रेडियोधर्मिता क्या है?
हर परमाणु के बीच में एक बहुत छोटा भाग होता है: नाभिक। इसमें प्रोटॉन (धनावेशित) और न्यूट्रॉन (आवेश रहित) होते हैं। दोनों को मिलाकर न्यूक्लिऑन कहते हैं।
- परमाणु संख्या (Z) = प्रोटॉनों की संख्या। इसी से तत्व तय होता है।
- द्रव्यमान संख्या (A) = प्रोटॉन + न्यूट्रॉन।
- समस्थानिक (isotopes): एक ही तत्व के परमाणु जिनमें न्यूट्रॉन अलग-अलग हों, जैसे कार्बन-12 और कार्बन-14।
जिन नाभिकों में न्यूट्रॉन या प्रोटॉन बहुत ज़्यादा हों, या जो बहुत बड़े हों, वे अस्थायी होते हैं। ऐसा नाभिक स्थायी बनने के लिए विकिरण छोड़ता है। यही रेडियोधर्मी क्षय है। यह अपने आप होता है; गर्मी, दाब या रसायन इसे नहीं बदल सकते। 1896 में हेनरी बेकरेल ने इसे खोजा और मैरी व पियरे क्यूरी ने इस पर आगे काम किया।
अल्फ़ा, बीटा और गामा विकिरण
- अल्फ़ा (α): 2 प्रोटॉन + 2 न्यूट्रॉन, यानी हीलियम का नाभिक। आवेश +2। भारी और धीमा।
- बीटा (β⁻): तेज़ इलेक्ट्रॉन, जो नाभिक में न्यूट्रॉन के प्रोटॉन बनने पर पैदा होता है। आवेश −1।
- गामा (γ): बहुत अधिक ऊर्जा वाली विद्युतचुंबकीय तरंग। न द्रव्यमान, न आवेश। अक्सर अल्फ़ा या बीटा के बाद निकलती है।
नाभिकीय समीकरण
समीकरण में दोनों ओर ऊपर की संख्याओं (A) का योग बराबर होता है और नीचे की संख्याओं (Z) का योग भी।
- अल्फ़ा: ²³⁸₉₂U → ²³⁴₉₀Th + ⁴₂He (A में 4, Z में 2 की कमी)
- बीटा: ¹⁴₆C → ¹⁴₇N + ⁰₋₁e (A वही, Z में 1 की बढ़त)
- गामा: A और Z वही; केवल ऊर्जा निकलती है।
कुछ नाभिक न्यूट्रॉन या पॉज़िट्रॉन (β⁺) भी छोड़ते हैं, जो आप आगे की कक्षाओं में पढ़ेंगे।
भेदन क्षमता और आयनन
आयनन (ionisation) का मतलब है परमाणुओं से इलेक्ट्रॉन छीन लेना। इसी से विकिरण जीवित कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाता है।
| विकिरण | किससे रुकता है | हवा में दूरी | आयनन क्षमता |
|---|---|---|---|
| अल्फ़ा | कागज़ या त्वचा | कुछ cm | बहुत अधिक |
| बीटा | कुछ mm एल्युमिनियम | लगभग 1 m | मध्यम |
| गामा | मोटे सीसे या कंक्रीट से घटता है | बहुत दूर तक | कम |
विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र में अल्फ़ा और बीटा उलटी दिशाओं में मुड़ते हैं, क्योंकि उनके आवेश उलटे हैं। गामा नहीं मुड़ता।
अर्ध-आयु और यादृच्छिक क्षय
हम कभी नहीं बता सकते कि कौन सा नाभिक अगला टूटेगा। यह सिक्का उछालने जैसा संयोग है। पर लाखों नाभिकों में पैटर्न स्थिर रहता है।
सक्रियता (activity) = हर सेकंड होने वाले क्षय। इसका मात्रक बेकरेल (Bq) है: 1 Bq = 1 क्षय प्रति सेकंड। गाइगर–म्यूलर (GM) ट्यूब विकिरण गिनती है।
अर्ध-आयु (T½) वह समय है जिसमें आधे अस्थायी नाभिक (या आधी सक्रियता) घट जाते हैं। n अर्ध-आयु के बाद बची मात्रा = शुरुआती मात्रा ÷ 2ⁿ।
अर्ध-आयु बहुत अलग-अलग होती है: टेक्नीशियम-99m लगभग 6 घंटे, आयोडीन-131 लगभग 8 दिन, कार्बन-14 लगभग 5,700 वर्ष, यूरेनियम-238 लगभग 4.5 अरब वर्ष।
पृष्ठभूमि विकिरण, उपयोग और सुरक्षा
पृष्ठभूमि विकिरण हमेशा हमारे आसपास रहता है: चट्टानों और मिट्टी से (रेडॉन गैस), अंतरिक्ष से (कॉस्मिक किरणें), भोजन से और मेडिकल एक्स-रे से। प्रयोग में पहले पृष्ठभूमि मापें और उसे घटाएँ।
उपयोग
- चिकित्सा: गामा से कैंसर का इलाज; टेक्नीशियम-99m जैसे ट्रेसर से अंगों की जाँच (मेडिकल इमेजिंग); उपकरणों को कीटाणुरहित करना।
- आयु ज्ञात करना: जीवित रही चीज़ों के लिए कार्बन-14, चट्टानों के लिए यूरेनियम।
- उद्योग: बीटा से कागज़ की मोटाई जाँचना; स्मोक अलार्म में अल्फ़ा।
संदूषण और किरणन
किरणन (irradiation): बाहर से विकिरण पड़ना; इससे आप रेडियोधर्मी नहीं बनते। संदूषण (contamination): रेडियोधर्मी पदार्थ शरीर पर या अंदर पहुँच जाना, जो लगातार विकिरण देता रहता है। स्रोत को दूर रखें, चिमटे से पकड़ें, ढाल लगाएँ और कम समय पास रहें।
करके देखें: सिक्कों से अर्ध-आयु
32 सिक्के (या पासे) लें। सबको उछालें। जिन पर चित आए, उन्हें हटा दें: वे "क्षय" हो गए। बचे हुए गिनें और फिर उछालें। हर बार लिखें। लगभग 32, 16, 8, 4, 2 मिलेंगे। हर उछाल एक अर्ध-आयु है। फिर 3D के स्लाइडर से मिलान करें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- द्रव्यमान संख्या A = प्रोटॉन + न्यूट्रॉन; परमाणु संख्या Z = प्रोटॉन
- अल्फ़ा: A − 4, Z − 2 · बीटा: A वही, Z + 1 · गामा: कोई बदलाव नहीं
- n अर्ध-आयु के बाद बची मात्रा = N₀ ÷ 2ⁿ
- सक्रियता: 1 बेकरेल (Bq) = 1 क्षय प्रति सेकंड
हल किए गए उदाहरण
1. पोलोनियम-210 (Z = 84) एक अल्फ़ा कण छोड़ता है। नए नाभिक के A और Z क्या होंगे?
अल्फ़ा A से 4 और Z से 2 घटाता है। नया A = 210 − 4 = 206, नया Z = 84 − 2 = 82 (यह सीसा है)।
2. कार्बन-14 (Z = 6) बीटा कण छोड़ता है। क्या बनेगा?
बीटा में A वही 14 रहता है, Z 1 बढ़कर 7 हो जाता है। Z = 7 नाइट्रोजन है, इसलिए नाइट्रोजन-14 बनेगा।
3. एक नमूने में 80 g रेडियोधर्मी समस्थानिक है, अर्ध-आयु 5 दिन। 15 दिन बाद कितना बचेगा?
15 ÷ 5 = 3 अर्ध-आयु। 80 → 40 → 20 → 10 g। उत्तर: 10 g।
4. किसी स्रोत की गिनती 6 घंटे में 1,200 से 150 प्रति मिनट हो जाती है। अर्ध-आयु ज्ञात करें।
1,200 → 600 → 300 → 150 = 3 बार आधा। 6 ÷ 3 = 2 घंटे।
5. GM ट्यूब स्रोत के पास 45 गिनती प्रति मिनट दिखाती है, पृष्ठभूमि 15 है। स्रोत की गिनती?
पृष्ठभूमि घटाएँ: 45 − 15 = 30 गिनती प्रति मिनट।
6. अल्फ़ा स्रोत शरीर के बाहर सुरक्षित पर निगलने पर बहुत ख़तरनाक क्यों है?
बाहर अल्फ़ा त्वचा की मृत परत पर रुक जाता है। अंदर उसे रोकने वाला कुछ नहीं, और तेज़ आयनन के कारण वह कोशिकाओं को बहुत नुकसान करता है।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि गर्म या ठंडा करने से क्षय की दर बदलती है। नहीं बदलती; क्षय यादृच्छिक है।
- बीटा क्षय में परमाणु संख्या 1 घटाना। सही: 1 बढ़ती है।
- कहना कि सीसा गामा को पूरी तरह रोक देता है। वह केवल बहुत घटाता है।
- सोचना कि दो अर्ध-आयु में पूरा नमूना ख़त्म। दो अर्ध-आयु बाद एक-चौथाई बचता है।