ऑक्साइड काँच: जाल कैसे बनता है
काँच एक अक्रिस्टलीय ठोस है: उसके परमाणुओं में दोहराता पैटर्न नहीं होता। ऑक्साइड काँच में मूल जाल कोने साझा करते चतुष्फलकों, जैसे SiO₄, का बना होता है। ऑक्साइडों की तीन भूमिकाएँ हैं:
- जाल-निर्माता अकेले जाल बना सकते हैं: SiO₂ (सिलिका), B₂O₃ (बोरॉन ऑक्साइड), P₂O₅।
- जाल-संशोधक जाल तोड़ते हैं: Na₂O (सोडा), K₂O, CaO (चूना)। इनके धातु आयन खाली जगहों में बैठते हैं और कुछ ऑक्सीजन की कड़ी टूट जाती है। टूटा जाल कम तापमान पर नरम हो जाता है।
- मध्यवर्ती जैसे Al₂O₃ मिश्रण के अनुसार जाल में जुड़ सकते हैं या उसे बदल सकते हैं।
शुद्ध सिलिका काँच बहुत ताप-सह है पर आकार देने के लिए लगभग 1700 °C या ज़्यादा चाहिए। सोडा-लाइम काँच (लगभग 70% SiO₂, 15% Na₂O, 10% CaO) सस्ता और ढालने में आसान है: खिड़कियाँ और बोतलें। अकेला सोडा ऐसा काँच बनाता जो पानी में घुल जाता, इसलिए चूना मिलाकर उसे टिकाऊ बनाते हैं। बोरोसिलिकेट काँच (सिलिका के साथ लगभग 13% B₂O₃) गर्म होने पर बहुत कम फैलता है, इसलिए प्रयोगशाला के बर्तनों और ओवन के बर्तनों में प्रयोग होता है। लेड काँच प्रकाश को ज़्यादा मोड़ता है और चमकता है (क्रिस्टल काँच)। धातु ऑक्साइडों की थोड़ी मात्रा रंग देती है: कोबाल्ट से नीला, लोहे और क्रोमियम से हरा।
काँच बनाना: मिश्रण को लगभग 1500 °C पर पिघलाएँ, नरम रहते आकार दें, फिर एनीलिंग करें (धीरे ठंडा करना) ताकि तनाव निकल जाए।
काँच संक्रमण: तीखा गलनांक नहीं
क्रिस्टल का एक गलनांक होता है। काँच का नहीं। गर्म करने पर काँच एक सीमा में धीरे-धीरे और नरम होता जाता है। काँच संक्रमण तापमान (Tg) के नीचे वह कठोर भंगुर ठोस है; Tg के ऊपर वह गाढ़ा चिपचिपा द्रव बन जाता है; फिर और गर्म होने पर आसानी से बहता है। इसी धीमे बदलाव के कारण काँच फूँकने वाले आराम से आकार दे पाते हैं।
क्यों? क्रिस्टल में सारे बंध एक जैसे हैं, इसलिए सब साथ टूटते हैं। काँच में कड़ियाँ जगह-जगह अलग हैं, इसलिए कमज़ोर जगहें पहले नरम होती हैं। Na₂O जैसे संशोधक मिलाने पर और कड़ियाँ टूटती हैं और Tg घटता है। इसीलिए काँच के गुण हर दिशा में एक जैसे होते हैं और वह मुड़ी सतहों के साथ टूटता है।
काँच-सिरेमिक
काँच-सिरेमिक साधारण काँच के रूप में शुरू होता है और आंशिक क्रिस्टल बनकर खत्म होता है। पहले काँच बनता है और आसानी से आकार पाता है। फिर उसे दो चरणों में नियंत्रित ऊष्मा-उपचार दिया जाता है: कम तापमान पर छोटे बीज (केंद्रक) बनते हैं, जिनमें TiO₂ या ZrO₂ जैसे केंद्रक-कारक मदद करते हैं; और ऊँचे तापमान पर बीजों से क्रिस्टल बढ़ते हैं। अंत में 50% से 95% भाग क्रिस्टल होता है, जिसमें एक मिलीमीटर के हज़ारवें हिस्से से छोटे लाखों क्रिस्टल होते हैं और उनके बीच काँच की परत।
काँच की तुलना में: ज़्यादा मज़बूत और कठोर (दरार को क्रिस्टलों के चारों ओर घूमकर जाना पड़ता है), और अचानक गर्म होने (ताप-झटके) को कहीं बेहतर सहता है। लिथियम ऐलुमिनोसिलिकेट काँच-सिरेमिक गर्म होने पर लगभग बिल्कुल नहीं फैलते। क्रिस्टल बहुत छोटे हों तो पदार्थ पारदर्शी भी रह सकता है।
उपयोग: कुकटॉप पैनल, खाना पकाने के बर्तन, दूरबीन के दर्पण के ब्लैंक, दाँतों के सिरेमिक और ओवन की खिड़कियाँ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सोडा-लाइम काँच ≈ 70% SiO₂ + 15% Na₂O + 10% CaO (+ थोड़ा अन्य)
- बोरोसिलिकेट काँच ≈ 80% SiO₂ + 13% B₂O₃ (+ Na₂O, Al₂O₃)
- निर्माता: SiO₂, B₂O₃, P₂O₅; संशोधक: Na₂O, K₂O, CaO
- Tg: काँच कठोर ठोस से नरम चिपचिपे पदार्थ में बदलता है
- काँच-सिरेमिक = काँच + नियंत्रित ऊष्मा-उपचार (केंद्रक बनना, फिर वृद्धि)
हल किए गए उदाहरण
1. एक काँच में 72% SiO₂, 14% Na₂O, 9% CaO और बाकी अन्य ऑक्साइड हैं। "अन्य" कितने प्रतिशत है? कौन जाल-संशोधक हैं?
72 + 14 + 9 = 95, इसलिए अन्य = 5%। Na₂O और CaO संशोधक हैं; SiO₂ निर्माता है।
2. प्रयोगशाला की बीकर बोरोसिलिकेट की क्यों होती है, सोडा-लाइम काँच की नहीं?
बोरोसिलिकेट गर्म होने पर बहुत कम फैलता है, इसलिए अचानक गर्म पानी से बड़ा तनाव नहीं बनता। सोडा-लाइम ज़्यादा फैलता है और चटक सकता है।
3. खिड़की का काँच बनाते समय सिलिका में सोडा क्यों मिलाते हैं?
सोडा जाल की कड़ियाँ तोड़कर नरम होने का तापमान घटाता है: शुद्ध सिलिका के लगभग 1700 °C से सोडा-लाइम में लगभग 1500 °C या कम। इससे ऊर्जा बचती है और आकार देना आसान होता है।
4. काँच-सिरेमिक काँच से ज़्यादा मज़बूत कैसे बनता है?
उसमें बहुत सारे छोटे क्रिस्टल होते हैं। काँच में शुरू हुई दरार क्रिस्टल से टकराती है और उसे मुड़ना या रुकना पड़ता है, इसलिए तोड़ने में ज़्यादा ऊर्जा लगती है।
आम गलतियाँ
- कहना कि काँच द्रव है। वह बेतरतीब सजावट वाला ठोस है; बस उसका तीखा गलनांक नहीं है।
- सोचना कि "अक्रिस्टलीय" का मतलब बंध नहीं हैं। बंध हैं; बस दीर्घ-परास पैटर्न नहीं है।
- निर्माता और संशोधक में उलझना। निर्माता जाल बनाते हैं (SiO₂); संशोधक काटते हैं (Na₂O, CaO)।
- काँच-सिरेमिक को काँच जैसा ही समझना। वह आंशिक क्रिस्टल है और अलग व्यवहार करता है (मज़बूत, कम प्रसार)।