कच्चा माल क्या है और उसमें क्या होता है?
कच्चा माल वह खाना है जिससे हम शुरू करते हैं। ज़्यादातर खाने कुछ ही हिस्सों से बने होते हैं:
- पानी: खाना नरम बनाता है और कीटाणु पनपने देता है।
- स्टार्च (कार्बोहाइड्रेट): अनाज, आलू और कंदों में ऊर्जा का भंडार।
- प्रोटीन: दालों, दूध, अंडे, माँस और मछली में। ताप से बदलता है (उबले अंडे की तरह जम जाता है)।
- वसा/तेल: मेवों, तिलहन, दूध और माँस में। हवा से बास मारने (रैंसिड) लगता है।
- विटामिन, खनिज, रेशा, रंग और स्वाद।
आम कच्चे मालों के गुण
| कच्चा माल | मुख्य गुण | आम प्रसंस्करण |
|---|---|---|
| अनाज (गेहूँ, चावल) | सूखा, सख़्त, स्टार्च से भरा; खूब टिकता है | सफ़ाई, पिसाई, पॉलिश, पकाना |
| दालें और सोया | प्रोटीन से भरी, सूखी | भिगोना, दलना, पकाना, पीसना |
| कंद (आलू, कसावा) | स्टार्च, लगभग 75% पानी; जल्दी ख़राब | धोना, छीलना, तलना, सुखाना |
| फल और सब्ज़ियाँ | पानी, शर्करा, अम्ल; काटने पर भूरे पड़ते हैं | धोना, काटना, गरम करना, जूस, सुखाना |
| दूध | लगभग 87% पानी; घंटों में ख़राब | ठंडा करना, पाश्चुरीकरण, दही और पनीर |
| माँस और मछली | प्रोटीन से भरे, बहुत जल्दी ख़राब | ठंडा रखना, जमाना, नमक लगाना, पकाना |
नियम: जितना ज़्यादा पानी, उतना जल्दी ख़राब। इसलिए गीले खाने को जल्दी और सावधानी से संसाधित करते हैं।
प्रसंस्करण के मुख्य सिद्धांत
- आकार बदलना: काटना, पीसना, कुचलना। छोटे टुकड़ों की सतह ज़्यादा होती है, इसलिए ताप और पानी जल्दी असर करते हैं।
- ताप देना: पकाना, उबालना, सेंकना, तलना। ताप कीटाणु मारता है, खाना नरम करता है और स्वाद निकालता है। पाश्चुरीकरण में हल्का ताप (दूध के लिए लगभग 72 °C पर 15 सेकंड) देते हैं, ताकि खाना ताज़ा रहे।
- पानी निकालना: सुखाना या चीनी-नमक मिलाना। कीटाणुओं को पानी चाहिए, इसलिए सूखा खाना देर तक टिकता है।
- ठंड का उपयोग: ठंडा रखना और जमाना कीटाणुओं को धीमा करता है।
- मिलाना और ढालना: मिलाना, गूँधना, साँचे में डालना, जिनसे आटा, घोल और चटनी बनती है।
- अलग करना: छानना, चालना, दबाना, ताकि जो नहीं चाहिए (चोकर, बीज, गूदे से जूस) निकल जाए।
- मित्र जीवाणुओं का उपयोग: किण्वन (फ़र्मेंटेशन) से दूध दही और घोल इडली बनता है।
- पैक करना: धूल, हवा और पानी को बाहर रखता है।
तरीका चुनना और नतीजा गिनना
सबसे अच्छा तरीका कच्चे माल, चाहे गए उत्पाद और लागत पर निर्भर करता है। कच्चे माल को पहले हमेशा साफ़ और छाँटो (ग्रेडिंग), क्योंकि गंदगी और ख़राब टुकड़े पूरे बैच को बिगाड़ देते हैं।
प्राप्ति (यील्ड) = उत्पाद ÷ कच्चा माल × 100। छिलके, चोकर, पानी या बर्बादी में कुछ भार हमेशा घटता है।
नमी की मात्रा बताती है कि खाने का कितना हिस्सा पानी है। सुखाने में सूखा पदार्थ (ठोस) वही रहता है, सिर्फ़ पानी निकलता है। इसलिए: अंतिम भार = ठोस ÷ (1 − अंतिम पानी का अंश)।
करके देखो
सेब की दो बराबर फाँकें लो। एक को पूरा रहने दो और दूसरी को छोटे क्यूब में काटो। दोनों को प्लेट में कुछ घंटे धूप में रखो। कौन जल्दी सूखा और क्यों? फिर 3D में टुकड़े सबसे छोटे करो और पानी का स्लाइडर नीचे लाओ। वही विचार दिखेगा।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्राप्ति (%) = उत्पाद ÷ कच्चा माल × 100
- ठोस = कुल भार × (1 − पानी का अंश)
- सुखाने के बाद भार = ठोस ÷ (1 − अंतिम पानी का अंश)
- भुजा a के घन का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 6a²
- दूध का पाश्चुरीकरण: लगभग 72 °C पर 15 सेकंड
हल किए गए उदाहरण
1. आलू के घन की भुजा 4 सेमी है। उसे 2 सेमी भुजा के 8 बराबर घनों में काटा गया। कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल कैसे बदला?
पहले: 6 × 4² = 96 सेमी²। बाद में: 8 × (6 × 2²) = 8 × 24 = 192 सेमी²। क्षेत्रफल दोगुना हो गया, इसलिए खाना जल्दी सूखता और पकता है।
2. 100 किलो फल में 80% पानी है। उसे सुखाकर 20% पानी तक लाया गया। अंतिम भार क्या होगा?
ठोस = 100 × 0.20 = 20 किलो। अंतिम भार = 20 ÷ (1 − 0.20) = 20 ÷ 0.8 = 25 किलो। निकला पानी = 75 किलो।
3. चक्की को 400 किलो गेहूँ मिला और 288 किलो आटा बना। प्राप्ति और चोकर-बर्बादी में गए भार निकालो।
प्राप्ति = 288 ÷ 400 × 100 = 72%। घटा भार = 400 − 288 = 112 किलो।
आम गलतियाँ
- सोचना कि सुखाने में ठोस भी निकल जाता है। सिर्फ़ पानी निकलता है; ठोस वही रहता है।
- सोचना कि ताप सिर्फ़ पकाता है। ताप कीटाणु भी मारता है, पर बहुत ज़्यादा ताप रंग, स्वाद और विटामिन बिगाड़ देता है।
- सामग्री के लिए ग़लत तरीका चुनना, जैसे गीले दूध को घंटों बिना गरम किए रखना।
- भूल जाना कि प्राप्ति 100% से कम होती है, क्योंकि छिलका, चोकर और पानी घटते हैं।