अवस्था परिवर्तन क्या है?
प्रावस्था (phase) यानी पदार्थ की अवस्था: ठोस, द्रव या गैस। एक अवस्था से दूसरी में जाना अवस्था परिवर्तन है। कोई नया पदार्थ नहीं बनता। पानी, पानी ही रहता है।
- गलन (पिघलना): ठोस → द्रव। हिमीकरण (जमना): द्रव → ठोस।
- वाष्पन: द्रव → गैस (वाष्पीकरण या उबलने से)। संघनन: गैस → द्रव।
- ऊर्ध्वपातन: ठोस → सीधे गैस (शुष्क बर्फ़, नेफ़्थलीन की गोलियाँ)। निक्षेपण (deposition): गैस → सीधे ठोस (पाला)।
जिन बदलावों में ऊष्मा लगती है (गलन, वाष्पन, ऊर्ध्वपातन) वे ऊष्माशोषी हैं। जिनमें ऊष्मा निकलती है (जमना, संघनन, निक्षेपण) वे ऊष्माक्षेपी हैं।
गुप्त ऊष्मा: तापमान क्यों रुकता है
बर्फ़ पिघलते समय हम गरम करते रहते हैं, फिर भी थर्मामीटर 0 °C पर रुका रहता है। ऊष्मा कहाँ गई? वह कणों के बीच का खिंचाव तोड़ती है। कणों को तेज़ नहीं करती, इसलिए तापमान नहीं बढ़ता। इस छिपी ऊष्मा को गुप्त ऊष्मा (latent heat) कहते हैं।
Q = m × L
- पानी की गलन की विशिष्ट गुप्त ऊष्मा: Lf ≈ 334 kJ/kg।
- पानी की वाष्पन की विशिष्ट गुप्त ऊष्मा: Lv ≈ 2260 kJ/kg।
Lv बहुत बड़ी है, क्योंकि गैस बनाने के लिए कणों को पूरी तरह अलग करना पड़ता है। इसीलिए 100 °C की भाप, 100 °C के पानी से ज़्यादा जलाती है: त्वचा पर संघनित होते समय भाप अपनी बड़ी गुप्त ऊष्मा छोड़ती है।
तापन वक्र (heating curve)
तापमान बनाम दी गई ऊष्मा के ग्राफ़ में चढ़ते हिस्से (एक अवस्था गरम हो रही है) और सपाट हिस्से (अवस्था बदल रही है) होते हैं। उबलने वाला सपाट हिस्सा पिघलने वाले से लंबा होता है।
वाष्प दाब, वाष्पशीलता और उबलना
बंद बोतल में कुछ तेज़ कण द्रव की सतह छोड़कर वाष्प बनते हैं, और कुछ वाष्प कण वापस गिरते हैं। जल्दी ही दोनों दरें बराबर हो जाती हैं (गतिक साम्य)। तब वाष्प का दाब वाष्प दाब कहलाता है।
- ज़्यादा गरम द्रव → ज़्यादा तेज़ कण → ज़्यादा वाष्प दाब।
- कणों के बीच कमज़ोर खिंचाव → आसानी से निकलना → ज़्यादा वाष्प दाब। ऐसे द्रव वाष्पशील (volatile) होते हैं: पेट्रोल, एसीटोन, एथेनॉल।
उबलना तब होता है जब वाष्प दाब बाहर के दाब के बराबर हो जाए। तब द्रव के अंदर भाप के बुलबुले बन पाते हैं। 1 atm (101.3 kPa) पर क्वथनांक सामान्य क्वथनांक है: पानी 100 °C, एथेनॉल लगभग 78 °C, एसीटोन लगभग 56 °C।
वाष्पीकरण और उबलने में अंतर
वाष्पीकरण किसी भी तापमान पर, सिर्फ़ सतह पर और धीरे होता है। उबलना एक तय तापमान पर (दिए दाब के लिए), पूरे द्रव में, बुलबुलों के साथ होता है।
दाब से क्वथनांक बदलता है
बाहर का दाब कम → क्वथनांक कम (पहाड़)। दाब ज़्यादा → क्वथनांक ज़्यादा (प्रेशर कुकर, 2 atm पर लगभग 120 °C)।
घर पर करके देखो
बर्फ़ वाले पानी के बर्तन में थर्मामीटर रखो और धीरे गरम करो। हर मिनट तापमान लिखो। बर्फ़ रहने तक तापमान 0 °C के पास रुकेगा, फिर बढ़ेगा, फिर उबलते समय 100 °C के पास रुकेगा। अपना तापन वक्र बनाओ।
प्रावस्था आरेख, त्रिक बिंदु और क्रांतिक बिंदु
प्रावस्था आरेख (phase diagram) बताता है कि हर तापमान (x-अक्ष) और दाब (y-अक्ष) पर कौन-सी अवस्था स्थिर है।
- तीन क्षेत्र: ठोस, द्रव, गैस।
- तीन रेखाएँ: गलन रेखा (ठोस-द्रव), वाष्प दाब रेखा (द्रव-गैस), ऊर्ध्वपातन रेखा (ठोस-गैस)। रेखा पर दो अवस्थाएँ साम्य में रहती हैं।
- त्रिक बिंदु (triple point): जहाँ तीनों रेखाएँ मिलती हैं। तीनों अवस्थाएँ साथ। पानी के लिए: 0.01 °C और 0.006 atm (611 Pa)।
- क्रांतिक बिंदु (critical point): द्रव-गैस रेखा का अंत। इसके आगे द्रव और गैस में फ़र्क़ नहीं रहता: सुपरक्रिटिकल द्रव। पानी: 374 °C और 218 atm। CO2: 31 °C और 73 atm (सुपरक्रिटिकल CO2 से कॉफ़ी से कैफ़ीन निकाला जाता है)।
पानी अनोखा है
ज़्यादातर पदार्थों की गलन रेखा दाईं ओर झुकती है। पानी की थोड़ी बाईं ओर, क्योंकि बर्फ़ पानी से हल्की (कम घनी) है। बर्फ़ को दबाने से वह थोड़ा पिघल सकती है।
CO2: शुष्क बर्फ़ सीधे गैस क्यों बनती है
CO2 का त्रिक बिंदु 5.1 atm पर है। सामान्य दाब (1 atm) इससे नीचे है, इसलिए ठोस CO2 −78 °C पर सीधे गैस बन जाता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- Q = m × L (अवस्था बदलने की ऊष्मा, तापमान नहीं बदलता)
- Q = m × c × ΔT (एक अवस्था को गरम करने की ऊष्मा)
- पानी: L_f ≈ 3.34 × 10^5 J/kg, L_v ≈ 2.26 × 10^6 J/kg, c ≈ 4200 J/(kg·K)
- उबलना: वाष्प दाब = बाहर का दाब
- पानी: त्रिक बिंदु 0.01 °C, 611 Pa; क्रांतिक बिंदु 374 °C, 22.1 MPa
हल किए गए उदाहरण
1. 0 °C की 2 kg बर्फ़ पिघलाने में कितनी ऊष्मा लगेगी? (L_f = 3.34 × 10^5 J/kg)
Q = m × L_f = 2 × 3.34 × 10^5 = 6.68 × 10^5 J = 668 kJ। पूरे समय तापमान 0 °C रहता है।
2. 100 °C के 0.5 kg पानी को 100 °C की भाप बनाने में कितनी ऊष्मा? (L_v = 2.26 × 10^6 J/kg)
Q = 0.5 × 2.26 × 10^6 = 1.13 × 10^6 J = 1130 kJ।
3. 0 °C की 1 kg बर्फ़ को 20 °C के पानी में बदलने में कितनी ऊष्मा? (c = 4200 J/kg K)
पहला कदम, पिघलाना: Q1 = 1 × 3.34 × 10^5 = 334 000 J। दूसरा, गरम करना: Q2 = 1 × 4200 × 20 = 84 000 J। कुल = 418 kJ।
4. −10 °C की 0.2 kg बर्फ़ को 100 °C की भाप बनाने में कुल ऊष्मा? (c_बर्फ़ = 2100, c_पानी = 4200 J/kg K)
बर्फ़ गरम: 0.2 × 2100 × 10 = 4 200 J। पिघलाना: 0.2 × 3.34 × 10^5 = 66 800 J। पानी गरम: 0.2 × 4200 × 100 = 84 000 J। उबालना: 0.2 × 2.26 × 10^6 = 452 000 J। कुल ≈ 607 kJ। सबसे ज़्यादा ऊष्मा उबालने में लगी।
5. किसी पहाड़ी जगह पर वायुदाब 0.7 atm है। पानी 100 °C से ऊपर उबलेगा या नीचे? क्यों?
नीचे (लगभग 90 °C)। उबलने के लिए वाष्प दाब = बाहर का दाब चाहिए। बाहर का दाब कम है, तो कम तापमान काफ़ी है।
6. प्रावस्था आरेख पर पानी 0.01 °C और 611 Pa पर है। क्या दिखेगा?
यह त्रिक बिंदु है। बर्फ़, पानी और जलवाष्प तीनों साम्य में साथ रहेंगे।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि बर्फ़ पिघलते समय तापमान बढ़ता है। पूरी बर्फ़ पिघलने तक यह 0 °C रहता है।
- कहना कि पानी हमेशा 100 °C पर ही उबलता है। यह सिर्फ़ 1 atm पर सच है; दाब बदलने पर क्वथनांक बदलता है।
- वाष्पीकरण और उबलने को एक मानना। वाष्पीकरण सिर्फ़ सतह पर और किसी भी तापमान पर होता है।
- अवस्था बदलते समय Q = m c ΔT लगाना। तब ΔT = 0 है, इसलिए Q = m L लगाओ।