ईंधन तेल: जहाज़ क्या जलाते हैं
ज़्यादातर जहाज़ों में डीज़ल इंजन होते हैं जो कच्चे तेल से बना ईंधन तेल जलाते हैं।
- भारी ईंधन तेल (HFO): हल्के हिस्से निकालने के बाद बचा तेल। यह तारकोल जैसा गाढ़ा, सस्ता और ज़्यादा सल्फ़र वाला होता है। इस्तेमाल से पहले गर्म करना पड़ता है।
- समुद्री डीज़ल तेल (MDO): थोड़ा पतला मिश्रण, संभालना आसान।
- समुद्री गैस तेल (MGO): हल्का और साफ़, सड़क के डीज़ल जैसा। महँगा।
- नए ईंधन: LNG, मेथनॉल और अमोनिया, जो प्रदूषण घटाते हैं।
ईंधन बंकर टंकियों में रखा जाता है। जहाज़ पर ईंधन भरने को बंकरिंग कहते हैं।
ईंधन तेल के गुण
- ऊष्मीय मान: 1 किग्रा ईंधन जलने पर निकली गर्मी। जहाज़ी ईंधनों में लगभग 40 से 43 MJ/किग्रा।
- श्यानता (गाढ़ापन): तेल कितना गाढ़ा है, यानी बहने का कितना विरोध करता है। सेंटीस्टोक्स (cSt) में मापते हैं। गर्म करने से घटती है। इंजेक्टर पर इंजन को लगभग 10 से 15 cSt चाहिए, इसलिए HFO को लगभग 100 से 150 °C तक गर्म करते हैं।
- घनत्व: HFO लगभग 0.99 टन प्रति घन मीटर, MGO लगभग 0.85। प्यूरीफ़ायर की सेटिंग और टंकी के आयतन के लिए चाहिए।
- फ़्लैश पॉइंट: वह सबसे कम तापमान जिस पर तेल इतनी भाप दे कि लौ दिखाने पर भभक उठे। सुरक्षा के लिए जहाज़ी ईंधन 60 °C या ज़्यादा होना चाहिए।
- पोर पॉइंट: वह सबसे कम तापमान जिस पर तेल अब भी बहता है।
- सल्फ़र: जलने पर SO₂ बनता है, जिससे अम्लीय वर्षा होती है। जहाज़ों के लिए विश्व सीमा 0.50% सल्फ़र है और विशेष उत्सर्जन नियंत्रण क्षेत्रों में 0.10%। जहाज़ स्क्रबर भी लगा सकते हैं।
- पानी और तलछट: हटाना ज़रूरी, वरना इंजेक्टर और पिस्टन खराब होते हैं।
टंकी से सिलेंडर तक: ईंधन का उपचार
ईंधन का रास्ता: बंकर टंकी, फिर बैठने की टंकी (पानी और मैल नीचे बैठते हैं), फिर प्यूरीफ़ायर (घूमती मशीन जो बाकी मैल निकालती है), फिर सर्विस टंकी, फिर फ़िल्टर, फिर हीटर, फिर इंजेक्शन पंप और इंजेक्टर। हर कदम ईंधन को ज़्यादा साफ़ या गर्म बनाता है, ताकि वह अच्छे से जले और इंजन को न घिसे।
स्नेहक: तेल की ज़रूरत क्यों
चिकनी दिखने वाली धातु भी बहुत पास से खुरदरी होती है। सूखी सतहें रगड़ें तो अटकती हैं, गर्मी बनती है और घिसती हैं। स्नेहक (चिकनाई तेल या ग्रीस) उनके बीच पतली परत बना देता है। इसके काम:
- सतहों को अलग रखकर घर्षण और घिसाई घटाना (तेल की परत)।
- बेयरिंग और पिस्टन से गर्मी ले जाकर ठंडक देना।
- मैल और कालिख को फ़िल्टर तक ले जाकर सफ़ाई करना।
- पिस्टन रिंग और सिलेंडर की दीवार के बीच का अंतर सील करना।
- जंग और अम्ल से बचाना।
स्नेहकों के प्रकार और गुण
- सिस्टम तेल बेयरिंग और गियर के लिए। सिलेंडर तेल बड़े धीमे इंजनों की सिलेंडर लाइनर के लिए; यह क्षारीय (ऊँचा TBN) होता है ताकि सल्फ़र से बना अम्ल बेअसर हो। ग्रीस वहाँ जहाँ तेल बह जाएगा।
- योजक (additives) तेल को बेहतर बनाते हैं: डिटर्जेंट (सफ़ाई), डिस्पर्सेंट (मैल को थामना), घिसाई-रोधी, झाग-रोधी और जंग-रोधी।
- श्यानता मुख्य गुण है। इसे ग्रेड से चुनते हैं (जैसे SAE 30 या 40)। तेल गर्म होकर पतला और ठंडा होकर गाढ़ा हो जाता है। अच्छा तेल कम बदलता है: इसे श्यानता सूचकांक कहते हैं।
- इस्तेमाल हुए तेल की प्रयोगशाला में पानी, घिसी धातु और श्यानता की जाँच होती है और प्यूरीफ़ायर से साफ़ करते हैं, ताकि पता चले कब बदलना है।
तेल बहुत पतला हो तो परत टूटती है और धातु धातु से छूती है। बहुत गाढ़ा हो तो शक्ति बर्बाद होती है।
करके देखिए: तेल को गर्म कीजिए
3D में भारी ईंधन तेल चुनिए और तापमान स्लाइडर 20 से 120 तक ले जाइए। बिंदुओं को तेज़ होते और बहाव प्रतिशत को बढ़ते देखिए। फिर चिकनाई तेल को बंद और चालू कीजिए। तेल चालू रखकर ऊँचा तापमान आज़माइए: परत का क्या होता है? घर पर एक चम्मच खाने का तेल या शहद गर्म और ठंडा करके देखिए कि कैसे बहता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ईंधन से गर्मी = द्रव्यमान × ऊष्मीय मान
- प्रति घंटा ईंधन = SFOC (ग्राम/kWh) × शक्ति (kW)
- आयतन = द्रव्यमान / घनत्व
- S + O₂ → SO₂ (32 ग्राम सल्फ़र से 64 ग्राम SO₂)
- इंजन दक्षता = 3.6 MJ / (SFOC किग्रा/kWh में × ऊष्मीय मान MJ/किग्रा)
हल किए गए उदाहरण
1. 2 टन ईंधन कितनी गर्मी देता है? (ऊष्मीय मान 42 MJ/किग्रा)
2 टन = 2000 किग्रा। गर्मी = 2000 × 42 = 84,000 MJ।
2. 8000 kW के इंजन की SFOC 180 ग्राम/kWh है। वह एक घंटे में कितना ईंधन जलाता है?
8000 × 180 = 14,40,000 ग्राम = 1440 किग्रा = 1.44 टन प्रति घंटा।
3. 99 टन HFO (घनत्व 0.99 टन/घन मी) कितने घन मीटर है?
आयतन = 99 / 0.99 = 100 घन मी।
4. 100 टन ईंधन में 3.5% सल्फ़र है। पूरा जलने पर कितना SO₂ बनेगा?
सल्फ़र = 3.5 टन। S (32) से SO₂ (64) बनता है, यानी द्रव्यमान दोगुना: 7 टन SO₂।
5. SFOC 175 ग्राम/kWh और ऊष्मीय मान 42 MJ/किग्रा है। इंजन की दक्षता निकालिए।
प्रति kWh ईंधन में ऊर्जा = 0.175 × 42 = 7.35 MJ। प्रति kWh उपयोगी काम = 3.6 MJ। दक्षता = 3.6/7.35 = 0.49, यानी लगभग 49%।
आम गलतियाँ
- सोचना कि गाढ़ा ईंधन ठंडा ही चल जाएगा। उसे गर्म करना पड़ता है, वरना वह ठीक से बहता और फुहार नहीं बनाता।
- सोचना कि चिकनाई तेल जितना गर्म, उतना अच्छा। बहुत गर्म हो तो पतला होकर परत टूट जाती है और भाग घिसते हैं।
- फ़्लैश पॉइंट (सुरक्षा, कब भाप आग पकड़े) और पोर पॉइंट (कब तेल बहना बंद करे) को मिला देना।
- घनत्व की इकाई भूलना। द्रव्यमान से आयतन घनत्व (टन/घन मी) से निकालिए।