इलेक्ट्रॉन की खोज: कैथोड किरणें
एक काँच की नली से लगभग सारी हवा निकाल दो और दोनों धातु सिरों के बीच बहुत ऊँचा वोल्टेज लगाओ। ऋण सिरा कैथोड और धन सिरा ऐनोड है। कैथोड से ऐनोड की ओर एक धारा चलती है जिसे कैथोड किरणें कहते हैं।
- ये सीधी रेखा में चलती हैं (साफ़ छाया बनाती हैं)।
- विद्युत क्षेत्र में ये + प्लेट की ओर मुड़ती हैं, यानी ऋणावेशित हैं।
- कोई भी गैस या धातु लो, ये एक जैसी रहती हैं। मतलब ये कण हर परमाणु में हैं।
ये कण इलेक्ट्रॉन हैं। टॉमसन ने आवेश/द्रव्यमान अनुपात नापा: e/m = 1.758820 × 1011 C kg−1। मिलिकन के तेल-बूँद प्रयोग से आवेश मिला: e = −1.602 × 10−19 C। इसलिए द्रव्यमान m = e ÷ (e/m) = 9.1094 × 10−31 kg।
प्रोटॉन की खोज: कैनाल (ऐनोड) किरणें
गोल्डस्टीन ने छेद वाला कैथोड लिया। उसके पीछे उल्टी दिशा में जाती किरणें दिखीं। ये कैनाल किरणें ऋण प्लेट की ओर मुड़ती हैं, इसलिए धनावेशित हैं।
- इनका e/m नली की गैस पर निर्भर करता है। ये गैस के वे धन आयन हैं जिनसे इलेक्ट्रॉन निकल गए।
- हाइड्रोजन गैस से सबसे छोटा और हल्का धन कण मिलता है: प्रोटॉन। आवेश +1.602 × 10−19 C, द्रव्यमान 1.6726 × 10−27 kg, यानी इलेक्ट्रॉन का लगभग 1836 गुना।
न्यूट्रॉन की खोज
परमाणु अपने प्रोटॉनों से ज़्यादा भारी निकलते थे। 1932 में जेम्स चैडविक ने बेरिलियम की पतली परत पर अल्फा कण मारे और बहुत भेदने वाले उदासीन कण पाए। इनका द्रव्यमान (1.6749 × 10−27 kg) प्रोटॉन से थोड़ा ज़्यादा है। इन्हें न्यूट्रॉन कहा गया।
| कण | आवेश (C) | सापेक्ष आवेश | द्रव्यमान (kg) | द्रव्यमान (u) |
|---|---|---|---|---|
| इलेक्ट्रॉन | −1.602 × 10−19 | −1 | 9.109 × 10−31 | 0.00054 |
| प्रोटॉन | +1.602 × 10−19 | +1 | 1.6726 × 10−27 | 1.00727 |
| न्यूट्रॉन | 0 | 0 | 1.6749 × 10−27 | 1.00867 |
टॉमसन का परमाणु मॉडल
टॉमसन (1898) ने कहा: परमाणु लगभग 10−10 m त्रिज्या का गोला है। धन आवेश पूरे गोले में बराबर फैला है और इलेक्ट्रॉन उसमें ऐसे बैठे हैं कि कुल आवेश शून्य हो। इसे प्लम पुडिंग या तरबूज़ मॉडल कहते हैं।
अच्छी बात: परमाणु उदासीन क्यों है, यह समझ आता है। कमी: रदरफोर्ड के अल्फा प्रकीर्णन का नतीजा नहीं समझा पाया, इसलिए छोड़ दिया गया।
रदरफोर्ड का अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग
रदरफोर्ड ने तेज़ अल्फा कणों (He2+) की पतली किरण को बहुत पतली सोने की पन्नी (लगभग 100 nm) पर डाला। चारों ओर लगी ज़िंक सल्फ़ाइड की स्क्रीन पर जहाँ कण गिरता, वहाँ चमक होती।
- ज़्यादातर कण सीधे निकल गए → परमाणु का ज़्यादातर भाग खाली है।
- कुछ कण थोड़े कोण से मुड़े → अंदर कोई धन आवेश है जो उन्हें धकेलता है।
- बहुत कम (लगभग 20,000 में 1) लगभग वापस लौटे → सारा धन आवेश और लगभग सारा द्रव्यमान बहुत छोटी जगह में है।
टॉमसन के फैले हुए गोले में कोई कण वापस नहीं लौट सकता था। इसलिए टॉमसन मॉडल गलत साबित हुआ।
रदरफोर्ड का नाभिकीय मॉडल और उसकी कमियाँ
नाभिकीय मॉडल: सारा धन आवेश और लगभग सारा द्रव्यमान एक बहुत छोटे नाभिक में है (त्रिज्या लगभग 10−15 m, परमाणु से 1,00,000 गुना छोटा)। इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर गोल रास्तों पर घूमते हैं, जैसे ग्रह सूर्य के चारों ओर। उन्हें स्थिर-वैद्युत आकर्षण बाँधे रखता है।
कमियाँ:
- स्थायित्व: गोल घूमता आवेश त्वरित होता है, और त्वरित आवेश ऊर्जा (प्रकाश) छोड़ता है। तब इलेक्ट्रॉन लगभग 10−8 s में घूमते-घूमते नाभिक में गिर जाता। पर असली परमाणु नहीं गिरते।
- रेखा स्पेक्ट्रम: यह इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा के बारे में कुछ नहीं कहता, इसलिए तीखी रेखाएँ नहीं समझाता।
परमाणु क्रमांक, द्रव्यमान संख्या, समस्थानिक और समभारिक
परमाणु क्रमांक Z = प्रोटॉन की संख्या = उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉन की संख्या। द्रव्यमान संख्या A = प्रोटॉन + न्यूट्रॉन (दोनों को न्यूक्लिऑन कहते हैं)। इसलिए न्यूट्रॉन N = A − Z। संकेत ऐसे लिखते हैं: AZX, जैसे 3517Cl।
- समस्थानिक (isotopes): Z समान, A अलग (1H प्रोटियम, 2H ड्यूटीरियम, 3H ट्राइटियम)। रासायनिक गुण एक जैसे, क्योंकि रसायन इलेक्ट्रॉनों पर चलता है।
- समभारिक (isobars): A समान, Z अलग (14C और 14N)।
- समन्यूट्रॉनिक (isotones): न्यूट्रॉन समान (13C और 14N, दोनों में N = 7)।
आयन के लिए: इलेक्ट्रॉन = Z − आवेश। Na+ में 11 − 1 = 10; Cl− में 17 + 1 = 18 इलेक्ट्रॉन।
करके देखें: 3D में परमाणु बनाइए
आखिरी स्टेप पर जाइए। Z = 6 और A = 12 रखिए (कार्बन-12)। अब सिर्फ़ A को 13 और 14 कीजिए। प्रोटॉन 6 ही रहते हैं, बस न्यूट्रॉन बदलते हैं: ये कार्बन के समस्थानिक हैं। फिर Z = 7, A = 14 करके कार्बन-14 से तुलना कीजिए: A समान, तत्व अलग, यानी समभारिक।
बोर्ड परीक्षा कोना
CBSE कक्षा 11 में यह इकाई (परमाणु की संरचना) लगभग 9 अंक की है। इस भाग से: 1–2 अंक के प्रश्न कैथोड/कैनाल किरणों के गुण, परमाणु और आयन में p, n, e गिनना, समस्थानिक/समभारिक; 3 अंक के प्रश्न रदरफोर्ड प्रयोग (प्रेक्षण → निष्कर्ष) और उसके मॉडल की कमियों पर।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- न्यूट्रॉन N = A − Z
- आयन में इलेक्ट्रॉन = Z − (आयन का आवेश)
- इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान m = e ÷ (e/m) = 9.109 × 10⁻³¹ kg
- e = 1.602 × 10⁻¹⁹ C
- प्रोटॉन द्रव्यमान ≈ 1836 × इलेक्ट्रॉन द्रव्यमान
- नाभिक त्रिज्या ≈ 10⁻¹⁵ m, परमाणु त्रिज्या ≈ 10⁻¹⁰ m
हल किए गए उदाहरण
1. ³⁵₁₇Cl में कितने प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन हैं?
प्रोटॉन = Z = 17। इलेक्ट्रॉन = 17 (उदासीन)। न्यूट्रॉन = A − Z = 35 − 17 = 18।
2. ⁵⁶₂₆Fe³⁺ में p, n और e निकालिए।
p = 26। n = 56 − 26 = 30। आयन ने 3 इलेक्ट्रॉन खोए: e = 26 − 3 = 23।
3. एक आयन में 18 इलेक्ट्रॉन, 16 प्रोटॉन और 16 न्यूट्रॉन हैं। इसका संकेत लिखिए।
Z = 16, यानी सल्फ़र। A = 16 + 16 = 32। आवेश = 16 − 18 = −2। संकेत: ³²₁₆S²⁻।
4. e/m = 1.76 × 10¹¹ C/kg और e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C से इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान निकालिए।
m = e ÷ (e/m) = 1.6 × 10⁻¹⁹ ÷ 1.76 × 10¹¹ = 9.09 × 10⁻³¹ kg।
5. नाभिक की त्रिज्या लगभग 10⁻¹⁵ m और परमाणु की 10⁻¹⁰ m है। नाभिक परमाणु के आयतन का कितना भाग है?
आयतन r³ के अनुसार। अनुपात = (10⁻¹⁵ ÷ 10⁻¹⁰)³ = (10⁻⁵)³ = 10⁻¹⁵। यानी परमाणु लगभग पूरा खाली है।
6. एक तत्व की द्रव्यमान संख्या 81 है और इसमें इलेक्ट्रॉनों से 31.7 % ज़्यादा न्यूट्रॉन हैं। तत्व पहचानिए।
इलेक्ट्रॉन = प्रोटॉन = x मानो। न्यूट्रॉन = 1.317x। x + 1.317x = 81, x = 81 ÷ 2.317 ≈ 35। Z = 35 यानी ब्रोमीन: ⁸¹₃₅Br (n = 46)।
7. ⁴⁰₁₈Ar, ⁴⁰₂₀Ca, ³⁹₁₉K, ⁴⁰₁₉K में समस्थानिक और समभारिक बताइए।
³⁹K और ⁴⁰K: Z समान = 19 → समस्थानिक। ⁴⁰Ar, ⁴⁰K, ⁴⁰Ca: A समान = 40 → समभारिक।
आम गलतियाँ
- A को न्यूट्रॉन की संख्या मान लेना। A = प्रोटॉन + न्यूट्रॉन; N = A − Z।
- धन आयन में इलेक्ट्रॉन जोड़ देना। Na⁺ ने एक इलेक्ट्रॉन खोया है: 11 − 1 = 10।
- कैनाल किरणों को हमेशा प्रोटॉन समझना। ये नली की गैस के धन आयन हैं; सिर्फ़ हाइड्रोजन से प्रोटॉन मिलते हैं।
- यह सोचना कि न्यूट्रॉन रदरफोर्ड ने खोजा। रदरफोर्ड ने नाभिक बताया; न्यूट्रॉन चैडविक ने 1932 में खोजा।