पावर सप्लाई परिपथ
ज़्यादातर इलेक्ट्रॉनिक्स को स्थिर DC चाहिए, पर दीवार के सॉकेट से AC मिलती है। पावर सप्लाई में चार खंड होते हैं:
- ट्रांसफ़ॉर्मर: AC वोल्टेज घटाता है (जैसे 230 V से 12 V)।
- दिष्टकारी (rectifier): डायोड करंट को सिर्फ़ एक दिशा में जाने देते हैं। अर्ध-तरंग दिष्टकारी सिर्फ़ धनात्मक आधा रखता है। पूर्ण-तरंग दिष्टकारी (4 डायोड का ब्रिज) ऋणात्मक आधे को ऊपर पलटता है, इसलिए उभार दोगुने होते हैं। आउटपुट स्पंदित DC है।
- फ़िल्टर: बड़ा संधारित्र हर शिखर पर चार्ज होता है और गड्ढों में करंट देता है। बची हलचल रिपल कहलाती है। बड़ा C या हल्का लोड तो कम रिपल: रिपल वोल्टेज ≈ I / (f × C)।
- रेगुलेटर: ज़ेनर डायोड या IC (जैसे 7805) आउटपुट को तय वोल्टेज पर रखता है, चाहे मेन्स या लोड बदले।
रिपल की आवृत्ति: अर्ध-तरंग = 50 Hz, पूर्ण-तरंग = 100 Hz (50 Hz मेन्स के लिए)। डायोड परिपथ PN संधि डायोड में समझाया है।
दोलित्र परिपथ
दोलित्र (oscillator) सिर्फ़ DC बिजली से अपने आप बार-बार दोहराने वाली तरंग बनाता है। इसमें एम्प्लीफ़ायर के साथ धनात्मक फ़ीडबैक होता है: आउटपुट का एक भाग उसी चाल में इनपुट पर लौटता है, इसलिए तरंग बढ़ती है और एक सधे आकार पर टिक जाती है।
बार्कहाउज़न विचार: दोलन के लिए लूप-लाभ कम से कम 1 और फ़ीडबैक सम-कला में होना चाहिए।
- LC दोलित्र (कोलपिट्स, हार्टले): कुंडली और संधारित्र आवृत्ति तय करते हैं f = 1 / (2π√(LC))। रेडियो आवृत्तियों के लिए।
- RC दोलित्र (फ़ेज़-शिफ़्ट, वीन ब्रिज): प्रतिरोधक और संधारित्र आवृत्ति तय करते हैं; श्रव्य आवृत्ति के लिए।
- क्रिस्टल दोलित्र: क्वार्ट्ज़ क्रिस्टल बहुत सटीक आवृत्ति देता है (घड़ी, कंप्यूटर, रेडियो)।
LC जोड़ी के बारे में और LC दोलन में पढ़ो।
पल्स परिपथ
पल्स ऐसा संकेत है जो दो स्तरों HIGH और LOW के बीच कूदता है। इसकी मुख्य संख्याएँ:
- आवर्तकाल T = एक पूरे चक्र का समय; आवृत्ति f = 1/T।
- पल्स चौड़ाई = संकेत जितनी देर HIGH रहता है।
- ड्यूटी साइकिल = पल्स चौड़ाई / T × 100%।
मल्टीवाइब्रेटर दो ट्रांज़िस्टर या टाइमर IC से पल्स बनाते हैं:
- अस्थायी (astable): अपने आप पल्स देता रहता है (घड़ी, टिमटिमाती LED)। 555 टाइमर में f ≈ 1.44 / ((R1 + 2R2) × C)।
- एकस्थायी (monostable): ट्रिगर होने पर तय लंबाई की एक पल्स देता है (देरी)।
- द्विस्थायी (flip-flop): बदलने को कहे जाने तक दो अवस्थाओं में से एक रखता है (एक बिट की मेमोरी)।
श्मिट ट्रिगर धीमे या शोर वाले संकेत को तीखी पल्स में साफ़ करता है। ड्यूटी साइकिल (PWM) बदलने से औसत शक्ति बदलती है: 25% ड्यूटी पर चौथाई शक्ति।
मॉडुलन और डिमॉडुलन परिपथ
आवाज़ का संकेत धीमा है (लगभग 300 Hz से 3 kHz) और अकेले दूर नहीं जा सकता। इसलिए हम उसे तेज़ वाहक तरंग (जैसे 1 MHz) पर चढ़ाते हैं। यही मॉडुलन है।
- AM (आयाम मॉडुलन): संदेश वाहक की ऊँचाई बदलता है। मॉडुलन सूचकांक m = संदेश का शिखर / वाहक का शिखर (m ≤ 1 रखो)।
- FM (आवृत्ति मॉडुलन): संदेश वाहक की आवृत्ति बदलता है; शोर का असर कम होता है।
- डिजिटल: ASK, FSK और PSK 0 और 1 के लिए ऊँचाई, आवृत्ति या कला को सीढ़ी की तरह बदलते हैं।
डिमॉडुलन संदेश वापस निकालता है। साधारण AM डिटेक्टर एक डायोड, संधारित्र और प्रतिरोधक है: डायोड एक आधा हटाता है, संधारित्र शिखरों (envelope) के साथ चलता है, और अंतिम फ़िल्टर वाहक को रोकता है। रिसीवर में एक स्टेशन चुनने का ट्यूनिंग परिपथ भी होता है।
करके देखो: तरंगें देखो
3D में संधारित्र सबसे छोटा करके रिपल देखो, फिर सबसे बड़ा करो। अनुमान लगाओ: रेडियो के लिए कौन-सा बेहतर है? पल्स की ड्यूटी 50% और फिर 20% करो और बताओ कि किससे लैंप धीमा जलेगा। मॉडुलन में गहराई बीच से ऊपर करो और देखो कि envelope शून्य के पास कहाँ पहुँचता है: संदेश बिगड़ने से पहले यही सीमा है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- पूर्ण-तरंग रिपल आवृत्ति = 2 × मेन्स आवृत्ति (50 Hz के लिए 100 Hz)
- रिपल वोल्टेज ≈ I / (f × C)
- LC दोलित्र: f = 1 / (2π√(LC))
- पल्स: f = 1/T; ड्यूटी = पल्स चौड़ाई / T × 100%
- 555 अस्थायी: f ≈ 1.44 / ((R1 + 2R2) × C)
- AM मॉडुलन सूचकांक: m = संदेश का शिखर / वाहक का शिखर
हल किए गए उदाहरण
1. 50 Hz मेन्स पर पूर्ण-तरंग दिष्टकारी की रिपल आवृत्ति क्या है?
2 × 50 = 100 Hz।
2. पावर सप्लाई 100 mA देती है। रिपल आवृत्ति 100 Hz और C = 1000 µF है। रिपल वोल्टेज निकालो।
V = I/(fC) = 0.1 / (100 × 0.001) = 1 V।
3. एक LC दोलित्र में L = 1 mH और C = 0.1 µF है। f निकालो।
f = 1/(2π√(10⁻³ × 10⁻⁷)) = 1/(2π × 10⁻⁵) ≈ 15.9 kHz।
4. एक पल्स 8 ms के आवर्तकाल में 2 ms HIGH रहती है। आवृत्ति और ड्यूटी निकालो।
f = 1/0.008 = 125 Hz। ड्यूटी = 2/8 × 100 = 25%।
5. 555 अस्थायी में R1 = 1 kΩ, R2 = 10 kΩ, C = 10 µF है। f निकालो।
f = 1.44 / ((1000 + 20000) × 10×10⁻⁶) = 1.44 / 0.21 ≈ 6.9 Hz।
6. AM तरंग में संदेश का शिखर 3 V और वाहक का शिखर 5 V है। m निकालो और बताओ ठीक है या नहीं।
m = 3/5 = 0.6, जो 1 से कम है, इसलिए विकृति नहीं होगी।
आम गलतियाँ
- कहना कि दिष्टकारी शुद्ध DC बनाता है। वह स्पंदित DC बनाता है; फ़िल्टर और रेगुलेटर फिर भी चाहिए।
- सोचना कि दोलित्र को इनपुट संकेत चाहिए। उसे सिर्फ़ DC बिजली और फ़ीडबैक चाहिए।
- ड्यूटी साइकिल और आवृत्ति को मिला देना। ड्यूटी ON का हिस्सा है, गति नहीं।
- AM में मॉडुलन सूचकांक 1 से ऊपर रखना, जिससे संदेश बिगड़ता है (अति-मॉडुलन)।