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विद्युत-अपघटनी विलयनों का चालकत्व

विलयन में धारा आयन ले जाते हैं। प्रतिरोध R सेल के आकार पर निर्भर है, जिसे सेल स्थिरांक G* = l/A से हटाते हैं: चालकता κ = G*/R। मोलर चालकता Λm = κ × 1000/c बताती है कि एक मोल विलेय कितना चालन करता है। तनु करने पर κ घटती है पर Λm बढ़ती है: प्रबल में थोड़ा (Λm = Λ°m − A√c), दुर्बल में बहुत। कोलराउश नियम: Λ°m = आयनों के मानों का योग, जिससे दुर्बल विद्युत-अपघट्य का Λ°m और वियोजन की मात्रा निकलती है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. नमक के विलयन वाला एक डिब्बा, उसमें धातु की दो प्लेटें। विलयन में धन और ऋण आयन हैं। बैटरी जोड़ते ही धन आयन एक ओर और ऋण आयन दूसरी ओर खिसकते हैं। चलते हुए आयन ही धारा ले जाते हैं।
  2. प्लेटों के बीच दूरी l है और हर प्लेट का क्षेत्रफल A। अनुपात l/A को सेल स्थिरांक G* कहते हैं। प्रतिरोध R नापो, तो चालकता κ = G*/R।
  3. ज़्यादा सांद्र विलयन में आयन ज़्यादा, तो κ भी ज़्यादा। सही तुलना के लिए प्रति मोल चालकता निकालते हैं: Λm = κ × 1000 / c। ग्राफ़ पर बिंदु Λm दिखाता है।
  4. अब बार-बार पानी मिलाओ। KCl (प्रबल) में Λm लगभग सीधी रेखा पर थोड़ा बढ़ता है। ऐसीटिक अम्ल (दुर्बल) में शून्य सांद्रता के पास Λm तेज़ी से ऊपर जाता है।
  5. अनंत तनुता पर हर आयन अपने-आप चलता है। इसलिए Λ°m = λ°(धनायन) + λ°(ऋणायन)। ऐसीटिक अम्ल: 349.6 + 40.9 = 390.5।
  6. खुद खेलो: विद्युत-अपघट्य चुनो, सांद्रता का स्लाइडर हिलाओ और Λm, κ और (दुर्बल अम्ल के लिए) वियोजन की मात्रा α पढ़ो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

विलयन में चालन धातु के तार से कैसे अलग है?

तार में सिर्फ़ इलेक्ट्रॉन चलते हैं और धातु नहीं बदलती। विलयन में आयन खुद चलते हैं, यानी पदार्थ भी साथ जाता है, और प्लेटों पर रासायनिक बदलाव होते हैं।

सेल स्थिरांक की ज़रूरत ही क्यों है?

प्रतिरोध सेल के आकार (दूरी और प्लेट का क्षेत्रफल) पर निर्भर करता है। सेल स्थिरांक आकार का असर हटा देता है, तो κ सिर्फ़ विलयन का गुण रह जाती है।

तनु करने पर κ घटती है तो Λm कैसे बढ़ सकता है?

Λm = κ/c। तनु करने पर c, κ से ज़्यादा तेज़ी से घटता है, क्योंकि हर मोल बड़े आयतन में फैल जाता है जहाँ आयन आसानी से चलते हैं। इसलिए अनुपात बढ़ता है।

प्रबल विद्युत-अपघट्य का ग्राफ़ √c के साथ सीधी रेखा क्यों है?

पास के आयनों का खिंचाव उन्हें धीमा करता है, और यह खिंचाव लगभग √c के अनुपात में बढ़ता है। इसलिए Λm एक तय गुणा √c से घटता है: Λm = Λ°m − A√c।

दुर्बल विद्युत-अपघट्य का वक्र बढ़ाकर Λ°m क्यों नहीं निकाल सकते?

शून्य सांद्रता के पास वक्र लगभग खड़ा ऊपर जाता है, तो उसे बढ़ाना बस अंदाज़ा होगा। कोलराउश नियम से ज्ञात आयन-मान जोड़ लेते हैं।

α = Λm/Λ°m का असली मतलब क्या है?

Λ°m वह मान है जो तब मिलता जब हर अणु आयनों में टूट जाता। Λm वह है जो असल में मिलता है। दोनों का अनुपात वह हिस्सा है जो सच में टूटा — यही वियोजन की मात्रा है।

प्रतिरोध, चालकत्व और चालकता

धातुएँ इलेक्ट्रॉनों से चालन करती हैं। विद्युत-अपघट्य (जो पानी में आयनों में टूट जाए) का विलयन आयनों से चालन करता है। यहाँ आयन खुद चलते हैं।

विलयन भी ओम के नियम को मानता है, इसलिए उसका प्रतिरोध R होता है। तार की तरह R = ρ × l/A। l प्लेटों की दूरी, A उनका क्षेत्रफल और ρ (रो) प्रतिरोधकता है।

चालकता विद्युत-अपघट्य की प्रकृति, आयनों के आकार और आवेश, विलायक, ताप और सांद्रता पर निर्भर करती है।

चालकता का मापन: सेल स्थिरांक

चालकता सेल में प्लैटिनम ब्लैक से ढकी दो प्लैटिनम प्लेटें होती हैं। R को AC सेतु (संसूचक वाला व्हीटस्टोन सेतु) से नापते हैं। DC नहीं, AC लेते हैं ताकि नापते समय विलयन का वैद्युत अपघटन न हो।

l और A को ठीक-ठीक नापना कठिन है। इसलिए ज्ञात κ वाले मानक KCl विलयन से सेल स्थिरांक G* = l/A निकालते हैं:

G* = κ × R, फिर उसी सेल में किसी भी विलयन के लिए κ = G*/R।

मोलर चालकता

अलग सांद्रता के दो विलयनों की तुलना सिर्फ़ κ से नहीं हो सकती। इसलिए मोलर चालकता Λm लेते हैं: 1 cm दूर रखी प्लेटों के बीच उतने विलयन की चालकता जिसमें 1 मोल विद्युत-अपघट्य हो।

Λm = κ / c। κ S cm⁻¹ में और c mol L⁻¹ में हो तो Λm = κ × 1000 / c, मात्रक S cm² mol⁻¹। (1 S cm² mol⁻¹ = 10⁻⁴ S m² mol⁻¹।)

सांद्रता के साथ चालकता में परिवर्तन

विलयन तनु करने पर:

प्रबल विद्युत-अपघट्य (KCl, NaCl, HCl)

ये हर सांद्रता पर पूरे आयनित होते हैं। तनु करने पर आयन दूर-दूर होकर एक-दूसरे को कम खींचते हैं और तेज़ चलते हैं। Λm धीरे बढ़ता है। Λm और √c का ग्राफ़ लगभग सीधी रेखा है:

Λm = Λ°m − A√c

रेखा को c = 0 तक बढ़ाकर Λ°m (सीमांत मोलर चालकता) पढ़ते हैं। ढाल A लवण के प्रकार (1-1, 2-1 आदि) पर निर्भर है।

दुर्बल विद्युत-अपघट्य (CH₃COOH, NH₄OH)

इनका थोड़ा ही हिस्सा आयनों में टूटता है। तनु करने पर बहुत ज़्यादा हिस्सा टूटता है, तो कम c पर Λm बहुत तेज़ी से बढ़ता है। ग्राफ़ खड़ा वक्र है, इसे बढ़ाकर Λ°m नहीं पढ़ सकते। यह काम कोलराउश नियम करता है।

कोलराउश का आयनों के स्वतंत्र अभिगमन का नियम

अनंत तनुता पर हर आयन स्वतंत्र रूप से चलता है और मोलर चालकता में अपना तय हिस्सा जोड़ता है।

Λ°m = ν₊ λ°₊ + ν₋ λ°₋, जहाँ ν₊ और ν₋ एक सूत्र इकाई में धनायनों और ऋणायनों की संख्या है।

उदाहरण: Λ°m(CaCl₂) = λ°(Ca²⁺) + 2λ°(Cl⁻)।

कोलराउश नियम के उपयोग

करके देखो: नमक से पानी चालक बनता है

एक गिलास में आसुत (या RO) पानी लो और बैटरी, दो तार और LED से जाँचो: LED मुश्किल से जलता है। चुटकी भर नमक घोलो: रोशनी बढ़ती है। और नमक: और तेज़ (κ बढ़ती है)। 3D में पहले अंदाज़ा लगाओ: CH₃COOH का c घटाने पर Λm थोड़ा बढ़ेगा या बहुत? फिर बिंदु देखो।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. एक सेल की प्लेटें 1 cm दूर हैं, हर एक का क्षेत्रफल 2 cm²। किसी विलयन के साथ प्रतिरोध 50 Ω है। G* और κ निकालो।

चरण 1: G* = l/A = 1/2 = 0.5 cm⁻¹। चरण 2: κ = G*/R = 0.5/50। चरण 3: κ = 0.01 S cm⁻¹।

2. 0.1 M KCl (κ = 0.0129 S cm⁻¹) एक सेल में R = 100 Ω देता है। सेल स्थिरांक निकालो।

चरण 1: G* = κ × R। चरण 2: G* = 0.0129 × 100। चरण 3: G* = 1.29 cm⁻¹।

3. 0.1 M KCl की κ = 0.0129 S cm⁻¹ है। मोलर चालकता निकालो।

चरण 1: Λm = κ × 1000 / c। चरण 2: Λm = 0.0129 × 1000 / 0.1 = 12.9 / 0.1। चरण 3: Λm = 129 S cm² mol⁻¹।

4. G* = 1.5 cm⁻¹ वाले सेल में 0.01 M विलयन का R = 1500 Ω है। κ और Λm निकालो।

चरण 1: κ = G*/R = 1.5/1500 = 0.001 S cm⁻¹। चरण 2: Λm = 0.001 × 1000 / 0.01। चरण 3: Λm = 100 S cm² mol⁻¹।

5. λ°(Na⁺) = 50.1 और λ°(Cl⁻) = 76.3 S cm² mol⁻¹। Λ°m(NaCl) निकालो।

चरण 1: कोलराउश: Λ°m = λ°₊ + λ°₋। चरण 2: Λ°m = 50.1 + 76.3। चरण 3: Λ°m(NaCl) = 126.4 S cm² mol⁻¹।

6. HCl, CH₃COONa और NaCl के Λ°m 426.1, 91.0 और 126.4 S cm² mol⁻¹ हैं। Λ°m(CH₃COOH) निकालो।

चरण 1: CH₃COOH = HCl + CH₃COONa − NaCl (Na⁺ और Cl⁻ कट जाते हैं)। चरण 2: Λ°m = 426.1 + 91.0 − 126.4। चरण 3: Λ°m(CH₃COOH) = 390.7 S cm² mol⁻¹।

7. 0.001 M ऐसीटिक अम्ल का Λm = 39.05 S cm² mol⁻¹ और Λ°m = 390.5 S cm² mol⁻¹ है। α और Ka निकालो।

चरण 1: α = Λm/Λ°m = 39.05/390.5 = 0.1। चरण 2: Ka = cα²/(1 − α) = 0.001 × 0.01 / 0.9। चरण 3: Ka = 1.11 × 10⁻⁵।

8. λ°(Ca²⁺) = 119.0 और λ°(Cl⁻) = 76.3 S cm² mol⁻¹ हों तो Λ°m(CaCl₂) निकालो।

चरण 1: एक CaCl₂ से 1 Ca²⁺ और 2 Cl⁻ बनते हैं। चरण 2: Λ°m = 119.0 + 2 × 76.3 = 119.0 + 152.6। चरण 3: Λ°m = 271.6 S cm² mol⁻¹।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. चालकता κ का SI मात्रक है:
2. सेल स्थिरांक बराबर है:
3. तनु करने पर किसी विलयन की मोलर चालकता:
4. Λm = Λ°m − A√c किसके लिए सही है?
5. कोलराउश नियम से निकालते हैं:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोलर चालकता क्या है?

उतने विलयन की चालकता जिसमें एक मोल विद्युत-अपघट्य हो: Λm = κ × 1000/c, मात्रक S cm² mol⁻¹।

कोलराउश का नियम लिखो।

अनंत तनुता पर किसी विद्युत-अपघट्य की सीमांत मोलर चालकता उसके धनायनों और ऋणायनों की सीमांत मोलर चालकताओं (उनकी संख्या से गुणा) के योग के बराबर होती है।

तनु करने पर मोलर चालकता क्यों बढ़ती है?

आयनों को ज़्यादा जगह मिलती है और आपसी खिंचाव घटता है (प्रबल), और ज़्यादा अणु आयनों में टूटते हैं (दुर्बल)।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 12वैद्युतरसायन

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