धातुओं और अधातुओं के भौतिक गुण
धातुएँ आम तौर पर चमकीली (धात्विक चमक), कठोर, आघातवर्ध्य (पीटकर पतली चादर), तन्य (खींचकर तार), ध्वानिक (टकराने पर आवाज़) और ऊष्मा-विद्युत की सुचालक होती हैं। चाँदी और कॉपर सबसे अच्छे चालक हैं; लेड और मर्करी कम।
अधातुएँ आम तौर पर मंद, भंगुर और कुचालक होती हैं। कई गैस हैं (ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, क्लोरीन), कुछ नरम ठोस (सल्फर, फ़ॉस्फ़ोरस); ब्रोमीन द्रव है।
ज़रूरी अपवाद
- मर्करी (पारा) धातु है पर कमरे के ताप पर द्रव है।
- सोडियम और पोटैशियम इतने नरम हैं कि चाकू से कट जाते हैं; गैलियम और सीज़ियम हथेली पर पिघल जाते हैं।
- आयोडीन अधातु है पर चमकदार है।
- हीरा (कार्बन) सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है; ग्रेफ़ाइट (कार्बन) बिजली चलाता है।
रासायनिक गुण: धातुओं की ऑक्सीजन से अभिक्रिया
ज़्यादातर धातुएँ ऑक्सीजन से मिलकर धातु ऑक्साइड बनाती हैं जो क्षारकीय होते हैं: 2Mg + O2 → 2MgO। Na2O, K2O पानी में घुलकर क्षार बनाते हैं।
Al2O3 और ZnO अम्ल और क्षार दोनों से अभिक्रिया करते हैं, इन्हें उभयधर्मी ऑक्साइड कहते हैं। Al2O3 + 6HCl → 2AlCl3 + 3H2O और Al2O3 + 2NaOH → 2NaAlO2 + H2O।
सोडियम-पोटैशियम खुली हवा में आग पकड़ लेते हैं, इसलिए केरोसिन में रखे जाते हैं; मैग्नीशियम गरम करने पर चमककर जलता है; लोहा केवल बुरादे के रूप में जलता है; कॉपर पर काली CuO परत बनती है; चाँदी-सोना गरम करने पर भी नहीं जुड़ते। अधातुएँ अम्लीय या उदासीन ऑक्साइड बनाती हैं (SO2, CO2 अम्लीय; CO, N2O उदासीन)।
धातुओं की जल से अभिक्रिया
धातु + जल → धातु हाइड्रॉक्साइड (या ऑक्साइड) + हाइड्रोजन।
- सोडियम, पोटैशियम ठंडे पानी से तेज़ी से अभिक्रिया करते हैं; गर्मी से हाइड्रोजन जल उठती है। 2Na + 2H2O → 2NaOH + H2।
- कैल्शियम धीमा है; बुलबुले चिपकने से तैरने लगता है।
- मैग्नीशियम गरम पानी से अभिक्रिया करता है।
- एल्युमिनियम, ज़िंक, आयरन केवल भाप से: 3Fe + 4H2O(भाप) → Fe3O4 + 4H2।
- लेड, कॉपर, चाँदी, सोना पानी से बिल्कुल नहीं।
धातुओं की तनु अम्ल से अभिक्रिया
धातु + तनु अम्ल → लवण + हाइड्रोजन, जैसे Zn + 2HCl → ZnCl2 + H2। बुदबुदाहट Mg में सबसे तेज़, फिर Al, Zn, Fe। कॉपर तनु HCl से हाइड्रोजन नहीं देता।
नाइट्रिक अम्ल प्रबल ऑक्सीकारक है, वह बनी हुई H2 को पानी में बदल देता है; केवल Mg और Mn बहुत तनु HNO3 से H2 देते हैं। अम्लराज (3 भाग सांद्र HCl : 1 भाग सांद्र HNO3) सोना-प्लैटिनम भी घोल देता है।
धातुओं की लवण विलयन से अभिक्रिया (विस्थापन)
अधिक सक्रिय धातु कम सक्रिय धातु को उसके लवण विलयन से विस्थापित करती है: Fe + CuSO4 → FeSO4 + Cu। नीला विलयन हल्का हरा और कील पर भूरी कॉपर परत। उल्टा (Cu + FeSO4) कुछ नहीं होता।
सक्रियता श्रेणी
धातुओं को घटती सक्रियता के क्रम में लिखना सक्रियता श्रेणी है: K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > [H] > Cu > Hg > Ag > Au।
- H से ऊपर की धातुएँ तनु अम्ल से H2 देती हैं, नीचे वाली नहीं।
- कोई धातु अपने से नीचे की हर धातु को विस्थापित कर सकती है।
- इसी स्थान से तय होता है कि धातु का निष्कर्षण कैसे होगा।
बोर्ड परीक्षा में विस्थापन का अनुमान, प्रेक्षणों से क्रम लगाना, या "कॉपर तनु HCl से क्यों नहीं अभिक्रिया करता" जैसे 2–3 अंक के प्रश्न आते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- धातु + ऑक्सीजन → धातु ऑक्साइड (क्षारकीय; Al₂O₃, ZnO उभयधर्मी)
- धातु + जल → धातु हाइड्रॉक्साइड/ऑक्साइड + H₂
- धातु + तनु अम्ल → लवण + H₂ (केवल H से ऊपर वाली धातुएँ)
- धातु A + धातु B का लवण → A का लवण + धातु B (यदि A ऊपर है)
- सक्रियता श्रेणी: K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > H > Cu > Hg > Ag > Au
हल किए गए उदाहरण
1. सोडियम को केरोसिन में क्यों रखते हैं?
सोडियम हवा की ऑक्सीजन और नमी से बहुत तेज़ी से अभिक्रिया करता है और आग पकड़ सकता है। केरोसिन उससे अभिक्रिया नहीं करता और हवा-पानी को दूर रखता है।
2. ज़िंक और तनु सल्फ़्यूरिक अम्ल का संतुलित समीकरण लिखो और गैस का नाम बताओ।
Zn + H₂SO₄ → ZnSO₄ + H₂। गैस हाइड्रोजन है; जलती तीली पास लाने पर 'पॉप' की आवाज़ करती है।
3. दिखाओ कि एल्युमिनियम ऑक्साइड उभयधर्मी है।
अम्ल से: Al₂O₃ + 6HCl → 2AlCl₃ + 3H₂O (क्षारक की तरह)। क्षार से: Al₂O₃ + 2NaOH → 2NaAlO₂ + H₂O (अम्ल की तरह)। दोनों से अभिक्रिया = उभयधर्मी।
4. धातु X, CuSO₄ से कॉपर निकाल देती है पर ZnSO₄ से ज़िंक नहीं। X का स्थान बताओ।
X, Cu से ऊपर है पर Zn से नीचे। यानी Zn > X > Cu; X आयरन या लेड हो सकती है।
5. सिल्वर नाइट्रेट में कॉपर की पट्टी डाली। क्या दिखेगा और क्यों?
कॉपर, चाँदी से ऊपर है: Cu + 2AgNO₃ → Cu(NO₃)₂ + 2Ag। पट्टी पर चाँदी के चमकीले कण जमते हैं और विलयन धीरे-धीरे नीला हो जाता है।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि सभी धातुएँ ठोस हैं: पारा द्रव धातु है।
- यह मानना कि हर धातु अम्ल से H₂ देती है: Cu, Ag, Au (H से नीचे) नहीं देतीं।
- नाइट्रिक अम्ल से H₂ लिखना: HNO₃ उसे पानी में ऑक्सीकृत कर देता है (Mg, Mn अपवाद)।
- विस्थापन उल्टा लिखना: नीचे की धातु ऊपर वाली को नहीं निकाल सकती, Cu + FeSO₄ → कोई अभिक्रिया नहीं।