सिलिका और ऐलुमिना
सिलिका (SiO₂) SiO₄ चतुष्फलकों से बनी है: एक छोटा सिलिकॉन, पिरामिड के कोनों पर 4 ऑक्सीजन से घिरा। हर ऑक्सीजन दो चतुष्फलकों में साझा है, इसलिए अनुपात 1 Si : 2 O है। सिलिका के कई क्रिस्टल रूप (बहुरूप, polymorphs) हैं: क्वार्ट्ज़, ट्रिडिमाइट और क्रिस्टोबलाइट। लगभग 573 °C पर क्वार्ट्ज़ α से β रूप में बदलता है और आकार थोड़ा उछलता है। इसीलिए क्वार्ट्ज़ वाले पके सिरेमिक इस तापमान के पास बहुत तेज़ गर्म या ठंडे होने पर चटक सकते हैं।
ऐलुमिना (Al₂O₃) का स्थिर रूप कोरंडम है, जिसमें बड़े ऑक्सीजन परमाणु परतों में सजे हैं और छोटे Al³⁺ आयन उनके बीच के दो-तिहाई खाली स्थानों में हैं। इसके बंध मज़बूत हैं, इसलिए ऐलुमिना बहुत कठोर (मोह पैमाने पर 9) है, लगभग 2050 °C पर पिघलता है, रसायनों का सामना करता है और बिजली नहीं चलाता। माणिक और नीलम ऐलुमिना ही हैं जिनमें दूसरे तत्व की ज़रा-सी मात्रा है। उपयोग: स्पार्क-प्लग के रोधक, काटने के औज़ार, हड्डी के प्रत्यारोपण, भट्ठी के पुर्ज़े।
ऐलुमिनियम सिलिकेट और मिट्टी के खनिज
ऐलुमिनियम सिलिकेट Al, Si और O के यौगिक हैं। ज़्यादातर मिट्टियाँ मिट्टी के खनिज हैं, जो पतली परतों में ऐलुमिनियम सिलिकेट हैं। सबसे आम काओलिनाइट, Al₂Si₂O₅(OH)₄ है। हर परत में एक सिलिका की परत (चतुष्फलक) एक ऐलुमिना की परत (Al के साथ O और OH) से चिपकी है। परतें किताब के पन्नों की तरह ढेर में हैं।
परतों के बीच पानी घुस सकता है। पानी पतले स्नेहक का काम करता है, इसलिए परतें एक-दूसरे पर फिसलती हैं। इसीलिए गीली मिट्टी सुघट्य (plastic) होती है (ढल जाती है और आकार बनाए रखती है)। सूखने पर पानी निकल जाता है, परतें जकड़ जाती हैं और मिट्टी कठोर हो जाती है।
पकाने पर काओलिनाइट अपना पानी खो देता है (लगभग 450 से 600 °C), और लगभग 1000 से 1200 °C पर मुलाइट (3Al₂O₃·2SiO₂) और सिलिका में बदल जाता है। मुलाइट सुई जैसे लंबे क्रिस्टलों का बना है। यह पोर्सिलेन और अग्निसह ईंट को मज़बूत और ताप-सह बनाता है। फेल्डस्पार अन्य ऐलुमिनियम सिलिकेट हैं, जो गालक की तरह काम आते हैं क्योंकि वे कम तापमान पर पिघलकर कणों को जोड़ देते हैं।
ऑक्साइड पदार्थ
ऑक्साइड सिरेमिक धातु और ऑक्सीजन से बने हैं। वे पहले से "जले हुए" हैं, इसलिए गर्म हवा में और नहीं जलते।
- मैग्नीशिया (MgO): सेंधा-नमक जैसी संरचना, CN 6, लगभग 2850 °C पर पिघलता है। भट्ठी की ईंटों और अस्तर में प्रयोग।
- ज़िरकोनिया (ZrO₂): लगभग 1170 °C पर आकार बदलता है (एकनताक्ष से चतुष्कोणीय) और बदलते समय चटक जाता है। थोड़ा येट्रिया (Y₂O₃) मिलाने से स्थिर रहता है ("स्थिरीकृत ज़िरकोनिया")। ऑक्सीजन सेंसर, मज़बूत चाकू और दाँतों के क्राउन में प्रयोग।
- बेरियम टाइटेनेट (BaTiO₃): विद्युत क्षेत्र से इसके आवेश खिसकते हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स के संधारित्रों में प्रयोग।
- टाइटेनिया (TiO₂): चमकीला सफ़ेद रंजक और सनस्क्रीन में।
मज़बूत आयनिक बंध ऊँचे गलनांक और कठोरता देते हैं; मुक्त इलेक्ट्रॉन न होने से ये रोधक हैं (हालाँकि स्थिरीकृत ज़िरकोनिया जैसे कुछ में ऊँचे ताप पर ऑक्सीजन आयन चल पाते हैं)।
अ-ऑक्साइड पदार्थ
अ-ऑक्साइड सिरेमिक में कार्बन, नाइट्रोजन या बोरॉन होता है और ऑक्सीजन नहीं। इनके बंध ज़्यादातर सहसंयोजी हैं, जो बहुत मज़बूत और तय दिशाओं में होते हैं।
- सिलिकॉन कार्बाइड (SiC): हीरे जैसा जाल। बहुत कठोर, गर्मी अच्छी चलाता है, ताप-झटका सह लेता है। अपघर्षक, ब्रेक डिस्क और भट्ठी के हीटरों में प्रयोग।
- सिलिकॉन नाइट्राइड (Si₃N₄): ऊँचे ताप पर भी मज़बूत और कठोर। बॉल बेयरिंग और टरबाइन के पुर्ज़ों में।
- ऐलुमिनियम नाइट्राइड (AlN): गर्मी चलाता है पर बिजली नहीं। इलेक्ट्रॉनिक्स में।
- बोरॉन नाइट्राइड (BN): नरम षट्कोणीय रूप ऊँचे ताप का स्नेहक है; कठोर घनीय रूप काटने के काम का है।
अ-ऑक्साइड बनाना कठिन है: इन्हें नाइट्रोजन या आर्गन में पकाना पड़ता है, नहीं तो हवा की ऑक्सीजन इन्हें जला देगी। SiC हवा में SiO₂ की पतली परत बना लेता है जो उसे बचाती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सिलिका: SiO₂ (SiO₄ चतुष्फलक, कोने साझा)
- ऐलुमिना: Al₂O₃ (कोरंडम)
- काओलिनाइट: Al₂Si₂O₅(OH)₄
- मुलाइट: 3Al₂O₃·2SiO₂
- अ-ऑक्साइड: SiC, Si₃N₄, AlN, BN
- क्वार्ट्ज़ α → β परिवर्तन लगभग 573 °C पर
हल किए गए उदाहरण
1. हर Si के 4 ऑक्सीजन पड़ोसी हैं, फिर सिलिका का सूत्र SiO₂ क्यों?
हर ऑक्सीजन दो सिलिकॉन में साझा है। इसलिए हर Si के हिस्से 4 × ½ = 2 ऑक्सीजन आती हैं। सूत्र SiO₂ है।
2. गीली मिट्टी ढल जाती है पर सूखी नहीं, क्यों?
पानी सिलिका–ऐलुमिना की परतों के बीच घुसकर स्नेहक का काम करता है, इसलिए परतें फिसलती हैं और दबाने पर मिट्टी आकार रखती है। सूखने पर परतें जकड़ जाती हैं।
3. सिलिकॉन नाइट्राइड को नाइट्रोजन में क्यों पकाना पड़ता है?
हवा में ऑक्सीजन ऊँचे ताप पर उससे अभिक्रिया करके उसे बिगाड़ देती। नाइट्रोजन में पकाने से यह नहीं होता।
4. पकाने पर काओलिनाइट मुलाइट बन जाता है। और क्या निकलता या बनता है?
लगभग 450 से 600 °C पर जलवाष्प निकलती है (OH का H₂O बनकर जाना), और लगभग 1000 से 1200 °C पर मुलाइट के साथ सिलिका भी बनती है।
आम गलतियाँ
- सिलिका को SiO₂ की जगह SiO₄ लिखना। SiO₄ तो बस मूल खंड है, और कोने साझा होते हैं।
- सोचना कि गीली मिट्टी इसलिए नरम है कि कण घुल गए हैं। कण ठोस ही रहते हैं; पानी बस परतों को फिसलने देता है।
- कहना कि सभी सिरेमिक ऑक्साइड होते हैं। सिलिकॉन कार्बाइड, नाइट्राइड और बोरॉन नाइट्राइड अ-ऑक्साइड सिरेमिक हैं।
- ऐलुमिना और कोरंडम को अलग समझना। कोरंडम ऐलुमिना का स्थिर क्रिस्टल रूप है।