ऐल्कोहॉल क्या है? वर्गीकरण
ऐल्कोहॉल में –OH (हाइड्रॉक्सिल) समूह ऐसे कार्बन पर लगा होता है जिसके सारे बंध एकल हों (sp³ कार्बन)। सामान्य सूत्र: R–OH।
–OH की गिनती से: मोनोहाइड्रिक (एक –OH, जैसे एथेनॉल), डाइहाइड्रिक (दो, जैसे एथेन-1,2-डाइऑल यानी ग्लाइकॉल) और ट्राइहाइड्रिक (तीन, जैसे ग्लिसरॉल)।
–OH वाले कार्बन (कार्बिनॉल कार्बन) पर कितने दूसरे कार्बन जुड़े हैं, यह गिनो:
- प्राथमिक (1°): एक कार्बन – जैसे एथेनॉल CH₃CH₂OH।
- द्वितीयक (2°): दो कार्बन – जैसे प्रोपेन-2-ऑल (CH₃)₂CHOH।
- तृतीयक (3°): तीन कार्बन – जैसे 2-मेथिलप्रोपेन-2-ऑल (CH₃)₃COH।
ख़ास प्रकार: ऐलिलिक (–OH, C=C के बगल वाले कार्बन पर) और बेंज़िलिक (–OH, बेंज़ीन वलय के बगल वाले कार्बन पर)। अगर –OH सीधे वलय पर हो, तो वह फ़ीनॉल है – अलग परिवार।
नामकरण: ऐल्कोहॉल के नाम
साधारण नाम: ऐल्किल समूह + 'ऐल्कोहॉल' (मेथिल ऐल्कोहॉल, आइसोप्रोपिल ऐल्कोहॉल)। IUPAC नाम के चार कदम:
- –OH वाले कार्बन सहित सबसे लंबी शृंखला चुनो।
- उस सिरे से नंबर दो जिससे –OH को सबसे छोटा नंबर मिले।
- ऐल्केन के अंत का 'e' हटाकर 'ol' (ऑल) लगाओ: प्रोपेन → प्रोपेन-1-ऑल या प्रोपेन-2-ऑल।
- शाखाएँ नंबर सहित वर्णक्रम में लिखो: 2-मेथिलप्रोपेन-2-ऑल।
एक से ज़्यादा –OH: डाइऑल, ट्राइऑल – एथेन-1,2-डाइऑल, प्रोपेन-1,2,3-ट्राइऑल (ग्लिसरॉल)। वलय वाले: साइक्लोहेक्सेनॉल।
संरचना
ऐल्कोहॉल के O पर दो बंध और दो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होते हैं। C–O–H कोण लगभग 109° है – एकाकी युग्म बंधों को थोड़ा पास धकेलते हैं।
ऐल्कोहॉल बनाने की विधियाँ
1. ऐल्कीन से
अम्ल-उत्प्रेरित जलयोजन: ऐल्कीन + पानी, H⁺ के साथ। H उस कार्बन पर जाता है जिस पर पहले से ज़्यादा H हैं; OH दूसरे पर (मार्कोवनिकोव)। प्रोपीन → प्रोपेन-2-ऑल। चरण: (i) H⁺ जुड़ता है और कार्बधनायन बनता है, (ii) पानी उस पर हमला करता है, (iii) एक H⁺ निकल जाता है।
हाइड्रोबोरॉनन–ऑक्सीकरण: ऐल्कीन + डाइबोरेन (B₂H₆), फिर H₂O₂/NaOH। OH ज़्यादा H वाले कार्बन पर आता है। प्रोपीन → प्रोपेन-1-ऑल।
2. कार्बोनिल यौगिकों का अपचयन
ऐल्डिहाइड → 1° ऐल्कोहॉल; कीटोन → 2° ऐल्कोहॉल (H₂ + Pd/Ni, NaBH₄ या LiAlH₄)। कार्बोक्सिलिक अम्ल को LiAlH₄ जैसा तेज़ अपचायक चाहिए; उद्योग में पहले एस्टर बनाकर H₂ से अपचयन करते हैं।
3. ग्रीन्यार अभिकर्मक से
RMgX, C=O पर जुड़ता है, फिर पानी से ऐल्कोहॉल मिलता है। मेथेनैल → 1°; दूसरे ऐल्डिहाइड → 2°; कीटोन → 3°। नया C–C बंध बनता है, इसलिए शृंखला लंबी होती है।
भौतिक गुण
क्वथनांक: समान द्रव्यमान के ऐल्केन, हैलोऐल्केन और ईथर से बहुत ज़्यादा, क्योंकि अणुओं के बीच हाइड्रोजन बंध होते हैं। शृंखला लंबी होने पर क्वथनांक बढ़ता है, शाखाएँ बढ़ने पर घटता है।
घुलनशीलता: छोटे ऐल्कोहॉल पानी से H-बंध बनाते हैं, इसलिए किसी भी अनुपात में घुल जाते हैं। कार्बन शृंखला (तेल जैसा भाग) लंबी होने पर घुलनशीलता घटती है।
ऐल्कोहॉल की रासायनिक अभिक्रियाएँ
A. O–H बंध टूटता है (दुर्बल अम्ल की तरह)
Na या K के साथ: 2R–OH + 2Na → 2R–O⁻Na⁺ + H₂। अम्लता: 1° > 2° > 3°। ऐल्कोहॉल पानी से भी दुर्बल अम्ल हैं। एस्टरीकरण: R–OH + R′COOH ⇌ R′COOR + H₂O (अम्ल उत्प्रेरक)।
B. C–O बंध टूटता है
HX के साथ: R–OH + HX → R–X + H₂O। क्रियाशीलता 3° > 2° > 1°। ल्यूकास परीक्षण (सांद्र HCl + निर्जल ZnCl₂): 3° तुरंत गंदला, 2° लगभग 5 मिनट में, 1° कमरे के ताप पर साफ़ रहता है। PCl₃, PCl₅ और SOCl₂ से भी ऐल्किल हैलाइड बनते हैं।
निर्जलीकरण (सांद्र H₂SO₄ या H₃PO₄, गर्म): एथेनॉल 443 K पर → एथीन। आसानी: 3° > 2° > 1°।
C. ऑक्सीकरण
1° → ऐल्डिहाइड (PCC या गर्म Cu, 573 K) → कार्बोक्सिलिक अम्ल (तेज़ KMnO₄/अम्लीय K₂Cr₂O₇)। 2° → कीटोन। 3° सामान्य ऑक्सीकरण नहीं देते; गर्म Cu पर ऐल्कीन बनाते हैं।
व्यापारिक रूप से महत्वपूर्ण ऐल्कोहॉल
मेथेनॉल (काष्ठ स्पिरिट): पहले लकड़ी गर्म करके बनता था; अब CO + 2H₂ से, ZnO–Cr₂O₃ उत्प्रेरक, 573–673 K और 200–300 atm पर। विलायक, फ़ॉर्मेल्डिहाइड बनाने और ईंधन में काम आता है। बहुत ज़हरीला: थोड़ी मात्रा से अंधापन, ज़्यादा से मृत्यु।
एथेनॉल: शीरे, अंगूर या अनाज की शक्कर के किण्वन से। यीस्ट के एंज़ाइम इन्वर्टेज़ (सुक्रोज़ → ग्लूकोज़ + फ़्रक्टोज़) और ज़ाइमेज़ (ग्लूकोज़ → एथेनॉल + CO₂) हवा के बिना काम करते हैं। सैनिटाइज़र, दवाइयों और पेट्रोल मिश्रण में उपयोग। उद्योग वाला एथेनॉल थोड़ा कॉपर सल्फ़ेट और पिरिडीन मिलाकर विकृत (पीने लायक नहीं) किया जाता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- संतृप्त मोनोहाइड्रिक ऐल्कोहॉल: CₙH₂ₙ₊₁OH
- जलयोजन: CH₃CH=CH₂ + H₂O (H⁺) → CH₃CH(OH)CH₃
- हाइड्रोबोरॉनन–ऑक्सीकरण: CH₃CH=CH₂ → CH₃CH₂CH₂OH
- 2R–OH + 2Na → 2R–ONa + H₂
- ल्यूकास परीक्षण की गति: 3° > 2° > 1°
- निर्जलीकरण: C₂H₅OH (सांद्र H₂SO₄, 443 K) → CH₂=CH₂ + H₂O
- ऑक्सीकरण: 1° → ऐल्डिहाइड → अम्ल; 2° → कीटोन; 3° → सामान्य ऑक्सीकरण नहीं
- ग्रीन्यार: HCHO → 1°, RCHO → 2°, R₂CO → 3° ऐल्कोहॉल
हल किए गए उदाहरण
1. (CH₃)₂CH–OH, CH₃CH₂CH₂OH और (CH₃)₃C–OH का वर्गीकरण करो।
चरण 1: –OH वाला कार्बन पहचानो। चरण 2: उस पर जुड़े कार्बन गिनो। (CH₃)₂CH–OH: 2 → द्वितीयक। CH₃CH₂CH₂OH: 1 → प्राथमिक। (CH₃)₃C–OH: 3 → तृतीयक।
2. CH₃–CH(OH)–CH₂–CH₃ का IUPAC नाम लिखो।
सबसे लंबी शृंखला = 4 कार्बन (ब्यूटेन)। बाएँ से गिनने पर –OH स्थिति 2, दाएँ से 3; इसलिए 2। नाम: ब्यूटेन-2-ऑल।
3. (CH₃)₂CH–CH₂–CH₂OH का नाम लिखो।
–OH वाले कार्बन सहित सबसे लंबी शृंखला = 4 C। –OH वाले सिरे से गिनो: C1 पर OH, C3 पर CH₃। नाम: 3-मेथिलब्यूटेन-1-ऑल।
4. प्रोपीन से (a) अम्ल-उत्प्रेरित जलयोजन, (b) हाइड्रोबोरॉनन–ऑक्सीकरण से कौन-सा ऐल्कोहॉल बनेगा?
(a) H⁺ सिरे के CH₂ पर जुड़ता है, बीच के C2 पर अधिक स्थायी द्वितीयक कार्बधनायन बनता है; पानी वहाँ जुड़ता है → प्रोपेन-2-ऑल। (b) बोरॉन सिरे के कार्बन पर जुड़ता है, फिर H₂O₂/OH⁻ उसे OH से बदल देता है → प्रोपेन-1-ऑल।
5. 2-मेथिलप्रोपेन-2-ऑल बनाने के लिए कौन-सा ग्रीन्यार अभिकर्मक और कार्बोनिल यौगिक लोगे?
उत्पाद 3° है, इसलिए कीटोन चाहिए। प्रोपेनोन (CH₃)₂C=O + CH₃MgBr, फिर पानी। CH₃, C=O के कार्बन पर जुड़ता है और O, OH बन जाता है।
6. तीन बोतलों में ब्यूटेन-1-ऑल, ब्यूटेन-2-ऑल और 2-मेथिलप्रोपेन-2-ऑल हैं। इन्हें कैसे पहचानोगे?
कमरे के ताप पर हर एक में ल्यूकास अभिकर्मक डालो। तुरंत गंदलापन → 2-मेथिलप्रोपेन-2-ऑल (3°)। लगभग 5 मिनट में → ब्यूटेन-2-ऑल (2°)। साफ़ रहा → ब्यूटेन-1-ऑल (1°)। गंदलापन अघुलनशील ऐल्किल क्लोराइड का है।
आम गलतियाँ
- वर्गीकरण करते समय –OH वाले कार्बन पर कार्बन की जगह H गिनना।
- बेंज़ीन वलय पर सीधे –OH वाले यौगिक को ऐल्कोहॉल कहना – वह फ़ीनॉल है। बेंज़िल ऐल्कोहॉल (C₆H₅CH₂OH) ऐल्कोहॉल है क्योंकि OH, CH₂ पर है।
- यह कहना कि 3° ऐल्कोहॉल सबसे अम्लीय है। उल्टा है: अम्लता 1° > 2° > 3°, जबकि HX से क्रियाशीलता और निर्जलीकरण 3° > 2° > 1°।
- प्रोपीन के उत्पाद उलझा देना: अम्ल जलयोजन → प्रोपेन-2-ऑल; हाइड्रोबोरॉनन–ऑक्सीकरण → प्रोपेन-1-ऑल।