मिट्टी के बर्तनों का इतिहास
बर्तन बनाना सबसे पुराने हुनरों में है। पूर्वी एशिया में लोग 15,000 साल से भी पहले पकी मिट्टी के बर्तन बनाते थे। खेती करने वालों को अनाज और पानी रखने के लिए बर्तन चाहिए थे। कुम्हार का चाक लगभग 5,000 साल पहले आया और सिंधु घाटी के नगरों में चाक पर बने सुंदर बर्तन मिलते हैं। चीनी मिट्टी (पोर्सिलेन) चीन में लगभग 1,000 से 1,400 साल पहले पूर्णता तक पहुँची और फिर जापान, भारत और यूरोप गई। ग्लेज़ और भट्ठियाँ सुधरती गईं, जिससे बर्तन ज़्यादा गरम, सख़्त और सुंदर पकने लगे।
कच्चा माल
बर्तन की मिट्टी के तीन भाग होते हैं:
- मिट्टी (जैसे काओलिन): गीले मिश्रण को चिपचिपा और आकार देने लायक बनाती है।
- सिलिका (रेत या क्वार्ट्ज़): मज़बूती देती है और ज़्यादा सिकुड़न रोकती है।
- फेल्सपार (गालक, flux): कम गर्मी पर थोड़ा पिघलकर कणों को जोड़ता है।
आम पोर्सिलेन मिश्रण: लगभग 50% काओलिन, 25% फेल्सपार और 25% क्वार्ट्ज़।
बर्तन बनाने की प्रक्रिया
- तैयारी: सामग्री साफ़ करो, पीसो और पानी के साथ मिलाओ।
- आकार: चाक पर बनाओ, साँचे में दबाओ, या द्रव मिट्टी (स्लिप) को प्लास्टर के साँचे में डालो।
- सुखाओ: धीरे-धीरे, ताकि दरार न पड़े। टुकड़ा सिकुड़ता है।
- बिस्क फायरिंग: लगभग 900 °C। टुकड़ा सख़्त हो जाता है पर छिद्रदार रहता है।
- ग्लेज़: काँच बनाने वाले चूर्ण का पानी में घोल लगाओ (डुबाकर या छिड़ककर)।
- ग्लॉस्ट फायरिंग: ग्लेज़ पिघलकर चिकनी काँच की परत बन जाती है और सतह को बंद कर देती है।
मिट्टी का बर्तन और चीनी मिट्टी
मिट्टी का बर्तन (अर्थनवेयर): लगभग 950-1150 °C पर पकता है। शरीर छिद्रदार रहता है (भार का लगभग 10-20% पानी सोखता है), रंग नारंगी, लाल या भूरा होता है और आसानी से टूटता है। मटके, गमले और कई टाइलें।
स्टोनवेयर: लगभग 1200-1300 °C पर पकता है। घना और मज़बूत, भूरा या स्लेटी। अचार की बरनी और थालियाँ।
चीनी मिट्टी (पोर्सिलेन): लगभग 1250-1400 °C पर पकती है। सफ़ेद, बहुत घनी, लगभग पानी नहीं सोखती और ठकठकाने पर खनकती है। पतले टुकड़ों से प्रकाश आर-पार दिखता है। चाय के सेट, भोजन के बर्तन और बिजली के रोधी।
करके देखो
घर पर करके देखो। टूटे गमले का सूखा टुकड़ा तौलो। उसे एक घंटा पानी में डुबाओ, सतह पोंछो और फिर तौलो। पानी सोखना (%) = (गीला - सूखा) / सूखा x 100। यही चीनी के कप के टुकड़े से करो। किसने ज़्यादा सोखा? 3D में पकाने की गर्मी स्लाइडर चलाकर संख्या देखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- पानी सोखना (%) = (गीला द्रव्यमान - सूखा द्रव्यमान) / सूखा द्रव्यमान x 100
- पोर्सिलेन मिश्रण: लगभग 50% काओलिन + 25% फेल्सपार + 25% क्वार्ट्ज़
- मिट्टी का बर्तन लगभग 1000 °C, स्टोनवेयर लगभग 1250 °C, पोर्सिलेन लगभग 1300 °C
- मुख्य शब्द: बिस्क, ग्लेज़, स्लिप, गालक (flux), काओलिन, सरंध्रता
हल किए गए उदाहरण
1. एक सूखा मिट्टी का टुकड़ा 200 g का है। भीगने के बाद 224 g का हो गया। पानी सोखना कितने प्रतिशत है?
(224 - 200) / 200 x 100 = 24 / 200 x 100 = 12%। यह मिट्टी के बर्तन जैसा है।
2. कारखाना 400 kg पोर्सिलेन मिश्रण बनाता है: 50% काओलिन, 25% फेल्सपार, 25% क्वार्ट्ज़। हर एक कितना?
काओलिन: 0.50 x 400 = 200 kg। फेल्सपार: 0.25 x 400 = 100 kg। क्वार्ट्ज़: 0.25 x 400 = 100 kg। कुल 400 kg।
3. ग्लेज़ वाला मिट्टी का बर्तन पानी रोकता है पर बिना ग्लेज़ वाला रिसता है, क्यों?
ग्लेज़ पिघलकर काँच की पतली परत बन जाती है जो छिद्र ढँक देती है। काँच में छिद्र नहीं होते, इसलिए पानी नहीं निकलता। बिना ग्लेज़ वाले बर्तन में खुले छिद्र पानी रिसने देते हैं।
आम गलतियाँ
- ग्लेज़ को रंग (पेंट) समझना। वह भट्ठी में बनी काँच की परत है।
- चीनी मिट्टी को रंगा हुआ मिट्टी का बर्तन कहना। उसका नुस्खा अलग है और पकाने की गर्मी बहुत ज़्यादा है।
- गीला बर्तन भट्ठी में डाल देना। भाप से वह चटक सकता है।
- दो फायरिंग उलझाना: बिस्क ग्लेज़ से पहले, ग्लॉस्ट ग्लेज़ के बाद।