पावर इलेक्ट्रॉनिक यंत्र: कम बर्बादी वाले स्विच
साधारण ट्रांज़िस्टर एम्प्लिफ़ायर में वोल्टेज और धारा साथ-साथ रहते हैं, इसलिए वह गरम होता है। पावर इलेक्ट्रॉनिक स्विच या तो पूरा ON रहता है (धारा चलती है, उस पर वोल्टेज लगभग शून्य) या पूरा OFF (वोल्टेज है, धारा नहीं)। खोई शक्ति = वोल्टेज × धारा, इसलिए दोनों हाल में बहुत कम खोती है। इसीलिए कन्वर्टर कुशल होते हैं (अक्सर 90% से ऊपर)।
- पावर डायोड: एकतरफ़ा, नियंत्रण नहीं। अग्र बायस में ON।
- थाइरिस्टर (SCR): छोटे गेट पल्स से ON, और तब तक ON रहता है जब तक धारा शून्य न हो। डिमर और बड़े रेक्टिफ़ायर में।
- पावर MOSFET: बहुत तेज़ ON-OFF, कम वोल्टेज और ऊँची आवृत्ति के लिए (चार्जर, कंप्यूटर)।
- IGBT: ऊँचा वोल्टेज और बड़ी धारा, मध्यम गति (मोटर ड्राइव, ट्रेन, सोलर इन्वर्टर)।
- पावर BJT: पुराना, अब कम इस्तेमाल।
शक्ति रूपांतरण: चार काम
इनपुट शक्ति को उस रूप में बदला जाता है जो लोड को चाहिए। चार मूल काम:
- AC से DC: रेक्टिफ़ायर (चार्जर, DC सप्लाई)।
- DC से DC: चॉपर या DC-DC कन्वर्टर (DC का स्तर बदलता है, जैसे फ़ोन बैटरी के लिए घटाना)।
- DC से AC: इन्वर्टर (UPS, सोलर, मोटर ड्राइव)।
- AC से AC: AC रेगुलेटर (डिमर) या साइक्लोकन्वर्टर (वोल्टेज या आवृत्ति बदलता है)।
दक्षता = निकली शक्ति ÷ आई शक्ति × 100%। अंतर गर्मी बनकर खोता है, इसलिए पावर इलेक्ट्रॉनिक्स में अक्सर हीट सिंक लगता है।
कन्वर्टर परिपथ
अर्ध-तरंग रेक्टिफ़ायर: एक डायोड। सिर्फ़ धनात्मक आधा हिस्सा निकलता है। Vavg = Vm / π ≈ 0.318 Vm।
पूर्ण-तरंग ब्रिज रेक्टिफ़ायर: चार डायोड। दोनों हिस्से धनात्मक हो जाते हैं। Vavg = 2Vm / π ≈ 0.637 Vm, और Vrms = Vm / √2। लोड के पार कैपेसिटर कूबड़ों को लगभग स्थिर DC में समतल कर देता है।
चॉपर (बक): स्विच हर आवर्त T में ton समय ON रहता है। ड्यूटी चक्र D = ton / T। औसत आउटपुट Vout = D × Vin। इंडक्टर और कैपेसिटर पल्स को समतल करते हैं।
एकल-कला इन्वर्टर: H आकार में चार स्विच। स्विच 1 और 4 ON तो +V; स्विच 2 और 3 ON तो −V। बारी-बारी करने पर वर्ग तरंग बनती है; फ़िल्टर या महीन स्विचिंग से वह साइन के पास आती है।
खुद करके देखो: कन्वर्टर से खेलो
3D खोलो। आधा दबाओ और लैंप देखो: लगभग 32% दिखता है। सोचो: पूरा क्या दिखाएगा? (लगभग 64%, दुगना।) चॉपर दबाओ। ON-समय 25% करो। लैंप का अंदाज़ा लगाओ, फिर जाँचो। फिर इन्वर्टर दबाओ और देखो कि आउटपुट धनात्मक-ऋणात्मक झूलता है।
घर पर: मेज़ के पंखे का रेगुलेटर या डिमर लैंप एक पावर कन्वर्टर है। उसे धीरे घुमाओ और देखो कि चमक चिकनी बदलती है, जबकि स्विच एक सेकंड में 100 बार ON-OFF हो रहा है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- अर्ध-तरंग: V_avg = V_m / π; V_rms = V_m / 2
- पूर्ण-तरंग: V_avg = 2 V_m / π; V_rms = V_m / √2
- ड्यूटी चक्र D = t_on / T
- चॉपर (बक): V_out = D × V_in
- दक्षता η = (P_out / P_in) × 100%
हल किए गए उदाहरण
1. अर्ध-तरंग रेक्टिफ़ायर को शिखर 325 V की साइन मिलती है। औसत आउटपुट निकालो।
V_avg = V_m / π = 325 / 3.1416 ≈ 103.5 V।
2. वही इनपुट पूर्ण-तरंग रेक्टिफ़ायर को मिले। V_avg निकालो।
V_avg = 2 V_m / π = 650 / 3.1416 ≈ 206.9 V, अर्ध-तरंग का दुगना।
3. चॉपर में V_in = 48 V और ड्यूटी चक्र 25% है। V_out निकालो।
V_out = D × V_in = 0.25 × 48 = 12 V।
4. चॉपर 12 V से चलता है और 9 V देना है। कितना ड्यूटी चक्र चाहिए?
D = V_out / V_in = 9 / 12 = 0.75 = 75%।
5. कन्वर्टर 100 W लेता है और 95 W देता है। दक्षता और गर्मी की हानि निकालो।
η = 95 / 100 = 95%। गर्मी = 100 − 95 = 5 W।
6. शिखर 100 V का अर्ध-तरंग रेक्टिफ़ायर 50 Ω प्रतिरोध को चलाता है। औसत धारा निकालो।
V_avg = 100 / π = 31.8 V। I_avg = 31.8 / 50 ≈ 0.637 A।
आम गलतियाँ
- अर्ध-तरंग परिपथ में पूर्ण-तरंग का सूत्र लगा देना। अर्ध-तरंग V_m / π है; पूर्ण-तरंग 2V_m / π।
- सोचना कि रेक्टिफ़ायर पूरी तरह स्थिर DC देता है। वह कूबड़ देता है; समतल करने के लिए कैपेसिटर या फ़िल्टर चाहिए।
- सोचना कि स्विचिंग कन्वर्टर कटी हुई शक्ति गर्मी में बहा देता है। आदर्श स्विच लगभग कुछ नहीं खोता, इसीलिए वह कुशल है।
- यह भूलना कि ड्यूटी चक्र आवर्त का भाग है, वोल्टेज का नहीं: V_out = D × V_in।