परमाणु आबंध क्यों बनाते हैं? अष्टक नियम
नियॉन, आर्गन जैसी उत्कृष्ट गैसें लगभग अभिक्रिया नहीं करतीं। उनके बाहरी कोश में 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं (हीलियम में 2)। 1916 में कॉसेल और लुईस ने कहा कि बाकी परमाणु भी यही स्थायी व्यवस्था पाने के लिए जुड़ते हैं। यही अष्टक नियम है: परमाणु इलेक्ट्रॉन खोकर, लेकर या बाँटकर बाहरी कोश में 8 इलेक्ट्रॉन पूरे करते हैं।
बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉन संयोजकता इलेक्ट्रॉन (valence electrons) कहलाते हैं। आबंध में सिर्फ़ यही भाग लेते हैं।
अष्टक नियम की सीमाएँ
- अपूर्ण अष्टक: केंद्रीय परमाणु के पास 8 से कम। जैसे LiCl, BeH₂, BCl₃ (B के पास सिर्फ़ 6)।
- विषम इलेक्ट्रॉन अणु: NO और NO₂ में इलेक्ट्रॉन विषम संख्या में हैं, इसलिए एक परमाणु 8 तक नहीं पहुँचता।
- प्रसारित अष्टक: तीसरे आवर्त और नीचे के परमाणु d कक्षक इस्तेमाल करके 8 से ज़्यादा रख सकते हैं। जैसे PF₅ (10), SF₆ (12)।
- यह नियम अणु की आकृति और आबंध की ऊर्जा नहीं बताता।
- कुछ उत्कृष्ट गैसें भी यौगिक बनाती हैं (XeF₂, XeF₄)।
लुईस प्रतीक और लुईस संरचना
लुईस प्रतीक में तत्व के प्रतीक के चारों ओर संयोजकता इलेक्ट्रॉन बिंदु से दिखाते हैं: Na में 1 बिंदु, C में 4, N में 5, O में 6, Cl में 7।
लुईस संरचना दिखाती है कि अणु में इलेक्ट्रॉन कैसे बँटे हैं। एक साझा युग्म = एक रेखा (एकल आबंध)। दो युग्म = द्विआबंध, तीन = त्रिआबंध। जो युग्म बँटे नहीं, वे एकाकी युग्म (lone pair) हैं।
बनाने के 5 कदम
- सारे संयोजकता इलेक्ट्रॉन जोड़ो। हर ऋण आवेश के लिए 1 जोड़ो, हर धन आवेश के लिए 1 घटाओ।
- केंद्रीय परमाणु चुनो: आमतौर पर सबसे कम विद्युतऋणी (H कभी नहीं)।
- हर बाहरी परमाणु को केंद्र से एकल आबंध द्वारा जोड़ो।
- बचे इलेक्ट्रॉन पहले बाहरी परमाणुओं पर, फिर केंद्र पर एकाकी युग्म बनाकर रखो।
- केंद्र में 8 पूरे न हों तो किसी बाहरी एकाकी युग्म को द्वि या त्रिआबंध में बदलो।
उदाहरण CO₂: 4 + 6 + 6 = 16 इलेक्ट्रॉन। O=C=O, हर O पर दो एकाकी युग्म। सबके पास 8।
फ़ॉर्मल आवेश (औपचारिक आवेश)
कभी-कभी एक से ज़्यादा लुईस संरचनाएँ बन सकती हैं। सबसे अच्छी चुनने में फ़ॉर्मल आवेश मदद करता है। यह वह आवेश है जो परमाणु पर होता अगर हर साझा युग्म बराबर बँटता।
फ़ॉर्मल आवेश = V − L − B/2। V = मुक्त परमाणु के संयोजकता इलेक्ट्रॉन, L = उस परमाणु पर एकाकी युग्मों के इलेक्ट्रॉन, B = उसके चारों ओर आबंधों के इलेक्ट्रॉन।
नियम: सबसे अच्छी संरचना में फ़ॉर्मल आवेश सबसे कम हों; ऋण फ़ॉर्मल आवेश अधिक विद्युतऋणी परमाणु पर हो; सारे फ़ॉर्मल आवेशों का जोड़ अणु या आयन के आवेश के बराबर हो।
फ़ॉर्मल आवेश सिर्फ़ हिसाब रखने का तरीका है, असली आवेश नहीं।
आयनिक आबंध और जालक एन्थैल्पी
जब धातु का परमाणु अधातु को इलेक्ट्रॉन देता है और बने आयन एक-दूसरे को खींचते हैं, तो आयनिक (वैद्युत संयोजी) आबंध बनता है। यह आसानी से बनता है जब:
- धातु की आयनन एन्थैल्पी कम हो (इलेक्ट्रॉन आसानी से खोए), और
- अधातु की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी अधिक ऋणात्मक हो (इलेक्ट्रॉन आसानी से ले)।
Na से Na⁺ बनाने में ऊर्जा लगती है (+496 kJ mol⁻¹) और Cl → Cl⁻ में सिर्फ़ 349 kJ mol⁻¹ वापस मिलती है। फिर NaCl क्यों बनता है? क्योंकि आयनों के क्रिस्टल में जमने पर बहुत ज़्यादा ऊर्जा निकलती है।
जालक एन्थैल्पी: 1 मोल ठोस आयनिक यौगिक को पूरी तरह गैसीय आयनों में तोड़ने के लिए ज़रूरी ऊर्जा। NaCl के लिए +788 kJ mol⁻¹। जितनी बड़ी जालक एन्थैल्पी, उतना स्थायी ठोस। आयन छोटे और अधिक आवेशित हों तो यह बढ़ती है: MgO (≈ 3890) बनाम NaCl (788)।
वैद्युत संयोजकता
परमाणु जितने इलेक्ट्रॉन देता या लेता है, वह उसकी वैद्युत संयोजकता है: Na = 1, Mg = 2, O = 2, Cl = 1।
करके देखो: सिक्कों से आयन बनाओ
कागज़ पर Na का बड़ा घेरा बनाओ, किनारे पर 1 सिक्का। Cl का घेरा, 7 सिक्के। Na का सिक्का Cl पर रखो। गिनो: Cl के पास 8। अब Mg (2 सिक्के) और दो Cl घेरे लो: हर Cl एक सिक्का लेता है, तो सूत्र MgCl₂। 3D के आख़िरी कदम में अपना उत्तर जाँचो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- फ़ॉर्मल आवेश = V − L − B/2
- लुईस संरचना के इलेक्ट्रॉन = Σ संयोजकता e⁻ − (धन आवेश) + (ऋण आवेश)
- जालक एन्थैल्पी: MX(s) → M⁺(g) + X⁻(g), ΔH = + (ज़रूरी ऊर्जा)
- आयन का आवेश बढ़े तो जालक एन्थैल्पी बढ़ती है, आकार बढ़े तो घटती है
- अष्टक = बाहरी कोश में 8 इलेक्ट्रॉन (H के लिए द्विक = 2)
हल किए गए उदाहरण
1. N, O और Cl के लुईस प्रतीक लिखो और बताओ अष्टक के लिए हर एक को कितने इलेक्ट्रॉन चाहिए।
कदम 1: N के 5, O के 6, Cl के 7 संयोजकता इलेक्ट्रॉन। कदम 2: ज़रूरत = 8 − संयोजकता: N को 3, O को 2, Cl को 1। उत्तर: N (5 बिंदु, 3 चाहिए), O (6 बिंदु, 2 चाहिए), Cl (7 बिंदु, 1 चाहिए)।
2. H₂O की लुईस संरचना बनाओ।
कदम 1: इलेक्ट्रॉन = 1 + 1 + 6 = 8। कदम 2: O केंद्र में। दो O–H आबंधों में 4 इलेक्ट्रॉन लगे। कदम 3: बचे 4 → O पर 2 एकाकी युग्म। कदम 4: O के पास 2 आबंध + 2 एकाकी युग्म = 8, हर H के पास 2। उत्तर: H–O–H, O पर दो एकाकी युग्म।
3. नाइट्रेट आयन NO₃⁻ की लुईस संरचना बनाओ और कुल इलेक्ट्रॉन बताओ।
कदम 1: 5 + 3 × 6 + 1 = 24 इलेक्ट्रॉन। कदम 2: N केंद्र में, तीन N–O एकल आबंध (6 लगे), 18 बचे। कदम 3: हर O को तीन एकाकी युग्म (18 लगे)। N के पास सिर्फ़ 6। कदम 4: एक O का एकाकी युग्म द्विआबंध में बदलो: एक N=O और दो N–O। उत्तर: 24 इलेक्ट्रॉन; एक N=O, दो N–O⁻ (तीन तुल्य अनुनादी संरचनाएँ)।
4. O₃ (O=O–O) के हर परमाणु पर फ़ॉर्मल आवेश निकालो।
कदम 1: बायाँ O (द्विआबंध): V = 6, L = 4, B = 4 → 6 − 4 − 2 = 0। कदम 2: बीच का O: V = 6, L = 2, B = 6 → 6 − 2 − 3 = +1। कदम 3: दायाँ O (एकल आबंध): V = 6, L = 6, B = 2 → 6 − 6 − 1 = −1। कदम 4: जाँच: 0 + 1 − 1 = 0 = O₃ का आवेश ✓
5. NH₄⁺ में N पर फ़ॉर्मल आवेश निकालो।
कदम 1: N का V = 5। कदम 2: कोई एकाकी युग्म नहीं, L = 0। चार N–H आबंध, B = 8। कदम 3: FC = 5 − 0 − 8/2 = +1। कदम 4: हर H: 1 − 0 − 1 = 0। कुल = +1 = आयन का आवेश ✓
6. CO₂ की कौन-सी संरचना बेहतर है: O=C=O या O≡C–O? फ़ॉर्मल आवेश से बताओ।
कदम 1: O=C=O: हर O: 6 − 4 − 2 = 0; C: 4 − 0 − 4 = 0। सब शून्य। कदम 2: O≡C–O: त्रिआबंध वाला O: 6 − 2 − 3 = +1; C: 0; एकल आबंध वाला O: 6 − 6 − 1 = −1। कदम 3: कम फ़ॉर्मल आवेश वाली जीतती है। उत्तर: O=C=O बेहतर है।
7. NaCl, MgO और KCl को जालक एन्थैल्पी के बढ़ते क्रम में लगाओ और कारण बताओ।
कदम 1: MgO के आयन 2+ और 2− हैं, बाकी के 1+ और 1−। ज़्यादा आवेश → बहुत बड़ी जालक एन्थैल्पी। कदम 2: K⁺, Na⁺ से बड़ा है। बड़ा आयन → आयन दूर → जालक एन्थैल्पी कम। उत्तर: KCl (717) < NaCl (788) < MgO (≈ 3890 kJ mol⁻¹)।
आम गलतियाँ
- आयन के आवेश के हिसाब से इलेक्ट्रॉन जोड़ना-घटाना भूल जाना।
- फ़ॉर्मल आवेश को परमाणु का असली आवेश समझना। यह सिर्फ़ हिसाब है।
- यह कहना कि Na → Na⁺ में ऊर्जा निकलती है। असल में ऊर्जा लगती है; जालक ऊर्जा पूरी प्रक्रिया को संभव बनाती है।
- H को केंद्रीय परमाणु बनाना। H सिर्फ़ एक आबंध बनाता है, इसलिए हमेशा बाहर रहता है।