Poland Liceum ogólnokształcące, klasa II Chemistry
अध्याय: 11
1. Reactions in aqueous solutions
Dissociation, pH and ionic equations
- आयनिक साम्य: अम्ल, क्षारक, आयनन और pH – अम्ल और क्षारक की तीन परिभाषाएँ हैं: आरेनियस (पानी में H⁺ या OH⁻ देना), ब्रॉन्स्टेड–लोरी (प्रोटॉन दाता या ग्राही) और लुइस (इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही या दाता)। प्रबल अम्ल-क्षारक पूरे आयनित होते हैं; दुर्बल थोड़े, और उनका साम्य Ka या Kb से लिखा जाता है। पानी भी थोड़ा आयनित होता है: 25 °C पर Kw = [H⁺][OH⁻] = 1.0 × 10⁻¹⁴। pH = −log[H⁺], pH + pOH = 14। दुर्बल वैद्युत-अपघट्य के लिए α ≈ √(K/C), यानी तनु करने पर α बढ़ता है (ओस्टवाल्ड तनुता नियम)। संयुग्मी युग्म के लिए Ka × Kb = Kw। दुर्बल अम्ल या क्षारक से बने लवण पानी से क्रिया करते हैं (जल-अपघटन)।
2. Inorganic compounds
Classes and names; oxides and hydrides · Hydroxides, acids and salts
- ऑक्साइड: अम्लीय, क्षारकीय, उभयधर्मी और उदासीन – ऑक्साइड वह यौगिक है जिसमें ऑक्सीजन और एक और तत्व होता है। धातु के ऑक्साइड प्रायः क्षारकीय, अधातु के ऑक्साइड प्रायः अम्लीय होते हैं। कुछ (Al₂O₃, ZnO) उभयधर्मी और कुछ (CO, N₂O, पानी) उदासीन होते हैं। पहचान का आसान तरीका: ऑक्साइड को पानी, अम्ल और क्षारक में डालकर देखें।
- अम्ल और क्षारक: गुण, सूचक और अभिक्रियाएँ – अम्ल पानी में H⁺ आयन देता है और क्षारक OH⁻ आयन। सूचक रंग या गंध बदलकर बताता है कि कौन मौजूद है। H⁺ और OH⁻ मिलकर पानी बनाते हैं और पीछे लवण बच जाता है।
3. Oxidation and reduction
Redox reactions
- अपचयोपचय अभिक्रियाएँ: ऑक्सीजन से इलेक्ट्रॉन तक – पहले ऑक्सीकरण का मतलब था ऑक्सीजन जुड़ना या हाइड्रोजन हटना। अपचयन इसका उल्टा था। आज हम बड़ा विचार लेते हैं: इलेक्ट्रॉन खोना ऑक्सीकरण है और इलेक्ट्रॉन पाना अपचयन। दोनों हमेशा साथ होते हैं, इसलिए इन्हें अपचयोपचय (रेडॉक्स) अभिक्रिया कहते हैं। ज़्यादा सक्रिय धातु कम सक्रिय धातु के आयन को इलेक्ट्रॉन देती है।
4. Electrochemistry
Galvanic cells and corrosion
- गैल्वेनी सेल और नेर्न्स्ट समीकरण – गैल्वेनी सेल अपने-आप होने वाली रेडॉक्स अभिक्रिया की ऊर्जा को बिजली में बदलता है। ऐनोड (−) पर ऑक्सीकरण और कैथोड (+) पर अपचयन होता है। हर इलेक्ट्रोड का विभव मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (0 V) से नापा जाता है। E°सेल = E°कैथोड − E°ऐनोड। नेर्न्स्ट समीकरण E = E° − (0.059/n) log Q (298 K पर) किसी भी सांद्रता पर वोल्टेज बताता है, और ΔG = −nFE वोल्टेज को ऊर्जा से जोड़ता है।
5. Metals, non-metals and their compounds
Metals · Non-metals
- संक्षारण, उसका बचाव और मिश्रातु – संक्षारण धातु का हवा, नमी या रसायनों से धीरे-धीरे खराब होना है। लोहे पर जंग तभी लगती है जब हवा (ऑक्सीजन) और पानी दोनों हों; जंग जलयुक्त आयरन ऑक्साइड है। इसे पेंट, तेल, यशदलेपन, क्रोमियम लेपन, ऐनोडीकरण या मिश्रातु बनाकर रोका जाता है। मिश्रातु किसी धातु का दूसरी धातुओं या अधातु के साथ समांगी मिश्रण है; यह शुद्ध धातु से प्रायः अधिक कठोर, मज़बूत और संक्षारण-रोधी होता है।
- धातुओं की प्राप्ति और निष्कर्षण – धातुएँ ज़्यादातर भू-पर्पटी में यौगिकों (खनिजों) के रूप में मिलती हैं; जिस खनिज से धातु लाभ के साथ निकाली जा सके वह अयस्क है। निष्कर्षण के तीन चरण: सांद्रण (गैंग हटाना), कच्ची धातु पाना (भर्जन या निस्तापन, फिर अपचयन या विद्युत अपघटन, जो सक्रियता श्रेणी से तय होता है), और परिष्करण (आम तौर पर विद्युत अपघटनी)।
- आयनिक यौगिक: धातु और अधातु कैसे अभिक्रिया करते हैं – धातु का परमाणु अपने बाहरी इलेक्ट्रॉन अधातु के परमाणु को दे देता है ताकि दोनों का बाहरी कोश पूरा (अष्टक) हो जाए। धातु धनायन बनती है, अधातु ऋणायन, और दोनों के बीच का प्रबल आकर्षण आयनिक (वैद्युत संयोजी) बंध है। आयनिक यौगिक कठोर क्रिस्टलीय ठोस होते हैं, उच्च गलनांक वाले, पानी में घुलनशील, और केवल पिघली या घुली अवस्था में विद्युत चालक।
- धातु और अधातु: गुण और सक्रियता श्रेणी – धातुएँ आम तौर पर चमकदार, कठोर, आघातवर्ध्य, तन्य और ऊष्मा-विद्युत की सुचालक होती हैं; अधातुएँ मंद, भंगुर और कुचालक। धातुएँ क्षारकीय ऑक्साइड बनाती हैं, जल और तनु अम्ल से हाइड्रोजन देती हैं, और अधिक सक्रिय धातु कम सक्रिय धातु को उसके लवण के विलयन से बाहर निकाल देती है। सक्रियता के क्रम में लिखी सूची सक्रियता श्रेणी कहलाती है।
- अधातुएँ और उनकी अभिक्रियाएँ – अधातुएँ हाइड्रोजन, कार्बन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, सल्फर, क्लोरीन जैसे तत्व हैं। ये प्रायः फीकी, भंगुर और कुचालक होती हैं। आपस में ये इलेक्ट्रॉन साझा करती हैं (सहसंयोजक बंध), इसलिए हाइड्रोजन से HCl, H₂O, NH₃, CH₄, H₂S बनते हैं। धातुओं के साथ क्लोरीन और सल्फर इलेक्ट्रॉन लेकर आयनिक लवण (NaCl, MgCl₂, Na₂S, FeS) बनाते हैं।
6. Uses of inorganic compounds
Silica, glass, limestone, gypsum, fertilisers
- सिलिका, काँच, चूना-पत्थर, जिप्सम और उर्वरक – सिलिका (SiO₂) रेत और क्वार्ट्ज़ है और काँच का कच्चा माल है। चूना-पत्थर, संगमरमर और चॉक सब कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO₃) हैं; अम्ल डालने पर झाग उठता है। उबालने से अस्थायी कठोरता CaCO₃ की परत बनकर निकल जाती है। जिप्सम (CaSO₄·2H₂O) पानी छोड़कर प्लास्टर ऑफ पेरिस बनता है, जो पानी मिलाने पर जम जाता है। उर्वरक पौधों को नाइट्रोजन, फ़ॉस्फ़ोरस और पोटैशियम देते हैं।
7. Introduction to organic chemistry
Classification and naming · Isomerism · Types of organic reactions
- कार्बनिक यौगिकों की IUPAC नामपद्धति और समावयवता – कार्बनिक यौगिक लाखों हैं, इसलिए हर एक का साफ़ और अलग नाम चाहिए। IUPAC पद्धति में नाम के तीन भाग हैं: मूल शब्द (मुख्य शृंखला में कार्बनों की संख्या), अनुलग्न (आबंध का प्रकार और मुख्य क्रियात्मक समूह) और पूर्वलग्न (शाखाएँ)। मुख्य समूह वाली सबसे लंबी शृंखला चुनो, ऐसे अंक दो कि मुख्य समूह और शाखाओं को सबसे छोटे अंक मिलें, और शाखाओं को वर्णक्रम में लिखो। समावयवी वे यौगिक हैं जिनका अणुसूत्र एक है पर बनावट अलग। संरचनात्मक समावयवियों में परमाणु अलग ढंग से जुड़े होते हैं (शृंखला, स्थिति, क्रियात्मक समूह, मध्यावयवता)। त्रिविम समावयवियों में जुड़ाव एक जैसा पर 3D व्यवस्था अलग होती है (ज्यामितीय सिस/ट्रांस और प्रकाशिक)।
- कार्बन और उसके यौगिक: आबंधन, हाइड्रोकार्बन और नामकरण – कार्बन के बाहरी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए वह इलेक्ट्रॉन लेने-देने के बजाय साझा करता है (सहसंयोजक आबंध)। वह अपने जैसे कार्बन से जुड़ता है (श्रृंखलन) और हमेशा 4 आबंध बनाता है (चतुःसंयोजकता), इसलिए लाखों यौगिक बनते हैं: सीधी श्रृंखला, शाखा और वलय, संतृप्त या असंतृप्त। एक ही क्रियात्मक समूह वाले यौगिक समजातीय श्रेणी बनाते हैं, जिनमें हर सदस्य –CH₂– से अलग होता है।
8. Hydrocarbons
Alkanes, alkenes, alkynes · Polymers · Aromatics and fuels
- ऐल्केन – ऐल्केन ऐसे हाइड्रोकार्बन हैं जिनमें केवल एकल C–C आबंध होते हैं। इनका सामान्य सूत्र CnH2n+2 है। इन्हें ऐल्कीन में हाइड्रोजन जोड़कर, वुर्ट्ज़ अभिक्रिया से, ऐल्किल हैलाइड के अपचयन से और विकार्बोक्सिलन से बनाते हैं। ये अध्रुवीय होते हैं, जलने पर बहुत ऊष्मा देते हैं और प्रकाश में H की जगह Cl ले लेते हैं। C–C आबंध के चारों ओर घूमने से सांतरित और ग्रहणित आकार बनते हैं, जिन्हें संरूपण कहते हैं।
- बहुलक (Polymers) – बहुलक एक विशाल अणु है जो कई छोटे अणुओं (एकलकों) को लंबी श्रृंखला में जोड़कर बनता है। योगात्मक बहुलकीकरण में C=C द्विबंध वाले एकलक खुलकर जुड़ते हैं और कुछ नहीं निकलता (एथीन → पॉलीएथीन)। संघनन बहुलकीकरण में दोनों सिरों पर क्रियाशील समूह वाले दो तरह के एकलक जुड़ते हैं और हर जोड़ पर पानी जैसा छोटा अणु निकलता है (नायलॉन, पॉलिएस्टर)। प्रकृति भी बहुलक बनाती है: स्टार्च, सेलुलोज़, प्रोटीन, DNA, रबर। अलग-अलग श्रृंखलाएँ थर्मोप्लास्टिक बनाती हैं जो पिघलकर पुनः चक्रित होते हैं; अनुप्रस्थ-बंधित श्रृंखलाएँ थर्मोसेट बनाती हैं जो कभी नहीं पिघलते। ज़्यादातर प्लास्टिक सड़ते नहीं, इसलिए कम इस्तेमाल, दोबारा इस्तेमाल और पुनः चक्रण ज़रूरी है।
- बेंज़ीन और ऐरोमैटिकता – बेंज़ीन (C₆H₆) छह sp² कार्बनों का चपटा वलय है। इसके छह π इलेक्ट्रॉन पूरे वलय में फैले हैं, इसलिए सभी C–C आबंध बराबर हैं और वलय बहुत स्थायी है। ऐसा वलय ऐरोमैटिक कहलाता है जब वह चक्रीय, समतलीय, पूर्ण संयुग्मित हो और उसमें 4n + 2 π इलेक्ट्रॉन हों (हकेल नियम)। बेंज़ीन योग की जगह इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन (नाइट्रीकरण, हैलोजनीकरण, सल्फ़ोनीकरण, फ़्रीडेल–क्राफ़्ट्स) पसंद करती है, क्योंकि इससे स्थायी वलय बचा रहता है। वलय पर पहले से लगा समूह तय करता है कि अगला समूह ऑर्थो/पैरा जाएगा या मेटा। बेंज़ीन और संगलित-वलय हाइड्रोकार्बन विषैले हैं और कैंसर कर सकते हैं।
9. Alcohols and phenols
Alcohols · Phenols
- ऐल्कोहॉल – ऐल्कोहॉल वह कार्बनिक यौगिक है जिसमें –OH समूह एक sp³ कार्बन पर लगा हो (R–OH)। –OH वाले कार्बन पर जुड़े कार्बन गिनकर इसे प्राथमिक (1°), द्वितीयक (2°) या तृतीयक (3°) कहते हैं। नाम: ऐल्केन का 'e' हटाकर 'ऑल' (ol), –OH को सबसे छोटा नंबर। बनाने के तरीके: ऐल्कीन का जलयोजन या हाइड्रोबोरॉनन–ऑक्सीकरण, ऐल्डिहाइड/कीटोन/अम्ल का अपचयन, ग्रीन्यार अभिकर्मक। हाइड्रोजन बंध के कारण क्वथनांक ऊँचा और पानी में घुलनशील। अभिक्रियाओं में या तो O–H टूटता है (Na, एस्टरीकरण) या C–O (HX, निर्जलीकरण); 1° और 2° का ऑक्सीकरण होता है। मेथेनॉल और एथेनॉल मुख्य व्यापारिक ऐल्कोहॉल हैं।
- फ़ीनॉल – फ़ीनॉल में –OH सीधे बेंज़ीन वलय के कार्बन पर लगा होता है। इसे क्लोरोबेंज़ीन (NaOH, 623 K, 300 atm), बेंज़ीनसल्फ़ोनिक अम्ल, डाइऐज़ोनियम लवण या क्यूमीन से बनाते हैं। फ़ीनॉल, ऐल्कोहॉल और पानी से ज़्यादा अम्लीय है क्योंकि फ़ीनॉक्साइड आयन का ऋण आवेश वलय पर फैल जाता है; –NO₂ जैसे इलेक्ट्रॉन खींचने वाले समूह (ऑर्थो/पैरा पर) अम्लता बढ़ाते हैं, –CH₃ जैसे इलेक्ट्रॉन देने वाले घटाते हैं। –OH वलय की ऑर्थो और पैरा स्थितियों को सक्रिय करता है: ब्रोमीन जल → 2,4,6-ट्राइब्रोमोफ़ीनॉल, तनु HNO₃ → o- और p-नाइट्रोफ़ीनॉल, NaOH + CO₂ → सैलिसिलिक अम्ल (कोल्बे), CHCl₃ + NaOH → सैलिसिलैल्डिहाइड (राइमर–टीमान)।
10. Aldehydes and ketones
Carbonyl compounds
- ऐल्डिहाइड और कीटोन: संरचना, बनाना और अभिक्रियाएँ – ऐल्डिहाइड और कीटोन दोनों में कार्बोनिल समूह C=O होता है। ऐल्डिहाइड में C=O वाले कार्बन पर कम से कम एक H होता है (−CHO)। कीटोन में उस कार्बन पर दो कार्बन समूह होते हैं (−CO−)। C=O बंध ध्रुवीय है: C थोड़ा धनात्मक, O थोड़ा ऋणात्मक। इसलिए इलेक्ट्रॉन से भरे कण (नाभिकस्नेही) कार्बन पर हमला करते हैं। यही एक बात ज़्यादातर अभिक्रियाएँ समझा देती है: HCN, NaHSO₃, ऐल्कोहॉल और अमोनिया व्युत्पन्नों का योग। ऐल्डिहाइड आसानी से ऑक्सीकृत होते हैं (टॉलेन्स, फेलिंग परीक्षण), कीटोन नहीं। C=O के बगल वाले कार्बन का H (α-H) थोड़ा अम्लीय होता है, इसी से ऐल्डोल संघनन होता है। जिन ऐल्डिहाइड में α-H नहीं, वे कैनिज़ारो अभिक्रिया देते हैं।
11. Carboxylic acids
Carboxylic acids
- कार्बोक्सिलिक अम्ल: कार्बोक्सिल समूह, अम्लता और अभिक्रियाएँ – कार्बोक्सिलिक अम्ल में कार्बोक्सिल समूह −COOH होता है: एक ही कार्बन पर C=O और O−H। यह H⁺ दे सकता है, और बचा हुआ आयन (कार्बोक्सिलेट, −COO⁻) स्थिर होता है क्योंकि उसका ऋण आवेश दोनों ऑक्सीजन में बराबर बँटा होता है। इसी कारण ये फ़ीनॉल और ऐल्कोहॉल से ज़्यादा अम्लीय हैं (पर HCl जैसे खनिज अम्लों से कमज़ोर)। इलेक्ट्रॉन खींचने वाले समूह (Cl, F, NO₂) अम्ल को प्रबल बनाते हैं, इलेक्ट्रॉन धकेलने वाले (ऐल्किल) दुर्बल। इन्हें ऐल्कोहॉल, ऐल्डिहाइड या ऐल्किलबेंज़ीन के ऑक्सीकरण से, नाइट्राइल, एस्टर और ऐमाइड के जल-अपघटन से, या ग्रिन्यार अभिकर्मक और CO₂ से बनाते हैं। मुख्य अभिक्रियाएँ: NaHCO₃ से लवण (CO₂ के बुलबुले), एस्टरीकरण, ऐसिल क्लोराइड और ऐनहाइड्राइड बनना, ऐल्कोहॉल में अपचयन, विकार्बोक्सिलन और HVZ अभिक्रिया।