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सेरामिक (मिट्टी के बर्तन): अर्थनवेयर और पोर्सिलेन

बर्तन मिट्टी में सिलिका और फेल्सपार मिलाकर बनते हैं। मिट्टी को आकार देकर सुखाते, पकाते और अक्सर ग्लेज़ करते हैं। मिट्टी का बर्तन (अर्थनवेयर) लगभग 1000 °C पर पकता है: छिद्रदार, नारंगी या भूरा। चीनी मिट्टी (पोर्सिलेन) लगभग 1300 °C पर पकती है: सफ़ेद, घनी, खनकदार, पानी नहीं सोखती।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. यह गीली मिट्टी का लोंदा है। नरम है, इसलिए हाथ से आकार बन सकता है। मिट्टी हमारा मुख्य कच्चा माल है।
  2. चाक पर हाथ मिट्टी को उठाकर घड़ा बनाते हैं। आकार स्लाइडर चलाओ और पेट पतला या गोल करो।
  3. घड़ा हवा में सूखकर हल्का रंग लेता है। फिर 900 °C पर पकता है। वह सख़्त और नारंगी हो जाता है। इस पहली बार पकाने को बिस्क कहते हैं।
  4. अब ग्लेज़ लगाते हैं: काँच की पतली परत। दूसरी बार पकाने पर वह चमकदार हो जाती है और पानी नहीं सोखती।
  5. दो बर्तनों की तुलना करो। मिट्टी का बर्तन (लगभग 1000 °C) पानी सोखता है। चीनी मिट्टी (लगभग 1300 °C) सफ़ेद है और लगभग कुछ नहीं सोखती।
  6. खुला खेल: पकाने की गर्मी और आकार बदलो। रंग और पानी सोखना बदलते देखो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

मिट्टी पकाने के बाद सख़्त होती है, सुखाने के बाद क्यों नहीं?

सुखाने में सिर्फ़ पानी निकलता है। पकाने से कण हमेशा के लिए जुड़ जाते हैं। चरण 2 देखो।

क्या ग्लेज़ और पेंट एक ही हैं?

नहीं। पेंट ऊपर बैठता है और घिस जाता है। ग्लेज़ भट्ठी में पिघलकर काँच की ऐसी परत बनती है जो बर्तन का हिस्सा हो जाती है। चरण 3 देखो।

घड़ा सिकुड़ता क्यों है?

सूखने में पानी निकलता है और पकते समय कण पास आ जाते हैं। चरण 2 में माप देखो।

चीनी मिट्टी सफ़ेद क्यों होती है?

उसमें शुद्ध सफ़ेद काओलिन होता है और लोहा बहुत कम। लोहे से मिट्टी का बर्तन लाल या भूरा बनता है।

क्या मैं पकी मिट्टी का रंग चुन सकता हूँ?

कुछ हद तक। लोहे की मात्रा और पकाने की गर्मी रंग बदलते हैं। चरण 5 में गर्मी चलाकर देखो।

मिट्टी के बर्तनों का इतिहास

बर्तन बनाना सबसे पुराने हुनरों में है। पूर्वी एशिया में लोग 15,000 साल से भी पहले पकी मिट्टी के बर्तन बनाते थे। खेती करने वालों को अनाज और पानी रखने के लिए बर्तन चाहिए थे। कुम्हार का चाक लगभग 5,000 साल पहले आया और सिंधु घाटी के नगरों में चाक पर बने सुंदर बर्तन मिलते हैं। चीनी मिट्टी (पोर्सिलेन) चीन में लगभग 1,000 से 1,400 साल पहले पूर्णता तक पहुँची और फिर जापान, भारत और यूरोप गई। ग्लेज़ और भट्ठियाँ सुधरती गईं, जिससे बर्तन ज़्यादा गरम, सख़्त और सुंदर पकने लगे।

कच्चा माल

बर्तन की मिट्टी के तीन भाग होते हैं:

आम पोर्सिलेन मिश्रण: लगभग 50% काओलिन, 25% फेल्सपार और 25% क्वार्ट्ज़।

बर्तन बनाने की प्रक्रिया

  1. तैयारी: सामग्री साफ़ करो, पीसो और पानी के साथ मिलाओ।
  2. आकार: चाक पर बनाओ, साँचे में दबाओ, या द्रव मिट्टी (स्लिप) को प्लास्टर के साँचे में डालो।
  3. सुखाओ: धीरे-धीरे, ताकि दरार न पड़े। टुकड़ा सिकुड़ता है।
  4. बिस्क फायरिंग: लगभग 900 °C। टुकड़ा सख़्त हो जाता है पर छिद्रदार रहता है।
  5. ग्लेज़: काँच बनाने वाले चूर्ण का पानी में घोल लगाओ (डुबाकर या छिड़ककर)।
  6. ग्लॉस्ट फायरिंग: ग्लेज़ पिघलकर चिकनी काँच की परत बन जाती है और सतह को बंद कर देती है।

मिट्टी का बर्तन और चीनी मिट्टी

मिट्टी का बर्तन (अर्थनवेयर): लगभग 950-1150 °C पर पकता है। शरीर छिद्रदार रहता है (भार का लगभग 10-20% पानी सोखता है), रंग नारंगी, लाल या भूरा होता है और आसानी से टूटता है। मटके, गमले और कई टाइलें।

स्टोनवेयर: लगभग 1200-1300 °C पर पकता है। घना और मज़बूत, भूरा या स्लेटी। अचार की बरनी और थालियाँ।

चीनी मिट्टी (पोर्सिलेन): लगभग 1250-1400 °C पर पकती है। सफ़ेद, बहुत घनी, लगभग पानी नहीं सोखती और ठकठकाने पर खनकती है। पतले टुकड़ों से प्रकाश आर-पार दिखता है। चाय के सेट, भोजन के बर्तन और बिजली के रोधी।

करके देखो

घर पर करके देखो। टूटे गमले का सूखा टुकड़ा तौलो। उसे एक घंटा पानी में डुबाओ, सतह पोंछो और फिर तौलो। पानी सोखना (%) = (गीला - सूखा) / सूखा x 100। यही चीनी के कप के टुकड़े से करो। किसने ज़्यादा सोखा? 3D में पकाने की गर्मी स्लाइडर चलाकर संख्या देखो।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. एक सूखा मिट्टी का टुकड़ा 200 g का है। भीगने के बाद 224 g का हो गया। पानी सोखना कितने प्रतिशत है?

(224 - 200) / 200 x 100 = 24 / 200 x 100 = 12%। यह मिट्टी के बर्तन जैसा है।

2. कारखाना 400 kg पोर्सिलेन मिश्रण बनाता है: 50% काओलिन, 25% फेल्सपार, 25% क्वार्ट्ज़। हर एक कितना?

काओलिन: 0.50 x 400 = 200 kg। फेल्सपार: 0.25 x 400 = 100 kg। क्वार्ट्ज़: 0.25 x 400 = 100 kg। कुल 400 kg।

3. ग्लेज़ वाला मिट्टी का बर्तन पानी रोकता है पर बिना ग्लेज़ वाला रिसता है, क्यों?

ग्लेज़ पिघलकर काँच की पतली परत बन जाती है जो छिद्र ढँक देती है। काँच में छिद्र नहीं होते, इसलिए पानी नहीं निकलता। बिना ग्लेज़ वाले बर्तन में खुले छिद्र पानी रिसने देते हैं।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. कौन ज़्यादा गर्मी पर पकता है?
2. पोर्सिलेन में फेल्सपार का काम है:
3. ग्लेज़ है:
4. ग्लेज़ से पहले की पहली फायरिंग कहलाती है:
5. सबसे ज़्यादा पानी कौन सोखता है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिट्टी के बर्तन और चीनी मिट्टी में क्या अंतर है?

मिट्टी का बर्तन लगभग 1000 °C पर पकता है, छिद्रदार और रंगीन होता है। चीनी मिट्टी लगभग 1300 °C पर पकती है, सफ़ेद, घनी होती है, लगभग पानी नहीं सोखती और पतली होने पर पारभासी होती है।

बर्तनों पर ग्लेज़ क्यों करते हैं?

ग्लेज़ छिद्र बंद करती है ताकि बर्तन पानी रोके, साफ़ करना आसान हो, चमक आए और रंग दिए जा सकें।

चीनी मिट्टी किन कच्चे मालों से बनती है?

मुख्यतः काओलिन (शुद्ध सफ़ेद मिट्टी), फेल्सपार (गालक) और क्वार्ट्ज़ (सिलिका) से।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

जापान高校(専門学科)1〜3年Ceramic Industry

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