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हैलोऐल्केन

हैलोऐल्केन वह ऐल्केन है जिसमें एक हाइड्रोजन की जगह हैलोजन (X) लगा हो (R–X)। C–X आबंध ध्रुवीय है: कार्बन पर हल्का धन आवेश होता है, इसलिए नाभिकस्नेही उस पर हमला करते हैं। अभिक्रियाएँ तीन तरह की: SN2 (एक चरण, पीछे से हमला, प्रतीपन; 1° के लिए अच्छी), SN1 (दो चरण, चपटा कार्बोधनायन, रेसेमिक उत्पाद; 3° के लिए अच्छी) और विलोपन (ऐल्कोहॉली KOH से ऐल्कीन)।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. हैलोऐल्केन यानी ऐसा ऐल्केन जिसमें एक H की जगह हैलोजन X (F, Cl, Br या I) आ गया। X इलेक्ट्रॉन अपनी ओर खींचता है, इसलिए कार्बन हल्का धनात्मक (δ+) हो जाता है।
  2. जिस कार्बन पर X लगा है, उससे जुड़े कार्बन गिनो। एक कार्बन → 1°, दो → 2°, तीन → 3°।
  3. हैलोऐल्केन ज़्यादातर ऐल्कोहॉल से बनाते हैं। –OH हट जाता है और उसकी जगह Cl, Br या I आ जाता है।
  4. SN2: OH⁻ पीछे से कार्बन पर वार करता है और उसी समय X निकल जाता है, सब एक ही चरण में। बाकी तीन समूह तेज़ हवा में छाते की तरह उलट जाते हैं।
  5. SN1: पहले X अकेला निकलता है और चपटा कार्बोधनायन बचता है। OH⁻ आगे या पीछे, आधे-आधे जुड़ता है, इसलिए मिश्रण प्रकाश को नहीं घुमाता।
  6. विलोपन: ऐल्कोहॉली KOH पड़ोसी कार्बन से H खींचता है, X निकलता है और C=C द्वि-आबंध बनता है। अब खेलो: कोई भी अभिक्रिया और कोई भी हैलोजन चुनो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

C–X आबंध में कार्बन δ+ क्यों?

हैलोजन ज़्यादा विद्युतऋणात्मक है, साझा इलेक्ट्रॉन युग्म X की ओर खिसकता है। कार्बन के पास इलेक्ट्रॉन थोड़े कम रह जाते हैं।

3° का मतलब "3 हाइड्रोजन" क्यों नहीं?

कोटि C–X वाले कार्बन से जुड़े कार्बनों से गिनते हैं। 3D में स्लेटी CH₃ गेंदें एक-एक कर आती देखो।

SN2 में हमला पीछे से क्यों?

आगे बड़ा, इलेक्ट्रॉन-समृद्ध X बैठा है। पीछे रास्ता खुला है और X ठीक उल्टी ओर से साथ-साथ निकल सकता है।

SN1 से रेसेमिक मिश्रण क्यों?

कार्बोधनायन चपटा है। नाभिकस्नेही दोनों फलकों तक बराबर संभावना से पहुँचता है, इसलिए दोनों रूप 50:50।

3° SN2 में धीमा पर SN1 में तेज़ क्यों?

तीन बड़े समूह पीछे का रास्ता रोकते हैं (SN2 के लिए बुरा), पर इलेक्ट्रॉन देकर कार्बोधनायन को स्थिर करते हैं (SN1 के लिए अच्छा)।

ऐल्कोहॉल की जगह ऐल्कीन कब बनती है?

ऐल्कोहॉली KOH (प्रबल क्षारक, कम पानी, गरम) β-H हटाता है → ऐल्कीन। जलीय KOH, X की जगह OH लगाता है → ऐल्कोहॉल।

हैलोऐल्केन का वर्गीकरण

हैलोऐल्केन को दो-तीन तरह से बाँटते हैं।

उदाहरण: CH₃CH₂Br 1°, (CH₃)₂CHBr 2°, (CH₃)₃CBr 3° है।

हैलोऐल्केन का नामकरण

सामान्य नाम में "ऐल्किल हैलाइड" कहते हैं: CH₃Cl = मेथिल क्लोराइड। IUPAC में हैलोजन पूर्वलग्न (फ़्लुओरो, क्लोरो, ब्रोमो, आयोडो) बनता है।

  1. हैलोजन वाली सबसे लंबी शृंखला चुनो।
  2. ऐसे क्रमांक दो कि पहले प्रतिस्थापी को सबसे छोटी संख्या मिले।
  3. पूर्वलग्न वर्णमाला (अंग्रेज़ी) क्रम में लिखो।

(CH₃)₂CHCl → 2-क्लोरोप्रोपेन। CH₃CHBrCH₂CH₃ → 2-ब्रोमोब्यूटेन। (CH₃)₃CCl → 2-क्लोरो-2-मेथिलप्रोपेन।

C–X आबंध की प्रकृति

हैलोजन कार्बन से ज़्यादा विद्युतऋणात्मक है, इसलिए कार्बन पर δ+ और X पर δ− आवेश आता है। F → Cl → Br → I जाने पर परमाणु बड़ा होता है, इसलिए आबंध लंबा और कमज़ोर होता जाता है। कमज़ोर आबंध = X आसानी से निकलता है। अतः क्रियाशीलता: R–I > R–Br > R–Cl > R–F।

हैलोऐल्केन बनाने की विधियाँ

भौतिक गुण

रासायनिक गुण: SN1 और SN2

नाभिकस्नेही (nucleophile) इलेक्ट्रॉन-समृद्ध स्पीशीज़ है, जैसे OH⁻, CN⁻, NH₃। यह δ+ कार्बन पर हमला करके X⁻ को बाहर निकालता है। इसे नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन कहते हैं।

SN2SN1
चरणएकदो (पहले कार्बोधनायन)
दर किस पर[RX] और [Nu⁻]केवल [RX]
सबसे तेज़CH₃X > 1° > 2° > 3°3° > 2° > 1° > CH₃X
किरेल C परप्रतीपनरेसिमीकरण
मददअप्रोटिक विलायक, प्रबल Nu⁻ध्रुवीय प्रोटिक विलायक (पानी, ऐल्कोहॉल)

क्यों? SN2 में नाभिकस्नेही को कार्बन के पीछे पहुँचना है, बड़े समूह रास्ता रोकते हैं। SN1 में कार्बोधनायन स्थिर होना चाहिए; ज़्यादा ऐल्किल समूह इलेक्ट्रॉन देकर उसे स्थिर करते हैं। बेंज़िलिक और ऐलिलिक हैलाइड अनुनाद के कारण आसानी से SN1 देते हैं।

अन्य: KCN से R–CN (सायनाइड), AgCN से R–NC (आइसोसायनाइड); KNO₂ से R–ONO, AgNO₂ से R–NO₂। वुर्ट्ज़ अभिक्रिया: 2R–X + 2Na → R–R + 2NaX (शुष्क ईथर)। Mg के साथ ग्रिन्यार अभिकर्मक RMgX बनता है।

ध्रुवण घूर्णकता और किरेलता

जिस कार्बन से चार अलग-अलग समूह जुड़े हों, वह किरेल (असममित) कार्बन है। ऐसा अणु और उसका दर्पण-प्रतिबिंब एक-दूसरे पर ठीक नहीं बैठते, जैसे बायाँ और दायाँ हाथ। ये प्रतिबिंबरूपी (enantiomers) हैं। एक समतल ध्रुवित प्रकाश को दाईं ओर (दक्षिण-ध्रुवण घूर्णक, +) और दूसरा बाईं ओर (वाम-ध्रुवण घूर्णक, −) उतना ही घुमाता है।

50:50 मिश्रण = रेसेमिक मिश्रण: घूर्णन कट जाते हैं, मिश्रण ध्रुवण अघूर्णक होता है। किरेल कार्बन पर SN2 से प्रतीपन (वाल्डेन प्रतीपन) और SN1 से ज़्यादातर रेसेमिक उत्पाद मिलता है।

उदाहरण: 2-ब्रोमोब्यूटेन का C2 किरेल है (H, CH₃, C₂H₅, Br)। 1-ब्रोमोब्यूटेन में कोई किरेल C नहीं।

विलोपन अभिक्रियाएँ

हैलोऐल्केन को ऐल्कोहॉली KOH के साथ गरम करो: क्षारक β-कार्बन (पड़ोसी कार्बन) से H हटाता है और α-कार्बन से X निकलता है। C=C बनता है। इसे β-विलोपन (विहाइड्रोहैलोजनन) कहते हैं।

सेत्ज़ेफ़ (ज़ैतसेव) नियम: एक से ज़्यादा ऐल्कीन बन सकें तो मुख्य उत्पाद वह होगा जिसके द्वि-आबंध वाले कार्बनों पर ज़्यादा ऐल्किल समूह हों। 2-ब्रोमोब्यूटेन से मुख्यतः ब्यूट-2-ईन।

जलीय KOH → प्रतिस्थापन (ऐल्कोहॉल)। ऐल्कोहॉली KOH → विलोपन (ऐल्कीन)।

बोर्ड परीक्षा पर ध्यान

इस इकाई के लगभग 6 अंक। आम प्रश्न: समावयवी के नाम/संरचना, SN1 या SN2 दर के क्रम में लगाना, SOCl₂ क्यों बेहतर, मुख्य उत्पाद बताना (मार्कोनीकॉफ़, सेत्ज़ेफ़), "रेसेमिक मिश्रण क्या है?"। 2 अंक वाले "कारण दीजिए" उत्तरों का अभ्यास करो।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. CH₃CH₂CH₂Br, CH₃CHBrCH₃ और (CH₃)₃CBr को 1°, 2°, 3° में बाँटो।

Br वाले C से जुड़े कार्बन गिनो। CH₃CH₂CH₂Br: 1 → 1°। CH₃CHBrCH₃: 2 → 2°। (CH₃)₃CBr: 3 → 3°।

2. CH₃–CH(CH₃)–CH₂–CHCl–CH₃ का IUPAC नाम लिखो।

सबसे लंबी शृंखला = 5 C। दाईं ओर से क्रमांक दो ताकि Cl को 2 और CH₃ को 4 मिले: 2-क्लोरो-4-मेथिलपेंटेन (वर्णक्रम में chloro पहले)।

3. C₄H₉Br के कितने संरचनात्मक समावयवी हैं? कितने किरेल हैं?

1-ब्रोमोब्यूटेन, 2-ब्रोमोब्यूटेन, 1-ब्रोमो-2-मेथिलप्रोपेन, 2-ब्रोमो-2-मेथिलप्रोपेन = 4। केवल 2-ब्रोमोब्यूटेन के एक कार्बन पर चार अलग समूह (H, Br, CH₃, C₂H₅) हैं, इसलिए 1 किरेल।

4. SN2 दर के क्रम में लगाओ: (CH₃)₃CBr, CH₃Br, CH₃CH₂Br, (CH₃)₂CHBr।

SN2 को पीछे खुली जगह चाहिए। कम समूह = तेज़: CH₃Br > CH₃CH₂Br > (CH₃)₂CHBr > (CH₃)₃CBr।

5. एक नमूने में 80% (+) रूप और 20% (−) रूप है। शुद्ध (+) रूप +23° घुमाता है। प्रेक्षित घूर्णन निकालो।

आधिक्य = (80 − 20) = 60%। प्रेक्षित घूर्णन = 0.60 × (+23°) = +13.8°।

6. 2-ब्रोमोब्यूटेन को ऐल्कोहॉली KOH के साथ गरम करने पर मुख्य उत्पाद और कारण बताओ।

β-H, C1 और C3 पर हैं। C3 से H हटे तो ब्यूट-2-ईन (C=C पर दो ऐल्किल समूह), C1 से हटे तो ब्यूट-1-ईन। सेत्ज़ेफ़ नियम से अधिक प्रतिस्थापित ब्यूट-2-ईन मुख्य।

7. (CH₃)₃CBr पानी के साथ (SN1) CH₃CH₂Br से तेज़ क्यों?

SN1 की गति कार्बोधनायन की स्थिरता पर है। (CH₃)₃C⁺ पर तीन CH₃ इलेक्ट्रॉन देते हैं (+I प्रभाव, अतिसंयुग्मन), इसलिए यह CH₃CH₂⁺ से बहुत स्थिर है। स्थिर कार्बोधनायन → तेज़ SN1।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. तृतीयक हैलोऐल्केन कौन-सा है?
2. एथेनॉल से शुद्ध क्लोरोएथेन बनाने का सबसे अच्छा अभिकर्मक:
3. किरेल कार्बन पर SN2 से मिलता है:
4. सबसे कमज़ोर आबंध कौन-सा?
5. हैलोऐल्केन + ऐल्कोहॉली KOH से मुख्यतः:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SN1 और SN2 में क्या अंतर है?

SN2 एक चरण वाली अभिक्रिया है, दर दोनों अभिकारकों पर निर्भर, प्रतीपन देती है और 1° के लिए सबसे तेज़। SN1 दो चरण में कार्बोधनायन से होती है, दर केवल हैलोऐल्केन पर, रेसिमीकरण देती है और 3° के लिए सबसे तेज़।

हैलोऐल्केन पानी में क्यों नहीं घुलते?

घुलने के लिए पानी के मज़बूत हाइड्रोजन आबंध तोड़ने पड़ते हैं, पर हैलोऐल्केन पानी के साथ उतने मज़बूत नए आबंध नहीं बना पाते।

किरेल कार्बन क्या है?

वह कार्बन जिससे चार अलग-अलग समूह जुड़े हों। ऐसा अणु अपने दर्पण-प्रतिबिंब जैसा नहीं होता, इसलिए ध्रुवण घूर्णक हो सकता है।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 12हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन
इंग्लैंडYear 123.3 Organic chemistry
रूस10 классHydrocarbons
चीन高三Selective 3 Ch.3 Hydrocarbon derivatives

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