द्रव का वाष्प दाब
बंद बर्तन में सतह के सबसे तेज़ अणु ऊपर की जगह में निकल जाते हैं, कुछ वापस आते हैं। जल्दी ही निकलना और लौटना बराबर दर से होने लगता है: साम्य। उस समय भाप का दाब वाष्प दाब है।
- यह सिर्फ़ द्रव की प्रकृति और ताप पर निर्भर है (ज़्यादा ताप → ज़्यादा दाब)।
- जिस द्रव के अणुओं में खिंचाव कमज़ोर हो (जैसे एसीटोन), उसका वाष्प दाब ऊँचा होता है; उसे वाष्पशील कहते हैं।
दो वाष्पशील द्रवों के विलयन के लिए राउल्ट का नियम
राउल्ट का नियम (अपने शब्दों में): वाष्पशील द्रवों के विलयन में हर घटक का आंशिक वाष्प दाब = द्रव में उसका मोल अंश × शुद्ध अवस्था का वाष्प दाब।
pA = xA · pA° और pB = xB · pB°
डाल्टन के नियम से कुल दाब p = pA + pB = pB° + (pA° − pB°)·xA। xA के साथ यह सीधी रेखा है।
भाप का संघटन
भाप में A का मोल अंश yA = pA ÷ p। भाप में हमेशा ज़्यादा वाष्पशील द्रव ज़्यादा होता है। प्रभाजी आसवन इसी पर चलता है।
अवाष्पशील विलेय वाला विलयन
विलेय भाप न बनाए (चीनी, नमक) तो सिर्फ़ विलायक की भाप: p = x₁·p₁°। x₁ < 1 है, इसलिए विलयन का वाष्प दाब शुद्ध विलायक से कम। इसी से अणुसंख्य गुणधर्म बनते हैं (अगला पाठ)।
हेनरी के नियम की विशेष स्थिति
हेनरी: p = KH·x। राउल्ट: p = p°·x। दोनों में दाब ∝ मोल अंश। यानी KH = p° रखने पर हेनरी का नियम ही राउल्ट का नियम है।
आदर्श विलयन
आदर्श विलयन हर संघटन पर राउल्ट का नियम मानता है। ऐसा तब होता है जब A–B खिंचाव लगभग A–A और B–B जितना हो। तब:
- Δमिश्रणH = 0 (मिलाने पर ऊष्मा न ली, न दी)
- Δमिश्रणV = 0 (आयतन सीधे जुड़ते हैं)
उदाहरण (लगभग आदर्श): n-हेक्सेन + n-हेप्टेन, बेंज़ीन + टॉलूईन, ब्रोमोएथेन + क्लोरोएथेन।
अनादर्श विलयन: धनात्मक और ऋणात्मक विचलन
अनादर्श विलयन पूरे संघटन पर राउल्ट का नियम नहीं मानता; उसका वक्र सीधी रेखा से ऊपर या नीचे मुड़ता है।
धनात्मक विचलन
A–B खिंचाव A–A और B–B से कमज़ोर। अणु आसानी से निकलते हैं, वाष्प दाब अपेक्षा से ज़्यादा। Δमिश्रणH > 0, Δमिश्रणV > 0। उदाहरण: एथेनॉल + एसीटोन, कार्बन डाइसल्फ़ाइड + एसीटोन, एथेनॉल + पानी।
ऋणात्मक विचलन
A–B खिंचाव मज़बूत। कम अणु निकलते हैं, वाष्प दाब कम। Δमिश्रणH < 0, Δमिश्रणV < 0। उदाहरण: क्लोरोफ़ॉर्म + एसीटोन (दोनों के बीच नया हाइड्रोजन बंध), फ़ीनॉल + ऐनिलीन, नाइट्रिक अम्ल + पानी।
स्थिरक्वाथी मिश्रण (azeotrope)
ऐसा मिश्रण जो स्थिर ताप पर उबलता है और जिसकी भाप का संघटन द्रव जैसा ही होता है, इसलिए प्रभाजी आसवन से अलग नहीं होता।
- न्यूनतम क्वथनांक वाला: बड़े धनात्मक विचलन से। एथेनॉल–पानी, लगभग 95% एथेनॉल (आयतन से)।
- अधिकतम क्वथनांक वाला: बड़े ऋणात्मक विचलन से। नाइट्रिक अम्ल–पानी, लगभग 68% HNO₃ (द्रव्यमान से)।
करके देखो
घर पर: एक ही कमरे में दो प्लेटों पर एक चम्मच पानी और एक चम्मच सैनिटाइज़र रखो। पहले अंदाज़ा लगाओ कौन पहले सूखेगा, फिर देखो। सैनिटाइज़र (अल्कोहल) पहले सूखता है, क्योंकि उसका वाष्प दाब ऊँचा है। 3D में: आदर्श मोड में xA = 0.4 के लिए p हाथ से निकालो, फिर स्लाइडर से जाँचो। फिर धनात्मक और ऋणात्मक चुनकर देखो बैंगनी बार काले निशान से कितना हटता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- राउल्ट का नियम: pA = xA · pA°
- कुल: p = pA + pB = pB° + (pA° − pB°) xA
- भाप में मोल अंश: yA = pA ÷ p
- अवाष्पशील विलेय: p = x₁ · p₁°
- आदर्श: Δमिश्रणH = 0, Δमिश्रणV = 0
- धनात्मक विचलन: ΔH > 0, ΔV > 0; ऋणात्मक: ΔH < 0, ΔV < 0
हल किए गए उदाहरण
1. शुद्ध A का वाष्प दाब 80 kPa, आदर्श विलयन में xA = 0.25। pA?
pA = 0.25 × 80 = 20 kPa।
2. pA° = 80 kPa, pB° = 30 kPa, xA = 0.4 (आदर्श)। कुल वाष्प दाब?
pA = 32 kPa। xB = 0.6, pB = 18 kPa। p = 50 kPa।
3. उदाहरण 2 में भाप में A का मोल अंश?
yA = 32 ÷ 50 = 0.64। भाप (0.64) में A द्रव (0.4) से ज़्यादा, क्योंकि A ज़्यादा वाष्पशील है।
4. बेंज़ीन (p° = 12.8 kPa) और टॉलूईन (p° = 3.85 kPa) आदर्श विलयन बनाते हैं। 78 g बेंज़ीन (M = 78) + 46 g टॉलूईन (M = 92)। कुल वाष्प दाब?
मोल: 1 और 0.5। x(बेंज़ीन) = 0.667, x(टॉलूईन) = 0.333। p = 8.53 + 1.28 = 9.81 kPa।
5. दो द्रवों के p° = 60 और 20 kPa। पहले का कितना मोल अंश लें कि कुल 40 kPa हो (आदर्श)?
40 = 20 + 40·xA → xA = 0.5।
6. 298 K पर पानी का वाष्प दाब 3.17 kPa। 9 mol पानी में 1 mol अवाष्पशील विलेय। नया वाष्प दाब?
x(पानी) = 0.9। p = 0.9 × 3.17 = 2.85 kPa।
7. xA = 0.5 पर A–B मिश्रण का कुल दाब 55 kPa मापा गया। pA° = 70, pB° = 30 kPa। आदर्श है? नहीं तो कौन-सा विचलन?
आदर्श मान = 35 + 15 = 50 kPa। 55 > 50, इसलिए धनात्मक विचलन।
आम गलतियाँ
- राउल्ट के नियम में भाप का मोल अंश (y) लगा देना। pA = xA·pA° में द्रव का मोल अंश x लगता है।
- चिह्न उलझाना: धनात्मक में ΔH > 0 और ΔV > 0; ऋणात्मक में दोनों < 0।
- सोचना कि स्थिरक्वाथी को प्रभाजी आसवन से अलग कर सकते हैं। नहीं, भाप और द्रव का संघटन एक जैसा है।
- भूल जाना कि अवाष्पशील विलेय भाप नहीं देता: सिर्फ़ x₁·p₁° बचता है।