ईंधन और दहन
ईंधन वह है जो जलकर गर्मी देता है। ईंधन ठोस (लकड़ी, कोयला), द्रव (डीज़ल, फ्यूल ऑयल) या गैस (LPG, प्राकृतिक गैस) हो सकते हैं। बिजली की भट्ठी में जलाने के बजाय बिजली लगती है।
ऊष्मीय मान (कैलोरिफ़िक वैल्यू, CV) वह गर्मी है जो 1 किग्रा ईंधन पूरा जलने पर देता है। मोटे मान: लकड़ी लगभग 15 MJ/किग्रा, कोयला लगभग 25 से 30, LPG और प्राकृतिक गैस लगभग 46 से 50। गैस प्रति किग्रा ज़्यादा गर्मी देती है और साफ़ जलती है।
दहन में ईंधन ऑक्सीजन से मिलता है। मीथेन के लिए: CH4 + 2 O2 → CO2 + 2 H2O + गर्मी। हवा पूरी हो तो दहन पूर्ण होता है। हवा कम हो तो अपूर्ण दहन होता है, जिसमें कार्बन मोनोऑक्साइड (CO, ज़हरीली) और कालिख बनती है और गर्मी कम मिलती है।
किल्न की हवा को वातावरण कहते हैं। ज़्यादा हवा ऑक्सीकारक वातावरण देती है (मिट्टी का लोहा लाल होता है)। कम हवा अपचायक वातावरण देती है (लोहा स्लेटी या काला होता है)।
भट्ठियाँ और किल्न
भट्ठी या किल्न सामान गरम करने का रोधित कक्ष है। दीवारें आग-रोधी (रेफ्रेक्टरी) ईंट या सिरेमिक फाइबर की होती हैं जो ऊँची गर्मी सहती हैं और गर्मी भीतर रखती हैं।
- बैच (रुक-रुककर) किल्न: भरो, पकाओ, ठंडा करो, निकालो। सरल और लचीली, पर ईंधन ज़्यादा लगता है।
- टनल किल्न: सामान गाड़ियों पर गरम क्षेत्रों से गुज़रता है: पहले गरम, पकाना, ठंडा। लगातार चलती है और ईंधन बचाती है, क्योंकि गरम निकास आने वाले सामान को गरम करता है।
- बिजली की भट्ठी: हीटिंग एलिमेंट (जैसे सिलिकॉन कार्बाइड छड़ें)। साफ़ और नियंत्रण में आसान।
पकाने का वक्र: धीरे गरम करो, ऊँचे तापमान पर रुको (सोक), धीरे ठंडा करो। बहुत तेज़ गरम या ठंडा करने से दरार पड़ती है। लगभग 1000 से 1400 °C पर कण सिंटर होते हैं: वे जुड़ते हैं और छिद्र सिकुड़ते हैं, इसलिए सामान पूरा पिघले बिना कड़ा और मज़बूत हो जाता है।
पिघलाना
पिघलाना ठोस को द्रव बनाना है। काँच का मिश्रण (सिलिका रेत, सोडा ऐश, चूना पत्थर) काँच की भट्ठी या कुठाली (क्रूसिबल) में लगभग 1500 °C पर पिघलता है। फिर बुलबुले निकलते हैं (फाइनिंग) और द्रव ठंडा करके आकार दिया जाता है।
कई सिरेमिक का गलनांक बहुत ऊँचा होता है। एल्युमिना लगभग 2070 °C पर पिघलती है। कारखाने उसे पिघलाते नहीं, पाउडर को सिंटर करते हैं।
तापमान बढ़ाने की गर्मी: Q = m × c × ΔT। पिघलने के लिए अलग से गर्मी (गुप्त ऊष्मा) लगती है। असली भट्ठियाँ दीवारों और निकास से गर्मी खोती हैं, इसलिए दक्षता = काम की गर्मी ÷ दी गई गर्मी × 100।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ईंधन से गर्मी = द्रव्यमान × ऊष्मीय मान
- Q = m × c × ΔT (द्रव्यमान गरम करने की गर्मी)
- दक्षता % = काम की गर्मी ÷ दी गई गर्मी × 100
- T (K) = T (°C) + 273
- CH4 + 2 O2 → CO2 + 2 H2O + गर्मी
हल किए गए उदाहरण
1. 10 किग्रा LPG (CV 46 MJ/किग्रा) जलाने से कितनी गर्मी मिलती है?
गर्मी = 10 × 46 = 460 MJ।
2. 1200 °C को केल्विन में बदलो।
T = 1200 + 273 = 1473 K।
3. 200 किग्रा सामान को 20 °C से 1020 °C तक गरम करने की गर्मी निकालो। c = 1.0 kJ/किग्रा·K लो।
ΔT = 1000 K। Q = 200 × 1.0 × 1000 = 200,000 kJ = 200 MJ।
4. किल्न की दक्षता 50% है। 200 MJ काम की गर्मी के लिए कितनी LPG (CV 46 MJ/किग्रा) चाहिए?
दी गई गर्मी = 200 ÷ 0.50 = 400 MJ। LPG = 400 ÷ 46 = 8.7 किग्रा।
5. किल्न को 500 MJ दिया गया और 200 MJ सामान को मिला। दक्षता निकालो।
दक्षता = 200 ÷ 500 × 100 = 40%।
6. CH4 + 2 O2 → CO2 + 2 H2O में 16 ग्राम मीथेन से कितने ग्राम CO2 बनेगी? (C = 12, O = 16, H = 1)
CH4 = 16 ग्राम/मोल। CO2 = 44 ग्राम/मोल, दोनों 1 मोल। इसलिए 16 ग्राम CH4 से 44 ग्राम CO2।
आम गलतियाँ
- बिजली को जलने वाला ईंधन समझना। बिजली एलिमेंट को गरम करती है; कुछ जलता नहीं।
- गर्मी के सवालों में सेल्सियस और केल्विन गड़बड़ाना। ΔT दोनों में एक-सा है, पर T नहीं।
- सामान को बहुत तेज़ गरम करना। बाहर पहले गरम होकर टुकड़ा तोड़ देता है।
- सिंटरिंग को पिघलना समझना। सिंटरिंग में कण जुड़ते हैं पर टुकड़ा ठोस रहता है।