द्रव्य स्थानांतरण और उच्च ताप पर अभिक्रियाएँ
ठोस में परमाणु स्थिर नहीं होते। वे अपनी जगह के आसपास कंपन करते हैं। जितनी गर्मी, उतना बड़ा कंपन। कभी-कभी परमाणु को इतनी ऊर्जा मिल जाती है कि वह खाली जगह (रिक्ति, vacancy) में कूद जाए। जगह-जगह यह कूदना विसरण (diffusion) है, जो एक प्रकार का द्रव्य स्थानांतरण है।
ठोस में विसरण ठंडे में बहुत धीमा होता है और गर्म में बहुत तेज़। नियम है D = D₀ × e−Q/RT: D विसरण की दर, Q कूदने के लिए चाहिए ऊर्जा (सक्रियण ऊर्जा), R गैस नियतांक और T केल्विन में तापमान। T थोड़ा बढ़ने पर D बहुत बढ़ता है।
दो ठोस चूर्ण बिना पिघले भी अभिक्रिया कर सकते हैं: इसे ठोस-अवस्था अभिक्रिया कहते हैं। जैसे MgO + Al₂O₃ लगभग 1400 °C पर स्पिनेल MgAl₂O₄ बनाते हैं। अभिक्रिया वहीं शुरू होती है जहाँ कण छूते हैं। वहाँ उत्पाद परत बनती है, और अब परमाणुओं को उस परत के भीतर से चलकर मिलना पड़ता है। इसलिए परत और धीमी बढ़ती है। उसकी मोटाई x² = k × t का पालन करती है: चार गुना समय में सिर्फ दोगुनी मोटाई।
महीन चूर्ण, कणों को दबाकर सटाना और ऊँचा तापमान, ये सब अभिक्रिया तेज़ करते हैं। यही कूदना सिंटरिंग में कणों को जोड़ता है, जिससे पका बर्तन कठोर होता है।
गलन और क्रिस्टलन
क्रिस्टल को गलनांक तक गर्म करने पर कंपन इतना बड़ा हो जाता है कि क्रमबद्ध पंक्तियाँ बिखर जाती हैं और ठोस द्रव बन जाता है। इसमें ऊर्जा (गुप्त ऊष्मा) लगती है, इसलिए पिघलते समय तापमान स्थिर रहता है।
क्रिस्टलन इसका उलटा है। द्रव ठंडा होने पर कुछ परमाणु सही पैटर्न में इकट्ठा होते हैं। यह छोटा बीज केंद्रक (nucleus) है (केंद्रक बनना)। फिर और परमाणु उसी पैटर्न में जुड़ते हैं: क्रिस्टल वृद्धि। बहुत केंद्रक से बहुत छोटे क्रिस्टल (महीन दाना); कम केंद्रक से कुछ बड़े क्रिस्टल।
द्रव अपने गलनांक से थोड़ा नीचे भी द्रव रह सकता है। इसे अतिशीतलन (supercooling) कहते हैं। अगर द्रव इतना तेज़ ठंडा हो कि परमाणु अपनी जगह ही न पा सकें, तो क्रिस्टल की जगह काँच बनता है।
मिश्रण अक्सर किसी भी शुद्ध भाग से कम तापमान पर पिघलता है। कुम्हार और काँच बनाने वाले गालक (flux) जैसे सोडा या चूना डालते हैं ताकि सिलिका कम तापमान पर पिघले और ईंधन बचे।
उच्च ताप पर ऑक्सीकरण और अपचयन
ऑक्सीकरण में पदार्थ ऑक्सीजन पाता है या इलेक्ट्रॉन खोता है। अपचयन में ऑक्सीजन खोता है या इलेक्ट्रॉन पाता है। ये हमेशा साथ होते हैं (रेडॉक्स अभिक्रिया)।
अपचयन का उदाहरण: धातु ऑक्साइड + कार्बन, उच्च ताप पर। MO + C → M + CO। कार्बन ऑक्सीजन ले जाता है, इसलिए धातु ऑक्साइड का अपचयन होता है और कार्बन का ऑक्सीकरण। लोहा, जस्ता और कई धातुएँ अयस्क से ऐसे ही मिलती हैं। उच्च ताप चाहिए क्योंकि धातु और ऑक्सीजन का बंध मज़बूत है।
कार्बन यह काम कर पाए या नहीं, तापमान पर निर्भर है। कार्बन की ऑक्सीजन छीनने की क्षमता तापमान के साथ बढ़ती है, इसलिए पर्याप्त गर्म भट्ठी ऐसे ऑक्साइड भी अपचयित कर देती है जो ठंडे में कार्बन से नहीं होते। (एलिंघम आरेख हर धातु के लिए यह दिखाता है।)
भट्ठी का वातावरण मायने रखता है। ऑक्सीकारक भट्ठी में (खूब हवा) मिट्टी का लोहा Fe₂O₃ रहता है और बर्तन लाल निकलता है। अपचायक भट्ठी में (कम हवा, धुआँ) लोहा FeO या Fe₃O₄ बन जाता है और बर्तन स्लेटी या काला होता है। कुछ अ-ऑक्साइड, जैसे सिलिकॉन कार्बाइड, हवा में गर्म करने पर SiO₂ की पतली सुरक्षात्मक परत बना लेते हैं जो बाकी को जलने से बचाती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- D = D₀ × e^(−Q/RT) (T केल्विन में)
- x² = k × t (समय t के बाद उत्पाद परत की मोटाई x)
- T(K) = T(°C) + 273
- कार्बन से अपचयन: MO + C → M + CO
- मुख्य शब्द: विसरण, रिक्ति, सिंटरिंग, केंद्रक, अतिशीतलन, गालक, रेडॉक्स
हल किए गए उदाहरण
1. पकाने का तापमान 1400 °C केल्विन में बदलें।
T = 1400 + 273 = 1673 K।
2. एक उत्पाद परत 1 घंटे बाद 2 µm मोटी है और x² = kt का पालन करती है। 4 घंटे बाद मोटाई?
x² = k t, इसलिए x ∝ √t। x₂ = 2 µm × √4 = 4 µm। चार गुना समय में दोगुनी मोटाई।
3. ZnO + C → Zn + CO में किसका ऑक्सीकरण और किसका अपचयन?
ZnO ऑक्सीजन खोकर Zn बनता है, इसलिए उसका अपचयन। कार्बन ऑक्सीजन पाकर CO बनाता है, इसलिए कार्बन का ऑक्सीकरण।
4. उसी तापमान पर महीन चूर्ण उसी ठोस के डले से तेज़ अभिक्रिया क्यों करता है?
महीन चूर्ण में कणों के संपर्क बहुत ज़्यादा होते हैं, इसलिए अभिक्रिया कई जगह शुरू होती है और परमाणुओं को कम दूरी तय करनी पड़ती है।
आम गलतियाँ
- सोचना कि अभिक्रिया के लिए ठोस को पिघलना ही पड़ता है। कई सिरेमिक अभिक्रियाएँ सब ठोसों में विसरण से होती हैं।
- e^(−Q/RT) में °C का प्रयोग करना। हमेशा केल्विन लें।
- मानना कि उत्पाद परत एक समान गति से बढ़ती है। वह धीमी होती है, क्योंकि परमाणुओं को मोटी परत पार करनी पड़ती है।
- ऑक्सीकरण और अपचयन उलझाना: MO + C → M + CO में ऑक्साइड का अपचयन होता है।