सेरामिक क्या है?
सेरामिक एक सख़्त ठोस है जो न धातु है और न प्लास्टिक। यह मिट्टी, रेत और चूना पत्थर जैसे धरती के पदार्थों से बनता है। सेरामिक दबाव सह लेते हैं, जंग नहीं खाते और ऊँची गर्मी में भी ठोस रहते हैं। पर ये भंगुर (brittle) होते हैं: चोट लगने पर टूट जाते हैं।
सेरामिक के परमाणु बहुत मज़बूत बंधों से जुड़े होते हैं। इसीलिए वे सख़्त होते हैं और बनाने में बहुत गर्मी लगती है।
चूर्ण से उत्पाद तक पाँच चरण
- कच्चा माल। मिट्टी, रेत (सिलिका), चूना पत्थर, फेल्सपार आदि खोदकर साफ़ किए जाते हैं।
- पीसो और मिलाओ। पत्थर बारीक चूर्ण बनाए जाते हैं और सही मात्रा में मिलाए जाते हैं।
- आकार दो। पानी मिलाकर नरम मिश्रण को दबाते हैं, साँचे में डालते हैं, नोज़ल से निकालते हैं या चाक पर घुमाते हैं।
- सुखाओ। पानी धीरे-धीरे निकलता है और टुकड़ा सिकुड़ता है।
- पकाओ। भट्ठी में गर्म करने पर कण अपने छूने के बिंदुओं पर जुड़ जाते हैं। इसे सिंटरिंग कहते हैं। टुकड़ा सख़्त और मज़बूत हो जाता है।
काँच अपवाद है: उसका कच्चा माल पूरा पिघलाया जाता है और गरम रहते आकार दिया जाता है।
चार बड़े उत्पाद परिवार
1. बर्तन और टाइल (मिट्टी के उत्पाद): कप, थाली, टाइल, ईंट, शौचालय की सीट। लगभग 1000-1400 °C पर पकते हैं।
2. काँच और इनैमल: बोतल, खिड़की, काँच चढ़े इस्पात के बर्तन। लगभग 1400-1600 °C पर पिघलाए जाते हैं।
3. आग-रोधी (रिफ्रैक्टरी): भट्ठियों में लगने वाली खास ईंटें। 1500 °C से ऊपर भी मज़बूत रहती हैं।
4. सीमेंट: लगभग 1450 °C पर बना धूसर चूर्ण। पानी मिलाने पर जमकर सख़्त हो जाता है।
पुराने सेरामिक और नए (फाइन) सेरामिक
परंपरागत सेरामिक प्राकृतिक मिट्टी और रेत से बनते हैं। ये सस्ते हैं और बहुत मात्रा में बनते हैं।
फाइन (उन्नत) सेरामिक बहुत शुद्ध, मानव-निर्मित चूर्णों से बनते हैं, जैसे एल्युमिना, ज़िरकोनिया, सिलिकॉन कार्बाइड और बेरियम टाइटेनेट। इन्हें बड़ी सावधानी से बनाते हैं। ये स्पार्क प्लग, काटने के औज़ार, मोबाइल के पुर्ज़े, सेंसर और शरीर में लगने वाले इम्प्लांट में काम आते हैं। जब ये बिजली, प्रकाश या मज़बूती का खास काम करते हैं तो इन्हें प्रकार्यात्मक (फंक्शनल) सेरामिक कहते हैं।
करके देखो
घर पर करके देखो। मुट्ठी भर चिकनी मिट्टी में पानी मिलाओ। उसकी छोटी चपटी टिकिया बनाकर स्केल से लंबाई नापो। दो दिन छाँव में सुखाओ और फिर नापो। कितनी सिकुड़ी? घर पर इसे आग में मत पकाना। 3D में गर्मी स्लाइडर चलाकर देखो कि गर्मी के साथ मज़बूती कैसे बढ़ती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य शब्द: कच्चा माल, भट्ठी (kiln), पकाना (firing), सिंटरिंग, भंगुर, आग-रोधी
- चरण: चूर्ण -> मिलाना -> आकार -> सुखाना -> पकाना
- सिकुड़न % = (पहले का माप - बाद का माप) / पहले का माप x 100
- सामान्य गर्मी: बर्तन 1000-1400 °C, काँच 1400-1600 °C, सीमेंट लगभग 1450 °C, आग-रोधी 1500 °C से ऊपर
हल किए गए उदाहरण
1. आकार देते समय एक टाइल 30 cm लंबी है। सुखाने और पकाने के बाद वह 27.6 cm रह गई। सिकुड़न कितने प्रतिशत है?
सिकुड़न = (30 - 27.6) / 30 x 100 = 2.4 / 30 x 100 = 8%।
2. कारखाने को 90 kg पका हुआ उत्पाद चाहिए। सुखाने और पकाने में 10% द्रव्यमान पानी और गैस बनकर निकल जाता है। शुरू में कितना गीला मिश्रण चाहिए?
पका द्रव्यमान शुरू का 90% है। शुरुआत = 90 / 0.9 = 100 kg।
3. उस चरण का नाम बताओ जिसमें चूर्ण के कण छूने के बिंदुओं पर जुड़ते हैं। इससे टुकड़ा मज़बूत क्यों होता है?
यह चरण सिंटरिंग है (पकाते समय)। जुड़ाव से सारे कण एक ठोस बन जाते हैं, इसलिए टुकड़ा भुरभुरा नहीं रहता।
आम गलतियाँ
- "सेरामिक" का मतलब सिर्फ़ बर्तन समझना। काँच, सीमेंट, ईंट और इलेक्ट्रॉनिक चिप भी सेरामिक हैं।
- सेरामिक को मिट्टी जैसा नरम कहना। मिट्टी पकाने से पहले ही नरम होती है।
- सुखाना भूल जाना। गीले टुकड़े भट्ठी में फट जाते हैं।
- सिंटरिंग को पिघलना समझना। सिंटरिंग में कण पूरे पिघले बिना जुड़ते हैं।