ठोसों में ऊर्जा बैंड (गुणात्मक)
एक अकेले परमाणु में इलेक्ट्रॉन की कुछ तय ऊर्जाएँ (स्तर) ही होती हैं। ठोस में करोड़ों परमाणु पास-पास होते हैं, तो ये स्तर फैलकर चौड़े बैंड बन जाते हैं।
- संयोजकता बैंड: ऊपर वाला भरा बैंड, जिसमें इलेक्ट्रॉन बँधे हैं।
- चालन बैंड: उसके ऊपर का बैंड। यहाँ इलेक्ट्रॉन मुक्त होकर धारा बहा सकता है।
- ऊर्जा अंतराल (Eg): दोनों बैंड के बीच की खाली जगह। यहाँ कोई इलेक्ट्रॉन नहीं टिक सकता।
तीन तरह के ठोस
- चालक (धातु): बैंड एक-दूसरे पर चढ़े, Eg = 0। बहुत मुक्त इलेक्ट्रॉन।
- अर्धचालक: छोटा अंतर, Eg लगभग 3 eV से कम (Si 1.1 eV, Ge 0.7 eV)। कमरे के ताप पर कुछ इलेक्ट्रॉन कूद जाते हैं।
- कुचालक: बड़ा अंतर, Eg 3 eV से ज़्यादा (हीरा लगभग 5.4 eV)। इलेक्ट्रॉन कूद नहीं पाते।
गर्म करने पर अर्धचालक में ज़्यादा इलेक्ट्रॉन कूदते हैं, इसलिए उसका प्रतिरोध घटता है। धातु में उल्टा होता है।
नैज (शुद्ध) अर्धचालक
नैज यानी शुद्ध। शुद्ध Si या Ge के हर परमाणु के 4 बाहरी इलेक्ट्रॉन होते हैं, जो 4 पड़ोसियों से साझा होते हैं (सहसंयोजक बंध)।
गर्मी से बंध टूटता है। इलेक्ट्रॉन मुक्त हो जाता है। उसकी खाली जगह को होल (कोटर) कहते हैं। होल धन आवेश जैसा बर्ताव करता है, क्योंकि पास का इलेक्ट्रॉन उसमें कूद आता है और होल उल्टी तरफ़ खिसकता दिखता है।
इलेक्ट्रॉन और होल जोड़ों में बनते हैं, इसलिए ne = nh = ni। कुल धारा = इलेक्ट्रॉन धारा + होल धारा।
अपद्रव्यी अर्धचालक: n-प्रकार और p-प्रकार
डोपिंग (अपमिश्रण) = बहुत थोड़ी मात्रा (लगभग दस लाख में 1 परमाणु) में दूसरा तत्व मिलाना। इससे अपद्रव्यी अर्धचालक बनता है, जो शुद्ध से कहीं ज़्यादा चालक होता है।
n-प्रकार
पंचसंयोजी परमाणु (P, As, Sb) मिलाओ। चार इलेक्ट्रॉन बंध बनाते हैं; पाँचवाँ ढीला रहता है और आसानी से मुक्त हो जाता है। इसे दाता (donor) कहते हैं। बहुसंख्यक वाहक = इलेक्ट्रॉन; अल्पसंख्यक = होल।
p-प्रकार
त्रिसंयोजी परमाणु (B, Al, In, Ga) मिलाओ। एक बंध अधूरा रहता है: होल। इसे ग्राही (acceptor) कहते हैं। बहुसंख्यक वाहक = होल; अल्पसंख्यक = इलेक्ट्रॉन।
मुख्य नियम
स्थिर ताप पर ne × nh = ni²। इलेक्ट्रॉन ज़्यादा तो होल कम।
ध्यान दो: n-प्रकार या p-प्रकार क्रिस्टल भी विद्युत रूप से उदासीन होता है।
p-n संधि का बनना
p-n संधि एक ही क्रिस्टल है, जिसके एक ओर p-प्रकार और दूसरी ओर n-प्रकार है।
- विसरण: n में इलेक्ट्रॉन ज़्यादा, p में होल ज़्यादा। हर कोई कम भीड़ वाली जगह फैलता है। इलेक्ट्रॉन p की ओर, होल n की ओर।
- वे मिलकर मिट जाते हैं। सीमा के पास केवल स्थिर आयन बचते हैं: p ओर ऋण आयन, n ओर धन आयन।
- यह वाहक-रहित पतली पट्टी ह्रास परत है (लगभग एक माइक्रोमीटर)।
- स्थिर आयन n से p की ओर विद्युत क्षेत्र बनाते हैं। यह आगे विसरण रोकता है और उल्टी दिशा में अपवाह (drift) धारा चलाता है।
- जब विसरण धारा = अपवाह धारा, तब संतुलन। परत के आर-पार विभवांतर = विभव प्राचीर: Si में लगभग 0.7 V, Ge में 0.3 V।
डायोड का V-I अभिलक्षण: अग्र और पश्च बायस
डायोड = दो तारों वाली p-n संधि। प्रतीक: तीर (p भाग, एनोड) एक पट्टी (n भाग, कैथोड) को छूता है। तीर आसान धारा की दिशा बताता है।
अग्र बायस
p को +, n को −। बैटरी प्राचीर के विरुद्ध धक्का देती है: ह्रास परत पतली होती है, प्राचीर (V0 − V) रह जाता है। देहली (knee) वोल्टता (Si में ≈ 0.7 V) से पहले धारा बहुत कम; उसके बाद तेज़ी से बढ़ती है (mA में)।
पश्च बायस
p को −, n को +। प्राचीर (V0 + V) हो जाता है, परत चौड़ी होती है। केवल अल्पसंख्यक वाहक पार करते हैं: बहुत छोटी, लगभग स्थिर पश्च संतृप्त धारा (µA में)। बहुत बड़ी पश्च वोल्टता पर भंजन (breakdown) होता है और धारा अचानक बढ़ती है।
ग्राफ़
V-I वक्र सीधी रेखा नहीं है, इसलिए डायोड अन-ओमीय है। गतिक प्रतिरोध rd = ΔV / ΔI, किसी बिंदु के पास ढाल से। अग्र में छोटा, पश्च में बहुत बड़ा।
खुद करके देखो: 3D के पाँचवें चरण में बायस स्लाइडर को 0 से 1 V तक धीरे खींचो, लाल बिंदु वक्र पर चढ़ता दिखेगा; फिर −3 V तक ले जाओ, धारा लगभग गायब। घर पर मल्टीमीटर के डायोड मोड में: लाल प्रोब एनोड पर लगभग 0.6–0.7 दिखाएगा; प्रोब बदलो तो OL।
डायोड दिष्टकारी के रूप में
दिष्टकरण = AC (दिशा बदलती रहती है) को DC (एक दिशा) में बदलना। डायोड एक-तरफ़ा दरवाज़ा है, इसलिए यह काम कर सकता है।
अर्ध-तरंग दिष्टकारी
लोड के साथ श्रेणी में एक डायोड। धन आधे चक्र में डायोड अग्र बायस में, धारा चलती है; ऋण आधे में पश्च बायस, कुछ नहीं चलता। आउटपुट = केवल धन आधे। आउटपुट आवृत्ति = इनपुट (50 Hz)। आधी ऊर्जा बेकार।
पूर्ण-तरंग दिष्टकारी (केंद्र-निष्कासी)
केंद्र-निष्कासी ट्रांसफ़ॉर्मर और दो डायोड। एक आधे में D1, दूसरे में D2 चलता है; दोनों लोड में एक ही दिशा में धारा भेजते हैं। आउटपुट = सारे उभार ऊपर। आवृत्ति = 2 × इनपुट = 100 Hz।
फ़िल्टर
आउटपुट एक-दिशा है पर ऊबड़-खाबड़ (स्पंदमान DC)। लोड के पार संधारित्र हर शिखर पर आवेशित होकर बीच के गड्ढों में आवेश देता है, तो आउटपुट लगभग स्थिर हो जाता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- n_e × n_h = n_i²
- नैज: n_e = n_h = n_i
- अग्र बायस: प्राचीर = V₀ − V; पश्च बायस: प्राचीर = V₀ + V
- गतिक प्रतिरोध r_d = ΔV / ΔI
- श्रेणी डायोड परिपथ: I = (V − V_knee) / R
- अर्ध-तरंग: f_out = f_in; पूर्ण-तरंग: f_out = 2 f_in
- अंतराल से फ़ोटॉन: λ = hc / Eg ≈ 1240 / Eg(eV) nm
हल किए गए उदाहरण
1. 300 K पर शुद्ध सिलिकॉन में n_i = 1.5 × 10¹⁶ m⁻³ है। प्रति m³ कितने होल हैं?
चरण 1: शुद्ध यानी नैज, तो n_h = n_e। चरण 2: n_h = n_i = 1.5 × 10¹⁶ m⁻³।
2. सिलिकॉन (n_i = 1.5 × 10¹⁶ m⁻³) में आर्सेनिक मिलाकर n_e = 5 × 10²² m⁻³ किया। n_h ज्ञात करो। यह n-प्रकार है या p-प्रकार?
चरण 1: n_e × n_h = n_i²। चरण 2: n_h = (1.5 × 10¹⁶)² / (5 × 10²²) = 4.5 × 10⁹ m⁻³। चरण 3: इलेक्ट्रॉन ≫ होल, और As के 5 बाहरी इलेक्ट्रॉन हैं, तो n-प्रकार।
3. Si डायोड (knee 0.7 V), 200 Ω प्रतिरोध और 5 V बैटरी श्रेणी में, अग्र बायस। धारा ज्ञात करो।
चरण 1: डायोड लगभग 0.7 V लेता है। चरण 2: प्रतिरोध के लिए बचा = 5 − 0.7 = 4.3 V। चरण 3: I = 4.3 / 200 = 0.0215 A = 21.5 mA।
4. वही परिपथ, पर डायोड उल्टा (पश्च बायस)। धारा लगभग कितनी?
चरण 1: पश्च बायस में केवल बहुत छोटी संतृप्त धारा (µA)। चरण 2: I ≈ 0। पूरे 5 V डायोड के पार होते हैं।
5. अग्र वक्र पर वोल्टता 0.70 V से 0.72 V और धारा 10 mA से 20 mA होती है। गतिक प्रतिरोध?
चरण 1: ΔV = 0.02 V। चरण 2: ΔI = 10 mA = 0.01 A। चरण 3: r_d = 0.02 / 0.01 = 2 Ω।
6. पश्च बायस में वोल्टता 10 V से 20 V और धारा 1 µA से 1.5 µA होती है। गतिक प्रतिरोध?
चरण 1: ΔV = 10 V; ΔI = 0.5 µA = 5 × 10⁻⁷ A। चरण 2: r_d = 10 / (5 × 10⁻⁷) = 2 × 10⁷ Ω = 20 MΩ। चरण 3: अग्र में कुछ ओम, पश्च में करोड़ों ओम — यही एक-तरफ़ा दरवाज़ा है।
7. इनपुट AC 50 Hz है। (a) अर्ध-तरंग (b) पूर्ण-तरंग दिष्टकारी की आउटपुट आवृत्ति?
चरण 1: अर्ध-तरंग: हर चक्र में एक उभार = 50 Hz। चरण 2: पूर्ण-तरंग: हर चक्र में दो उभार = 100 Hz।
8. किसी अर्धचालक का Eg = 2.0 eV है। क्या 700 nm का प्रकाश इलेक्ट्रॉन को अंतराल पार करा सकता है?
चरण 1: E = 1240 / 700 ≈ 1.77 eV। चरण 2: 1.77 eV < 2.0 eV, फ़ोटॉन कमज़ोर है। चरण 3: नहीं। 620 nm से छोटी तरंगदैर्घ्य चाहिए।
आम गलतियाँ
- n-प्रकार को ऋण आवेशित कहना। वह उदासीन है: हर अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन अपने धन दाता परमाणु के साथ आया।
- होल को असली कण मानना। होल बंध में इलेक्ट्रॉन की खाली जगह है, जो + आवेश जैसा बर्ताव करती है।
- परिपथ के प्रश्नों में 0.7 V भूल जाना: I = (V − 0.7)/R, न कि V/R।
- आवृत्ति में गड़बड़: पूर्ण-तरंग आउटपुट = 2 × इनपुट (50 Hz पर 100 Hz)।