सीमेंट का कच्चा माल
सीमेंट के लिए चूना (कैल्सियम), सिलिका, एल्युमिना और थोड़ा लौह ऑक्साइड चाहिए।
- चूना-पत्थर (कैल्सियम कार्बोनेट, CaCO3) से चूना मिलता है। लगभग 3 भाग लगता है।
- चिकनी मिट्टी से सिलिका, एल्युमिना और लोहा मिलता है। लगभग 1 भाग लगती है।
- जिप्सम (कैल्सियम सल्फ़ेट) सबसे अंत में थोड़ा सा मिलाते हैं (लगभग 3 से 5 प्रतिशत)।
कुछ कारख़ाने मिट्टी की जगह शेल, रेत या कारख़ाने के बचे पदार्थ (जैसे स्लैग) भी काम में लेते हैं।
बनाने की विधि, एक-एक क़दम
- कूटना और पीसना। चूना-पत्थर और मिट्टी को कूटकर सही अनुपात में बारीक पीसते और मिलाते हैं। यह कच्चा आटा है।
- भट्ठी में पकाना। आटा एक लंबी, हल्की तिरछी, धीरे घूमती लोहे की नली में नीचे की ओर सरकता है। निचले सिरे पर लौ उसे लगभग 1450 °C तक गरम करती है। पहले चूना-पत्थर टूटता है: CaCO3 से CaO + CO2 बनते हैं। फिर चूना, सिलिका, एल्युमिना और लोहा मिलकर कठोर स्लेटी गाँठें बनाते हैं। इन्हें क्लिंकर कहते हैं।
- ठंडा करना। क्लिंकर को हवा से जल्दी ठंडा करते हैं।
- जिप्सम के साथ पीसना। क्लिंकर को बहुत बारीक पीसते हैं और जिप्सम मिलाते हैं, ताकि सीमेंट बहुत जल्दी न जमे।
- भरना। पाउडर साइलो में रखते हैं और बोरियों में भरते हैं।
दो तरीके हैं: शुष्क विधि (सूखा आटा, ईंधन कम लगता है) और आर्द्र विधि (आटे में पानी मिलाकर घोल बनाते हैं, पुरानी विधि, ईंधन ज़्यादा लगता है)।
सीमेंट का जमना और सख़्त होना
पानी डालने पर सीमेंट सूखता नहीं है। वह पानी से क्रिया करता है। इसे जलयोजन (हाइड्रेशन) कहते हैं। इससे बनने वाले छोटे-छोटे क्रिस्टल रेत और गिट्टी को आपस में जकड़ लेते हैं।
- जमना (सेटिंग): लेई नरम नहीं रहती। इसमें लगभग 30 मिनट से कुछ घंटे लगते हैं।
- सख़्त होना (हार्डनिंग): ताकत बढ़ती रहती है। ज़्यादातर ताकत 7 दिन में आ जाती है। मानक जाँच 28 दिन पर होती है।
- जिप्सम न हो तो सीमेंट तुरंत अकड़ जाएगा और उसे काम में नहीं ले सकेंगे।
- इस क्रिया में गरमी निकलती है, इसलिए बड़ी ढलाई गरम हो जाती है।
सीमेंट के गुण और उपयोग
गुण: बारीक स्लेटी पाउडर; पानी से जमकर सख़्त होता है, पानी के नीचे भी; दबाव सहने में बहुत मज़बूत, खिंचाव सहने में कमज़ोर; जलता नहीं; दशकों चलता है।
उपयोग:
- गारा (मोर्टार) (सीमेंट + रेत + पानी): ईंटें जोड़ना, दीवार पर पलस्तर।
- कंक्रीट (सीमेंट + रेत + गिट्टी + पानी): फ़र्श, सड़क, पुल, बाँध।
- प्रबलित कंक्रीट: कंक्रीट में लोहे की छड़ें, ताकि खिंचाव भी सह सके।
- पाइप, ब्लॉक, टाइल और खंभे।
सावधानी: बोरियाँ सूखी रखो, दस्ताने और मास्क पहनो (सीमेंट की धूल और गीला मिश्रण त्वचा और फेफड़ों को नुक़सान करते हैं)। चूना-पत्थर और ईंधन से CO2 निकलती है, इसलिए इंजीनियर कम क्लिंकर वाला सीमेंट बनाने की कोशिश करते हैं।
खुद करके देखो
3D में दिन वाला स्लाइडर 0 से 28 तक चलाओ और ताकत पढ़ो। पहले अंदाज़ा लगाओ: 7 दिन पर ताकत आधे से ज़्यादा है या कम? फिर जाँचो। घर पर एक चम्मच प्लास्टर ऑफ़ पेरिस पानी में घोलकर देखो कि वह कैसे अकड़ता है। किसी बड़े से कहो कि गीले कपड़े से तराई की हुई दीवार दिखाएँ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- चूना-पत्थर + गरमी: CaCO3 → CaO + CO2
- सीमेंट = पिसा क्लिंकर + लगभग 5% जिप्सम
- कंक्रीट = सीमेंट + रेत + गिट्टी + पानी
- कच्चा आटा लगभग 1450 °C पर पकता है
- ताकत की मानक जाँच: 28 दिन
हल किए गए उदाहरण
1. सीमेंट के दो मुख्य कच्चे माल बताओ और हर एक से क्या मिलता है।
चूना-पत्थर से चूना (कैल्सियम) मिलता है। चिकनी मिट्टी से सिलिका, एल्युमिना और लौह ऑक्साइड मिलते हैं।
2. एक कारख़ाना 5 प्रतिशत जिप्सम वाला 100 kg सीमेंट बनाता है। कितना क्लिंकर लगा?
जिप्सम = 5 kg। क्लिंकर = 100 − 5 = 95 kg।
3. नए फ़र्श को कई दिन गीला क्यों रखते हैं?
सख़्त होना पानी से क्रिया है। फ़र्श जल्दी सूख गया तो क्रिया रुक जाती है और फ़र्श कमज़ोर रहकर चटक जाता है। गीला रखने से क्रिया चलती रहती है।
4. एक मिश्रण में आयतन से 1 भाग सीमेंट, 2 भाग रेत और 4 भाग गिट्टी है। 14 भाग सूखे मिश्रण में सीमेंट के कितने भाग हैं?
कुल भाग = 1 + 2 + 4 = 7। 14 भाग यानी दो बैच, तो सीमेंट = 2 × 1 = 2 भाग।
आम गलतियाँ
- सीमेंट और कंक्रीट को एक ही समझना। सीमेंट जोड़ने वाला पाउडर है; कंक्रीट में सीमेंट के साथ रेत, गिट्टी और पानी होते हैं।
- यह सोचना कि सीमेंट सूखने से सख़्त होता है। वह पानी से क्रिया करके सख़्त होता है, पानी में भी।
- जिप्सम को भूल जाना। वह जमना धीमा करने के लिए है, ताकत बढ़ाने के लिए नहीं।
- यह कहना कि मिट्टी अकेली पकती है। चूना-पत्थर और मिट्टी का आटा साथ पकाकर क्लिंकर बनता है।