पदार्थों के परिवार और उनकी संरचना
पदार्थ विज्ञान पढ़ता है कि पदार्थ के अंदर की बनावट उसके काम को कैसे तय करती है।
- धातु (लोहा, एल्युमिनियम, ताँबा): धात्विक बंध, मुक्त इलेक्ट्रॉनों का "समुद्र"। ऊष्मा-विद्युत के सुचालक, तन्य (तार बने) और आघातवर्ध्य (पीटकर चादर बने)।
- पॉलिमर (पॉलीथीन, नायलॉन, रबर): दोहराती इकाइयों (मोनोमर) से बने लंबे शृंखला अणु। हल्के, कुचालक, अक्सर लचीले। थर्मोप्लास्टिक पिघलकर फिर ढल सकते हैं; थर्मोसेट नहीं।
- सिरेमिक (मिट्टी, पोर्सिलेन, काँच, सीमेंट): आयनिक व सहसंयोजी बंध। कठोर, ऊष्मा-रोधी, पर भंगुर।
- कंपोज़िट (कंक्रीट, फ़ाइबरग्लास, कार्बन फ़ाइबर, प्लाईवुड): दो या ज़्यादा पदार्थ साथ, हर एक का अपना काम।
क्रिस्टल, ग्रेन और दोष
क्रिस्टल में परमाणु एक पैटर्न (जालक, lattice) में दोहराते हैं। असली धातु कई छोटे क्रिस्टलों यानी ग्रेन से बनी होती है; छोटे ग्रेन = आमतौर पर ज़्यादा मज़बूत। छोटे दोष (डिस्लोकेशन) परतों को फिसलने देते हैं, इसलिए धातु मुड़ती है। अक्रिस्टलीय ठोस जैसे काँच में लंबी दूरी का क्रम नहीं। मिश्रधातु में धातु के साथ दूसरे परमाणु (स्टील = लोहा + थोड़ा कार्बन); ये फिसलन रोकते हैं, इसलिए मिश्रधातु ज़्यादा कठोर होती है।
पदार्थों का परीक्षण: प्रतिबल, विकृति, कठोरता, चीमड़पन
तनन परीक्षण (tensile test)
छड़ को टूटने तक खींचते हैं और बल व खिंचाव नापते हैं।
- प्रतिबल (stress) σ = F ÷ A (मात्रक पास्कल, Pa = N/m²; 1 MPa = 1 N/mm²)।
- विकृति (strain) ε = ΔL ÷ L₀ (कोई मात्रक नहीं)।
- यंग प्रत्यास्थता गुणांक E = σ ÷ ε: कड़ापन। स्टील ≈ 200 GPa, एल्युमिनियम ≈ 70 GPa, नायलॉन ≈ 3 GPa।
- प्रत्यास्थता सीमा / पराभव बिंदु: इससे नीचे छड़ वापस आ जाती है; ऊपर स्थायी खिंचाव (सुघट्य)।
- चरम तनन सामर्थ्य (UTS): टूटने से पहले सबसे बड़ा प्रतिबल।
दूसरे परीक्षण
- कठोरता (ब्रिनेल, विकर्स, रॉकवेल): कठोर गोली या हीरा सतह में दबाकर गड्ढा नापते हैं। छोटा गड्ढा = ज़्यादा कठोर।
- आघात परीक्षण (शार्पी, आइज़ोड): झूलता हथौड़ा खाँचेदार छड़ तोड़ता है; सोखी ऊर्जा = चीमड़पन (toughness)।
- श्रांति (fatigue): बार-बार के छोटे भार से भी दरार आ सकती है।
- अविनाशी परीक्षण: अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, डाई पेनिट्रेंट — बिना नुकसान छिपी दरारें ढूँढते हैं।
उपचार और निर्माण
ऊष्मा उपचार (मुख्यतः स्टील)
- अनीलन (annealing): गरम करो, धीरे ठंडा करो → नरम, आसानी से ढले।
- शमन (quenching): गरम करो, पानी/तेल में तेज़ी से ठंडा → बहुत कठोर पर भंगुर।
- पायन (tempering): कठोर किए हिस्से को हल्का फिर गरम → कम भंगुर, ज़्यादा चीमड़।
- केस हार्डनिंग: बाहर कठोर, अंदर चीमड़।
सतह उपचार
पेंट, यशदलेपन (galvanising, ज़िंक की परत), एल्युमिनियम का एनोडाइज़िंग, विद्युत-लेपन: जंग रोकते हैं और सुंदर बनाते हैं।
आकार देने की विधियाँ
ढलाई (casting), गढ़ाई और बेलन (forging, rolling), मशीनिंग (काटकर हटाना), प्लास्टिक की मोल्डिंग (इंजेक्शन, एक्सट्रूज़न), जोड़ना (वेल्डिंग, चिपकाने वाले पदार्थ) और योगात्मक निर्माण (3D प्रिंटिंग, परत-दर-परत)। विधि लागत, आकार, संख्या और पदार्थ देखकर चुनी जाती है।
नए पदार्थ और कला-सामग्री का रसायन
नए और उन्नत पदार्थ
- कंपोज़िट: रेज़िन में कार्बन या ग्लास फ़ाइबर; हल्के और मज़बूत (विमान, खेल का सामान)।
- नैनो पदार्थ: 1–100 nm पैमाने पर; ग्रैफ़ीन (कार्बन परमाणुओं की एक परत), नैनो-सिल्वर (कीटाणु मारे)।
- स्मार्ट पदार्थ: हालात से बदलते हैं — शेप-मेमोरी मिश्रधातु, थर्मोक्रोमिक रंजक, दाब-विद्युत क्रिस्टल।
- जैव पदार्थ और बायोप्लास्टिक: टाइटेनियम कूल्हा जोड़, पौधों से बने गलने वाले प्लास्टिक।
- अर्धचालक: चिप और सौर सेल के लिए सिलिकॉन।
कला-सामग्री
पेंट = रंजक (pigment) (रंगीन चूर्ण, अक्सर धातु ऑक्साइड या कार्बनिक रंग) + बाइंडर (तेल, अंडा, गोंद, ऐक्रेलिक पॉलिमर) + विलायक। मिट्टी पकाने पर सिरेमिक कठोर होता है। काँच मुख्यतः सिलिका है, रंग के लिए ऑक्साइड मिलाते हैं। मूर्तियों के लिए काँसा (ताँबा + टिन)। संरक्षक कलाकृतियों को साफ़ करने और बचाने में रसायन का उपयोग करते हैं।
खुद करो: एक पेपरक्लिप को आगे-पीछे मोड़ो जब तक टूट न जाए (श्रांति)। फिर रबर बैंड, प्लास्टिक स्केल और पेंसिल की लीड की तुलना करो: कौन मुड़ता है, कौन खिंचता है, कौन चटक जाता है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रतिबल σ = F ÷ A (Pa या N/m²; 1 MPa = 1 N/mm²)
- विकृति ε = ΔL ÷ L₀ (मात्रकहीन)
- यंग गुणांक E = σ ÷ ε
- घनत्व ρ = m ÷ V
- विशिष्ट सामर्थ्य = सामर्थ्य ÷ घनत्व
- स्टील = लोहा + लगभग 2% तक कार्बन
हल किए गए उदाहरण
1. 2 mm² क्षेत्रफल का स्टील तार 400 N भार उठाता है। प्रतिबल ज्ञात करो।
σ = F ÷ A = 400 N ÷ 2 mm² = 200 N/mm² = 200 MPa।
2. 2 m लंबी छड़ 1 mm खिंचती है। विकृति क्या है?
ε = ΔL ÷ L₀ = 0.001 m ÷ 2 m = 0.0005 (मात्रकहीन)।
3. ऊपर के दोनों उत्तरों से स्टील का यंग गुणांक निकालो।
E = σ ÷ ε = 200 MPa ÷ 0.0005 = 400 000 MPa = 400 GPa। (असली स्टील लगभग 200 GPa होता है, इसलिए यह असामान्य नमूना या नापने की गलती होगी।)
4. लोहार छेनी को लाल-गरम करके पानी में डालता है, फिर हल्का गरम करता है। दोनों उपचारों के नाम और नतीजा बताओ।
शमन से छेनी बहुत कठोर पर भंगुर होती है। फिर पायन भंगुरता घटाता है: छेनी कठोर और चीमड़ बनती है।
आम गलतियाँ
- मज़बूत और कठोर को एक समझना। मज़बूती भार से टूटने का विरोध है; कठोरता खरोंच या गड्ढे का।
- mm² को m² में न बदलना (या N/mm² = MPa सीधे इस्तेमाल न करना)। 1 mm² = 10⁻⁶ m²।
- भंगुर को कमज़ोर मानना। सिरेमिक दबाव में बहुत मज़बूत होते हैं पर बिना मुड़े अचानक टूटते हैं।
- काँच को क्रिस्टल मानना। साधारण काँच अक्रिस्टलीय है।