संयोजकता आबंध सिद्धांत और कक्षकों का अतिव्यापन
हाइटलर और लंदन (1927) ने H₂ का आबंध समझाया; पॉलिंग और स्लेटर ने संयोजकता आबंध (VB) सिद्धांत बनाया। मुख्य बात:
- दो परमाणु पास आते हैं तो हर नाभिक दूसरे के इलेक्ट्रॉन को खींचता है, और दोनों नाभिक (और दोनों इलेक्ट्रॉन) एक-दूसरे को धकेलते हैं।
- एक खास दूरी (H₂ के लिए 74 pm) पर आकर्षण सबसे ज़्यादा जीतता है और ऊर्जा सबसे कम होती है। 435 kJ mol⁻¹ निकलती है। यही आबंध है।
- आबंध तब बनता है जब अर्धपूरित कक्षक अतिव्यापन करें और इलेक्ट्रॉन उलटे चक्रण से युग्म बनाएँ।
- ज़्यादा अतिव्यापन = ज़्यादा मज़बूत आबंध।
अतिव्यापन धनात्मक (समान कला, आबंध बनता है), ऋणात्मक (उलटी कला, आबंध नहीं) या शून्य (कक्षक समकोण पर) हो सकता है।
सिग्मा (σ) और पाई (π) आबंध
| σ आबंध | π आबंध | |
|---|---|---|
| अतिव्यापन | आमने-सामने, नाभिकों को जोड़ने वाली रेखा पर | बगल से, रेखा के ऊपर-नीचे |
| कक्षक | s–s, s–p, p–p (सिरे से), संकर कक्षक | सिर्फ़ p–p (या p–d) बगल से |
| शक्ति | ज़्यादा मज़बूत | कमज़ोर |
| घूर्णन | आबंध के चारों ओर मुक्त घूर्णन | मुक्त घूर्णन नहीं |
| अकेला? | हाँ | सिर्फ़ σ के साथ |
एकल आबंध = 1σ। द्विआबंध = 1σ + 1π। त्रिआबंध = 1σ + 2π।
संकरण
कार्बन का विन्यास 2s² 2p² है। शुद्ध कक्षक CH₄ के चार बराबर, 109.5° वाले C–H आबंध नहीं समझा सकते। पॉलिंग का विचार: परमाणु पहले एक इलेक्ट्रॉन उत्तेजित करता है (2s¹ 2p³), फिर लगभग बराबर ऊर्जा वाले कक्षक मिलाकर उतने ही नए, बराबर संकर कक्षक बनाता है।
- एक ही परमाणु के, मिलती-जुलती ऊर्जा वाले कक्षक ही मिलते हैं।
- संकर कक्षकों की संख्या = मिलाए गए कक्षकों की संख्या।
- संकर कक्षक ऊर्जा और आकार में बराबर हैं और जितना हो सके दूर रहते हैं।
- संकर कक्षक σ आबंध बनाते हैं (या एकाकी युग्म रखते हैं)। बचे शुद्ध p कक्षक π आबंध बनाते हैं।
| प्रकार | मिले | आकृति | कोण | उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| sp | s + p | रैखिक | 180° | BeCl₂, C₂H₂ |
| sp² | s + 2p | त्रिकोणीय समतलीय | 120° | BF₃, C₂H₄ |
| sp³ | s + 3p | चतुष्फलकीय | 109.5° | CH₄, C₂H₆; NH₃, H₂O |
| sp³d | s + 3p + d | त्रिकोणीय द्विपिरामिडी | 120°, 90° | PCl₅ |
| sp³d² | s + 3p + 2d | अष्टफलकीय | 90° | SF₆ |
s-लक्षण: sp 50 %, sp² 33 %, sp³ 25 %। ज़्यादा s-लक्षण → छोटा, मज़बूत आबंध।
उदाहरण: एथेन, एथीन, एथाइन, PCl₅, SF₆
एथेन C₂H₆: हर C sp³। C–C σ (sp³–sp³) और छह C–H σ (sp³–s)। कुल 7 σ।
एथीन C₂H₄: हर C sp²। C=C = एक σ (sp²–sp²) + एक π (p–p बगल से)। चार C–H σ। 5σ + 1π। π आबंध घूर्णन रोकता है, इसलिए एथीन समतल है।
एथाइन C₂H₂: हर C sp। C≡C = एक σ + दो π। 3σ + 2π। रैखिक अणु।
PCl₅: P (3s² 3p³) एक 3s इलेक्ट्रॉन को 3d में भेजता है → पाँच अर्धपूरित कक्षक → sp³d। दो अक्षीय आबंध तीन निरक्षीय से लंबे।
SF₆: S (3s² 3p⁴) → 3s¹ 3p³ 3d² → छह अर्धपूरित कक्षक → sp³d², अष्टफलकीय।
छोटा तरीका: स्टेरिक संख्या (σ आबंध + एकाकी युग्म) 2 → sp, 3 → sp², 4 → sp³, 5 → sp³d, 6 → sp³d²।
करके देखो: खाने-पीने के अणुओं में σ और π गिनो
एथेनॉल (C₂H₅OH, सैनिटाइज़र में) और ऐसीटिक अम्ल (CH₃COOH, सिरके में) की संरचनाएँ बनाओ। गिनो: हर आबंध में एक σ; हर द्विआबंध एक π जोड़ता है। हर कार्बन का संकरण अनुमान लगाओ (सब एकल आबंध → sp³; एक द्विआबंध → sp²)। फिर खेल वाले कदम में हर प्रकार की आकृति जाँचो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- संकर कक्षकों की संख्या = मिलाए गए परमाणु कक्षकों की संख्या
- स्टेरिक संख्या = σ आबंध + एकाकी युग्म → 2 sp, 3 sp², 4 sp³, 5 sp³d, 6 sp³d²
- एकल = 1σ; द्वि = 1σ + 1π; त्रि = 1σ + 2π
- s-लक्षण: sp 50 %, sp² 33.3 %, sp³ 25 %
- शक्ति: σ > π; अतिव्यापन ↑ ⇒ आबंध शक्ति ↑
हल किए गए उदाहरण
1. CH₄ में C का संकरण बताओ।
कदम 1: C 4 σ आबंध बनाता है, 0 एकाकी युग्म → स्टेरिक संख्या 4। कदम 2: 4 → sp³। उत्तर: sp³, चतुष्फलकीय, 109.5°।
2. BF₃ में B और BeCl₂ में Be का संकरण बताओ।
कदम 1: B: 3 σ, 0 एकाकी युग्म → 3 → sp²। कदम 2: Be: 2 σ, 0 एकाकी युग्म → 2 → sp। उत्तर: BF₃ sp² (त्रिकोणीय समतलीय); BeCl₂ sp (रैखिक)।
3. NH₃ में N और H₂O में O का संकरण बताओ।
कदम 1: N: 3 σ + 1 एकाकी युग्म = 4 → sp³। कदम 2: O: 2 σ + 2 एकाकी युग्म = 4 → sp³। उत्तर: दोनों sp³। एकाकी युग्म संकर कक्षकों में हैं, इसलिए कोण (107°, 104.5°) 109.5° के पास हैं।
4. एथीन C₂H₄ में σ और π आबंध गिनो।
कदम 1: 4 C–H एकल आबंध → 4σ। कदम 2: एक C=C → 1σ + 1π। उत्तर: 5σ और 1π।
5. एथाइन C₂H₂ में σ और π आबंध गिनो और C का संकरण बताओ।
कदम 1: 2 C–H → 2σ। कदम 2: C≡C → 1σ + 2π। कदम 3: हर C पर 2 σ, 0 एकाकी युग्म → sp। उत्तर: 3σ, 2π; sp।
6. PCl₅ में P का संकरण समझाओ।
कदम 1: मूल अवस्था P: 3s² 3p³ (3 अयुग्मित)। कदम 2: एक 3s इलेक्ट्रॉन 3d में: 3s¹ 3p³ 3d¹ (5 अयुग्मित)। कदम 3: 1 s + 3 p + 1 d मिलाओ → पाँच sp³d कक्षक। कदम 4: हर एक Cl के 3p से अतिव्यापन → 5 σ आबंध। उत्तर: sp³d, त्रिकोणीय द्विपिरामिडी।
7. CH₂=CH–C≡N (ऐक्रिलोनाइट्राइल) में σ और π गिनो और हर C का संकरण बताओ।
कदम 1: आबंध: 3 C–H (3σ), C=C (1σ + 1π), C–C (1σ), C≡N (1σ + 2π)। कदम 2: कुल σ = 3 + 1 + 1 + 1 = 6; π = 1 + 2 = 3। कदम 3: CH₂ और CH वाले कार्बन: 3 σ → sp²; C≡N का C: 2 σ → sp। उत्तर: 6σ, 3π; sp², sp², sp।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि π आबंध अकेला बन सकता है। पहले हमेशा σ बनता है; π अतिरिक्त होते हैं।
- संकरण निकालते समय एकाकी युग्म न गिनना। स्टेरिक संख्या = σ + एकाकी युग्म (NH₃ sp³ है, sp² नहीं)।
- यह मानना कि अकेले परमाणु में संकरण होता है। यह आबंध बनाते परमाणु का मॉडल है।
- कहना कि π आबंध σ से मज़बूत है। बगल से अतिव्यापन कम है, इसलिए π कमज़ोर।