प्रतिरोध, चालकत्व और चालकता
धातुएँ इलेक्ट्रॉनों से चालन करती हैं। विद्युत-अपघट्य (जो पानी में आयनों में टूट जाए) का विलयन आयनों से चालन करता है। यहाँ आयन खुद चलते हैं।
विलयन भी ओम के नियम को मानता है, इसलिए उसका प्रतिरोध R होता है। तार की तरह R = ρ × l/A। l प्लेटों की दूरी, A उनका क्षेत्रफल और ρ (रो) प्रतिरोधकता है।
- चालकत्व G = 1/R। मात्रक: सीमेंस (S) = Ω⁻¹।
- चालकता κ (कप्पा) = 1/ρ। यह 1 cm दूर रखी प्लेटों के बीच 1 cm³ विलयन का चालकत्व है। मात्रक: S cm⁻¹ या S m⁻¹। 1 S m⁻¹ = 0.01 S cm⁻¹।
चालकता विद्युत-अपघट्य की प्रकृति, आयनों के आकार और आवेश, विलायक, ताप और सांद्रता पर निर्भर करती है।
चालकता का मापन: सेल स्थिरांक
चालकता सेल में प्लैटिनम ब्लैक से ढकी दो प्लैटिनम प्लेटें होती हैं। R को AC सेतु (संसूचक वाला व्हीटस्टोन सेतु) से नापते हैं। DC नहीं, AC लेते हैं ताकि नापते समय विलयन का वैद्युत अपघटन न हो।
l और A को ठीक-ठीक नापना कठिन है। इसलिए ज्ञात κ वाले मानक KCl विलयन से सेल स्थिरांक G* = l/A निकालते हैं:
G* = κ × R, फिर उसी सेल में किसी भी विलयन के लिए κ = G*/R।
मोलर चालकता
अलग सांद्रता के दो विलयनों की तुलना सिर्फ़ κ से नहीं हो सकती। इसलिए मोलर चालकता Λm लेते हैं: 1 cm दूर रखी प्लेटों के बीच उतने विलयन की चालकता जिसमें 1 मोल विद्युत-अपघट्य हो।
Λm = κ / c। κ S cm⁻¹ में और c mol L⁻¹ में हो तो Λm = κ × 1000 / c, मात्रक S cm² mol⁻¹। (1 S cm² mol⁻¹ = 10⁻⁴ S m² mol⁻¹।)
सांद्रता के साथ चालकता में परिवर्तन
विलयन तनु करने पर:
- κ घटती है, क्योंकि हर cm³ में आयन कम हो जाते हैं।
- Λm बढ़ती है, क्योंकि एक मोल वाला आयतन बड़ा हो जाता है और आयनों को ज़्यादा जगह मिलती है।
प्रबल विद्युत-अपघट्य (KCl, NaCl, HCl)
ये हर सांद्रता पर पूरे आयनित होते हैं। तनु करने पर आयन दूर-दूर होकर एक-दूसरे को कम खींचते हैं और तेज़ चलते हैं। Λm धीरे बढ़ता है। Λm और √c का ग्राफ़ लगभग सीधी रेखा है:
Λm = Λ°m − A√c
रेखा को c = 0 तक बढ़ाकर Λ°m (सीमांत मोलर चालकता) पढ़ते हैं। ढाल A लवण के प्रकार (1-1, 2-1 आदि) पर निर्भर है।
दुर्बल विद्युत-अपघट्य (CH₃COOH, NH₄OH)
इनका थोड़ा ही हिस्सा आयनों में टूटता है। तनु करने पर बहुत ज़्यादा हिस्सा टूटता है, तो कम c पर Λm बहुत तेज़ी से बढ़ता है। ग्राफ़ खड़ा वक्र है, इसे बढ़ाकर Λ°m नहीं पढ़ सकते। यह काम कोलराउश नियम करता है।
कोलराउश का आयनों के स्वतंत्र अभिगमन का नियम
अनंत तनुता पर हर आयन स्वतंत्र रूप से चलता है और मोलर चालकता में अपना तय हिस्सा जोड़ता है।
Λ°m = ν₊ λ°₊ + ν₋ λ°₋, जहाँ ν₊ और ν₋ एक सूत्र इकाई में धनायनों और ऋणायनों की संख्या है।
उदाहरण: Λ°m(CaCl₂) = λ°(Ca²⁺) + 2λ°(Cl⁻)।
कोलराउश नियम के उपयोग
- प्रबल विद्युत-अपघट्यों से दुर्बल का Λ°m: Λ°m(CH₃COOH) = Λ°m(HCl) + Λ°m(CH₃COONa) − Λ°m(NaCl)।
- वियोजन की मात्रा: α = Λm / Λ°m।
- दुर्बल अम्ल का वियोजन स्थिरांक: Ka = cα² / (1 − α)।
करके देखो: नमक से पानी चालक बनता है
एक गिलास में आसुत (या RO) पानी लो और बैटरी, दो तार और LED से जाँचो: LED मुश्किल से जलता है। चुटकी भर नमक घोलो: रोशनी बढ़ती है। और नमक: और तेज़ (κ बढ़ती है)। 3D में पहले अंदाज़ा लगाओ: CH₃COOH का c घटाने पर Λm थोड़ा बढ़ेगा या बहुत? फिर बिंदु देखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- R = ρ l/A ; G = 1/R ; κ = 1/ρ
- सेल स्थिरांक G* = l/A = κ × R
- κ = G*/R
- Λm = κ × 1000 / c (κ S cm⁻¹ में, c mol L⁻¹ में)
- Λm = Λ°m − A√c (प्रबल विद्युत-अपघट्य)
- Λ°m = ν₊λ°₊ + ν₋λ°₋ (कोलराउश)
- α = Λm/Λ°m ; Ka = cα²/(1 − α)
हल किए गए उदाहरण
1. एक सेल की प्लेटें 1 cm दूर हैं, हर एक का क्षेत्रफल 2 cm²। किसी विलयन के साथ प्रतिरोध 50 Ω है। G* और κ निकालो।
चरण 1: G* = l/A = 1/2 = 0.5 cm⁻¹। चरण 2: κ = G*/R = 0.5/50। चरण 3: κ = 0.01 S cm⁻¹।
2. 0.1 M KCl (κ = 0.0129 S cm⁻¹) एक सेल में R = 100 Ω देता है। सेल स्थिरांक निकालो।
चरण 1: G* = κ × R। चरण 2: G* = 0.0129 × 100। चरण 3: G* = 1.29 cm⁻¹।
3. 0.1 M KCl की κ = 0.0129 S cm⁻¹ है। मोलर चालकता निकालो।
चरण 1: Λm = κ × 1000 / c। चरण 2: Λm = 0.0129 × 1000 / 0.1 = 12.9 / 0.1। चरण 3: Λm = 129 S cm² mol⁻¹।
4. G* = 1.5 cm⁻¹ वाले सेल में 0.01 M विलयन का R = 1500 Ω है। κ और Λm निकालो।
चरण 1: κ = G*/R = 1.5/1500 = 0.001 S cm⁻¹। चरण 2: Λm = 0.001 × 1000 / 0.01। चरण 3: Λm = 100 S cm² mol⁻¹।
5. λ°(Na⁺) = 50.1 और λ°(Cl⁻) = 76.3 S cm² mol⁻¹। Λ°m(NaCl) निकालो।
चरण 1: कोलराउश: Λ°m = λ°₊ + λ°₋। चरण 2: Λ°m = 50.1 + 76.3। चरण 3: Λ°m(NaCl) = 126.4 S cm² mol⁻¹।
6. HCl, CH₃COONa और NaCl के Λ°m 426.1, 91.0 और 126.4 S cm² mol⁻¹ हैं। Λ°m(CH₃COOH) निकालो।
चरण 1: CH₃COOH = HCl + CH₃COONa − NaCl (Na⁺ और Cl⁻ कट जाते हैं)। चरण 2: Λ°m = 426.1 + 91.0 − 126.4। चरण 3: Λ°m(CH₃COOH) = 390.7 S cm² mol⁻¹।
7. 0.001 M ऐसीटिक अम्ल का Λm = 39.05 S cm² mol⁻¹ और Λ°m = 390.5 S cm² mol⁻¹ है। α और Ka निकालो।
चरण 1: α = Λm/Λ°m = 39.05/390.5 = 0.1। चरण 2: Ka = cα²/(1 − α) = 0.001 × 0.01 / 0.9। चरण 3: Ka = 1.11 × 10⁻⁵।
8. λ°(Ca²⁺) = 119.0 और λ°(Cl⁻) = 76.3 S cm² mol⁻¹ हों तो Λ°m(CaCl₂) निकालो।
चरण 1: एक CaCl₂ से 1 Ca²⁺ और 2 Cl⁻ बनते हैं। चरण 2: Λ°m = 119.0 + 2 × 76.3 = 119.0 + 152.6। चरण 3: Λ°m = 271.6 S cm² mol⁻¹।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि तनु करने पर चालकता κ बढ़ती है। κ घटती है (प्रति cm³ आयन कम); बढ़ती Λm है।
- c mol L⁻¹ में और κ S cm⁻¹ में हो तब Λm = κ × 1000/c में 1000 भूल जाना।
- दुर्बल विद्युत-अपघट्य का ग्राफ़ बढ़ाकर Λ°m पढ़ने की कोशिश करना। वक्र बहुत खड़ा है; कोलराउश नियम लगाओ।
- कोलराउश नियम में आयनों की संख्या भूलना: CaCl₂ में 2 × λ°(Cl⁻) लगेगा।