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संक्रमण तत्व (d-ब्लॉक)

संक्रमण तत्व समूह 3 से 12 की d-ब्लॉक धातुएँ हैं। इनका आखिरी इलेक्ट्रॉन अंदर के (n−1)d कक्षक में जाता है। d-कक्षक आधे-अधूरे भरे होने से ये कई ऑक्सीकरण अवस्थाएँ, रंगीन आयन, चुंबकत्व (μ = √(n(n+2)) BM), अच्छा उत्प्रेरण और आसानी से मिश्रधातु बनाते हैं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. आवर्त सारणी देखिए। बीच का नारंगी हिस्सा d-ब्लॉक है। यह s-ब्लॉक और p-ब्लॉक के बीच, समूह 3 से 12 में है।
  2. अब लोहे के परमाणु के अंदर देखिए। पाँच पीले डिब्बे पाँच 3d कक्षक हैं। इलेक्ट्रॉन पहले हर डिब्बे में एक-एक जाते हैं, फिर जोड़ी बनाते हैं। लोहा = [Ar] 3d⁶ 4s²।
  3. Sc से Zn तक दस धातुएँ एक पंक्ति में। गेंद का आकार = त्रिज्या, बीच में लगभग नहीं बदलता। स्तंभ की ऊँचाई = एक इलेक्ट्रॉन निकालने की ऊर्जा, धीरे-धीरे बढ़ती है।
  4. हर घन एक ऑक्सीकरण अवस्था है। 4s और 3d इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा लगभग बराबर है, इसलिए धातु अलग-अलग संख्या में इलेक्ट्रॉन दे सकती है। बीच वाला मैंगनीज +7 तक जाता है।
  5. अब गेंदें पानी में अपने आयन के रंग की हो गईं। पीले तीर अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं। इन्हीं से रंग बनता है और आयन चुंबक की ओर खिंचता है।
  6. अब आप खेलें: कोई भी तत्व चुनें। नीचे उसका विन्यास, त्रिज्या, ऊर्जा, ऑक्सीकरण अवस्थाएँ, रंग और चुंबकीय आघूर्ण पढ़ें।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

अगर 4s पहले भरता है, तो आयन में पहले खाली क्यों होता है?

3d में इलेक्ट्रॉन आने के बाद 3d नाभिक के पास खिंच जाता है और उसकी ऊर्जा 4s से कम हो जाती है। इसलिए बाहरी 4s इलेक्ट्रॉन सबसे आसानी से निकलते हैं।

Zn को सच्चा संक्रमण तत्व क्यों नहीं कहते?

Zn परमाणु और Zn²⁺ दोनों में 3d¹⁰ पूरा भरा है। संक्रमण तत्व के लिए आंशिक भरा d-सेट चाहिए।

श्रेणी के बीच में त्रिज्या लगभग क्यों नहीं बदलती?

नया इलेक्ट्रॉन अंदर के 3d में जाकर बाहरी इलेक्ट्रॉनों का परिरक्षण करता है। बढ़ा खिंचाव और बढ़ा परिरक्षण लगभग बराबर हो जाते हैं।

Mn +7 दिखाता है पर Zn केवल +2 क्यों?

Mn के 5 अयुग्मित 3d और 2 4s इलेक्ट्रॉन लगभग बराबर ऊर्जा के हैं, तो 7 तक दे सकता है। Zn का 3d¹⁰ पूरा और स्थायी है, केवल 4s के 2 जाते हैं।

Zn²⁺ रंगहीन पर Cu²⁺ नीला क्यों?

रंग के लिए d–d कूद चाहिए। Cu²⁺ (d⁹) के ऊपरी स्तर में जगह है। Zn²⁺ (d¹⁰) में कोई खाली जगह नहीं, तो दृश्य प्रकाश नहीं सोखा जाता।

क्या ज़्यादा अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हमेशा ज़्यादा चुंबकीय?

केवल-चक्रण आघूर्ण के लिए हाँ: μ = √(n(n+2)) n के साथ बढ़ता है। 3d श्रेणी में Mn²⁺ और Fe³⁺ (5 अयुग्मित) सबसे ऊपर हैं।

आवर्त सारणी में संक्रमण तत्वों का स्थान

d-ब्लॉक आवर्त सारणी के बीच का चौड़ा हिस्सा है, समूह 3 से 12 तक। बाईं ओर s-ब्लॉक (समूह 1, 2) और दाईं ओर p-ब्लॉक (समूह 13 से 18) है।

इसकी चार श्रेणियाँ हैं: 3d (Sc से Zn), 4d (Y से Cd), 5d (La, Hf से Hg) और 6d (Ac, Rf आगे)।

संक्रमण तत्व वह है जिसके परमाणु या किसी सामान्य आयन में d-उपकोश आंशिक भरा हो। Zn, Cd, Hg में d¹⁰ पूरा भरा है, इसलिए ये d-ब्लॉक में हैं पर सच्चे संक्रमण तत्व नहीं।

"संक्रमण" का मतलब है "बीच का": इनके गुण s-ब्लॉक से p-ब्लॉक की ओर धीरे-धीरे बदलते हैं।

d-ब्लॉक तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास

सामान्य विन्यास: (n−1)d¹⁻¹⁰ ns¹⁻²। "n−1" का मतलब d-कोश बाहरी कोश से एक अंदर है। पहली श्रेणी में n = 4, यानी 3d भरता है।

4s पहले भरता है, पर आयन बनते समय 4s के इलेक्ट्रॉन पहले निकलते हैं।

दो खास अपवाद

आधा भरा (d⁵) या पूरा भरा (d¹⁰) सेट ज़्यादा स्थायी है, इसलिए:

इलेक्ट्रॉन पहले हर डिब्बे में एक-एक, फिर जोड़ी में (हुंड का नियम)। कहानी का दूसरा चरण यही दिखाता है।

संक्रमण तत्वों के सामान्य गुण

सारे संक्रमण तत्व धातुएँ हैं: कठोर, चमकीले, ऊँचे गलनांक वाले (कई अयुग्मित d-इलेक्ट्रॉन मज़बूत धात्विक बंध बनाते हैं), और ऊष्मा-विद्युत के अच्छे चालक। नीचे पाठ्यक्रम के मुख्य गुण हैं।

परमाणु और आयनिक त्रिज्या

श्रेणी में आगे बढ़ने पर त्रिज्या पहले घटती है, बीच में लगभग एक जैसी रहती है, और अंत में थोड़ी बढ़ती है। कारण: नया इलेक्ट्रॉन अंदर के d-कोश में जाता है और बाहरी इलेक्ट्रॉनों को नाभिक के बढ़ते खिंचाव से बचाता (परिरक्षण) है।

समूह में नीचे 4d, 3d से बड़ा है, पर 4d और 5d लगभग बराबर हैं (Zr 160 pm, Hf 159 pm)। इसका कारण लैंथेनॉयड संकुचन है।

आयनन एन्थैल्पी

गैस अवस्था के परमाणु से एक इलेक्ट्रॉन निकालने की ऊर्जा आयनन एन्थैल्पी है। श्रेणी में यह धीरे-धीरे बढ़ती है, क्योंकि d-इलेक्ट्रॉनों का परिरक्षण बढ़ते नाभिकीय आवेश का असर कम कर देता है।

Zn का पहला मान ऊँचा है (3d¹⁰ 4s² पूरा भरा)। Cr और Cu का दूसरा मान बहुत ऊँचा है, क्योंकि दूसरा इलेक्ट्रॉन निकालने पर स्थायी d⁵ या d¹⁰ टूटता है।

परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ

4s और 3d इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा लगभग बराबर है, इसलिए धातु अलग-अलग संख्या में इलेक्ट्रॉन खो सकती है। इससे कई ऑक्सीकरण अवस्थाएँ बनती हैं, अक्सर एक-एक के अंतर से (Fe²⁺, Fe³⁺)।

पानी में Mn²⁺ और Fe³⁺ (दोनों d⁵) ज़्यादा स्थायी हैं। Cu⁺ पानी में Cu²⁺ और Cu में बदल जाता है, क्योंकि Cu²⁺ की जलयोजन ऊर्जा बहुत ज़्यादा है।

संक्रमण धातु आयन रंगीन क्यों होते हैं?

पानी से घिरे आयन में पाँच d-कक्षक दो ऊर्जा स्तरों में बँट जाते हैं। एक d-इलेक्ट्रॉन दृश्य प्रकाश का कुछ हिस्सा सोखकर नीचे से ऊपर कूदता है। हमें बचा हुआ (पूरक) रंग दिखता है। इसे d–d संक्रमण कहते हैं।

इसलिए रंग के लिए d-सेट आंशिक भरा होना चाहिए। d⁰ (Sc³⁺, Ti⁴⁺) और d¹⁰ (Zn²⁺, Cu⁺) रंगहीन हैं।

उदाहरण: Cu²⁺ नीला, Ni²⁺ हरा, Co²⁺ गुलाबी, Fe³⁺ पीला।

चुंबकीय गुण और चुंबकीय आघूर्ण

इलेक्ट्रॉन घूमता (चक्रण) है, इसलिए छोटे चुंबक जैसा है। जोड़ी वाले दो इलेक्ट्रॉन एक-दूसरे को रद्द कर देते हैं; अयुग्मित नहीं करते।

केवल-चक्रण चुंबकीय आघूर्ण: μ = √(n(n+2)) BM, n = अयुग्मित इलेक्ट्रॉन, BM = बोर मैग्नेटॉन।

उत्प्रेरक गुण

उत्प्रेरक अभिक्रिया तेज़ करता है पर खुद खर्च नहीं होता। संक्रमण धातुएँ दो कारणों से अच्छे उत्प्रेरक हैं:

  1. परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ: धातु इलेक्ट्रॉन लेकर वापस दे सकती है (Fe³⁺ ⇌ Fe²⁺)।
  2. सतह: अभिकारक अणु धातु की सतह पर चिपककर पास आते हैं और जल्दी क्रिया करते हैं।

उदाहरण: हेबर प्रक्रम में Fe, संपर्क प्रक्रम में V₂O₅, तेलों के हाइड्रोजनीकरण (वनस्पति घी) में Ni, कार के उत्प्रेरक परिवर्तक में Pt/Rh।

अंतराकाशी यौगिक और मिश्रधातुएँ

अंतराकाशी यौगिक: छोटे परमाणु (H, C, N) धातु के क्रिस्टल की खाली जगहों में बैठ जाते हैं, जैसे TiC, Mn₄N। ये बहुत कठोर, ऊँचे गलनांक वाले और विद्युत चालक होते हैं।

मिश्रधातुएँ आसानी से बनती हैं, क्योंकि इन धातुओं के परमाणुओं का आकार लगभग बराबर (15% के अंदर) होता है, तो एक परमाणु दूसरे की जगह ले लेता है। उदाहरण: स्टील, पीतल (Cu + Zn), काँसा (Cu + Sn)।

अन्य गुण: संकुल और परमाणुकरण एन्थैल्पी

इनके आयन छोटे, ज़्यादा आवेश वाले और खाली d-कक्षक वाले होते हैं, इसलिए ये कई संकुल बनाते हैं, जैसे [Cu(NH₃)₄]²⁺।

इनकी परमाणुकरण एन्थैल्पी ऊँची होती है, क्योंकि अयुग्मित इलेक्ट्रॉन मज़बूत धातु-धातु बंध बनाते हैं। यह हर श्रेणी के बीच में सबसे ज़्यादा होती है।

करके देखें: पहले अनुमान, फिर जाँच

1. आखिरी 3D चरण में तत्व चुनने से पहले लिखिए: Fe²⁺ (d⁶) और Cu²⁺ (d⁹) में कितने अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होंगे? फिर Fe और Cu चुनकर μ जाँचिए।

2. घर/स्कूल में: नीला तूतिया (कॉपर सल्फेट) और हल्का हरा हीरा कसीस (फेरस सल्फेट) देखिए। दोनों रंग d–d कूद से हैं। ज़िंक सल्फेट सफ़ेद है, क्योंकि Zn²⁺ d¹⁰ है।

3. फ्रिज वाला चुंबक लोहे की कील और ताँबे के तार के पास लाइए। केवल लोहा तेज़ी से खिंचता है (लौहचुंबकीय)।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. Mn (Z = 25) और Mn²⁺ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।

चरण 1: Ar में 18 इलेक्ट्रॉन, बचे 7। चरण 2: 4s में 2, 3d में 5 → Mn = [Ar] 3d⁵ 4s²। चरण 3: आयन के लिए पहले दोनों 4s इलेक्ट्रॉन हटाएँ → Mn²⁺ = [Ar] 3d⁵।

2. Fe³⁺ (Fe का Z = 26) में कितने अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं? इसका केवल-चक्रण आघूर्ण निकालिए।

Fe = [Ar] 3d⁶ 4s²। Fe³⁺: 4s से 2 और 3d से 1 हटाएँ → 3d⁵। पाँचों डिब्बों में एक-एक → n = 5। μ = √(5 × 7) = √35 = 5.92 BM।

3. Cu²⁺ (Z = 29) का केवल-चक्रण चुंबकीय आघूर्ण निकालिए।

Cu = [Ar] 3d¹⁰ 4s¹। Cu²⁺: 4s¹ और एक 3d हटाएँ → 3d⁹। चार जोड़ी, एक अकेला → n = 1। μ = √3 = 1.73 BM।

4. कौन रंगीन है: Ti⁴⁺, V³⁺, Zn²⁺ या Sc³⁺?

d-संख्या: Ti⁴⁺ = d⁰, V³⁺ = d², Zn²⁺ = d¹⁰, Sc³⁺ = d⁰। d–d कूद केवल आंशिक भरे सेट में हो सकती है। इसलिए केवल V³⁺ रंगीन (हरा) है।

5. किसी 3d आयन का μ = 3.87 BM है। कितने अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं? एक उदाहरण आयन बताइए।

√(n(n+2)) = 3.87। वर्ग करें: n(n+2) = 15। n = 3 रखें: 3 × 5 = 15 ✔। तो n = 3। Cr³⁺ (d³) या Co²⁺ (d⁷) ऐसे आयन हैं।

6. Mn²⁺, Fe²⁺, Ni²⁺, Zn²⁺ को चुंबकीय आघूर्ण के बढ़ते क्रम में लिखिए।

d-संख्या: Mn²⁺ d⁵ (n = 5), Fe²⁺ d⁶ (n = 4), Ni²⁺ d⁸ (n = 2), Zn²⁺ d¹⁰ (n = 0)। क्रम: Zn²⁺ (0) < Ni²⁺ (2.83) < Fe²⁺ (4.90) < Mn²⁺ (5.92 BM)।

7. Cu की दूसरी आयनन एन्थैल्पी Zn से बहुत ज़्यादा क्यों है?

Cu⁺ = 3d¹⁰, पूरा और बहुत स्थायी सेट। दूसरा इलेक्ट्रॉन निकालने पर यह टूटता है, इसलिए ज़्यादा ऊर्जा लगती है। Zn⁺ = 3d¹⁰ 4s¹, दूसरा इलेक्ट्रॉन 4s से आसानी से निकलता है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. d-ब्लॉक तत्वों का सामान्य बाहरी विन्यास है:
2. 3d श्रेणी में सबसे ज़्यादा ऑक्सीकरण अवस्थाएँ कौन दिखाता है?
3. 2 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन वाले आयन का केवल-चक्रण आघूर्ण:
4. कौन-सा आयन रंगहीन है?
5. संक्रमण धातुएँ आसानी से मिश्रधातु क्यों बनाती हैं?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संक्रमण तत्व आसान शब्दों में क्या हैं?

आवर्त सारणी के बीच (समूह 3 से 12) की धातुएँ, जिनका d-कोश परमाणु या किसी सामान्य आयन में आंशिक भरा होता है।

केवल-चक्रण चुंबकीय आघूर्ण का सूत्र क्या है?

μ = √(n(n+2)) BM, n = अयुग्मित इलेक्ट्रॉन। जैसे n = 3 पर 3.87 BM।

संक्रमण धातु यौगिक रंगीन क्यों होते हैं?

आंशिक भरे d-कक्षक दो स्तरों में बँटते हैं। इलेक्ट्रॉन दृश्य प्रकाश सोखकर ऊपर कूदता है और हमें बचा हुआ रंग दिखता है।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

यूक्रेन11 класMetallic elements and compounds
सीबीएसई (भारत)कक्षा 12d- एवं f-ब्लॉक के तत्व
इंग्लैंडYear 133.2 Inorganic chemistry
रूस11 классMetals

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