Russia 10 класс Chemistry (advanced)
अध्याय: 5
1. Foundations of organic chemistry
Carbon atom and hybridisation · Structure theory and isomerism · Reaction mechanisms
- संयोजकता आबंध सिद्धांत और संकरण – संयोजकता आबंध सिद्धांत कहता है कि सहसंयोजी आबंध तब बनता है जब दो परमाणुओं के अर्धपूरित कक्षक अतिव्यापन करते हैं और दोनों इलेक्ट्रॉन उलटे चक्रण के साथ युग्म बनाते हैं। आमने-सामने अतिव्यापन से मज़बूत σ (सिग्मा) आबंध बनता है; p कक्षकों के बगल से अतिव्यापन से कमज़ोर π (पाई) आबंध। असली आकृतियाँ समझाने के लिए परमाणु पहले अपने कक्षक मिलाकर बराबर संकर कक्षक बनाता है: sp (रैखिक, 180°), sp² (त्रिकोणीय समतलीय, 120°), sp³ (चतुष्फलकीय, 109.5°), sp³d (त्रिकोणीय द्विपिरामिडी) और sp³d² (अष्टफलकीय)।
- कार्बनिक यौगिकों की IUPAC नामपद्धति और समावयवता – कार्बनिक यौगिक लाखों हैं, इसलिए हर एक का साफ़ और अलग नाम चाहिए। IUPAC पद्धति में नाम के तीन भाग हैं: मूल शब्द (मुख्य शृंखला में कार्बनों की संख्या), अनुलग्न (आबंध का प्रकार और मुख्य क्रियात्मक समूह) और पूर्वलग्न (शाखाएँ)। मुख्य समूह वाली सबसे लंबी शृंखला चुनो, ऐसे अंक दो कि मुख्य समूह और शाखाओं को सबसे छोटे अंक मिलें, और शाखाओं को वर्णक्रम में लिखो। समावयवी वे यौगिक हैं जिनका अणुसूत्र एक है पर बनावट अलग। संरचनात्मक समावयवियों में परमाणु अलग ढंग से जुड़े होते हैं (शृंखला, स्थिति, क्रियात्मक समूह, मध्यावयवता)। त्रिविम समावयवियों में जुड़ाव एक जैसा पर 3D व्यवस्था अलग होती है (ज्यामितीय सिस/ट्रांस और प्रकाशिक)।
- कार्बनिक अभिक्रिया क्रियाविधि की मूल बातें – अभिक्रिया क्रियाविधि एक-एक चरण की कहानी है: कौन-से आबंध टूटते हैं, कौन-से बनते हैं और इलेक्ट्रॉन कहाँ जाते हैं। सहसंयोजी आबंध दो तरह से टूटता है। समांश विखंडन में हर परमाणु एक इलेक्ट्रॉन लेता है और मुक्त मूलक बनते हैं। विषमांश विखंडन में एक परमाणु दोनों इलेक्ट्रॉन ले लेता है, जिससे कार्बधनायन (C पर + आवेश) और कार्बऋणायन या ऋणायन बनते हैं। इलेक्ट्रॉन की कमी वाले, इलेक्ट्रॉन ढूँढने वाले कण इलेक्ट्रॉनस्नेही हैं; इलेक्ट्रॉन देने वाले कण नाभिकस्नेही हैं। अणु के अंदर इलेक्ट्रॉनों की चाल चार प्रभाव तय करते हैं: प्रेरणिक प्रभाव (σ आबंधों पर खिंचाव), अनुनाद प्रभाव (π इलेक्ट्रॉनों का फैलना), इलेक्ट्रोमेरी प्रभाव (अभिकर्मक के हमले पर अस्थायी पूरा खिसकना) और अतिसंयुग्मन (C–H के σ इलेक्ट्रॉनों का पास के खाली p कक्षक या π आबंध में फैलना)।
2. Hydrocarbons
Alkanes and cycloalkanes · Alkenes · Dienes · Alkynes · Arenes · Halogen derivatives · Hydrocarbon sources
- ऐल्केन – ऐल्केन ऐसे हाइड्रोकार्बन हैं जिनमें केवल एकल C–C आबंध होते हैं। इनका सामान्य सूत्र CnH2n+2 है। इन्हें ऐल्कीन में हाइड्रोजन जोड़कर, वुर्ट्ज़ अभिक्रिया से, ऐल्किल हैलाइड के अपचयन से और विकार्बोक्सिलन से बनाते हैं। ये अध्रुवीय होते हैं, जलने पर बहुत ऊष्मा देते हैं और प्रकाश में H की जगह Cl ले लेते हैं। C–C आबंध के चारों ओर घूमने से सांतरित और ग्रहणित आकार बनते हैं, जिन्हें संरूपण कहते हैं।
- ऐल्कीन – ऐल्कीन वे हाइड्रोकार्बन हैं जिनमें एक C=C द्वि-आबंध होता है; सूत्र CₙH₂ₙ। द्वि-आबंध = एक σ + एक π आबंध, इसलिए उसके आसपास अणु चपटा है और घूम नहीं सकता। इसी से समपक्ष (cis) और विपक्ष (trans) समावयवी बनते हैं। ऐल्कीन छोटे अणु (H₂O, HX, X₂) हटाकर या ऐल्काइन में आंशिक H₂ जोड़कर बनते हैं। ये मुख्य रूप से योगज अभिक्रियाएँ करते हैं: H₂, X₂, HX (मारकोनीकॉफ़ नियम, या परॉक्साइड के साथ उल्टा), पानी, ओज़ोन, KMnO₄ और बहुलकीकरण।
- ऐल्काइन – ऐल्काइन में C≡C त्रि-आबंध होता है; सूत्र CₙH₂ₙ₋₂। त्रि-आबंध के दोनों कार्बन sp संकरित हैं, इसलिए अणु सीधी रेखा है। त्रि-आबंध वाले कार्बन पर लगा H हल्का अम्लीय है, क्योंकि sp कार्बन इलेक्ट्रॉनों को कसकर पकड़ता है: NaNH₂ जैसे प्रबल क्षारक उसे हटा देते हैं। त्रि-आबंध दो बार खुल सकता है, इसलिए ऐल्काइन H₂, X₂ या HX के दो अणु जोड़ते हैं। पानी (Hg²⁺ उत्प्रेरक) से ऐल्डिहाइड या कीटोन बनते हैं, और तीन एथाइन जुड़कर बेंज़ीन बनाते हैं।
- बेंज़ीन और ऐरोमैटिकता – बेंज़ीन (C₆H₆) छह sp² कार्बनों का चपटा वलय है। इसके छह π इलेक्ट्रॉन पूरे वलय में फैले हैं, इसलिए सभी C–C आबंध बराबर हैं और वलय बहुत स्थायी है। ऐसा वलय ऐरोमैटिक कहलाता है जब वह चक्रीय, समतलीय, पूर्ण संयुग्मित हो और उसमें 4n + 2 π इलेक्ट्रॉन हों (हकेल नियम)। बेंज़ीन योग की जगह इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन (नाइट्रीकरण, हैलोजनीकरण, सल्फ़ोनीकरण, फ़्रीडेल–क्राफ़्ट्स) पसंद करती है, क्योंकि इससे स्थायी वलय बचा रहता है। वलय पर पहले से लगा समूह तय करता है कि अगला समूह ऑर्थो/पैरा जाएगा या मेटा। बेंज़ीन और संगलित-वलय हाइड्रोकार्बन विषैले हैं और कैंसर कर सकते हैं।
- हैलोऐल्केन – हैलोऐल्केन वह ऐल्केन है जिसमें एक हाइड्रोजन की जगह हैलोजन (X) लगा हो (R–X)। C–X आबंध ध्रुवीय है: कार्बन पर हल्का धन आवेश होता है, इसलिए नाभिकस्नेही उस पर हमला करते हैं। अभिक्रियाएँ तीन तरह की: SN2 (एक चरण, पीछे से हमला, प्रतीपन; 1° के लिए अच्छी), SN1 (दो चरण, चपटा कार्बोधनायन, रेसेमिक उत्पाद; 3° के लिए अच्छी) और विलोपन (ऐल्कोहॉली KOH से ऐल्कीन)।
3. Oxygen-containing compounds
Alcohols and ethers · Phenol · Aldehydes and ketones · Carboxylic acids and derivatives · Carbohydrates
- ऐल्कोहॉल – ऐल्कोहॉल वह कार्बनिक यौगिक है जिसमें –OH समूह एक sp³ कार्बन पर लगा हो (R–OH)। –OH वाले कार्बन पर जुड़े कार्बन गिनकर इसे प्राथमिक (1°), द्वितीयक (2°) या तृतीयक (3°) कहते हैं। नाम: ऐल्केन का 'e' हटाकर 'ऑल' (ol), –OH को सबसे छोटा नंबर। बनाने के तरीके: ऐल्कीन का जलयोजन या हाइड्रोबोरॉनन–ऑक्सीकरण, ऐल्डिहाइड/कीटोन/अम्ल का अपचयन, ग्रीन्यार अभिकर्मक। हाइड्रोजन बंध के कारण क्वथनांक ऊँचा और पानी में घुलनशील। अभिक्रियाओं में या तो O–H टूटता है (Na, एस्टरीकरण) या C–O (HX, निर्जलीकरण); 1° और 2° का ऑक्सीकरण होता है। मेथेनॉल और एथेनॉल मुख्य व्यापारिक ऐल्कोहॉल हैं।
- फ़ीनॉल – फ़ीनॉल में –OH सीधे बेंज़ीन वलय के कार्बन पर लगा होता है। इसे क्लोरोबेंज़ीन (NaOH, 623 K, 300 atm), बेंज़ीनसल्फ़ोनिक अम्ल, डाइऐज़ोनियम लवण या क्यूमीन से बनाते हैं। फ़ीनॉल, ऐल्कोहॉल और पानी से ज़्यादा अम्लीय है क्योंकि फ़ीनॉक्साइड आयन का ऋण आवेश वलय पर फैल जाता है; –NO₂ जैसे इलेक्ट्रॉन खींचने वाले समूह (ऑर्थो/पैरा पर) अम्लता बढ़ाते हैं, –CH₃ जैसे इलेक्ट्रॉन देने वाले घटाते हैं। –OH वलय की ऑर्थो और पैरा स्थितियों को सक्रिय करता है: ब्रोमीन जल → 2,4,6-ट्राइब्रोमोफ़ीनॉल, तनु HNO₃ → o- और p-नाइट्रोफ़ीनॉल, NaOH + CO₂ → सैलिसिलिक अम्ल (कोल्बे), CHCl₃ + NaOH → सैलिसिलैल्डिहाइड (राइमर–टीमान)।
- ऐल्डिहाइड और कीटोन: संरचना, बनाना और अभिक्रियाएँ – ऐल्डिहाइड और कीटोन दोनों में कार्बोनिल समूह C=O होता है। ऐल्डिहाइड में C=O वाले कार्बन पर कम से कम एक H होता है (−CHO)। कीटोन में उस कार्बन पर दो कार्बन समूह होते हैं (−CO−)। C=O बंध ध्रुवीय है: C थोड़ा धनात्मक, O थोड़ा ऋणात्मक। इसलिए इलेक्ट्रॉन से भरे कण (नाभिकस्नेही) कार्बन पर हमला करते हैं। यही एक बात ज़्यादातर अभिक्रियाएँ समझा देती है: HCN, NaHSO₃, ऐल्कोहॉल और अमोनिया व्युत्पन्नों का योग। ऐल्डिहाइड आसानी से ऑक्सीकृत होते हैं (टॉलेन्स, फेलिंग परीक्षण), कीटोन नहीं। C=O के बगल वाले कार्बन का H (α-H) थोड़ा अम्लीय होता है, इसी से ऐल्डोल संघनन होता है। जिन ऐल्डिहाइड में α-H नहीं, वे कैनिज़ारो अभिक्रिया देते हैं।
- कार्बोक्सिलिक अम्ल: कार्बोक्सिल समूह, अम्लता और अभिक्रियाएँ – कार्बोक्सिलिक अम्ल में कार्बोक्सिल समूह −COOH होता है: एक ही कार्बन पर C=O और O−H। यह H⁺ दे सकता है, और बचा हुआ आयन (कार्बोक्सिलेट, −COO⁻) स्थिर होता है क्योंकि उसका ऋण आवेश दोनों ऑक्सीजन में बराबर बँटा होता है। इसी कारण ये फ़ीनॉल और ऐल्कोहॉल से ज़्यादा अम्लीय हैं (पर HCl जैसे खनिज अम्लों से कमज़ोर)। इलेक्ट्रॉन खींचने वाले समूह (Cl, F, NO₂) अम्ल को प्रबल बनाते हैं, इलेक्ट्रॉन धकेलने वाले (ऐल्किल) दुर्बल। इन्हें ऐल्कोहॉल, ऐल्डिहाइड या ऐल्किलबेंज़ीन के ऑक्सीकरण से, नाइट्राइल, एस्टर और ऐमाइड के जल-अपघटन से, या ग्रिन्यार अभिकर्मक और CO₂ से बनाते हैं। मुख्य अभिक्रियाएँ: NaHCO₃ से लवण (CO₂ के बुलबुले), एस्टरीकरण, ऐसिल क्लोराइड और ऐनहाइड्राइड बनना, ऐल्कोहॉल में अपचयन, विकार्बोक्सिलन और HVZ अभिक्रिया।
- कार्बोहाइड्रेट: वर्गीकरण, ग्लूकोज़, डाइसैकेराइड और पॉलीसैकेराइड – कार्बोहाइड्रेट यानी शर्कराएँ और शर्करा से बने बड़े अणु। रसायन की भाषा में ये पॉलीहाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड या कीटोन हैं (बहुत सारे –OH और एक C=O), या वे पदार्थ जो जल-अपघटन पर ऐसे अणु देते हैं। इकाइयों की गिनती से इन्हें बाँटते हैं: एक (मोनोसैकेराइड), दो से दस (ऑलिगोसैकेराइड), बहुत सारी (पॉलीसैकेराइड)। ग्लूकोज़ छह कार्बन वाला ऐल्डोज़ है, फ्रक्टोज़ कीटोज़। दो इकाइयाँ –O– पुल (ग्लाइकोसाइडी बंध) से जुड़कर सुक्रोज़, माल्टोज़, लैक्टोज़ बनाती हैं; सैकड़ों जुड़कर स्टार्च, सेलुलोज़, ग्लाइकोजन।
4. Nitrogen-containing compounds
Amines and aniline · Amino acids and proteins · Heterocycles and nucleic acids
- ऐमीन: संरचना, नामकरण, बनाना, क्षारकता और अभिक्रियाएँ – ऐमीन यानी अमोनिया, जिसके एक, दो या तीन H की जगह कार्बन समूह लग गए। N पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बचा रहता है, इसलिए ऐमीन क्षार हैं। N पर लगे C गिनो: 1, 2 या 3 → प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक। बनाने के तरीके: नाइट्रो, नाइट्राइल या एमाइड का अपचयन, ऐल्किल हैलाइड + NH₃, गैब्रिएल (केवल 1°), हॉफमान ब्रोमेमाइड (एक C कम)। ऐल्किल समूह क्षारकता बढ़ाते हैं; ऐनिलीन का वलय घटाता है। मुख्य अभिक्रियाएँ: अम्ल से लवण, ऐसीटिलन, कार्बिलऐमीन परीक्षण, हिन्सबर्ग परीक्षण, नाइट्रस अम्ल और ऐनिलीन के वलय पर प्रतिस्थापन।
- प्रोटीन और एंज़ाइम: ऐमीनो अम्ल, पेप्टाइड बंध, संरचना और विकृतीकरण – प्रोटीन ऐमीनो अम्लों की लंबी शृंखलाएँ हैं। हर ऐमीनो अम्ल के एक कार्बन पर ऐमीनो समूह (–NH₂), अम्ल समूह (–COOH), एक हाइड्रोजन और एक पार्श्व समूह R होता है। एक का –COOH अगले के –NH₂ से पानी निकालकर जुड़ता है: यह पेप्टाइड बंध (–CO–NH–) है। ऐमीनो अम्लों का क्रम प्राथमिक संरचना; कुंडली और परत द्वितीयक; पूरा 3D मोड़ तृतीयक; कई शृंखलाएँ साथ में चतुर्धातुक संरचना। गर्मी, अम्ल या ऐल्कोहॉल मोड़ खोल देते हैं (विकृतीकरण)। एंज़ाइम ज़्यादातर प्रोटीन हैं जो शरीर की अभिक्रियाएँ तेज़ करते हैं।
- विटामिन, न्यूक्लिक अम्ल और हॉर्मोन: प्रकार, कार्य, DNA और RNA – विटामिन छोटे कार्बनिक यौगिक हैं जो भोजन से बहुत थोड़ी मात्रा में चाहिए; A, D, E, K वसा में और B, C पानी में घुलते हैं, और हर एक की कमी से एक खास रोग होता है। न्यूक्लिक अम्ल (DNA और RNA) न्यूक्लियोटाइड की लंबी शृंखलाएँ हैं। हर न्यूक्लियोटाइड = पेंटोज़ शर्करा + फॉस्फेट + नाइट्रोजनी क्षार। DNA में डीऑक्सीराइबोज़, क्षार A, G, C, T और द्विकुंडली में दो लड़ियाँ, जहाँ A–T और G–C जोड़े बनते हैं। RNA में राइबोज़, T की जगह U, और प्रायः एक लड़ी। हॉर्मोन ग्रंथियों के बनाए रासायनिक संदेशवाहक हैं: स्टेरॉयड, प्रोटीन/पेप्टाइड या ऐमीनो अम्ल व्युत्पन्न।
5. Polymers
Polymer materials
- बहुलक (Polymers) – बहुलक एक विशाल अणु है जो कई छोटे अणुओं (एकलकों) को लंबी श्रृंखला में जोड़कर बनता है। योगात्मक बहुलकीकरण में C=C द्विबंध वाले एकलक खुलकर जुड़ते हैं और कुछ नहीं निकलता (एथीन → पॉलीएथीन)। संघनन बहुलकीकरण में दोनों सिरों पर क्रियाशील समूह वाले दो तरह के एकलक जुड़ते हैं और हर जोड़ पर पानी जैसा छोटा अणु निकलता है (नायलॉन, पॉलिएस्टर)। प्रकृति भी बहुलक बनाती है: स्टार्च, सेलुलोज़, प्रोटीन, DNA, रबर। अलग-अलग श्रृंखलाएँ थर्मोप्लास्टिक बनाती हैं जो पिघलकर पुनः चक्रित होते हैं; अनुप्रस्थ-बंधित श्रृंखलाएँ थर्मोसेट बनाती हैं जो कभी नहीं पिघलते। ज़्यादातर प्लास्टिक सड़ते नहीं, इसलिए कम इस्तेमाल, दोबारा इस्तेमाल और पुनः चक्रण ज़रूरी है।