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उप-परमाणुक कण और परमाणु के शुरुआती मॉडल

परमाणु तीन मुख्य कणों से बना है। इलेक्ट्रॉन (आवेश −1, बहुत हल्का) कैथोड किरण नली से मिला। प्रोटॉन (आवेश +1, इलेक्ट्रॉन से लगभग 1836 गुना भारी) कैनाल किरणों से मिला। न्यूट्रॉन (कोई आवेश नहीं, द्रव्यमान लगभग प्रोटॉन जितना) 1932 में चैडविक ने खोजा। टॉमसन ने परमाणु को धन आवेश का गोला माना जिसमें इलेक्ट्रॉन धँसे हैं। रदरफोर्ड ने सोने की पन्नी पर अल्फा कण मारकर बीच में छोटा, भारी, धनावेशित नाभिक खोजा। परमाणु क्रमांक Z = प्रोटॉन की संख्या; द्रव्यमान संख्या A = प्रोटॉन + न्यूट्रॉन। रदरफोर्ड मॉडल परमाणु का स्थायित्व और रेखा स्पेक्ट्रम नहीं समझा पाया, इसलिए बोर मॉडल आया।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. एक काँच की नली, एक सिरा − और एक सिरा +। − सिरे से छोटे कण निकलते हैं और + प्लेट की ओर मुड़ते हैं। ये ऋणावेशित हैं: इलेक्ट्रॉन।
  2. अब कैथोड में छेद हैं। छेदों से किरणें उल्टी दिशा में निकलती हैं और उल्टी ओर मुड़ती हैं। ये धनावेशित हैं। हाइड्रोजन से मिला सबसे हल्का कण प्रोटॉन है।
  3. तीसरा कण आवेशित प्लेटों के बीच से भी सीधा निकल जाता है: इस पर आवेश नहीं है। यह न्यूट्रॉन है, लगभग प्रोटॉन जितना भारी।
  4. टॉमसन का विचार: परमाणु धन आवेश का एक गोला है, जिसमें इलेक्ट्रॉन तरबूज़ के बीजों की तरह धँसे हैं।
  5. रदरफोर्ड ने पतली सोने की पन्नी पर अल्फा कण मारे। ज़्यादातर सीधे निकले, कुछ मुड़े, और लगभग 20,000 में से 1 वापस लौटा। यानी परमाणु ज़्यादातर खाली है और बीच में छोटा भारी नाभिक है।
  6. अब आप खेलें: Z और A बदलकर H से Ca तक कोई भी परमाणु बनाइए। प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन गिनिए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

कैसे पता चला कि कैथोड किरणें आवेशित कण हैं, प्रकाश नहीं?

ये विद्युत क्षेत्र में + प्लेट की ओर मुड़ती हैं। प्रकाश विद्युत क्षेत्र में नहीं मुड़ता। + की ओर मुड़ना मतलब ऋणावेश।

कैनाल किरणें गैस बदलने पर बदलती हैं, कैथोड किरणें क्यों नहीं?

कैनाल किरणें गैस के बचे हुए धन आयन हैं, इसलिए गैस पर निर्भर। कैथोड किरणें इलेक्ट्रॉन हैं, जो हर परमाणु में एक जैसे हैं।

न्यूट्रॉन पर आवेश नहीं, तो वह मिला कैसे?

क्षेत्र उसे मोड़ता नहीं, इसलिए देखना मुश्किल था। चैडविक ने अल्फा कण से टकराए बेरिलियम से निकले बहुत भेदने वाले उदासीन विकिरण का द्रव्यमान नापा।

टॉमसन मॉडल क्यों विफल हुआ?

उसमें धन आवेश फैला है, जो सिर्फ़ हल्का धक्का देता है। वह अल्फा कण को वापस नहीं मोड़ सकता, पर रदरफोर्ड ने कुछ कण लौटते देखे।

बहुत कम अल्फा कण ही वापस क्यों लौटते हैं?

सिर्फ़ वही कण जो लगभग सीधा छोटे नाभिक की ओर जाए, उसके पास पहुँचकर लौटता है। नाभिक इतना छोटा है कि ऐसा कम ही होता है।

क्या समस्थानिकों के रासायनिक गुण अलग होते हैं?

नहीं। रसायन इलेक्ट्रॉनों पर चलता है और समस्थानिकों में इलेक्ट्रॉन बराबर हैं। सिर्फ़ द्रव्यमान से जुड़े गुण बदलते हैं। आखिरी स्टेप में सिर्फ़ A बदलकर देखिए।

इलेक्ट्रॉन की खोज: कैथोड किरणें

एक काँच की नली से लगभग सारी हवा निकाल दो और दोनों धातु सिरों के बीच बहुत ऊँचा वोल्टेज लगाओ। ऋण सिरा कैथोड और धन सिरा ऐनोड है। कैथोड से ऐनोड की ओर एक धारा चलती है जिसे कैथोड किरणें कहते हैं।

ये कण इलेक्ट्रॉन हैं। टॉमसन ने आवेश/द्रव्यमान अनुपात नापा: e/m = 1.758820 × 1011 C kg−1। मिलिकन के तेल-बूँद प्रयोग से आवेश मिला: e = −1.602 × 10−19 C। इसलिए द्रव्यमान m = e ÷ (e/m) = 9.1094 × 10−31 kg।

प्रोटॉन की खोज: कैनाल (ऐनोड) किरणें

गोल्डस्टीन ने छेद वाला कैथोड लिया। उसके पीछे उल्टी दिशा में जाती किरणें दिखीं। ये कैनाल किरणें ऋण प्लेट की ओर मुड़ती हैं, इसलिए धनावेशित हैं।

न्यूट्रॉन की खोज

परमाणु अपने प्रोटॉनों से ज़्यादा भारी निकलते थे। 1932 में जेम्स चैडविक ने बेरिलियम की पतली परत पर अल्फा कण मारे और बहुत भेदने वाले उदासीन कण पाए। इनका द्रव्यमान (1.6749 × 10−27 kg) प्रोटॉन से थोड़ा ज़्यादा है। इन्हें न्यूट्रॉन कहा गया।

कणआवेश (C)सापेक्ष आवेशद्रव्यमान (kg)द्रव्यमान (u)
इलेक्ट्रॉन−1.602 × 10−19−19.109 × 10−310.00054
प्रोटॉन+1.602 × 10−19+11.6726 × 10−271.00727
न्यूट्रॉन001.6749 × 10−271.00867

टॉमसन का परमाणु मॉडल

टॉमसन (1898) ने कहा: परमाणु लगभग 10−10 m त्रिज्या का गोला है। धन आवेश पूरे गोले में बराबर फैला है और इलेक्ट्रॉन उसमें ऐसे बैठे हैं कि कुल आवेश शून्य हो। इसे प्लम पुडिंग या तरबूज़ मॉडल कहते हैं।

अच्छी बात: परमाणु उदासीन क्यों है, यह समझ आता है। कमी: रदरफोर्ड के अल्फा प्रकीर्णन का नतीजा नहीं समझा पाया, इसलिए छोड़ दिया गया।

रदरफोर्ड का अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग

रदरफोर्ड ने तेज़ अल्फा कणों (He2+) की पतली किरण को बहुत पतली सोने की पन्नी (लगभग 100 nm) पर डाला। चारों ओर लगी ज़िंक सल्फ़ाइड की स्क्रीन पर जहाँ कण गिरता, वहाँ चमक होती।

  1. ज़्यादातर कण सीधे निकल गए → परमाणु का ज़्यादातर भाग खाली है।
  2. कुछ कण थोड़े कोण से मुड़े → अंदर कोई धन आवेश है जो उन्हें धकेलता है।
  3. बहुत कम (लगभग 20,000 में 1) लगभग वापस लौटे → सारा धन आवेश और लगभग सारा द्रव्यमान बहुत छोटी जगह में है।

टॉमसन के फैले हुए गोले में कोई कण वापस नहीं लौट सकता था। इसलिए टॉमसन मॉडल गलत साबित हुआ।

रदरफोर्ड का नाभिकीय मॉडल और उसकी कमियाँ

नाभिकीय मॉडल: सारा धन आवेश और लगभग सारा द्रव्यमान एक बहुत छोटे नाभिक में है (त्रिज्या लगभग 10−15 m, परमाणु से 1,00,000 गुना छोटा)। इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर गोल रास्तों पर घूमते हैं, जैसे ग्रह सूर्य के चारों ओर। उन्हें स्थिर-वैद्युत आकर्षण बाँधे रखता है।

कमियाँ:

परमाणु क्रमांक, द्रव्यमान संख्या, समस्थानिक और समभारिक

परमाणु क्रमांक Z = प्रोटॉन की संख्या = उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉन की संख्या। द्रव्यमान संख्या A = प्रोटॉन + न्यूट्रॉन (दोनों को न्यूक्लिऑन कहते हैं)। इसलिए न्यूट्रॉन N = A − Z। संकेत ऐसे लिखते हैं: AZX, जैसे 3517Cl।

आयन के लिए: इलेक्ट्रॉन = Z − आवेश। Na+ में 11 − 1 = 10; Cl− में 17 + 1 = 18 इलेक्ट्रॉन।

करके देखें: 3D में परमाणु बनाइए

आखिरी स्टेप पर जाइए। Z = 6 और A = 12 रखिए (कार्बन-12)। अब सिर्फ़ A को 13 और 14 कीजिए। प्रोटॉन 6 ही रहते हैं, बस न्यूट्रॉन बदलते हैं: ये कार्बन के समस्थानिक हैं। फिर Z = 7, A = 14 करके कार्बन-14 से तुलना कीजिए: A समान, तत्व अलग, यानी समभारिक।

बोर्ड परीक्षा कोना

CBSE कक्षा 11 में यह इकाई (परमाणु की संरचना) लगभग 9 अंक की है। इस भाग से: 1–2 अंक के प्रश्न कैथोड/कैनाल किरणों के गुण, परमाणु और आयन में p, n, e गिनना, समस्थानिक/समभारिक; 3 अंक के प्रश्न रदरफोर्ड प्रयोग (प्रेक्षण → निष्कर्ष) और उसके मॉडल की कमियों पर।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. ³⁵₁₇Cl में कितने प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन हैं?

प्रोटॉन = Z = 17। इलेक्ट्रॉन = 17 (उदासीन)। न्यूट्रॉन = A − Z = 35 − 17 = 18।

2. ⁵⁶₂₆Fe³⁺ में p, n और e निकालिए।

p = 26। n = 56 − 26 = 30। आयन ने 3 इलेक्ट्रॉन खोए: e = 26 − 3 = 23।

3. एक आयन में 18 इलेक्ट्रॉन, 16 प्रोटॉन और 16 न्यूट्रॉन हैं। इसका संकेत लिखिए।

Z = 16, यानी सल्फ़र। A = 16 + 16 = 32। आवेश = 16 − 18 = −2। संकेत: ³²₁₆S²⁻।

4. e/m = 1.76 × 10¹¹ C/kg और e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C से इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान निकालिए।

m = e ÷ (e/m) = 1.6 × 10⁻¹⁹ ÷ 1.76 × 10¹¹ = 9.09 × 10⁻³¹ kg।

5. नाभिक की त्रिज्या लगभग 10⁻¹⁵ m और परमाणु की 10⁻¹⁰ m है। नाभिक परमाणु के आयतन का कितना भाग है?

आयतन r³ के अनुसार। अनुपात = (10⁻¹⁵ ÷ 10⁻¹⁰)³ = (10⁻⁵)³ = 10⁻¹⁵। यानी परमाणु लगभग पूरा खाली है।

6. एक तत्व की द्रव्यमान संख्या 81 है और इसमें इलेक्ट्रॉनों से 31.7 % ज़्यादा न्यूट्रॉन हैं। तत्व पहचानिए।

इलेक्ट्रॉन = प्रोटॉन = x मानो। न्यूट्रॉन = 1.317x। x + 1.317x = 81, x = 81 ÷ 2.317 ≈ 35। Z = 35 यानी ब्रोमीन: ⁸¹₃₅Br (n = 46)।

7. ⁴⁰₁₈Ar, ⁴⁰₂₀Ca, ³⁹₁₉K, ⁴⁰₁₉K में समस्थानिक और समभारिक बताइए।

³⁹K और ⁴⁰K: Z समान = 19 → समस्थानिक। ⁴⁰Ar, ⁴⁰K, ⁴⁰Ca: A समान = 40 → समभारिक।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. कैथोड किरणें धन प्लेट की ओर मुड़ती हैं। इसका मतलब वे:
2. न्यूट्रॉन किसने खोजा?
3. रदरफोर्ड प्रयोग में बहुत कम अल्फा कण वापस लौटे क्योंकि:
4. ²³₁₁Na में न्यूट्रॉन की संख्या:
5. ¹⁴C और ¹⁴N हैं:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की खोज किसने की?

इलेक्ट्रॉन जे. जे. टॉमसन ने कैथोड किरणों से (1897), प्रोटॉन गोल्डस्टीन की कैनाल किरणों से मिला और बाद में नाम पड़ा, न्यूट्रॉन जेम्स चैडविक ने 1932 में खोजा।

टॉमसन और रदरफोर्ड मॉडल में मुख्य अंतर क्या है?

टॉमसन ने धन आवेश पूरे परमाणु में फैला माना। रदरफोर्ड ने सारा धन आवेश और द्रव्यमान बीच के छोटे नाभिक में रखा और इलेक्ट्रॉन बाहर घूमते बताए।

रदरफोर्ड मॉडल की कमियाँ क्या हैं?

यह परमाणु का स्थायित्व नहीं समझाता (घूमता इलेक्ट्रॉन ऊर्जा छोड़कर गिरना चाहिए) और रेखा स्पेक्ट्रम या इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा नहीं बताता।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

नीदरलैंडHAVO 5 (eindexamenjaar)Matter
नीदरलैंडVWO 5Matter
सीबीएसई (भारत)कक्षा 11परमाणु की संरचना
इंग्लैंडYear 123.1 Physical chemistry
दक्षिण कोरिया고등학교 3학년The atomic world

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