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पॉलिहैलोजन यौगिक

पॉलिहैलोजन यौगिकों में कार्बन पर एक से ज़्यादा हैलोजन होते हैं। डाइक्लोरोमेथेन विलायक और पेंट हटाने वाला है; क्लोरोफ़ॉर्म विलायक है जो वायु और प्रकाश में विषैली फ़ॉस्जीन बनाता है; आयोडोफ़ॉर्म पीला पूतिरोधी है; CCl₄ विलायक और अग्निशामक था; फ़्रिऑन शीतलक थे जो ओज़ोन नष्ट करते हैं; DDT कीटनाशक है जो खाद्य शृंखला में जमा होता है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. मेथेन से शुरू करो और उसके H एक-एक करके Cl से बदलो। एक कार्बन पर दो Cl हों तो बनता है डाइक्लोरोमेथेन, CH₂Cl₂।
  2. क्लोरोफ़ॉर्म (CHCl₃) हवा और रोशनी में धीरे-धीरे फ़ॉस्जीन बन जाता है, जो ज़हरीली गैस है। इसलिए इसे गहरे रंग की, पूरी भरी, बंद बोतल में रखते हैं।
  3. आयोडोफ़ॉर्म (CHI₃) में तीन बड़े आयोडीन परमाणु हैं। यह तेज़ गंध वाले पीले क्रिस्टल बनाता है और घावों पर पूतिरोधी के रूप में लगाया जाता था।
  4. CF₂Cl₂ जैसे फ़्रिऑन इतने स्थिर हैं कि ऊपर ओज़ोन परत तक पहुँच जाते हैं। UV प्रकाश एक Cl परमाणु छुड़ाता है और वह एक Cl कई ओज़ोन अणु तोड़ देता है।
  5. DDT कीड़े मारता है, पर टूटता नहीं और वसा में जमा रहता है। खाद्य शृंखला की हर कड़ी में नीचे वाली से ज़्यादा DDT होता है।
  6. अब खेलो: मेनू से कोई भी यौगिक चुनो और उसका उपयोग और नुकसान पढ़ो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

कोई यौगिक "पॉलिहैलोजन" कब कहलाता है?

जब उसमें एक से ज़्यादा हैलोजन परमाणु हों। हरी Cl गेंदें गिनो: दो या ज़्यादा = पॉलिहैलोजन।

क्लोरोफ़ॉर्म गहरे रंग की बोतल में क्यों?

प्रकाश और हवा उसे विषैली फ़ॉस्जीन में बदलते हैं। सूरज चमकने पर O₂ आकर COCl₂ बनती देखो।

क्या आयोडोफ़ॉर्म खुद कीटाणु मारता है?

नहीं। यह धीरे-धीरे आयोडीन छोड़ता है, और आयोडीन कीटाणु मारती है।

फ़्रिऑन विषैले नहीं, फिर प्रतिबंध क्यों?

वे इतने स्थिर हैं कि ओज़ोन परत तक पहुँचते हैं। वहाँ UV से Cl निकलता है जो बार-बार ओज़ोन तोड़ता है।

पक्षियों में पानी से ज़्यादा DDT क्यों?

हर जंतु नीचे की कड़ी के बहुत सारे जीव खाता है और उनका DDT अपनी वसा में रखता है। हर कड़ी पर मात्रा गुणा होती है।

पॉलिहैलोजन यौगिक क्या हैं?

जिन यौगिकों में एक से ज़्यादा हैलोजन परमाणु हों, वे पॉलिहैलोजन यौगिक हैं। उद्योग और खेती में ये उपयोगी हैं, पर कई स्वास्थ्य या पर्यावरण को नुकसान भी करते हैं। मेथेन पर हैलोजन गिनो: CH₃Cl (1), CH₂Cl₂ (2), CHCl₃ (3), CCl₄ (4)।

डाइक्लोरोमेथेन (मेथिलीन क्लोराइड)

उपयोग: विलायक, पेंट हटाने वाला, ऐरोसॉल में नोदक, दवा बनाने में विलायक; धातु साफ़ करने में।

प्रभाव: साँस से लेने पर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर असर: कम मात्रा में सुनने और देखने में कमी; ज़्यादा में चक्कर, मिचली, उँगलियों में झनझनाहट। त्वचा पर जलन और लाली; आँखों में कॉर्निया जल सकता है।

क्लोरोफ़ॉर्म (ट्राइक्लोरोमेथेन)

उपयोग: वसा, ऐल्कलॉइड और आयोडीन का विलायक; फ़्रिऑन शीतलक R-22 बनाने में। पहले निश्चेतक था, अब ईथर जैसे सुरक्षित निश्चेतक प्रयोग होते हैं।

प्रभाव: साँस से तंत्रिका तंत्र शिथिल; लंबे समय में यकृत और गुर्दों को नुकसान।

भंडारण: वायु और प्रकाश में यह फ़ॉस्जीन (COCl₂) बनाता है, जो बहुत विषैली गैस है: 2CHCl₃ + O₂ → 2COCl₂ + 2HCl। इसलिए गहरे रंग की, पूरी भरी, बंद बोतलों में रखते हैं (हवा न रहे), और थोड़ा एथेनॉल मिलाते हैं जो फ़ॉस्जीन को हानिरहित डाइएथिल कार्बोनेट में बदल देता है।

आयोडोफ़ॉर्म (ट्राइआयोडोमेथेन)

तेज़ गंध वाला पीला क्रिस्टलीय ठोस। घाव की पट्टी में पूतिरोधी के रूप में प्रयुक्त होता था; पूतिरोधी गुण आयोडोफ़ॉर्म से नहीं, उससे धीरे-धीरे निकलने वाली आयोडीन से है। बुरी गंध के कारण अब दूसरे आयोडीन मिश्रणों ने इसकी जगह ले ली है।

आयोडोफ़ॉर्म परीक्षण (I₂ + NaOH से पीला CHI₃) से CH₃CO– या CH₃CH(OH)– समूह पहचानते हैं, जैसे एथेनॉल या ऐसीटोन में।

कार्बन टेट्राक्लोराइड (टेट्राक्लोरोमेथेन)

उपयोग: शीतलक और ऐरोसॉल नोदक बनाने में, तेल-वसा के विलायक के रूप में, ड्राई-क्लीनिंग और अग्निशामक में होता था।

प्रभाव: यकृत कैंसर का ख़तरा; तंत्रिका तंत्र पर असर (चक्कर, सिरदर्द, मिचली); दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है। वायु में जाकर ऊपरी वायुमंडल में ओज़ोन परत घटाता है, जिससे ज़्यादा UV हम तक पहुँचती है (त्वचा कैंसर, आँखों को हानि)।

फ़्रिऑन (क्लोरोफ़्लुओरोकार्बन, CFC)

फ़्रिऑन मेथेन और एथेन के क्लोरोफ़्लुओरो यौगिक हैं, जैसे CCl₂F₂ (फ़्रिऑन-12)। ये स्थिर, अक्रियाशील, अविषैले, असंक्षारक और आसानी से द्रवित होते हैं, इसलिए फ्रिज, AC, ऐरोसॉल स्प्रे और फ़ोम बनाने में प्रयुक्त हुए।

प्रभाव: ये समतापमंडल तक पहुँचते हैं। UV प्रकाश इन्हें मुक्त मूलकों में तोड़ता है: CF₂Cl₂ → •CF₂Cl + Cl•। Cl• शृंखला शुरू करता है: Cl• + O₃ → ClO• + O₂; ClO• + O → Cl• + O₂। Cl• फिर मुक्त हो जाता है, इसलिए एक Cl हज़ारों ओज़ोन अणु नष्ट कर सकता है।

DDT (p,p′-डाइक्लोरोडाइफ़ेनिलट्राइक्लोरोएथेन)

DDT पहला क्लोरीनयुक्त कार्बनिक कीटनाशक था। इसकी कीटनाशी क्षमता 1939 में पता चली (पॉल मुलर को 1948 में नोबेल पुरस्कार)। इससे मलेरिया (मच्छर) और टाइफ़स (जूँ) बहुत घटे।

समस्याएँ: कई कीट इसके प्रति प्रतिरोधी हो गए। यह आसानी से नहीं टूटता (सालों रहता है) और पानी में नहीं, वसा में घुलता है। इसलिए जंतुओं की वसा में जमा होता है और खाद्य शृंखला की हर कड़ी पर बढ़ता है: जैव-आवर्धन। मछलीखोर पक्षियों के अंडों के खोल पतले हो गए और उनकी संख्या घटी। अमेरिका ने 1973 में प्रतिबंध लगाया; कई देशों में अब सीमित है।

बोर्ड परीक्षा पर ध्यान

आम प्रश्न (1–3 अंक): हर यौगिक के उपयोग और दुष्प्रभाव; "क्लोरोफ़ॉर्म गहरे रंग की बोतल में क्यों?"; "फ़्रिऑन ओज़ोन कैसे घटाते हैं?"; "DDT तुरंत बहुत विषैला न होकर भी हानिकारक क्यों?"; प्रतिशत संघटन के आंकिक।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. क्लोरोफ़ॉर्म को गहरे रंग की, पूरी भरी बोतलों में क्यों रखते हैं?

प्रकाश और वायु इसे विषैली फ़ॉस्जीन में बदलते हैं। गहरी बोतल प्रकाश रोकती है, पूरी भरी बोतल में हवा नहीं रहती। बनी हुई फ़ॉस्जीन नष्ट करने को थोड़ा एथेनॉल भी मिलाते हैं।

2. क्लोरोफ़ॉर्म में क्लोरीन का प्रतिशत निकालो (C = 12, H = 1, Cl = 35.5)।

M = 12 + 1 + 3×35.5 = 119.5 g/mol। Cl का द्रव्यमान = 106.5 g। %Cl = 106.5 ÷ 119.5 × 100 = 89.1%।

3. फ़्रिऑन-12, CCl₂F₂ का मोलर द्रव्यमान निकालो (F = 19)।

M = 12 + 2×35.5 + 2×19 = 12 + 71 + 38 = 121 g/mol।

4. आयोडोफ़ॉर्म में आयोडीन का प्रतिशत निकालो (I = 127)।

M = 12 + 1 + 3×127 = 394 g/mol। %I = 381 ÷ 394 × 100 = 96.7%।

5. 23.9 g क्लोरोफ़ॉर्म पूरा ऑक्सीकृत हो तो कितने मोल फ़ॉस्जीन बनेगी?

CHCl₃ के मोल = 23.9 ÷ 119.5 = 0.2 mol। 2CHCl₃ → 2COCl₂, यानी 1:1 → 0.2 mol COCl₂ (0.2 × 99 = 19.8 g)।

6. पानी में DDT 0.00005 ppm और मछलीखोर पक्षियों में 25 ppm है। कितने गुना बढ़ा?

25 ÷ 0.00005 = 5,00,000 गुना। खाद्य शृंखला में यह जमाव जैव-आवर्धन है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. क्लोरोफ़ॉर्म वायु और प्रकाश में बनाता है:
2. आयोडोफ़ॉर्म पूतिरोधी है क्योंकि यह:
3. फ़्रिऑन ओज़ोन परत को किसे मुक्त करके नष्ट करते हैं?
4. खाद्य शृंखला में DDT के बढ़ने को कहते हैं:
5. पेंट हटाने में कौन प्रयुक्त होता है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्लोरोफ़ॉर्म के उपयोग क्या हैं?

वसा, ऐल्कलॉइड और आयोडीन का विलायक, और शीतलक R-22 बनाने का कच्चा माल। पहले निश्चेतक था।

फ़्रिऑन ओज़ोन परत को कैसे घटाते हैं?

समतापमंडल में UV प्रकाश फ़्रिऑन को तोड़कर क्लोरीन परमाणु मुक्त करता है। हर Cl शृंखला अभिक्रिया में ओज़ोन नष्ट करता है और फिर बन जाता है।

जैव-आवर्धन क्या है?

DDT जैसे स्थायी रसायन की सांद्रता का खाद्य शृंखला की हर ऊँची कड़ी पर बढ़ना।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 12हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन

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