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क्वांटम यांत्रिक मॉडल: क्वांटम संख्याएँ, कक्षक और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास

चलते इलेक्ट्रॉन तरंग जैसे भी हैं: λ = h/mv (दे ब्रॉग्ली)। इसलिए स्थिति और संवेग एक साथ ठीक-ठीक नहीं जान सकते: Δx·Δp ≥ h/4π (हाइज़ेनबर्ग)। इसलिए पक्की कक्षाएँ छोड़कर कक्षक (orbital) लेते हैं: वह जगह जहाँ इलेक्ट्रॉन मिलने की संभावना ज़्यादा है (श्रोडिंगर समीकरण, ψ² = संभावना)। चार क्वांटम संख्याएँ हर इलेक्ट्रॉन बताती हैं: n (कोश, आकार, ऊर्जा), l (उपकोश, आकृति: 0 से n−1), mₗ (दिशा: −l से +l) और mₛ (चक्रण: +½ या −½)। s गोल, p डम्बल, d ज़्यादातर चार पत्ती जैसा। इलेक्ट्रॉन आउफबाऊ (n + l), पाउली (अधिकतम 2, उल्टे चक्रण) और हुंड (पहले अकेले) नियम से भरते हैं। आधे और पूरे भरे उपकोश ज़्यादा स्थायी, इसलिए Cr = 3d⁵4s¹ और Cu = 3d¹⁰4s¹।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. इलेक्ट्रॉन एक छोटा कण भी है और तरंग भी, λ = h/mv। कक्षा पर सिर्फ़ पूरी-पूरी तरंगें टिकती हैं; टूटी तरंग खुद को मिटा देती है।
  2. इलेक्ट्रॉन की जगह पक्की करने की कोशिश करो (बादल छोटा करो): उसके संवेग के तीर चारों ओर फैल जाते हैं। दोनों एक साथ ठीक-ठीक नहीं जान सकते: Δx·Δp ≥ h/4π।
  3. इसलिए हम कक्षक बनाते हैं: बिंदुओं का बादल, जहाँ इलेक्ट्रॉन मिलने की संभावना ज़्यादा वहाँ घना। 1s धुँधली गेंद है; 2s बड़ी है और अंदर एक खाली गोला (नोड) है।
  4. हर कक्षक का एक पता है: n (कोश), l (आकृति), mₗ (दिशा)। हर इलेक्ट्रॉन का चक्रण mₛ = +½ या −½ भी है। n और l बदलकर नए कक्षक देखिए।
  5. आकृतियाँ: s गेंद, p डम्बल (x, y या z पर), d में ज़्यादातर चार पत्तियाँ (dz² डम्बल और छल्ला)। mₗ कक्षक को घुमाता है।
  6. अब आप: Z को 1 से 30 तक चुनें और बक्सों में इलेक्ट्रॉन भरते देखें: पहले कम ऊर्जा, एक बक्से में दो उल्टे चक्रण, जोड़ी से पहले अकेले। Cr (24) और Cu (29) आज़माइए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

इलेक्ट्रॉन तरंग है तो क्रिकेट गेंद तरंग क्यों नहीं दिखती?

λ = h/mv। गेंद का द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन से बहुत ज़्यादा है, इसलिए उसका λ लगभग 10⁻³⁴ m, कोई असर दिखाने के लिए बहुत छोटा।

क्या बेहतर यंत्र से अनिश्चितता सिद्धांत को हराया जा सकता है?

नहीं। यह प्रकृति का गुण है, यंत्र का नहीं। जो प्रकाश इलेक्ट्रॉन की जगह पक्की बताए, वही उसे ज़ोर का धक्का भी देता है।

कक्षा और कक्षक में ठीक-ठीक अंतर क्या है?

कक्षा एक पक्का गोल रास्ता है जिसमें हर पल स्थिति पता हो। कक्षक एक 3D बादल है जो बताता है इलेक्ट्रॉन कहाँ मिलने की संभावना है; उसका कोई पक्का रास्ता नहीं।

l, n के बराबर क्यों नहीं हो सकता?

समीकरण के हल सिर्फ़ l = 0 से n − 1 तक देते हैं। इसीलिए कोश 1 में सिर्फ़ s, कोश 2 में s और p।

p कक्षक में नाभिक पर संभावना शून्य क्यों?

p कक्षक में नाभिक से होकर एक नोडीय तल है: दोनों पत्तियों में ψ के चिह्न उल्टे हैं, बीच के तल पर ψ² शून्य है।

4s, 3d से पहले क्यों भरता है?

(n + l) नियम से 4s = 4 और 3d = 5। 4s इलेक्ट्रॉन नाभिक के ज़्यादा पास पहुँचता है और कम परिरक्षित है। आखिरी स्टेप में Z = 19, 20 फिर 21 देखिए।

Cr और Cu अपवाद क्यों हैं?

आधे (d⁵) और पूरे (d¹⁰) भरे उपकोश सममिति और विनिमय ऊर्जा के कारण ज़्यादा स्थायी हैं। Z = 24 और 29 करके 4s का इलेक्ट्रॉन जाता देखिए।

द्रव्य का द्वैत व्यवहार: दे ब्रॉग्ली

प्रकाश तरंग भी है और कण भी। 1924 में दे ब्रॉग्ली ने कहा कि द्रव्य भी ऐसा ही होना चाहिए: हर चलते कण का एक तरंगदैर्ध्य है

λ = h/mv = h/p (p = संवेग)।

क्रिकेट गेंद का λ बहुत ही छोटा (लगभग 10−34 m) है, इसलिए कोई तरंग असर नहीं दिखता। इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान बहुत कम है, इसलिए उसका λ परमाणु जितना होता है और तरंग असर मायने रखता है। इलेक्ट्रॉन विवर्तन ने इसे सिद्ध किया और इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी इसी पर चलता है।

बोर से जोड़: कक्षा पर पूरी तरंगें फिट हों तो 2πr = nλ = nh/mv, यानी mvr = nh/2π: ठीक बोर का नियम।

हाइज़ेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धांत

इलेक्ट्रॉन की ठीक स्थिति और ठीक संवेग (या वेग) एक साथ जानना असंभव है:

Δx × Δp ≥ h/4π, या Δx × Δv ≥ h/(4πm)।

क्यों: इलेक्ट्रॉन को "देखने" के लिए उस जगह से छोटे तरंगदैर्ध्य का प्रकाश चाहिए। ऐसे प्रकाश में बहुत ऊर्जा होती है, वह इलेक्ट्रॉन को धक्का देकर उसका संवेग बदल देता है। स्थिति जितनी पक्की, संवेग उतना धुँधला।

मतलब: इलेक्ट्रॉन का पक्का रास्ता (कक्षा) बेमानी है, इसलिए बोर मॉडल छोड़ना पड़ा। बड़ी चीज़ों (गेंद) में अनिश्चितता इतनी छोटी है कि पता ही नहीं चलती।

क्वांटम यांत्रिक मॉडल और कक्षक

श्रोडिंगर (1926) ने इलेक्ट्रॉन को तरंग मानकर एक समीकरण लिखा। उसके हल तरंग फलन ψ हैं। ψ का सीधा अर्थ नहीं, पर ψ² प्रायिकता घनत्व बताता है: किसी बिंदु पर इलेक्ट्रॉन मिलने की संभावना।

क्वांटम संख्याएँ

क्वांटम संख्यामानक्या बताती है
मुख्य n1, 2, 3 … (K, L, M …)कोश, आकार और ऊर्जा। कोश n में कक्षक = n²; इलेक्ट्रॉन = 2n²।
दिगंशी l0 से n − 1 (s, p, d, f)उपकोश और आकृति। उपकोश में कक्षक = 2l + 1।
चुंबकीय mₗ−l … 0 … +lकक्षक की दिशा।
चक्रण mₛ+½ या −½इलेक्ट्रॉन के घूमने की दिशा (↑ या ↓)।

उदाहरण: n = 3 के लिए l = 0, 1, 2 (3s, 3p, 3d); कक्षक = 1 + 3 + 5 = 9 = 3²; इलेक्ट्रॉन = 18।

कक्षीय कोणीय संवेग = √(l(l+1)) · h/2π।

s, p और d कक्षकों की आकृतियाँ

कक्षकों की ऊर्जा और (n + l) नियम

हाइड्रोजन में ऊर्जा सिर्फ़ n पर निर्भर: 2s = 2p। बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं में ऊर्जा l पर भी निर्भर है, क्योंकि अंदर के इलेक्ट्रॉन बाहर वालों को परिरक्षित करते हैं, और s इलेक्ट्रॉन नाभिक के ज़्यादा पास पहुँचते (भेदन) हैं, फिर p, फिर d।

(n + l) नियम: n + l कम तो ऊर्जा कम। बराबर हो तो कम n पहले। इसलिए 4s (4+0 = 4) 3d (3+2 = 5) से पहले भरता है।

क्रम: 1s, 2s, 2p, 3s, 3p, 4s, 3d, 4p, 5s, 4d, 5p, 6s, 4f, 5d, 6p, 7s …

भरने के नियम: आउफबाऊ, पाउली और हुंड

  1. आउफबाऊ सिद्धांत: इलेक्ट्रॉन पहले सबसे कम ऊर्जा वाले कक्षक में जाते हैं ("आउफबाऊ" = ऊपर बनाना)।
  2. पाउली अपवर्जन सिद्धांत: एक परमाणु में किन्हीं दो इलेक्ट्रॉनों की चारों क्वांटम संख्याएँ समान नहीं हो सकतीं। इसलिए एक कक्षक में अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन, उल्टे चक्रण के साथ (↑↓)।
  3. हुंड का अधिकतम बहुलता नियम: बराबर ऊर्जा वाले कक्षकों (p, d, f) में पहले एक-एक इलेक्ट्रॉन समान चक्रण से जाता है; सबमें एक-एक होने के बाद ही जोड़ी बनती है। N (2p³) = ↑ ↑ ↑, न कि ↑↓ ↑।

इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और स्थायित्व

उपकोश लिखकर ऊपर इलेक्ट्रॉन संख्या लिखते हैं: O (8) = 1s² 2s² 2p⁴; K (19) = 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 4s¹ = [Ar] 4s¹। सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन संयोजी इलेक्ट्रॉन, बाकी आंतरिक (core) इलेक्ट्रॉन।

आधे और पूरे भरे उपकोशों का विशेष स्थायित्व:

इसलिए Cr (24) = [Ar] 3d⁵ 4s¹, 3d⁴4s² नहीं; और Cu (29) = [Ar] 3d¹⁰ 4s¹, 3d⁹4s² नहीं।

आयन: सबसे बड़े n वाले इलेक्ट्रॉन पहले निकालो। Fe (26) = [Ar]3d⁶4s²; Fe²⁺ = [Ar]3d⁶; Fe³⁺ = [Ar]3d⁵ (आधा भरा, इसलिए Fe³⁺ ज़्यादा स्थायी)।

करके देखें: भरिए और जाँचिए

आखिरी स्टेप में पहले नाइट्रोजन (Z = 7) का विन्यास कॉपी में बक्सों और तीरों से बनाइए। फिर Z = 7 करके देखिए कि तीनों 2p इलेक्ट्रॉन अकेले और एक ही दिशा में हैं। फिर Z = 23, 24, 25 की तुलना कीजिए: Cr पर 4s का इलेक्ट्रॉन 3d में जाता दिखेगा।

बोर्ड परीक्षा कोना

आम प्रश्न: दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य और अनिश्चितता के आंकिक (2–3 अंक); क्वांटम संख्याओं के संभव/असंभव समूह; कोश में कक्षक/इलेक्ट्रॉन की संख्या; नोड; कक्षकों की आकृतियाँ (चित्र); आउफबाऊ, पाउली, हुंड लिखना और समझाना; Z = 1–30 के विन्यास, Cr और Cu अपवाद और कारण।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. 10 m/s से चलती 0.1 kg की गेंद का दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य निकालिए।

λ = h/mv = 6.626 × 10⁻³⁴ ÷ (0.1 × 10) = 6.626 × 10⁻³⁴ m। इतना छोटा कि पता ही न चले।

2. 2.19 × 10⁶ m/s से चलते इलेक्ट्रॉन (m = 9.1 × 10⁻³¹ kg) का दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य?

λ = 6.626 × 10⁻³⁴ ÷ (9.1 × 10⁻³¹ × 2.19 × 10⁶) = 6.626 × 10⁻³⁴ ÷ 1.993 × 10⁻²⁴ = 3.32 × 10⁻¹⁰ m = 332 pm, परमाणु जितना। (यह H की पहली कक्षा की परिधि 2πr है: एक पूरी तरंग फिट।)

3. 25 g की गेंद की स्थिति 10⁻⁵ m तक पता है। वेग की न्यूनतम अनिश्चितता?

Δv = h/(4πmΔx) = 6.626 × 10⁻³⁴ ÷ (4 × 3.14 × 0.025 × 10⁻⁵) = 2.1 × 10⁻²⁸ m/s। नगण्य।

4. इलेक्ट्रॉन की स्थिति 0.1 Å (10⁻¹¹ m) तक पता है। वेग की न्यूनतम अनिश्चितता?

Δv = 6.626 × 10⁻³⁴ ÷ (4 × 3.14 × 9.1 × 10⁻³¹ × 10⁻¹¹) = 5.8 × 10⁶ m/s। परमाणु में उसकी अपनी चाल से भी ज़्यादा, इसलिए पक्की कक्षा बेमानी है।

5. 3d उपकोश के सभी कक्षकों की क्वांटम संख्याएँ और त्रिज्य व कोणीय नोड लिखिए।

n = 3, l = 2, mₗ = −2, −1, 0, +1, +2 (पाँच कक्षक)। त्रिज्य नोड = 3 − 2 − 1 = 0; कोणीय नोड = 2।

6. कौन-से समूह संभव नहीं? (a) n = 2, l = 2, mₗ = 0 (b) n = 3, l = 1, mₗ = −1 (c) n = 1, l = 0, mₗ = +1 (d) n = 4, l = 3, mₗ = −3

(a) असंभव: l ≤ n − 1 = 1 होना चाहिए। (c) असंभव: l = 0 पर mₗ सिर्फ़ 0। (b) 3p और (d) 4f ठीक हैं।

7. किसी परमाणु में कितने इलेक्ट्रॉनों के n = 3 और mₛ = −½ हो सकते हैं?

n = 3 में n² = 9 कक्षक। हर एक में mₛ = −½ वाला एक इलेक्ट्रॉन। उत्तर 9।

8. (n + l) नियम से 4s, 3d, 4p, 5s को ऊर्जा क्रम में लगाइए।

4s: 4, 3d: 5, 4p: 5, 5s: 5। 4s सबसे कम। n + l = 5 वालों में कम n पहले: 3d < 4p < 5s। क्रम: 4s < 3d < 4p < 5s।

9. Cr (24) और Cu (29) के विन्यास लिखिए और कारण बताइए।

Cr: 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 3d⁵ 4s¹। Cu: 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 3d¹⁰ 4s¹। एक 4s इलेक्ट्रॉन 3d में जाने से 3d आधा (Cr) या पूरा (Cu) भर जाता है। ये ज़्यादा सममित हैं और इनमें विनिमय ऊर्जा ज़्यादा है, इसलिए ज़्यादा स्थायी।

10. Fe³⁺ (Fe, Z = 26) में कितने अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं?

Fe = [Ar] 3d⁶ 4s²। पहले 4s² फिर एक 3d निकालो: Fe³⁺ = [Ar] 3d⁵। हुंड नियम से पाँचों अकेले: 5 अयुग्मित।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य:
2. n = 3 के लिए l के संभव मान:
3. p कक्षक की आकृति:
4. कौन-सा नियम कहता है कि एक कक्षक में उल्टे चक्रण वाले सिर्फ़ दो इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं?
5. Cu (Z = 29) का विन्यास:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चार क्वांटम संख्याएँ कौन-सी हैं?

मुख्य n (कोश और ऊर्जा), दिगंशी l (उपकोश की आकृति), चुंबकीय mₗ (दिशा) और चक्रण mₛ (+½ या −½)। चारों मिलकर हर इलेक्ट्रॉन का अलग पता देती हैं।

हाइज़ेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धांत क्या है?

इलेक्ट्रॉन जैसे छोटे कण की ठीक स्थिति और ठीक संवेग एक साथ जानना असंभव है: Δx·Δp ≥ h/4π।

आउफबाऊ, पाउली और हुंड नियम क्या हैं?

आउफबाऊ: पहले कम ऊर्जा वाले कक्षक भरो। पाउली: किन्हीं दो इलेक्ट्रॉनों की चारों क्वांटम संख्याएँ समान नहीं, इसलिए एक कक्षक में उल्टे चक्रण वाले अधिकतम 2। हुंड: बराबर ऊर्जा के कक्षकों में जोड़ी से पहले सबमें एक-एक।

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