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संयोजकता आबंध सिद्धांत और संकरण

संयोजकता आबंध सिद्धांत कहता है कि सहसंयोजी आबंध तब बनता है जब दो परमाणुओं के अर्धपूरित कक्षक अतिव्यापन करते हैं और दोनों इलेक्ट्रॉन उलटे चक्रण के साथ युग्म बनाते हैं। आमने-सामने अतिव्यापन से मज़बूत σ (सिग्मा) आबंध बनता है; p कक्षकों के बगल से अतिव्यापन से कमज़ोर π (पाई) आबंध। असली आकृतियाँ समझाने के लिए परमाणु पहले अपने कक्षक मिलाकर बराबर संकर कक्षक बनाता है: sp (रैखिक, 180°), sp² (त्रिकोणीय समतलीय, 120°), sp³ (चतुष्फलकीय, 109.5°), sp³d (त्रिकोणीय द्विपिरामिडी) और sp³d² (अष्टफलकीय)।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. दो H परमाणु पास आते हैं। उनके गोल 1s कक्षक एक-दूसरे पर चढ़ने (अतिव्यापन) लगते हैं। बीच का चमकीला भाग इलेक्ट्रॉन युग्म रखता है: यही H–H आबंध है।
  2. बाईं ओर दो p कक्षक सिरे से सिरा मिलते हैं: σ आबंध। दाईं ओर दो p कक्षक बगल से, रेखा के ऊपर और नीचे मिलते हैं: π आबंध।
  3. कार्बन अपना एक s और तीन p कक्षक मिलाता है। चार बराबर sp³ कक्षक बनते हैं, जो चतुष्फलक के कोनों की ओर 109.5° पर हैं।
  4. अब कार्बन सिर्फ़ एक s और दो p मिलाता है। तीन sp² कक्षक समतल त्रिभुज में 120° पर बनते हैं। एक p कक्षक (नीला) बचता है, जो π आबंध बनाता है।
  5. एक s और एक p मिलाने से दो sp कक्षक बनते हैं, 180° पर। दो p कक्षक बचते हैं, दो π आबंधों के लिए, जैसे एथाइन में।
  6. अब तुम्हारी बारी: sp, sp², sp³, sp³d या sp³d² चुनो। संकर कक्षक गिनो और कोण व उदाहरण मिलाओ।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

कक्षकों के अतिव्यापन पर ऊर्जा क्यों घटती है?

साझा इलेक्ट्रॉन युग्म दोनों नाभिकों के बीच रहता है और दोनों उसे खींचते हैं। 74 pm पर आकर्षण, प्रतिकर्षण से सबसे ज़्यादा जीतता है, इसलिए ऊर्जा सबसे कम।

π आबंध σ से कमज़ोर क्यों है?

बगल से अतिव्यापन, आमने-सामने से कम जगह घेरता है। कम अतिव्यापन = कमज़ोर आबंध।

कार्बन s और p को जैसे हैं वैसे क्यों नहीं इस्तेमाल करता?

शुद्ध s और p से एक अलग आबंध और तीन 90° वाले आबंध बनते। असली CH₄ में चार बराबर आबंध 109.5° पर हैं। बराबर sp³ कक्षक यही समझाते हैं।

sp² में न लगे p कक्षक का क्या होता है?

वह शुद्ध p कक्षक बनकर समतल त्रिभुज के लंबवत रहता है। पड़ोसी के p से बगल से मिलकर द्विआबंध का π आबंध बनाता है।

एथाइन सीधा अणु क्यों है?

हर कार्बन sp है: दोनों संकर कक्षक ठीक उलटी दिशा में, 180° पर। दो शुद्ध p कक्षक अक्ष के चारों ओर दो π आबंध बनाते हैं।

d कक्षक कहाँ आते हैं?

तीसरे आवर्त से आगे के परमाणु (P, S) d कक्षक मिलाकर sp³d (5 कक्षक) और sp³d² (6 कक्षक) बनाते हैं। खेल में इन्हें चुनो।

संयोजकता आबंध सिद्धांत और कक्षकों का अतिव्यापन

हाइटलर और लंदन (1927) ने H₂ का आबंध समझाया; पॉलिंग और स्लेटर ने संयोजकता आबंध (VB) सिद्धांत बनाया। मुख्य बात:

अतिव्यापन धनात्मक (समान कला, आबंध बनता है), ऋणात्मक (उलटी कला, आबंध नहीं) या शून्य (कक्षक समकोण पर) हो सकता है।

सिग्मा (σ) और पाई (π) आबंध

σ आबंधπ आबंध
अतिव्यापनआमने-सामने, नाभिकों को जोड़ने वाली रेखा परबगल से, रेखा के ऊपर-नीचे
कक्षकs–s, s–p, p–p (सिरे से), संकर कक्षकसिर्फ़ p–p (या p–d) बगल से
शक्तिज़्यादा मज़बूतकमज़ोर
घूर्णनआबंध के चारों ओर मुक्त घूर्णनमुक्त घूर्णन नहीं
अकेला?हाँसिर्फ़ σ के साथ

एकल आबंध = 1σ। द्विआबंध = 1σ + 1π। त्रिआबंध = 1σ + 2π।

संकरण

कार्बन का विन्यास 2s² 2p² है। शुद्ध कक्षक CH₄ के चार बराबर, 109.5° वाले C–H आबंध नहीं समझा सकते। पॉलिंग का विचार: परमाणु पहले एक इलेक्ट्रॉन उत्तेजित करता है (2s¹ 2p³), फिर लगभग बराबर ऊर्जा वाले कक्षक मिलाकर उतने ही नए, बराबर संकर कक्षक बनाता है।

प्रकारमिलेआकृतिकोणउदाहरण
sps + pरैखिक180°BeCl₂, C₂H₂
sp²s + 2pत्रिकोणीय समतलीय120°BF₃, C₂H₄
sp³s + 3pचतुष्फलकीय109.5°CH₄, C₂H₆; NH₃, H₂O
sp³ds + 3p + dत्रिकोणीय द्विपिरामिडी120°, 90°PCl₅
sp³d²s + 3p + 2dअष्टफलकीय90°SF₆

s-लक्षण: sp 50 %, sp² 33 %, sp³ 25 %। ज़्यादा s-लक्षण → छोटा, मज़बूत आबंध।

उदाहरण: एथेन, एथीन, एथाइन, PCl₅, SF₆

एथेन C₂H₆: हर C sp³। C–C σ (sp³–sp³) और छह C–H σ (sp³–s)। कुल 7 σ।

एथीन C₂H₄: हर C sp²। C=C = एक σ (sp²–sp²) + एक π (p–p बगल से)। चार C–H σ। 5σ + 1π। π आबंध घूर्णन रोकता है, इसलिए एथीन समतल है।

एथाइन C₂H₂: हर C sp। C≡C = एक σ + दो π। 3σ + 2π। रैखिक अणु।

PCl₅: P (3s² 3p³) एक 3s इलेक्ट्रॉन को 3d में भेजता है → पाँच अर्धपूरित कक्षक → sp³d। दो अक्षीय आबंध तीन निरक्षीय से लंबे।

SF₆: S (3s² 3p⁴) → 3s¹ 3p³ 3d² → छह अर्धपूरित कक्षक → sp³d², अष्टफलकीय।

छोटा तरीका: स्टेरिक संख्या (σ आबंध + एकाकी युग्म) 2 → sp, 3 → sp², 4 → sp³, 5 → sp³d, 6 → sp³d²।

करके देखो: खाने-पीने के अणुओं में σ और π गिनो

एथेनॉल (C₂H₅OH, सैनिटाइज़र में) और ऐसीटिक अम्ल (CH₃COOH, सिरके में) की संरचनाएँ बनाओ। गिनो: हर आबंध में एक σ; हर द्विआबंध एक π जोड़ता है। हर कार्बन का संकरण अनुमान लगाओ (सब एकल आबंध → sp³; एक द्विआबंध → sp²)। फिर खेल वाले कदम में हर प्रकार की आकृति जाँचो।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. CH₄ में C का संकरण बताओ।

कदम 1: C 4 σ आबंध बनाता है, 0 एकाकी युग्म → स्टेरिक संख्या 4। कदम 2: 4 → sp³। उत्तर: sp³, चतुष्फलकीय, 109.5°।

2. BF₃ में B और BeCl₂ में Be का संकरण बताओ।

कदम 1: B: 3 σ, 0 एकाकी युग्म → 3 → sp²। कदम 2: Be: 2 σ, 0 एकाकी युग्म → 2 → sp। उत्तर: BF₃ sp² (त्रिकोणीय समतलीय); BeCl₂ sp (रैखिक)।

3. NH₃ में N और H₂O में O का संकरण बताओ।

कदम 1: N: 3 σ + 1 एकाकी युग्म = 4 → sp³। कदम 2: O: 2 σ + 2 एकाकी युग्म = 4 → sp³। उत्तर: दोनों sp³। एकाकी युग्म संकर कक्षकों में हैं, इसलिए कोण (107°, 104.5°) 109.5° के पास हैं।

4. एथीन C₂H₄ में σ और π आबंध गिनो।

कदम 1: 4 C–H एकल आबंध → 4σ। कदम 2: एक C=C → 1σ + 1π। उत्तर: 5σ और 1π।

5. एथाइन C₂H₂ में σ और π आबंध गिनो और C का संकरण बताओ।

कदम 1: 2 C–H → 2σ। कदम 2: C≡C → 1σ + 2π। कदम 3: हर C पर 2 σ, 0 एकाकी युग्म → sp। उत्तर: 3σ, 2π; sp।

6. PCl₅ में P का संकरण समझाओ।

कदम 1: मूल अवस्था P: 3s² 3p³ (3 अयुग्मित)। कदम 2: एक 3s इलेक्ट्रॉन 3d में: 3s¹ 3p³ 3d¹ (5 अयुग्मित)। कदम 3: 1 s + 3 p + 1 d मिलाओ → पाँच sp³d कक्षक। कदम 4: हर एक Cl के 3p से अतिव्यापन → 5 σ आबंध। उत्तर: sp³d, त्रिकोणीय द्विपिरामिडी।

7. CH₂=CH–C≡N (ऐक्रिलोनाइट्राइल) में σ और π गिनो और हर C का संकरण बताओ।

कदम 1: आबंध: 3 C–H (3σ), C=C (1σ + 1π), C–C (1σ), C≡N (1σ + 2π)। कदम 2: कुल σ = 3 + 1 + 1 + 1 = 6; π = 1 + 2 = 3। कदम 3: CH₂ और CH वाले कार्बन: 3 σ → sp²; C≡N का C: 2 σ → sp। उत्तर: 6σ, 3π; sp², sp², sp।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. त्रिआबंध में होते हैं:
2. एथीन में C का संकरण:
3. sp³d² संकरण से कौन-सी आकृति बनती है?
4. कौन-सा अतिव्यापन π आबंध देता है?
5. sp संकर कक्षक में s-लक्षण:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संकरण आसान शब्दों में क्या है?

परमाणु मिलती-जुलती ऊर्जा वाले अपने कुछ कक्षक (s, p, d) मिलाकर उतने ही नए, बराबर कक्षक बनाता है, जो आबंध के लिए सबसे अच्छी दिशाओं में होते हैं।

संकरण जल्दी कैसे निकालें?

परमाणु पर σ आबंध और एकाकी युग्म गिनो (स्टेरिक संख्या): 2 sp, 3 sp², 4 sp³, 5 sp³d, 6 sp³d²।

सिग्मा और पाई आबंध में क्या अंतर है?

σ आबंध अक्ष पर आमने-सामने अतिव्यापन से बनता है और मज़बूत है। π आबंध p कक्षकों के बगल से अतिव्यापन से बनता है, कमज़ोर है और σ के बाद ही बनता है।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

यूक्रेन11 класReview and deepening of theory
सीबीएसई (भारत)कक्षा 11रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना
जर्मनीJahrgangsstufe 12Chemical bonding
रूस10 классFoundations of organic chemistry
चीन高二Selective 2 Ch.2 Molecular structure

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