VSEPR सिद्धांत की मुख्य बातें
सिजविक और पॉवेल ने 1940 में यह सिद्धांत दिया; न्यहोम और गिलेस्पी ने 1957 में इसे सुधारा। मुख्य बातें:
- अणु की आकृति केंद्रीय परमाणु के चारों ओर के संयोजकता इलेक्ट्रॉन युग्मों (आबंधी और एकाकी) की संख्या पर निर्भर है।
- इलेक्ट्रॉन युग्म एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं, क्योंकि उनके बादल ऋणात्मक हैं।
- वे ऐसी जगह लेते हैं कि जितना हो सके दूर रहें (न्यूनतम प्रतिकर्षण)।
- द्वि या त्रिआबंध को एक बड़ा युग्म गिनते हैं।
- एकाकी युग्म सिर्फ़ एक नाभिक से बँधा है, इसलिए ज़्यादा फैलता और ज़्यादा धकेलता है। क्रम: lp–lp > lp–bp > bp–bp।
- अनुनादी अणु की किसी भी संरचना पर VSEPR लगा सकते हैं।
सिर्फ़ आबंध युग्म वाले अणु
| युग्म | आकृति | कोण | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| 2 | रैखिक | 180° | BeCl₂, CO₂ |
| 3 | त्रिकोणीय समतलीय | 120° | BF₃ |
| 4 | चतुष्फलकीय | 109.5° | CH₄, NH₄⁺ |
| 5 | त्रिकोणीय द्विपिरामिडी | 120° और 90° | PCl₅ |
| 6 | अष्टफलकीय | 90° | SF₆ |
PCl₅ में दो अक्षीय आबंध (ऊपर-नीचे) तीन आबंध युग्मों से 90° पर मिलते हैं, जबकि निरक्षीय (equatorial) सिर्फ़ दो से। इसलिए अक्षीय आबंध ज़्यादा प्रतिकर्षण झेलते हैं और थोड़े लंबे व कमज़ोर होते हैं।
एकाकी युग्म वाले अणु
एकाकी युग्म हों तो भी सारे युग्म मूल आकृति में रखते हैं, पर आकृति का नाम सिर्फ़ परमाणुओं से देते हैं। एकाकी युग्म आबंध कोण भी घटाते हैं।
| कुल युग्म | एकाकी युग्म | आकृति | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| 3 | 1 | बंकित (V) | SO₂, SnCl₂ |
| 4 | 1 | त्रिकोणीय पिरामिडी | NH₃ (107°) |
| 4 | 2 | बंकित (V) | H₂O (104.5°) |
| 5 | 1 | ढेंकली (see-saw) | SF₄ |
| 5 | 2 | T-आकार | ClF₃ |
| 5 | 3 | रैखिक | XeF₂, I₃⁻ |
| 6 | 1 | वर्ग पिरामिडी | BrF₅ |
| 6 | 2 | वर्ग समतलीय | XeF₄ |
द्विपिरामिड में एकाकी युग्म हमेशा निरक्षीय जगह लेते हैं, क्योंकि वहाँ 90° पर सिर्फ़ दो पड़ोसी हैं। अष्टफलक में दो एकाकी युग्म आमने-सामने (180°) बैठते हैं, जिससे XeF₄ वर्ग समतलीय बनता है।
युग्म जल्दी कैसे गिनें
केंद्रीय परमाणु A एकल आबंधों से जुड़ा हो तो:
युग्म = ½ (V + M − c + a)। V = A के संयोजकता इलेक्ट्रॉन, M = जुड़े एकसंयोजी परमाणु (H, हैलोजन), c = धन आवेश, a = ऋण आवेश। ऑक्सीजन परमाणु 0 जोड़ते हैं।
आबंध युग्म = जुड़े परमाणुओं की संख्या। एकाकी युग्म = कुल युग्म − आबंध युग्म।
उदाहरण NH₄⁺: ½ (5 + 4 − 1) = 4 युग्म, 4 आबंधी → चतुष्फलकीय।
करके देखो: गुब्बारा मॉडल
2, 3, 4, 5 और 6 गुब्बारे फुलाकर हर सेट को गाँठ पर बाँधो। देखो वे कैसे टिकते हैं: रेखा, त्रिभुज, चतुष्फलक, द्विपिरामिड, अष्टफलक। अब 4 वाले सेट में एक गुब्बारा बड़ा करो ("एकाकी युग्म")। बाकी तीन पास सिमट जाते हैं, NH₃ जैसे। पहले अनुमान लगाओ, फिर खेल वाले कदम में जाँचो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- केंद्रीय परमाणु पर युग्म = ½ (V + M − c + a)
- एकाकी युग्म = कुल युग्म − जुड़े परमाणु
- प्रतिकर्षण क्रम: lp–lp > lp–bp > bp–bp
- 2 रैखिक · 3 त्रिकोणीय समतलीय · 4 चतुष्फलकीय · 5 त्रिकोणीय द्विपिरामिडी · 6 अष्टफलकीय
- बहुआबंध = एक इलेक्ट्रॉन क्षेत्र
हल किए गए उदाहरण
1. BF₃ की आकृति बताओ।
कदम 1: B के 3 संयोजकता इलेक्ट्रॉन, 3 F: युग्म = ½(3 + 3) = 3। कदम 2: 3 जुड़े परमाणु → 0 एकाकी युग्म। उत्तर: त्रिकोणीय समतलीय, 120°।
2. NH₃ की आकृति और आबंध कोण बताओ।
कदम 1: N: V = 5, 3 H: युग्म = ½(5 + 3) = 4। कदम 2: 3 आबंध युग्म + 1 एकाकी युग्म। कदम 3: 4 युग्म → चतुष्फलकीय व्यवस्था; एकाकी युग्म छिपाओ। कदम 4: lp–bp प्रतिकर्षण कोण 109.5° से कम करता है। उत्तर: त्रिकोणीय पिरामिडी, लगभग 107°।
3. H₂O की आकृति बताओ और कोण समझाओ।
कदम 1: O: V = 6, 2 H: युग्म = ½(6 + 2) = 4। कदम 2: 2 आबंध युग्म + 2 एकाकी युग्म। कदम 3: दो एकाकी युग्म एक से ज़्यादा धकेलते हैं (lp–lp > lp–bp)। उत्तर: बंकित, 104.5° (NH₃ के 107° से कम)।
4. SF₄ की आकृति बताओ।
कदम 1: S: V = 6, 4 F: युग्म = ½(6 + 4) = 5। कदम 2: 4 आबंध युग्म + 1 एकाकी युग्म। कदम 3: 5 युग्म → द्विपिरामिड; एकाकी युग्म निरक्षीय जगह पर। उत्तर: ढेंकली (see-saw)।
5. ClF₃ की आकृति बताओ।
कदम 1: Cl: V = 7, 3 F: युग्म = ½(7 + 3) = 5। कदम 2: 3 आबंध युग्म + 2 एकाकी युग्म, दोनों निरक्षीय। कदम 3: तीन F: दो अक्षीय + एक निरक्षीय। उत्तर: T-आकार, F–Cl–F कोण 90° से थोड़ा कम।
6. XeF₄ की आकृति बताओ।
कदम 1: Xe: V = 8, 4 F: युग्म = ½(8 + 4) = 6। कदम 2: 4 आबंध युग्म + 2 एकाकी युग्म। कदम 3: 6 युग्म → अष्टफलक; दोनों एकाकी युग्म आमने-सामने। उत्तर: वर्ग समतलीय, 90°।
7. NH₄⁺ और I₃⁻ की आकृति बताओ।
कदम 1: NH₄⁺: ½(5 + 4 − 1) = 4 युग्म, 4 आबंधी → चतुष्फलकीय। कदम 2: I₃⁻: बीच का I: ½(7 + 2 + 1) = 5 युग्म, 2 आबंधी → 3 एकाकी युग्म, सब निरक्षीय। उत्तर: NH₄⁺ चतुष्फलकीय; I₃⁻ रैखिक।
आम गलतियाँ
- आकृति का नाम सारे युग्मों से देना, परमाणुओं से नहीं। NH₃ में युग्मों की व्यवस्था चतुष्फलकीय है पर आकृति पिरामिडी।
- द्विआबंध को दो इलेक्ट्रॉन क्षेत्र गिनना। VSEPR में बहुआबंध एक क्षेत्र है।
- द्विपिरामिड में एकाकी युग्म को अक्षीय जगह पर रखना। वे हमेशा निरक्षीय होते हैं।
- युग्म गिनते समय आयन का आवेश भूल जाना (NH₄⁺, I₃⁻)।