अणुसंख्य गुणधर्म क्या हैं?
अवाष्पशील विलेय के तनु विलयन के कुछ गुण सिर्फ़ विलेय कणों की संख्या पर निर्भर हैं, उनकी किस्म पर नहीं। इन्हें अणुसंख्य गुणधर्म (colligative properties) कहते हैं। 1 kg पानी में 1 mol ग्लूकोस और 1 mol यूरिया का असर एक जैसा।
1. वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन
अवाष्पशील विलेय सतह का कुछ हिस्सा घेरता है, कम विलायक अणु निकलते हैं। राउल्ट से p = x₁·p₁°, तो Δp = p₁° − p = x₂·p₁°। इसलिए
(p₁° − p) ÷ p₁° = x₂
आपेक्षिक अवनमन = विलेय का मोल अंश। तनु विलयन में x₂ ≈ (w₂M₁)/(M₂w₁), जिससे M₂ निकाल सकते हैं।
क्वथनांक का उन्नयन
द्रव तब उबलता है जब उसका वाष्प दाब बाहर के दाब (1 atm) के बराबर हो। विलयन का वाष्प दाब कम है, इसलिए ज़्यादा गर्म करना पड़ता है:
ΔTb = Tb − Tb° = Kb · m
m = मोललता; Kb = मोलल उन्नयन स्थिरांक (ebullioscopic constant), इकाई K kg mol⁻¹। पानी के लिए Kb = 0.52 K kg mol⁻¹।
M₂ = (Kb × w₂ × 1000) ÷ (ΔTb × w₁) (w₁ ग्राम में)।
हिमांक का अवनमन
हिमांक पर द्रव और ठोस का वाष्प दाब बराबर होता है। विलयन का वाष्प दाब कम है, तो वह ठोस के बराबर और ठंडे ताप पर ही होता है:
ΔTf = Tf° − Tf = Kf · m
Kf = मोलल अवनमन स्थिरांक (cryoscopic constant)। पानी: 1.86, बेंज़ीन: 5.12 K kg mol⁻¹।
M₂ = (Kf × w₂ × 1000) ÷ (ΔTf × w₁)
उपयोग: बर्फ़ीली सड़कों पर नमक; कार रेडिएटर में एथिलीन ग्लाइकॉल (प्रतिहिम)।
परासरण और परासरण दाब
अर्धपारगम्य झिल्ली विलायक अणुओं को जाने देती है, विलेय कणों को नहीं (जैसे जंतु मूत्राशय, कोशिका झिल्ली)। परासरण: झिल्ली से होकर विलायक का शुद्ध विलायक (या तनु विलयन) से गाढ़े विलयन की ओर बहना।
परासरण दाब (π): विलयन पर लगाया जाने वाला वह अतिरिक्त दाब जो परासरण को ठीक रोक दे। तनु विलयनों के लिए:
π = C R T = (n₂ ÷ V) R T, इसलिए M₂ = (w₂ R T) ÷ (π V)
R = 0.083 L bar mol⁻¹ K⁻¹। प्रोटीन और बहुलकों के लिए यह सबसे अच्छी विधि है: बहुत कम सांद्रता पर भी π मापने लायक होता है और कमरे के ताप पर काम हो जाता है।
समपरासरी, अतिपरासरी, अल्पपरासरी
- समपरासरी (isotonic): बराबर परासरण दाब (0.9% NaCl ≈ रक्त कोशिकाएँ)। कोई शुद्ध बहाव नहीं।
- अतिपरासरी (hypertonic): बाहर ज़्यादा; कोशिका पानी खोकर सिकुड़ती है।
- अल्पपरासरी (hypotonic): बाहर कम; कोशिका पानी लेकर फूलती है।
उत्क्रम परासरण
विलयन की ओर π से ज़्यादा दाब लगाएँ तो शुद्ध विलायक झिल्ली से बाहर धकेला जाता है: उत्क्रम परासरण (reverse osmosis)। समुद्री पानी से पीने का पानी बनाने में उपयोग।
करके देखो (घर पर)
कुछ किशमिश सादे पानी में और कुछ बहुत नमकीन पानी में रात भर रखो। पहले अंदाज़ा लगाओ। सादे पानी वाली फूल जाती हैं (पानी अंदर गया: अल्पपरासरी)। आलू की दो पट्टियाँ काटो; नमकीन पानी वाली नरम और लचीली हो जाती है (पानी बाहर निकला: अतिपरासरी)। 3D के चरण 4 में हरी झिल्ली से यही बहाव दिखता है।
अणुसंख्य गुणधर्मों से मोलर द्रव्यमान
हर अणुसंख्य गुणधर्म विलेय के मोल गिनता है। डाले गए विलेय का द्रव्यमान पता हो और असर मापें, तो मोलर द्रव्यमान M₂ निकलता है:
- वाष्प दाब: (p° − p)/p° = (w₂M₁)/(M₂w₁)
- क्वथनांक: M₂ = Kb·w₂·1000 / (ΔTb·w₁)
- हिमांक: M₂ = Kf·w₂·1000 / (ΔTf·w₁)
- परासरण दाब: M₂ = w₂RT / (πV)
बोर्ड टिप: इस इकाई से एक संख्यात्मक प्रश्न (3 अंक) लगभग पक्का है। सूत्र लिखो, इकाइयों के साथ आँकड़े लिखो, g → kg या mL → L बदलो, फिर मान रखो।
असामान्य मोलर द्रव्यमान और वान्ट हॉफ़ गुणक
विलेय आयनों में टूटे (वियोजन) तो कण ज़्यादा, असर ज़्यादा, और निकाला गया मोलर द्रव्यमान असली से कम। विलेय जुड़े (संगुणन) तो कण कम, और निकाला गया मोलर द्रव्यमान ज़्यादा। इन्हें असामान्य मोलर द्रव्यमान कहते हैं।
वान्ट हॉफ़ गुणक:
i = सामान्य मोलर द्रव्यमान ÷ असामान्य मोलर द्रव्यमान = प्रेक्षित अणुसंख्य गुण ÷ परिकलित अणुसंख्य गुण
- i > 1: वियोजन (NaCl → Na⁺ + Cl⁻, i ≈ 2; K₂SO₄, i ≈ 3)
- i < 1: संगुणन (बेंज़ीन में 2 CH₃COOH ⇌ (CH₃COOH)₂, i ≈ 0.5)
- i = 1: कोई बदलाव नहीं (ग्लूकोस, यूरिया)
बदले सूत्र: Δp/p° = i·x₂, ΔTb = i·Kb·m, ΔTf = i·Kf·m, π = i·CRT।
वियोजन और संगुणन की मात्रा
n कण देने वाले विलेय के लिए, वियोजन की मात्रा α हो तो i = 1 + (n − 1)α। n के समूह में संगुणन हो तो i = 1 − α + α/n।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- आपेक्षिक अवनमन: (p₁° − p) ÷ p₁° = x₂ ≈ (w₂M₁) ÷ (M₂w₁)
- ΔTb = i · Kb · m; Kb(पानी) = 0.52 K kg mol⁻¹
- ΔTf = i · Kf · m; Kf(पानी) = 1.86 K kg mol⁻¹
- π = i · C R T; R = 0.083 L bar mol⁻¹ K⁻¹
- M₂ = (K × w₂ × 1000) ÷ (ΔT × w₁)
- i = सामान्य मोलर द्रव्यमान ÷ असामान्य मोलर द्रव्यमान
- वियोजन: i = 1 + (n − 1)α; संगुणन: i = 1 − α + α/n
हल किए गए उदाहरण
1. 1 kg पानी में 0.5 mol ग्लूकोस। क्वथनांक? (Kb = 0.52)
m = 0.5। ΔTb = 0.52 × 0.5 = 0.26 K। क्वथनांक = 373.15 + 0.26 = 373.41 K (100.26 °C)।
2. 250 g पानी में 6 g यूरिया (M = 60)। हिमांक? (Kf = 1.86)
मोल = 0.1। m = 0.1 ÷ 0.25 = 0.4। ΔTf = 0.744 K। हिमांक = −0.744 °C (272.41 K)।
3. शुद्ध पानी का वाष्प दाब 3.17 kPa। 0.9 mol पानी में 0.1 mol अवाष्पशील विलेय। विलयन का वाष्प दाब?
x₂ = 0.1। Δp = 0.317 kPa। p = 3.17 − 0.317 = 2.85 kPa।
4. 100 g पानी में 1.8 g अवाष्पशील विलेय घोलने से क्वथनांक 0.052 K बढ़ा। मोलर द्रव्यमान? (Kb = 0.52)
M₂ = (0.52 × 1.8 × 1000) ÷ (0.052 × 100) = 936 ÷ 5.2 = 180 g mol⁻¹।
5. 27 °C पर 200 mL विलयन में 2 g प्रोटीन (M = 40 000)। परासरण दाब? (R = 0.083)
n = 5 × 10⁻⁵ mol। C = 2.5 × 10⁻⁴ mol L⁻¹। T = 300 K। π = 2.5 × 10⁻⁴ × 0.083 × 300 = 6.2 × 10⁻³ bar।
6. 1 kg पानी में 0.1 mol NaCl (पूरा वियोजन)। ΔTf? (Kf = 1.86)
i = 2। ΔTf = 2 × 1.86 × 0.1 = 0.372 K। हिमांक = −0.372 °C।
7. बेंज़ीन में एसिटिक अम्ल का हिमांक से मोलर द्रव्यमान 120 आया, असली 60। i और संगुणन की मात्रा (द्वितय बनते हैं)?
i = 60 ÷ 120 = 0.5। i = 1 − α/2 → 0.5 = 1 − α/2 → α = 1 (100% संगुणन)।
8. 0.01 m K₂SO₄ विलयन −0.0521 °C पर जमता है। i और वियोजन की मात्रा? (Kf = 1.86)
परिकलित ΔTf = 0.0186 K। i = 0.0521 ÷ 0.0186 = 2.8। n = 3, i = 1 + 2α → α = 0.9 (90%)।
आम गलतियाँ
- ΔTb या ΔTf में मोलरता लगाना। दोनों में मोललता लगती है; सिर्फ़ π में मोलरता।
- लवणों के लिए वान्ट हॉफ़ गुणक भूलना: NaCl असर दोगुना करता है (i = 2), CaCl₂ लगभग तिगुना।
- π = CRT में ताप °C में रखना। हमेशा केल्विन: T = °C + 273।
- परासरण की दिशा उलटना: विलायक तनु से गाढ़े की ओर जाता है, उल्टा नहीं।