Poland Liceum ogólnokształcące, klasa III Physics
अध्याय: 5
1. Electric current
Circuits and Ohm's law · Home wiring and diodes
- ओम का नियम, प्रतिरोधकता और ताप का प्रभाव – अपवाह वेग से V = IR मिलता है, जहाँ R = ml/(ne²τA) = ρl/A. प्रतिरोधकता ρ = m/(ne²τ) सिर्फ़ पदार्थ और ताप पर निर्भर है; चालकता σ = 1/ρ. सदिश रूप: j = σE. धातु के तार और प्रतिरोधक सीधी V–I रेखा देते हैं (ओमीय); बल्ब, डायोड और GaAs जैसे युक्तियाँ मुड़ा या एकदिशीय ग्राफ़ देती हैं (अनओमीय)। धातुओं में ताप बढ़ने पर ρ बढ़ता है: ρT = ρ0[1 + α(T − T0)]; नाइक्रोम जैसी मिश्रधातुओं में बहुत कम बदलता है; अर्धचालकों में ρ घटता है।
- अर्धचालक और p-n संधि डायोड – अर्धचालक में ऊर्जा अंतराल छोटा (लगभग 1 eV) होता है, इसलिए थोड़ी गर्मी से कुछ इलेक्ट्रॉन मुक्त हो जाते हैं। शुद्ध सिलिकॉन नैज है (इलेक्ट्रॉन = होल)। 5 संयोजकता वाला परमाणु मिलाने से n-प्रकार, 3 वाला मिलाने से p-प्रकार बनता है। p और n जोड़ने पर ह्रास परत और लगभग 0.7 V का विभव प्राचीर बनता है। डायोड अग्र बायस में धारा चलाता है, पश्च में लगभग नहीं, इसलिए यह AC को DC में बदल सकता है।
2. Magnetism
Magnetic fields and forces · Induction and alternating current
- धारा के कारण चुंबकीय क्षेत्र: बायो-सावर्ट नियम और ऐम्पियर नियम – धारा अपने चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र बनाती है (ऑर्स्टेड, 1820)। बायो-सावर्ट नियम तार के छोटे टुकड़े का क्षेत्र देता है: dB = (μ₀/4π)·I dl sinθ / r²। वृत्ताकार लूप के केंद्र पर B = μ₀NI / 2R और अक्ष पर B = μ₀NIR² / 2(R² + x²)^{3/2}। ऐम्पियर का परिपथीय नियम ∮B·dl = μ₀I लंबे सीधे तार के लिए B = μ₀I / 2πr देता है। लंबी परिनालिका के अंदर क्षेत्र प्रबल और एकसमान है: B = μ₀nI।
- विद्युत चुंबकीय प्रेरण – जब किसी कुंडली से गुजरने वाला चुंबकीय फ्लक्स बदलता है, तो उसमें emf पैदा होता है: ε = −N dΦ/dt (फैराडे)। ऋण चिह्न लेन्ज़ का नियम है: प्रेरित धारा हमेशा उस बदलाव का विरोध करती है जिससे वह बनी। चुंबकीय क्षेत्र में छड़ चलाने पर गतिक emf ε = Blv मिलता है। बदलती धारा अपनी ही कुंडली में (स्वप्रेरण, L) और पास की कुंडली में (अन्योन्य प्रेरण, M) emf बनाती है।
- धारावाही चालक पर बल, विद्युत मोटर और प्रेरण – चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही तार पर एक धक्का यानी बल लगता है। तार क्षेत्र से 90° पर हो तो बल सबसे ज़्यादा, और क्षेत्र के समांतर हो तो शून्य। बल की दिशा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम से मिलती है। मोटर इसी बल से कुंडली घुमाती है; जनित्र उल्टा काम करके गति से धारा बनाता है।
3. Waves and optics
Wave phenomena · Light as a wave
- व्यतिकरण (यंग का द्वि-झिरी प्रयोग) और एकल झिरी विवर्तन – दो कला-संबद्ध स्रोत (समान आवृत्ति, स्थिर कलांतर) दीप्त और अदीप्त फ्रिंजों का स्थिर पैटर्न बनाते हैं। पर्दे के किसी बिंदु पर पथांतर Δ = yd/D: Δ = nλ पर दीप्त, Δ = (n + ½)λ पर अदीप्त। सभी फ्रिंज समान चौड़ाई β = λD/d के होते हैं। a चौड़ाई की एकल झिरी विवर्तन देती है: 2λD/a चौड़ा चमकीला केंद्रीय उच्चिष्ठ, पहला निम्निष्ठ a sin θ = λ पर, और हल्के पार्श्व उच्चिष्ठ।
- तरंगों के गुण: परावर्तन, अपवर्तन, विवर्तन और व्यतिकरण – हर तरंग (पानी, ध्वनि, प्रकाश) चार काम करती है। दीवार से टकराकर लौटती है (परावर्तन)। चाल बदलने पर मुड़ जाती है (अपवर्तन)। दरार या किनारे के बाद फैल जाती है (विवर्तन)। और दो तरंगें मिलें तो जुड़ जाती हैं (अध्यारोपण): शिखर + शिखर = बड़ी तरंग (संपोषी व्यतिकरण), शिखर + गर्त = शांत (विनाशी व्यतिकरण)। नियम: पथांतर = nλ हो तो तेज़, (n + ½)λ हो तो शांत। दो झिरियों के लिए फ्रिंज की दूरी Δx = λD/d।
- प्रकाश का ध्रुवण (Polarisation) – प्रकाश एक अनुप्रस्थ (transverse) तरंग है: इसका विद्युत क्षेत्र चलने की दिशा के लंबवत कंपन करता है। साधारण प्रकाश में यह कंपन हर दिशा में होता है। पोलेरॉइड केवल एक दिशा का कंपन आगे जाने देता है, इसलिए प्रकाश समतल ध्रुवित हो जाता है और उसकी तीव्रता आधी रह जाती है। दूसरा पोलेरॉइड कोण θ पर हो तो I = I₀cos²θ (मैलस का नियम)।
4. Atomic physics
Photons and atomic spectra
- परमाणु: अल्फा कण प्रकीर्णन से बोर मॉडल तक – रदरफोर्ड ने सोने की पतली पन्नी पर अल्फा कण फेंके और पाया कि परमाणु ज़्यादातर खाली है, बीच में एक बहुत छोटा, भारी, धनावेशित नाभिक है। फिर बोर ने कहा कि हाइड्रोजन का इलेक्ट्रॉन सिर्फ़ उन्हीं कक्षाओं में घूम सकता है जहाँ कोणीय संवेग nh/2π हो। n वीं कक्षा में त्रिज्या 0.529 n² Å, चाल (2.19 × 10⁶)/n m/s और ऊर्जा −13.6/n² eV होती है। इलेक्ट्रॉन नीचे कूदता है तो ऊर्जा का अंतर एक खास रंग के प्रकाश के रूप में निकलता है — यही हाइड्रोजन का रेखा स्पेक्ट्रम है।
5. Nuclear physics
Nucleus and radioactivity · Nuclear energy and stars
- रेडियोधर्मिता: अल्फ़ा, बीटा, गामा और अर्ध-आयु – कुछ परमाणुओं के नाभिक अस्थायी होते हैं। वे स्थायी बनने के लिए अपने आप, यादृच्छिक ढंग से विकिरण छोड़ते हैं। इसे रेडियोधर्मी क्षय कहते हैं। अल्फ़ा (2 प्रोटॉन + 2 न्यूट्रॉन), बीटा (तेज़ इलेक्ट्रॉन) और गामा (ऊर्जा की तरंग) मुख्य तीन प्रकार हैं। अर्ध-आयु वह समय है जिसमें आधे अस्थायी नाभिक क्षय हो जाते हैं।
- नाभिक: आकार, नाभिकीय बल, बंधन ऊर्जा, विखंडन और संलयन – नाभिक में Z प्रोटॉन और N न्यूट्रॉन होते हैं (A = Z + N न्यूक्लिऑन)। इसकी त्रिज्या R = R₀A^(1/3), R₀ ≈ 1.2 fm, इसलिए सब नाभिकों का घनत्व लगभग एक जैसा और बहुत ज़्यादा है। एक बहुत तेज़, कम दूरी वाला नाभिकीय बल न्यूक्लिऑनों को बाँधे रखता है। नाभिक अपने अलग-अलग कणों से थोड़ा हल्का होता है; यह द्रव्यमान क्षति Δm ही बंधन ऊर्जा है, E = Δm c² (1 u = 931.5 MeV)। प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा लोहे (A ≈ 56) के पास सबसे ज़्यादा है, इसलिए भारी नाभिक टूटकर (विखंडन) और हल्के नाभिक जुड़कर (संलयन) ऊर्जा देते हैं।