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ऐल्कोहॉल

ऐल्कोहॉल वह कार्बनिक यौगिक है जिसमें –OH समूह एक sp³ कार्बन पर लगा हो (R–OH)। –OH वाले कार्बन पर जुड़े कार्बन गिनकर इसे प्राथमिक (1°), द्वितीयक (2°) या तृतीयक (3°) कहते हैं। नाम: ऐल्केन का 'e' हटाकर 'ऑल' (ol), –OH को सबसे छोटा नंबर। बनाने के तरीके: ऐल्कीन का जलयोजन या हाइड्रोबोरॉनन–ऑक्सीकरण, ऐल्डिहाइड/कीटोन/अम्ल का अपचयन, ग्रीन्यार अभिकर्मक। हाइड्रोजन बंध के कारण क्वथनांक ऊँचा और पानी में घुलनशील। अभिक्रियाओं में या तो O–H टूटता है (Na, एस्टरीकरण) या C–O (HX, निर्जलीकरण); 1° और 2° का ऑक्सीकरण होता है। मेथेनॉल और एथेनॉल मुख्य व्यापारिक ऐल्कोहॉल हैं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. यह है एथेनॉल। यह एथेन जैसा है, बस एक H की जगह –OH लगा है (लाल = ऑक्सीजन)। यही –OH इसे ऐल्कोहॉल बनाता है।
  2. पीले कार्बन को देखो – इसी पर –OH लगा है। इस पर जुड़े कार्बन गिनो: 1 = प्राथमिक, 2 = द्वितीयक, 3 = तृतीयक।
  3. नाम रखना: –OH वाले कार्बन सहित सबसे लंबी शृंखला लो, –OH के पास वाले सिरे से नंबर दो, फिर ऐल्केन के 'e' की जगह 'ऑल' लगाओ। यहाँ: ब्यूटेन-2-ऑल।
  4. ऐल्कोहॉल बनाना: प्रोपीन + पानी, अम्ल उत्प्रेरक के साथ। H सिरे वाले कार्बन पर, OH बीच वाले कार्बन पर जाता है। बनता है प्रोपेन-2-ऑल।
  5. एक अणु के O–H का H अगले अणु के O को खींचता है। ये हाइड्रोजन बंध (नीले) क्वथनांक बढ़ाते हैं और छोटे ऐल्कोहॉल को पानी में घुलने देते हैं।
  6. अब खुद खेलो: ऐल्कोहॉल और अभिकर्मक चुनो। चमकते परमाणु बताते हैं कौन-सा बंध टूटा – O–H, C–O, या O–H के साथ C–H।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

क्या बेंज़िल ऐल्कोहॉल फ़ीनॉल है, क्योंकि इसमें बेंज़ीन वलय है?

नहीं। इसमें –OH, CH₂ कार्बन पर है, वलय पर नहीं। केवल वलय पर सीधे लगा –OH फ़ीनॉल बनाता है।

वर्गीकरण में H की जगह कार्बन क्यों गिनते हैं?

वर्ग बताता है कि –OH वाला कार्बन कितना भीड़ वाला है। कार्बन समूह इलेक्ट्रॉन धकेलते हैं और जगह घेरते हैं; इससे अभिक्रिया की गति बदलती है। H ऐसा नहीं करते।

शाखा को बड़ा नंबर मिले तो भी OH के पास से क्यों गिनें?

–OH मुख्य (क्रियात्मक) समूह है, इसलिए सबसे छोटे नंबर का पहला हक़ उसका है। शाखाएँ बाद में।

प्रोपीन में OH बीच वाले कार्बन पर क्यों जाता है?

H⁺ पहले सिरे वाले कार्बन पर जुड़ता है, जिससे धनावेश बीच वाले कार्बन पर आता है, जिसे दो CH₃ सहारा देते हैं (2° कार्बधनायन, ज़्यादा स्थायी)। फिर पानी वहीं जुड़ता है।

एथेनॉल द्रव है, पर समान द्रव्यमान वाला प्रोपेन गैस क्यों?

एथेनॉल के अणु हाइड्रोजन बंध से एक-दूसरे को पकड़ते हैं। प्रोपेन में केवल कमज़ोर बल हैं। एथेनॉल के अणुओं को अलग करने में ज़्यादा ऊर्जा लगती है।

तृतीयक ऐल्कोहॉल का K₂Cr₂O₇ से ऑक्सीकरण क्यों नहीं होता?

ऑक्सीकरण में O का H और –OH वाले कार्बन का एक H हटता है। तृतीयक कार्बन पर H है ही नहीं, इसलिए सामान्य ऑक्सीकरण नहीं होता।

ऐल्कोहॉल क्या है? वर्गीकरण

ऐल्कोहॉल में –OH (हाइड्रॉक्सिल) समूह ऐसे कार्बन पर लगा होता है जिसके सारे बंध एकल हों (sp³ कार्बन)। सामान्य सूत्र: R–OH।

–OH की गिनती से: मोनोहाइड्रिक (एक –OH, जैसे एथेनॉल), डाइहाइड्रिक (दो, जैसे एथेन-1,2-डाइऑल यानी ग्लाइकॉल) और ट्राइहाइड्रिक (तीन, जैसे ग्लिसरॉल)।

–OH वाले कार्बन (कार्बिनॉल कार्बन) पर कितने दूसरे कार्बन जुड़े हैं, यह गिनो:

ख़ास प्रकार: ऐलिलिक (–OH, C=C के बगल वाले कार्बन पर) और बेंज़िलिक (–OH, बेंज़ीन वलय के बगल वाले कार्बन पर)। अगर –OH सीधे वलय पर हो, तो वह फ़ीनॉल है – अलग परिवार।

नामकरण: ऐल्कोहॉल के नाम

साधारण नाम: ऐल्किल समूह + 'ऐल्कोहॉल' (मेथिल ऐल्कोहॉल, आइसोप्रोपिल ऐल्कोहॉल)। IUPAC नाम के चार कदम:

  1. –OH वाले कार्बन सहित सबसे लंबी शृंखला चुनो।
  2. उस सिरे से नंबर दो जिससे –OH को सबसे छोटा नंबर मिले।
  3. ऐल्केन के अंत का 'e' हटाकर 'ol' (ऑल) लगाओ: प्रोपेन → प्रोपेन-1-ऑल या प्रोपेन-2-ऑल।
  4. शाखाएँ नंबर सहित वर्णक्रम में लिखो: 2-मेथिलप्रोपेन-2-ऑल।

एक से ज़्यादा –OH: डाइऑल, ट्राइऑल – एथेन-1,2-डाइऑल, प्रोपेन-1,2,3-ट्राइऑल (ग्लिसरॉल)। वलय वाले: साइक्लोहेक्सेनॉल।

संरचना

ऐल्कोहॉल के O पर दो बंध और दो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होते हैं। C–O–H कोण लगभग 109° है – एकाकी युग्म बंधों को थोड़ा पास धकेलते हैं।

ऐल्कोहॉल बनाने की विधियाँ

1. ऐल्कीन से

अम्ल-उत्प्रेरित जलयोजन: ऐल्कीन + पानी, H⁺ के साथ। H उस कार्बन पर जाता है जिस पर पहले से ज़्यादा H हैं; OH दूसरे पर (मार्कोवनिकोव)। प्रोपीन → प्रोपेन-2-ऑल। चरण: (i) H⁺ जुड़ता है और कार्बधनायन बनता है, (ii) पानी उस पर हमला करता है, (iii) एक H⁺ निकल जाता है।

हाइड्रोबोरॉनन–ऑक्सीकरण: ऐल्कीन + डाइबोरेन (B₂H₆), फिर H₂O₂/NaOH। OH ज़्यादा H वाले कार्बन पर आता है। प्रोपीन → प्रोपेन-1-ऑल।

2. कार्बोनिल यौगिकों का अपचयन

ऐल्डिहाइड → 1° ऐल्कोहॉल; कीटोन → 2° ऐल्कोहॉल (H₂ + Pd/Ni, NaBH₄ या LiAlH₄)। कार्बोक्सिलिक अम्ल को LiAlH₄ जैसा तेज़ अपचायक चाहिए; उद्योग में पहले एस्टर बनाकर H₂ से अपचयन करते हैं।

3. ग्रीन्यार अभिकर्मक से

RMgX, C=O पर जुड़ता है, फिर पानी से ऐल्कोहॉल मिलता है। मेथेनैल → 1°; दूसरे ऐल्डिहाइड → 2°; कीटोन → 3°। नया C–C बंध बनता है, इसलिए शृंखला लंबी होती है।

भौतिक गुण

क्वथनांक: समान द्रव्यमान के ऐल्केन, हैलोऐल्केन और ईथर से बहुत ज़्यादा, क्योंकि अणुओं के बीच हाइड्रोजन बंध होते हैं। शृंखला लंबी होने पर क्वथनांक बढ़ता है, शाखाएँ बढ़ने पर घटता है।

घुलनशीलता: छोटे ऐल्कोहॉल पानी से H-बंध बनाते हैं, इसलिए किसी भी अनुपात में घुल जाते हैं। कार्बन शृंखला (तेल जैसा भाग) लंबी होने पर घुलनशीलता घटती है।

ऐल्कोहॉल की रासायनिक अभिक्रियाएँ

A. O–H बंध टूटता है (दुर्बल अम्ल की तरह)

Na या K के साथ: 2R–OH + 2Na → 2R–O⁻Na⁺ + H₂। अम्लता: 1° > 2° > 3°। ऐल्कोहॉल पानी से भी दुर्बल अम्ल हैं। एस्टरीकरण: R–OH + R′COOH ⇌ R′COOR + H₂O (अम्ल उत्प्रेरक)।

B. C–O बंध टूटता है

HX के साथ: R–OH + HX → R–X + H₂O। क्रियाशीलता 3° > 2° > 1°। ल्यूकास परीक्षण (सांद्र HCl + निर्जल ZnCl₂): 3° तुरंत गंदला, 2° लगभग 5 मिनट में, 1° कमरे के ताप पर साफ़ रहता है। PCl₃, PCl₅ और SOCl₂ से भी ऐल्किल हैलाइड बनते हैं।

निर्जलीकरण (सांद्र H₂SO₄ या H₃PO₄, गर्म): एथेनॉल 443 K पर → एथीन। आसानी: 3° > 2° > 1°।

C. ऑक्सीकरण

1° → ऐल्डिहाइड (PCC या गर्म Cu, 573 K) → कार्बोक्सिलिक अम्ल (तेज़ KMnO₄/अम्लीय K₂Cr₂O₇)। 2° → कीटोन। 3° सामान्य ऑक्सीकरण नहीं देते; गर्म Cu पर ऐल्कीन बनाते हैं।

व्यापारिक रूप से महत्वपूर्ण ऐल्कोहॉल

मेथेनॉल (काष्ठ स्पिरिट): पहले लकड़ी गर्म करके बनता था; अब CO + 2H₂ से, ZnO–Cr₂O₃ उत्प्रेरक, 573–673 K और 200–300 atm पर। विलायक, फ़ॉर्मेल्डिहाइड बनाने और ईंधन में काम आता है। बहुत ज़हरीला: थोड़ी मात्रा से अंधापन, ज़्यादा से मृत्यु।

एथेनॉल: शीरे, अंगूर या अनाज की शक्कर के किण्वन से। यीस्ट के एंज़ाइम इन्वर्टेज़ (सुक्रोज़ → ग्लूकोज़ + फ़्रक्टोज़) और ज़ाइमेज़ (ग्लूकोज़ → एथेनॉल + CO₂) हवा के बिना काम करते हैं। सैनिटाइज़र, दवाइयों और पेट्रोल मिश्रण में उपयोग। उद्योग वाला एथेनॉल थोड़ा कॉपर सल्फ़ेट और पिरिडीन मिलाकर विकृत (पीने लायक नहीं) किया जाता है।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. (CH₃)₂CH–OH, CH₃CH₂CH₂OH और (CH₃)₃C–OH का वर्गीकरण करो।

चरण 1: –OH वाला कार्बन पहचानो। चरण 2: उस पर जुड़े कार्बन गिनो। (CH₃)₂CH–OH: 2 → द्वितीयक। CH₃CH₂CH₂OH: 1 → प्राथमिक। (CH₃)₃C–OH: 3 → तृतीयक।

2. CH₃–CH(OH)–CH₂–CH₃ का IUPAC नाम लिखो।

सबसे लंबी शृंखला = 4 कार्बन (ब्यूटेन)। बाएँ से गिनने पर –OH स्थिति 2, दाएँ से 3; इसलिए 2। नाम: ब्यूटेन-2-ऑल।

3. (CH₃)₂CH–CH₂–CH₂OH का नाम लिखो।

–OH वाले कार्बन सहित सबसे लंबी शृंखला = 4 C। –OH वाले सिरे से गिनो: C1 पर OH, C3 पर CH₃। नाम: 3-मेथिलब्यूटेन-1-ऑल।

4. प्रोपीन से (a) अम्ल-उत्प्रेरित जलयोजन, (b) हाइड्रोबोरॉनन–ऑक्सीकरण से कौन-सा ऐल्कोहॉल बनेगा?

(a) H⁺ सिरे के CH₂ पर जुड़ता है, बीच के C2 पर अधिक स्थायी द्वितीयक कार्बधनायन बनता है; पानी वहाँ जुड़ता है → प्रोपेन-2-ऑल। (b) बोरॉन सिरे के कार्बन पर जुड़ता है, फिर H₂O₂/OH⁻ उसे OH से बदल देता है → प्रोपेन-1-ऑल।

5. 2-मेथिलप्रोपेन-2-ऑल बनाने के लिए कौन-सा ग्रीन्यार अभिकर्मक और कार्बोनिल यौगिक लोगे?

उत्पाद 3° है, इसलिए कीटोन चाहिए। प्रोपेनोन (CH₃)₂C=O + CH₃MgBr, फिर पानी। CH₃, C=O के कार्बन पर जुड़ता है और O, OH बन जाता है।

6. तीन बोतलों में ब्यूटेन-1-ऑल, ब्यूटेन-2-ऑल और 2-मेथिलप्रोपेन-2-ऑल हैं। इन्हें कैसे पहचानोगे?

कमरे के ताप पर हर एक में ल्यूकास अभिकर्मक डालो। तुरंत गंदलापन → 2-मेथिलप्रोपेन-2-ऑल (3°)। लगभग 5 मिनट में → ब्यूटेन-2-ऑल (2°)। साफ़ रहा → ब्यूटेन-1-ऑल (1°)। गंदलापन अघुलनशील ऐल्किल क्लोराइड का है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. प्रोपेन-2-ऑल है:
2. किस अभिकर्मक से तृतीयक ऐल्कोहॉल तुरंत गंदलापन देता है?
3. समान द्रव्यमान के ऐल्केन से ऐल्कोहॉल का क्वथनांक ज़्यादा होता है, क्योंकि:
4. कीटोन के अपचयन से बनता है:
5. एथेनॉल को सांद्र H₂SO₄ के साथ 443 K पर गर्म करने से बनता है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐल्कोहॉल में क्या अंतर है?

–OH वाले कार्बन पर कितने कार्बन जुड़े हैं: एक (प्राथमिक), दो (द्वितीयक) या तीन (तृतीयक)।

ल्यूकास परीक्षण क्या है?

सांद्र HCl और निर्जल ZnCl₂ का मिश्रण। तृतीयक ऐल्कोहॉल तुरंत गंदला, द्वितीयक लगभग 5 मिनट में, प्राथमिक कमरे के ताप पर साफ़ रहता है।

मेथेनॉल पीना ख़तरनाक क्यों है?

शरीर इसे मेथेनैल और मेथेनॉइक अम्ल में बदल देता है, जो आँख की तंत्रिका को नुकसान पहुँचाते हैं – थोड़ी मात्रा भी अंधापन या मृत्यु ला सकती है।

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