पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा
सिरेमिक के काम में असली खतरे हैं। अच्छे कारखाने हर खतरे को काबू में रखते हैं।
- धूल: मिट्टी, क्वार्ट्ज़ और ग्लेज़ की धूल। बहुत महीन सिलिका धूल फेफड़ों में निशान डाल सकती है (सिलिकोसिस)। बचाव: झाड़ू के बजाय गीली सफ़ाई, फ़िल्टर वाले स्थानीय निकास पंखे, और धूल मास्क या रेस्पिरेटर।
- गर्मी और आग: किल्न बहुत गरम होती है। रोधन, दस्ताने, सुरक्षित दूरी और आग के नियम रखो।
- शोर: मिल और क्रशर बहुत शोर करते हैं। कान की सुरक्षा पहनो।
- रसायन: कुछ ग्लेज़ में सीसा या कैडमियम जैसी धातुएँ होती हैं। सुरक्षित ग्लेज़, दस्ताने लो और हाथ धोओ। काम की जगह खाना मत रखो।
- किल्न की गैसें: CO2, CO, सल्फर और नाइट्रोजन के ऑक्साइड, फ्लोराइड। अच्छे बर्नर, पूरी हवा और फ़िल्टर या स्क्रबर इन्हें घटाते हैं।
संरक्षण यानी कम ऊर्जा और कम कच्चे माल का उपयोग: अच्छा रोधन, गरम निकास से गर्मी की वापसी, कुशल किल्न और पानी की बचत।
कचरा उपचार
कचरा हवा, पानी या ठोस रूप में हो सकता है। हर एक का उपचार है।
- हवा: बैग फ़िल्टर वैक्यूम क्लीनर के थैले की तरह धूल पकड़ता है। स्क्रबर पानी या द्रव छिड़ककर गैसें धो देता है। इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर धूल को आवेशित करता है ताकि वह प्लेटों पर चिपक जाए।
- पानी: मिट्टी वाला धुलाई का पानी बैठने वाले टैंक में जाता है। ठोस कीचड़ बनकर नीचे बैठते हैं, जिसे फ़िल्टर प्रेस में सुखाते हैं। अम्ल या क्षार उदासीन किए जाते हैं। साफ़ पानी दोबारा काम आता है।
- ठोस: कीचड़ और टूटा सामान। जो दोबारा काम का नहीं, वह आख़िरी विकल्प के रूप में सुरक्षित गड्ढे (लैंडफ़िल) में जाता है।
पसंद का क्रम है: घटाओ, दोबारा इस्तेमाल करो, रीसाइकल करो, फेंको।
रीसाइक्लिंग तकनीक
कच्चा स्क्रैप (बिना पका टुकड़ा) पानी में भिगोकर फिर स्लिप बन सकता है। पका स्क्रैप (टूटा सामान) कुचलकर ग्रोग में पीसा जाता है। ग्रोग नई मिट्टी में मिलाया जाता है; वह सिकुड़न और दरार भी घटाता है। कुछ सिरेमिक कचरा ईंट, टाइल और सड़क की परत में काम आता है।
काँच बनाने में टूटा काँच, जिसे कलेट कहते हैं, मिश्रण के साथ पिघलाया जाता है। वह कम तापमान पर पिघलता है और ऊर्जा व कच्चा माल बचाता है।
सरल गणित: दोबारा इस्तेमाल द्रव्यमान = कचरा × दोबारा इस्तेमाल का हिस्सा, और नया कच्चा माल = बैच − दोबारा इस्तेमाल द्रव्यमान।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- दोबारा इस्तेमाल द्रव्यमान = कचरे का द्रव्यमान × (दोबारा % ÷ 100)
- नया कच्चा माल = बैच का द्रव्यमान − दोबारा इस्तेमाल द्रव्यमान
- लैंडफ़िल = कचरे का द्रव्यमान − दोबारा इस्तेमाल द्रव्यमान
- हटाने की दक्षता % = (अंदर की मात्रा − बाहर की मात्रा) ÷ अंदर की मात्रा × 100
- घटाओ → दोबारा इस्तेमाल → रीसाइकल → फेंको
हल किए गए उदाहरण
1. 100 किग्रा बैच से 20 किग्रा कचरा बनता है। कचरे का 60% रीसाइकल होता है। कितना लैंडफ़िल जाएगा?
रीसाइकल = 0.60 × 20 = 12 किग्रा। लैंडफ़िल = 20 − 12 = 8 किग्रा।
2. बैग फ़िल्टर धूल को 50 mg/m³ से 5 mg/m³ पर ले आता है। दक्षता निकालो।
(50 − 5) ÷ 50 × 100 = 90%।
3. कारखाना रोज़ 1000 लीटर पानी लेता है और 80% दोबारा इस्तेमाल करता है। ताज़ा पानी कितना चाहिए?
दोबारा = 800 लीटर। ताज़ा = 1000 − 800 = 200 लीटर।
4. बैठने वाले टैंक में 40 किग्रा ठोस है और वह 95% हटाता है। पानी में कितने किग्रा बचे?
हटा = 0.95 × 40 = 38 किग्रा। बचा = 2 किग्रा।
5. 100 किग्रा बैच में 12 किग्रा ग्रोग दोबारा लगता है। कच्चा माल ₹5 प्रति किग्रा है। हर बैच में कितनी बचत?
12 × ₹5 = ₹60 प्रति बैच।
6. 1000 किग्रा काँच बैच में 30% कलेट लगता है। नया कच्चा माल कितना चाहिए? (सरल मॉडल)
कलेट = 300 किग्रा। नया कच्चा माल = 1000 − 300 = 700 किग्रा।
आम गलतियाँ
- सूखी झाड़ू से धूल बुहारना। इससे महीन कण हवा में उड़ते हैं। पानी से या फ़िल्टर वाले वैक्यूम से सफ़ाई करो।
- सोचना कि महीन सिलिका धूल के लिए पतला कागज़ी मास्क काफ़ी है। सही रेस्पिरेटर लो।
- कचरा फेंक देना। ज़्यादातर सिरेमिक कचरा ग्रोग या भराव बन सकता है।
- लैंडफ़िल को पहली पसंद मानना। वह घटाने, दोबारा इस्तेमाल और रीसाइकल के बाद आख़िरी कदम है।