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ईंधन और स्नेहक (चिकनाई तेल)

जहाज़ के इंजन ईंधन तेल जलाते हैं: गाढ़ा और सस्ता भारी ईंधन तेल (HFO), जिसे गर्म और साफ़ करना पड़ता है, या पतले आसुत ईंधन जैसे समुद्री डीज़ल (MDO) और गैस तेल (MGO)। ईंधन के मुख्य गुण हैं: ऊष्मीय मान, श्यानता (गाढ़ापन), फ़्लैश पॉइंट और सल्फ़र। चिकनाई तेल चलते धातु के भागों के बीच पतली परत बनाता है। यह परत घर्षण और घिसाई घटाती है, गर्मी ले जाती है, सफ़ाई करती है, सील करती है और जंग से बचाती है। तेल गर्म होकर पतला और ठंडा होकर गाढ़ा हो जाता है, इसलिए ईंधन और चिकनाई तेल दोनों में तापमान मायने रखता है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. ईंधन टंकी में रखा है। पाइप उसे इंजन तक ले जाता है। नीचे चलते धातु के भाग को तेल चाहिए।
  2. सिलेंडर में ईंधन जलता है। गर्म गैस फैलकर पिस्टन को धकेलती है। इसी तरह ईंधन काम में बदलता है।
  3. भारी ईंधन तेल सस्ता है, पर गाढ़ा। ठंडा हो तो मुश्किल से बहता है, इसलिए छोटे बिंदु पाइप में रेंगते हैं।
  4. हीटर तेल को गर्म करता है। गर्म तेल पतला होता है, तेज़ बहता है और इंजन में अच्छी फुहार बनाता है।
  5. तेल हटा दीजिए। दो खुरदरी धातु की सतहें रगड़ खाती हैं। वे गर्म (लाल) होती हैं और घिसती हैं।
  6. तेल चालू कीजिए। पतली परत सतहों को अलग रखती है। अब खेलिए: ईंधन, तापमान और तेल बदलिए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

ईंधन इंजन के पास नहीं, टंकी में क्यों रखते हैं?

ईंधन बहुत होता है और जल सकता है। उसे जहाज़ में नीचे टंकियों में रखते हैं और ज़रूरत पर पंप करते हैं। चरण 0 में टंकी और पाइप देखिए।

ईंधन जलने से जहाज़ कैसे चलता है?

जलने से ऊँचे दबाव की गर्म गैस बनती है। गैस पिस्टन को नीचे धकेलती है और पिस्टन शाफ़्ट घुमाता है। लौ और चलता पिस्टन देखिए।

संभालने में कठिन गाढ़ा ईंधन क्यों इस्तेमाल करें?

वह सस्ता है और ऊर्जा काफ़ी देता है। गाढ़ेपन की दिक्कत हीटर हल कर देता है। 20 °C पर भारी ईंधन तेल चुनकर धीमा बहाव देखिए।

ईंधन को गर्म करते हैं, इंजन तेल को क्यों नहीं?

ईंधन पतला होना चाहिए ताकि बहे और बारीक बूँदों में फैले। इंजन तेल इतना गाढ़ा रहना चाहिए कि परत टिके। 3D में तेल चालू रखकर तापमान बढ़ाइए।

क्या चिकनी धातु सचमुच खुरदरी होती है?

माइक्रोस्कोप से देखें तो हाँ। दोनों सतहों की छोटी चोटियाँ अटकती और टूटती हैं। 3D के छोटे शंकु इन चोटियों का फँसना दिखाते हैं।

तेल होने पर भी क्या वह फ़ेल हो सकता है?

हाँ। तेल बहुत गर्म हो तो पतला हो जाता है, परत बहुत पतली हो जाती है और चोटियाँ छू जाती हैं। तेल चालू रखकर तापमान 120 °C के पास कीजिए।

ईंधन तेल: जहाज़ क्या जलाते हैं

ज़्यादातर जहाज़ों में डीज़ल इंजन होते हैं जो कच्चे तेल से बना ईंधन तेल जलाते हैं।

ईंधन बंकर टंकियों में रखा जाता है। जहाज़ पर ईंधन भरने को बंकरिंग कहते हैं।

ईंधन तेल के गुण

टंकी से सिलेंडर तक: ईंधन का उपचार

ईंधन का रास्ता: बंकर टंकी, फिर बैठने की टंकी (पानी और मैल नीचे बैठते हैं), फिर प्यूरीफ़ायर (घूमती मशीन जो बाकी मैल निकालती है), फिर सर्विस टंकी, फिर फ़िल्टर, फिर हीटर, फिर इंजेक्शन पंप और इंजेक्टर। हर कदम ईंधन को ज़्यादा साफ़ या गर्म बनाता है, ताकि वह अच्छे से जले और इंजन को न घिसे।

स्नेहक: तेल की ज़रूरत क्यों

चिकनी दिखने वाली धातु भी बहुत पास से खुरदरी होती है। सूखी सतहें रगड़ें तो अटकती हैं, गर्मी बनती है और घिसती हैं। स्नेहक (चिकनाई तेल या ग्रीस) उनके बीच पतली परत बना देता है। इसके काम:

स्नेहकों के प्रकार और गुण

तेल बहुत पतला हो तो परत टूटती है और धातु धातु से छूती है। बहुत गाढ़ा हो तो शक्ति बर्बाद होती है।

करके देखिए: तेल को गर्म कीजिए

3D में भारी ईंधन तेल चुनिए और तापमान स्लाइडर 20 से 120 तक ले जाइए। बिंदुओं को तेज़ होते और बहाव प्रतिशत को बढ़ते देखिए। फिर चिकनाई तेल को बंद और चालू कीजिए। तेल चालू रखकर ऊँचा तापमान आज़माइए: परत का क्या होता है? घर पर एक चम्मच खाने का तेल या शहद गर्म और ठंडा करके देखिए कि कैसे बहता है।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. 2 टन ईंधन कितनी गर्मी देता है? (ऊष्मीय मान 42 MJ/किग्रा)

2 टन = 2000 किग्रा। गर्मी = 2000 × 42 = 84,000 MJ।

2. 8000 kW के इंजन की SFOC 180 ग्राम/kWh है। वह एक घंटे में कितना ईंधन जलाता है?

8000 × 180 = 14,40,000 ग्राम = 1440 किग्रा = 1.44 टन प्रति घंटा।

3. 99 टन HFO (घनत्व 0.99 टन/घन मी) कितने घन मीटर है?

आयतन = 99 / 0.99 = 100 घन मी।

4. 100 टन ईंधन में 3.5% सल्फ़र है। पूरा जलने पर कितना SO₂ बनेगा?

सल्फ़र = 3.5 टन। S (32) से SO₂ (64) बनता है, यानी द्रव्यमान दोगुना: 7 टन SO₂।

5. SFOC 175 ग्राम/kWh और ऊष्मीय मान 42 MJ/किग्रा है। इंजन की दक्षता निकालिए।

प्रति kWh ईंधन में ऊर्जा = 0.175 × 42 = 7.35 MJ। प्रति kWh उपयोगी काम = 3.6 MJ। दक्षता = 3.6/7.35 = 0.49, यानी लगभग 49%।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. कौन-सा जहाज़ी ईंधन सबसे गाढ़ा और सस्ता है?
2. भारी ईंधन तेल को गर्म क्यों करते हैं?
3. इनमें से चिकनाई तेल का काम कौन-सा नहीं है?
4. सुरक्षा के लिए जहाज़ी ईंधन का न्यूनतम फ़्लैश पॉइंट लगभग:
5. ईंधन में सल्फ़र जलने पर बनता है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जहाज़ भारी ईंधन तेल क्यों इस्तेमाल करते हैं?

यह आसुत ईंधनों से बहुत सस्ता है और ऊर्जा काफ़ी देता है। बड़े इंजन पर उसे गर्म और साफ़ करने की मेहनत से जो बचत होती है, वह ज़्यादा है।

इंजन में चिकनाई तेल क्या करता है?

यह पतली परत बनाता है ताकि चलते भाग छुएँ नहीं, जिससे घर्षण और घिसाई घटती है। यह ठंडक देता है, सफ़ाई करता है, सील करता है और जंग से बचाता है।

श्यानता आसान शब्दों में क्या है?

तरल कितना गाढ़ा है। शहद की श्यानता ज़्यादा है, पानी की कम। गर्म करने से तेल की श्यानता घटती है।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

जापान高校(専門学科)1〜3年Marine Engines

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