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रेडियोधर्मिता: अल्फ़ा, बीटा, गामा और अर्ध-आयु

कुछ परमाणुओं के नाभिक अस्थायी होते हैं। वे स्थायी बनने के लिए अपने आप, यादृच्छिक ढंग से विकिरण छोड़ते हैं। इसे रेडियोधर्मी क्षय कहते हैं। अल्फ़ा (2 प्रोटॉन + 2 न्यूट्रॉन), बीटा (तेज़ इलेक्ट्रॉन) और गामा (ऊर्जा की तरंग) मुख्य तीन प्रकार हैं। अर्ध-आयु वह समय है जिसमें आधे अस्थायी नाभिक क्षय हो जाते हैं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. यह है नाभिक। इसमें प्रोटॉन (लाल) और न्यूट्रॉन (धूसर) हैं। इसका मेल ठीक नहीं, इसलिए यह अस्थायी है।
  2. अल्फ़ा क्षय: 2 प्रोटॉन और 2 न्यूट्रॉन एक साथ निकलते हैं। द्रव्यमान संख्या 4 घटती है, परमाणु संख्या 2 घटती है।
  3. बीटा क्षय: एक न्यूट्रॉन प्रोटॉन बनता है और एक इलेक्ट्रॉन तेज़ी से निकलता है। परमाणु संख्या 1 बढ़ती है। गामा सिर्फ़ ऊर्जा है, बाकी कुछ नहीं बदलता।
  4. कौन सी दीवार किसे रोकती है? कागज़ अल्फ़ा को, एल्युमिनियम बीटा को। मोटा सीसा गामा को बस घटाता है।
  5. अर्ध-आयु: 16 ब्लॉक देखिए। हर अर्ध-आयु के बाद आधे बचते हैं: 16, 8, 4, 2। अगला कौन टूटेगा, यह संयोग है।
  6. अब आपकी बारी। कोई किरण चुनें और देखें वह कहाँ रुकती है। स्लाइडर खिसकाकर बचे ब्लॉक गिनें।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

कुछ नाभिक क्षय होते हैं, कुछ क्यों नहीं?

केवल वे नाभिक अस्थायी होते हैं जिनमें प्रोटॉन-न्यूट्रॉन का मेल बिगड़ा हो या जो बहुत बड़े हों। संतुलित नाभिक वैसे ही रहते हैं।

अल्फ़ा क्षय से नया तत्व क्यों बनता है?

तत्व प्रोटॉनों की संख्या से तय होता है। अल्फ़ा 2 प्रोटॉन ले जाता है, इसलिए Z बदलता है और तत्व बदल जाता है।

नाभिक में इलेक्ट्रॉन नहीं होते, तो बीटा इलेक्ट्रॉन कहाँ से आता है?

वह उसी पल बनता है जब एक न्यूट्रॉन प्रोटॉन में बदलता है। 3D में एक धूसर ब्लॉक लाल होता है और इलेक्ट्रॉन निकल जाता है।

गामा से तत्व क्यों नहीं बदलता?

गामा केवल ऊर्जा ले जाता है। प्रोटॉन और न्यूट्रॉन उतने ही रहते हैं।

अल्फ़ा इतनी आसानी से रुकता है, तो ख़तरनाक क्यों?

क्योंकि वह बहुत आयनन करता है। शरीर के अंदर उसे रोकने को कागज़ या त्वचा नहीं, इसलिए पास की कोशिकाएँ नष्ट होती हैं।

क्षय यादृच्छिक है तो अर्ध-आयु निश्चित कैसे?

एक नाभिक का पता नहीं, पर बहुत बड़ी संख्या में लगभग ठीक आधे हर अर्ध-आयु में टूटते हैं, जैसे हज़ारों सिक्के उछालना।

रेडियोधर्मिता क्या है?

हर परमाणु के बीच में एक बहुत छोटा भाग होता है: नाभिक। इसमें प्रोटॉन (धनावेशित) और न्यूट्रॉन (आवेश रहित) होते हैं। दोनों को मिलाकर न्यूक्लिऑन कहते हैं।

जिन नाभिकों में न्यूट्रॉन या प्रोटॉन बहुत ज़्यादा हों, या जो बहुत बड़े हों, वे अस्थायी होते हैं। ऐसा नाभिक स्थायी बनने के लिए विकिरण छोड़ता है। यही रेडियोधर्मी क्षय है। यह अपने आप होता है; गर्मी, दाब या रसायन इसे नहीं बदल सकते। 1896 में हेनरी बेकरेल ने इसे खोजा और मैरी व पियरे क्यूरी ने इस पर आगे काम किया।

अल्फ़ा, बीटा और गामा विकिरण

नाभिकीय समीकरण

समीकरण में दोनों ओर ऊपर की संख्याओं (A) का योग बराबर होता है और नीचे की संख्याओं (Z) का योग भी।

कुछ नाभिक न्यूट्रॉन या पॉज़िट्रॉन (β⁺) भी छोड़ते हैं, जो आप आगे की कक्षाओं में पढ़ेंगे।

भेदन क्षमता और आयनन

आयनन (ionisation) का मतलब है परमाणुओं से इलेक्ट्रॉन छीन लेना। इसी से विकिरण जीवित कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाता है।

विकिरणकिससे रुकता हैहवा में दूरीआयनन क्षमता
अल्फ़ाकागज़ या त्वचाकुछ cmबहुत अधिक
बीटाकुछ mm एल्युमिनियमलगभग 1 mमध्यम
गामामोटे सीसे या कंक्रीट से घटता हैबहुत दूर तककम

विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र में अल्फ़ा और बीटा उलटी दिशाओं में मुड़ते हैं, क्योंकि उनके आवेश उलटे हैं। गामा नहीं मुड़ता।

अर्ध-आयु और यादृच्छिक क्षय

हम कभी नहीं बता सकते कि कौन सा नाभिक अगला टूटेगा। यह सिक्का उछालने जैसा संयोग है। पर लाखों नाभिकों में पैटर्न स्थिर रहता है।

सक्रियता (activity) = हर सेकंड होने वाले क्षय। इसका मात्रक बेकरेल (Bq) है: 1 Bq = 1 क्षय प्रति सेकंड। गाइगर–म्यूलर (GM) ट्यूब विकिरण गिनती है।

अर्ध-आयु (T½) वह समय है जिसमें आधे अस्थायी नाभिक (या आधी सक्रियता) घट जाते हैं। n अर्ध-आयु के बाद बची मात्रा = शुरुआती मात्रा ÷ 2ⁿ।

अर्ध-आयु बहुत अलग-अलग होती है: टेक्नीशियम-99m लगभग 6 घंटे, आयोडीन-131 लगभग 8 दिन, कार्बन-14 लगभग 5,700 वर्ष, यूरेनियम-238 लगभग 4.5 अरब वर्ष।

पृष्ठभूमि विकिरण, उपयोग और सुरक्षा

पृष्ठभूमि विकिरण हमेशा हमारे आसपास रहता है: चट्टानों और मिट्टी से (रेडॉन गैस), अंतरिक्ष से (कॉस्मिक किरणें), भोजन से और मेडिकल एक्स-रे से। प्रयोग में पहले पृष्ठभूमि मापें और उसे घटाएँ।

उपयोग

संदूषण और किरणन

किरणन (irradiation): बाहर से विकिरण पड़ना; इससे आप रेडियोधर्मी नहीं बनते। संदूषण (contamination): रेडियोधर्मी पदार्थ शरीर पर या अंदर पहुँच जाना, जो लगातार विकिरण देता रहता है। स्रोत को दूर रखें, चिमटे से पकड़ें, ढाल लगाएँ और कम समय पास रहें।

करके देखें: सिक्कों से अर्ध-आयु

32 सिक्के (या पासे) लें। सबको उछालें। जिन पर चित आए, उन्हें हटा दें: वे "क्षय" हो गए। बचे हुए गिनें और फिर उछालें। हर बार लिखें। लगभग 32, 16, 8, 4, 2 मिलेंगे। हर उछाल एक अर्ध-आयु है। फिर 3D के स्लाइडर से मिलान करें।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. पोलोनियम-210 (Z = 84) एक अल्फ़ा कण छोड़ता है। नए नाभिक के A और Z क्या होंगे?

अल्फ़ा A से 4 और Z से 2 घटाता है। नया A = 210 − 4 = 206, नया Z = 84 − 2 = 82 (यह सीसा है)।

2. कार्बन-14 (Z = 6) बीटा कण छोड़ता है। क्या बनेगा?

बीटा में A वही 14 रहता है, Z 1 बढ़कर 7 हो जाता है। Z = 7 नाइट्रोजन है, इसलिए नाइट्रोजन-14 बनेगा।

3. एक नमूने में 80 g रेडियोधर्मी समस्थानिक है, अर्ध-आयु 5 दिन। 15 दिन बाद कितना बचेगा?

15 ÷ 5 = 3 अर्ध-आयु। 80 → 40 → 20 → 10 g। उत्तर: 10 g।

4. किसी स्रोत की गिनती 6 घंटे में 1,200 से 150 प्रति मिनट हो जाती है। अर्ध-आयु ज्ञात करें।

1,200 → 600 → 300 → 150 = 3 बार आधा। 6 ÷ 3 = 2 घंटे।

5. GM ट्यूब स्रोत के पास 45 गिनती प्रति मिनट दिखाती है, पृष्ठभूमि 15 है। स्रोत की गिनती?

पृष्ठभूमि घटाएँ: 45 − 15 = 30 गिनती प्रति मिनट।

6. अल्फ़ा स्रोत शरीर के बाहर सुरक्षित पर निगलने पर बहुत ख़तरनाक क्यों है?

बाहर अल्फ़ा त्वचा की मृत परत पर रुक जाता है। अंदर उसे रोकने वाला कुछ नहीं, और तेज़ आयनन के कारण वह कोशिकाओं को बहुत नुकसान करता है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. अल्फ़ा कण बना होता है:
2. कागज़ की शीट किसे रोक देती है?
3. बीटा क्षय में परमाणु संख्या:
4. अर्ध-आयु वह समय है जिसमें:
5. सक्रियता का मात्रक है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रेडियोधर्मिता आसान शब्दों में क्या है?

कुछ परमाणुओं के नाभिक अस्थायी होते हैं। वे स्थायी बनने के लिए छोटे कण या ऊर्जा बाहर फेंकते हैं। यही रेडियोधर्मिता है।

अल्फ़ा, बीटा और गामा में क्या अंतर है?

अल्फ़ा 2 प्रोटॉन + 2 न्यूट्रॉन है, कागज़ पर रुकता है। बीटा तेज़ इलेक्ट्रॉन है, एल्युमिनियम पर रुकता है। गामा ऊर्जा की तरंग है, मोटा सीसा उसे घटाता है।

अर्ध-आयु का क्या अर्थ है?

वह समय जिसमें नमूने के आधे रेडियोधर्मी नाभिक क्षय हो जाते हैं। हर अर्ध-आयु के बाद बची मात्रा फिर आधी हो जाती है।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

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