आकार देने की विभिन्न विधियाँ
आकार देना पकाने से पहले सामान को उसका रूप देना है। विधि इस पर निर्भर करती है कि आकार क्या है और कितने नग चाहिए।
- प्लास्टिक विधि (लगभग 20% पानी वाली मिट्टी): हाथ से बनाना, चाक, जिगरिंग (घूमते साँचे में औज़ार से मिट्टी दबाना) और एक्सट्रूज़न (डाई से मिट्टी सेवइयों की तरह निकालना, ईंट और पाइप के लिए)।
- दबाई (प्रेसिंग) (थोड़े पानी वाला पाउडर): पाउडर को स्टील की डाई में दबाते हैं। ड्राई प्रेसिंग से टाइल और इंसुलेटर जल्दी बनते हैं। आइसोस्टैटिक प्रेसिंग में द्रव के दबाव से चारों तरफ़ से एक-सा दबाव मिलता है।
- ढलाई (कास्टिंग) (काफ़ी पानी): स्लिप कास्टिंग में बहती मिट्टी (स्लिप) प्लास्टर के साँचे में डालते हैं। प्लास्टर पानी सोखता है और साँचे पर ठोस दीवार बनती है। बची स्लिप उँडेल देते हैं। सिंक, कमोड और पतले गुलदान ऐसे बनते हैं। टेप कास्टिंग इलेक्ट्रॉनिक पुर्ज़ों के लिए पतली चादरें बनाती है।
- इंजेक्शन मोल्डिंग: बाइंडर मिला पाउडर साँचे में भरा जाता है, छोटे सटीक पुर्ज़ों के लिए।
सुखाना
आकार दिया टुकड़ा गीला और नरम होता है। सुखाना पकाने से पहले पानी निकालता है। पानी रह जाए तो भट्ठी में भाप बनकर टुकड़े को फोड़ सकता है।
सुखाने के दो चरण हैं। पहले सतह का पानी निकलता है और कण पास आने से टुकड़ा सिकुड़ता है। फिर रोमछिद्रों का पानी निकलता है और सिकुड़न लगभग नहीं होती।
सूखने की सिकुड़न आम तौर पर 3 से 8% होती है। साँचा बनाते समय इसका ध्यान रखो।
सुखाने की खराबियाँ और बचाव
बाहर का हिस्सा पहले सूखता है। तब बाहर सिकुड़ता है जबकि भीतर गीला रहता है। इससे टुकड़ा खिंचकर टूट जाता है।
- दरारें: बहुत तेज़ सुखाने या एक हिस्से के जल्दी सूखने से।
- टेढ़ापन: असमान सुखाने से टुकड़ा मुड़ जाता है।
बचाव: धीरे सुखाओ, टुकड़ा पलटो, दीवार की मोटाई एक-सी रखो, और शुरू में नम गरम हवा, फिर सूखी हवा दो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- नमी % (गीले के आधार पर) = (गीला द्रव्यमान − सूखा द्रव्यमान) ÷ गीला द्रव्यमान × 100
- सूखने की सिकुड़न % = (शुरू की लंबाई − सूखी लंबाई) ÷ शुरू की लंबाई × 100
- सुखाने से पहले की लंबाई = बाद की लंबाई ÷ (1 − सिकुड़न का अंश)
- स्लिप कास्टिंग: दीवार की मोटाई समय के वर्गमूल के अनुपात में बढ़ती है
- निकला पानी = गीला द्रव्यमान − अंतिम द्रव्यमान
हल किए गए उदाहरण
1. गीला मिट्टी का टुकड़ा 120 ग्राम है। सूखने पर 100 ग्राम रहा। नमी प्रतिशत (गीले के आधार पर) निकालो।
पानी = 120 − 100 = 20 ग्राम। नमी = 20 ÷ 120 × 100 = 16.7%।
2. एक टाइल गीली 20 सेमी और सूखी 19 सेमी लंबी है। सूखने की सिकुड़न निकालो।
सिकुड़न = (20 − 19) ÷ 20 × 100 = 5%।
3. टाइल सूखकर 19 सेमी चाहिए और सिकुड़न 5% है। साँचे से गीली लंबाई कितनी बनानी होगी?
गीली लंबाई = 19 ÷ (1 − 0.05) = 19 ÷ 0.95 = 20 सेमी।
4. स्लिप कास्टिंग में 4 मिनट में 3 मिमी दीवार बनती है। मोटाई समय के वर्गमूल के अनुपात में है तो 16 मिनट में कितनी?
समय 4 गुना है, इसलिए दीवार √4 = 2 गुना मोटी: 2 × 3 = 6 मिमी।
5. 500 किग्रा मिट्टी का मिश्रण 20% नमी (गीले के आधार पर) से सुखाकर 2% नमी पर लाया गया। कितना पानी निकला?
सूखा द्रव्यमान = 0.80 × 500 = 400 किग्रा। अंतिम = 400 ÷ 0.98 = 408.2 किग्रा। निकला पानी = 500 − 408.2 = 91.8 किग्रा।
6. एक कारखाने को रोज़ 10,000 एक जैसी समतल टाइलें बनानी हैं। कौन-सी विधि सबसे ठीक है और क्यों?
ड्राई प्रेसिंग। स्टील की डाई हर बार एक-सा आकार देती है और बहुत तेज़ है।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि धूप में एक घंटे में सारा पानी निकालना ठीक है। तेज़ सुखाने से दरारें पड़ती हैं।
- साँचा बनाते समय सिकुड़न भूल जाना। साँचा तैयार टुकड़े से थोड़ा बड़ा होना चाहिए।
- विधियाँ गड़बड़ाना। प्लास्टिक विधि में नरम मिट्टी, दबाई में पाउडर और ढलाई में स्लिप लगती है।
- सोचना कि स्लिप कास्टिंग में दीवार भीतर से बनती है। दीवार साँचे की सतह पर बनती है, जहाँ प्लास्टर पानी सोखता है।