≈ 19 km। यह बहुत ज़्यादा है। उच्च आवृत्ति के वाहक पर मॉड्युलेशन करने से एंटीना बहुत छोटा लगता है।
3. 10 V आयाम के वाहक को 6 V आयाम का संकेत मॉड्युलित करता है। मॉड्युलन सूचकांक निकालो।
μ = A_m / A_c = 6 / 10 = 0.6। यह 1 से कम है, इसलिए विकृति नहीं होगी।
4. 1000 kHz के वाहक को 2 kHz की ध्वनि मॉड्युलित करती है। तरंग में कौन-सी आवृत्तियाँ हैं? बैंडविड्थ निकालो।
f_c − f_m = 998 kHz, f_c = 1000 kHz, f_c + f_m = 1002 kHz। बैंडविड्थ = 2 f_m = 4 kHz।
5. एक ट्यूनिंग परिपथ में L = 250 µH और C = 100 pF है। वह किस आवृत्ति पर ट्यून है?
f₀ = 1/(2π√(LC))। LC = 2.5 × 10⁻⁴ × 1 × 10⁻¹⁰ = 2.5 × 10⁻¹⁴। वर्गमूल = 1.58 × 10⁻⁷। f₀ = 1/(2π × 1.58 × 10⁻⁷) = 1.0 × 10⁶ Hz = 1.0 MHz।
6. L = 200 µH हो तो रेडियो को 600 kHz पर ट्यून करने के लिए C कितना चाहिए?
C = 1/(4π²f²L) = 1/(4π² × (6 × 10⁵)² × 2 × 10⁻⁴) = 3.5 × 10⁻¹⁰ F, लगभग 350 pF।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि वाहक तरंग अपने आप ध्वनि ले जाती है। वाहक में मॉड्युलेशन के बिना कोई ध्वनि नहीं होती।
- AM और FM में गड़बड़ी: AM में ऊँचाई (आयाम) बदलती है, FM में आवृत्ति।
- यह सोचना कि बड़े C से ट्यून की आवृत्ति बड़ी होती है। f₀ = 1/(2π√(LC)), इसलिए बड़े C पर f₀ घटती है।
- डायोड को भूल जाना। दिष्टकरण के बिना तरंग का औसत शून्य है और फ़िल्टर से ध्वनि नहीं निकलती।