ऑक्सीकरण और अपचयन का पुराना (क्लासिकल) विचार
पहले रसायनज्ञ सिर्फ़ ऑक्सीजन और हाइड्रोजन देखते थे।
- ऑक्सीकरण = ऑक्सीजन जुड़ना या हाइड्रोजन हटना। जैसे 2Mg + O₂ → 2MgO (Mg को O मिली)।
- अपचयन = ऑक्सीजन हटना या हाइड्रोजन जुड़ना। जैसे CuO + H₂ → Cu + H₂O (CuO की O हटी)।
बाद में विचार बड़ा हुआ। कोई भी विद्युतऋणी तत्व (जो इलेक्ट्रॉन ज़ोर से खींचे, जैसे Cl, F) जुड़ना भी ऑक्सीकरण है। कोई विद्युतधनी (धातु जैसा) तत्व हटना भी ऑक्सीकरण है। जैसे 2K₄[Fe(CN)₆] + H₂O₂ → 2K₃[Fe(CN)₆] + 2KOH में K हटता है, इसलिए संकुल का ऑक्सीकरण हुआ।
H₂S + Cl₂ → 2HCl + S में S की हाइड्रोजन हटी (ऑक्सीकरण) और Cl को हाइड्रोजन मिली (अपचयन)। एक के बिना दूसरा नहीं होता।
करके देखो: 3D के चरण 1 और 2 में देखो किसे O मिली और किसकी H हटी।
ऑक्सीकारक और अपचायक
ऑक्सीकारक दूसरे पदार्थ का ऑक्सीकरण करता है। ख़ुद उसका अपचयन होता है।
अपचायक दूसरे पदार्थ का अपचयन करता है। ख़ुद उसका ऑक्सीकरण होता है।
CuO + H₂ → Cu + H₂O में H₂ अपचायक है और CuO ऑक्सीकारक है।
इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण के रूप में अपचयोपचय
2Na + Cl₂ → 2NaCl देखो। इसमें न ऑक्सीजन है, न हाइड्रोजन, फिर भी यह रेडॉक्स है।
- Na → Na⁺ + e⁻ : सोडियम इलेक्ट्रॉन खोता है। यह ऑक्सीकरण है।
- Cl₂ + 2e⁻ → 2Cl⁻ : क्लोरीन इलेक्ट्रॉन पाती है। यह अपचयन है।
इनमें से हर पंक्ति एक अर्ध-अभिक्रिया है। दोनों को (इलेक्ट्रॉन बराबर करके) जोड़ो तो पूरी अभिक्रिया मिलती है। खोए इलेक्ट्रॉन = पाए इलेक्ट्रॉन।
यानी ऑक्सीकरण = इलेक्ट्रॉन खोना, अपचयन = इलेक्ट्रॉन पाना। इलेक्ट्रॉन देने वाला अपचायक है, लेने वाला ऑक्सीकारक।
करके देखो: 3D के चरण 3 में पीले इलेक्ट्रॉन को Na से Cl तक जाते देखो।
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ज़िंक की छड़ नीले कॉपर सल्फेट में डुबाओ। कुछ देर में छड़ पर भूरी कॉपर की परत आती है और नीला रंग हल्का होता है।
Zn(s) + Cu²⁺(aq) → Zn²⁺(aq) + Cu(s)
ज़िंक Cu²⁺ को इलेक्ट्रॉन देता है। उल्टा (कॉपर छड़ ज़िंक सल्फेट में) नहीं होता। मतलब ज़िंक कॉपर से ज़्यादा आसानी से इलेक्ट्रॉन देता है।
इसी तरह कॉपर Ag⁺ को इलेक्ट्रॉन देता है, तो सिल्वर नाइट्रेट में कॉपर तार पर चाँदी के क्रिस्टल बनते हैं और घोल नीला हो जाता है। ज़िंक अम्ल के H⁺ को इलेक्ट्रॉन देकर H₂ गैस बनाता है, कॉपर नहीं।
इस "इलेक्ट्रॉन की होड़" से क्रम मिलता है: Zn > Cu > Ag। आगे यही विद्युत-रासायनिक श्रेणी बनती है।
करके देखो: 3D के चरण 5 में "Cu छड़ + Zn²⁺" चुनो। पहले अंदाज़ा लगाओ। फिर "Cu छड़ + Ag⁺" चुनो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ऑक्सीकरण: इलेक्ट्रॉन खोना, जैसे Zn → Zn²⁺ + 2e⁻
- अपचयन: इलेक्ट्रॉन पाना, जैसे Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu
- रेडॉक्स = ऑक्सीकरण अर्ध + अपचयन अर्ध (खोए e⁻ = पाए e⁻)
- ऑक्सीकारक: इलेक्ट्रॉन लेता है, ख़ुद अपचयित होता है
- अपचायक: इलेक्ट्रॉन देता है, ख़ुद ऑक्सीकृत होता है
हल किए गए उदाहरण
1. 2Mg + O₂ → 2MgO में किसका ऑक्सीकरण हुआ और ऑक्सीकारक कौन है?
Mg को ऑक्सीजन मिली, इसलिए Mg का ऑक्सीकरण हुआ। यह O₂ ने किया, इसलिए O₂ ऑक्सीकारक है (उसका अपचयन हुआ)।
2. CuO + H₂ → Cu + H₂O में ऑक्सीकृत और अपचयित पदार्थ बताओ।
H₂ को ऑक्सीजन मिली → ऑक्सीकरण। CuO की ऑक्सीजन हटी → अपचयन। H₂ अपचायक है।
3. 2Na + Cl₂ → 2NaCl की दोनों अर्ध-अभिक्रियाएँ लिखो।
ऑक्सीकरण: 2Na → 2Na⁺ + 2e⁻। अपचयन: Cl₂ + 2e⁻ → 2Cl⁻। खोए (2) = पाए (2)।
4. लोहे की कील कॉपर सल्फेट में डालें तो क्या अभिक्रिया होगी? लिखो।
हाँ। लोहा कॉपर से ज़्यादा सक्रिय है। Fe(s) + Cu²⁺(aq) → Fe²⁺(aq) + Cu(s)। Fe का ऑक्सीकरण, Cu²⁺ का अपचयन।
5. सिल्वर नाइट्रेट घोल को कॉपर के बर्तन में रखें तो क्या होगा?
कॉपर Ag⁺ को इलेक्ट्रॉन देता है: Cu + 2Ag⁺ → Cu²⁺ + 2Ag। बर्तन धीरे-धीरे घुलता है और घोल नीला हो जाता है। इसलिए ऐसा नहीं करना चाहिए।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि ऑक्सीकारक का ऑक्सीकरण होता है। उल्टा है: ऑक्सीकारक का अपचयन होता है।
- यह मानना कि रेडॉक्स के लिए ऑक्सीजन ज़रूरी है। 2Na + Cl₂ → 2NaCl में ऑक्सीजन नहीं, फिर भी रेडॉक्स है।
- अर्ध-अभिक्रिया में इलेक्ट्रॉन गलत ओर लिखना। ऑक्सीकरण में इलेक्ट्रॉन उत्पाद की ओर आते हैं।
- सोचना कि कोई भी धातु किसी भी धातु को हटा सकती है। सिर्फ़ ज़्यादा सक्रिय धातु ही।