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कॉसेल-लुईस उपागम और आयनिक आबंध

परमाणु आपस में इसलिए जुड़ते हैं ताकि हर एक के बाहरी कोश में 8 इलेक्ट्रॉन (अष्टक) हो जाएँ, बिल्कुल उत्कृष्ट गैस जैसे। कॉसेल ने बताया कि परमाणु इलेक्ट्रॉन देकर या लेकर आयन बनाते हैं (आयनिक आबंध)। लुईस ने बताया कि परमाणु इलेक्ट्रॉन-युग्म बाँट भी सकते हैं (सहसंयोजी आबंध)। लुईस संरचना इन इलेक्ट्रॉनों को बिंदु और रेखा से दिखाती है। फ़ॉर्मल आवेश (V − L − B/2) सबसे अच्छी संरचना चुनने में मदद करता है। आयन जुड़कर क्रिस्टल बनाते हैं; इसमें निकली ऊर्जा का संबंध जालक एन्थैल्पी से है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. यह रहा सोडियम और क्लोरीन का परमाणु। Na के बाहरी कोश में 1 इलेक्ट्रॉन है, Cl में 7। दोनों को 8 चाहिए।
  2. Na अपना एक इलेक्ट्रॉन Cl को दे देता है। Na बन जाता है Na⁺ और Cl बन जाता है Cl⁻। दोनों के पास अब 8। उलटे आवेश एक-दूसरे को खींचते हैं: यही आयनिक आबंध है।
  3. दो Cl परमाणु एक जैसे हैं, इसलिए कोई इलेक्ट्रॉन नहीं देता। दोनों एक-एक इलेक्ट्रॉन डालकर एक जोड़ा बाँटते हैं। यह साझा जोड़ा सहसंयोजी आबंध है।
  4. ओज़ोन O₃ में हर O का फ़ॉर्मल आवेश V − L − B/2 से निकालते हैं। बीच वाला O +1, एक सिरे वाला O −1। कुल जोड़ शून्य।
  5. अब बहुत सारे Na⁺ और Cl⁻ बारी-बारी से जमकर क्रिस्टल बनाते हैं। खूब ऊर्जा निकलती है। इसीलिए आयनिक ठोस इतने स्थायी होते हैं।
  6. अब तुम्हारी बारी: एक धातु और एक अधातु चुनो। देखो कितने इलेक्ट्रॉन जाते हैं, सूत्र और जालक एन्थैल्पी पढ़ो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

परमाणुओं को 8 इलेक्ट्रॉन ही क्यों चाहिए?

8 बाहरी इलेक्ट्रॉन (s² p⁶) उस कोश के s और p कक्षक भर देते हैं। यह कम ऊर्जा वाली व्यवस्था है, इसलिए उत्कृष्ट गैसें कम अभिक्रिया करती हैं। आबंध बनाकर परमाणु यही स्थिति पाते हैं।

Na ही क्यों देता है और Cl ही क्यों लेता है?

Na आसानी से 1 इलेक्ट्रॉन खोता है (कम आयनन एन्थैल्पी)। Cl एक और इलेक्ट्रॉन को ज़ोर से खींचता है। उलटा करने में बहुत ज़्यादा ऊर्जा लगेगी।

दो Cl परमाणु इलेक्ट्रॉन देने के बजाय बाँटते क्यों हैं?

दोनों का इलेक्ट्रॉन पर खिंचाव बराबर है। कोई दूसरे से इलेक्ट्रॉन छीन नहीं सकता, इसलिए एक युग्म बाँटकर 8 पूरे करते हैं।

क्या फ़ॉर्मल आवेश परमाणु पर असली आवेश है?

नहीं। यह मान लेता है कि बाँटना बिल्कुल बराबर है। यह सबसे अच्छी लुईस संरचना चुनने का औज़ार है।

MgO को पिघलाना NaCl से इतना कठिन क्यों है?

इसके आयन 2+ और 2− हैं और छोटे हैं, इसलिए जालक एन्थैल्पी लगभग पाँच गुना है। खेल वाले कदम में MgO चुनकर देखो।

आयन बनाने में ऊर्जा लगती है, तो ऊर्जा आती कहाँ से है?

आयनों के जालक में जमने से। कदम 5 दिखाता है: जालक बनने पर निकली 788 kJ mol⁻¹ ऊर्जा, आयन बनाने की लागत से ज़्यादा है।

परमाणु आबंध क्यों बनाते हैं? अष्टक नियम

नियॉन, आर्गन जैसी उत्कृष्ट गैसें लगभग अभिक्रिया नहीं करतीं। उनके बाहरी कोश में 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं (हीलियम में 2)। 1916 में कॉसेल और लुईस ने कहा कि बाकी परमाणु भी यही स्थायी व्यवस्था पाने के लिए जुड़ते हैं। यही अष्टक नियम है: परमाणु इलेक्ट्रॉन खोकर, लेकर या बाँटकर बाहरी कोश में 8 इलेक्ट्रॉन पूरे करते हैं।

बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉन संयोजकता इलेक्ट्रॉन (valence electrons) कहलाते हैं। आबंध में सिर्फ़ यही भाग लेते हैं।

अष्टक नियम की सीमाएँ

लुईस प्रतीक और लुईस संरचना

लुईस प्रतीक में तत्व के प्रतीक के चारों ओर संयोजकता इलेक्ट्रॉन बिंदु से दिखाते हैं: Na में 1 बिंदु, C में 4, N में 5, O में 6, Cl में 7।

लुईस संरचना दिखाती है कि अणु में इलेक्ट्रॉन कैसे बँटे हैं। एक साझा युग्म = एक रेखा (एकल आबंध)। दो युग्म = द्विआबंध, तीन = त्रिआबंध। जो युग्म बँटे नहीं, वे एकाकी युग्म (lone pair) हैं।

बनाने के 5 कदम

  1. सारे संयोजकता इलेक्ट्रॉन जोड़ो। हर ऋण आवेश के लिए 1 जोड़ो, हर धन आवेश के लिए 1 घटाओ।
  2. केंद्रीय परमाणु चुनो: आमतौर पर सबसे कम विद्युतऋणी (H कभी नहीं)।
  3. हर बाहरी परमाणु को केंद्र से एकल आबंध द्वारा जोड़ो।
  4. बचे इलेक्ट्रॉन पहले बाहरी परमाणुओं पर, फिर केंद्र पर एकाकी युग्म बनाकर रखो।
  5. केंद्र में 8 पूरे न हों तो किसी बाहरी एकाकी युग्म को द्वि या त्रिआबंध में बदलो।

उदाहरण CO₂: 4 + 6 + 6 = 16 इलेक्ट्रॉन। O=C=O, हर O पर दो एकाकी युग्म। सबके पास 8।

फ़ॉर्मल आवेश (औपचारिक आवेश)

कभी-कभी एक से ज़्यादा लुईस संरचनाएँ बन सकती हैं। सबसे अच्छी चुनने में फ़ॉर्मल आवेश मदद करता है। यह वह आवेश है जो परमाणु पर होता अगर हर साझा युग्म बराबर बँटता।

फ़ॉर्मल आवेश = V − L − B/2। V = मुक्त परमाणु के संयोजकता इलेक्ट्रॉन, L = उस परमाणु पर एकाकी युग्मों के इलेक्ट्रॉन, B = उसके चारों ओर आबंधों के इलेक्ट्रॉन।

नियम: सबसे अच्छी संरचना में फ़ॉर्मल आवेश सबसे कम हों; ऋण फ़ॉर्मल आवेश अधिक विद्युतऋणी परमाणु पर हो; सारे फ़ॉर्मल आवेशों का जोड़ अणु या आयन के आवेश के बराबर हो।

फ़ॉर्मल आवेश सिर्फ़ हिसाब रखने का तरीका है, असली आवेश नहीं।

आयनिक आबंध और जालक एन्थैल्पी

जब धातु का परमाणु अधातु को इलेक्ट्रॉन देता है और बने आयन एक-दूसरे को खींचते हैं, तो आयनिक (वैद्युत संयोजी) आबंध बनता है। यह आसानी से बनता है जब:

Na से Na⁺ बनाने में ऊर्जा लगती है (+496 kJ mol⁻¹) और Cl → Cl⁻ में सिर्फ़ 349 kJ mol⁻¹ वापस मिलती है। फिर NaCl क्यों बनता है? क्योंकि आयनों के क्रिस्टल में जमने पर बहुत ज़्यादा ऊर्जा निकलती है।

जालक एन्थैल्पी: 1 मोल ठोस आयनिक यौगिक को पूरी तरह गैसीय आयनों में तोड़ने के लिए ज़रूरी ऊर्जा। NaCl के लिए +788 kJ mol⁻¹। जितनी बड़ी जालक एन्थैल्पी, उतना स्थायी ठोस। आयन छोटे और अधिक आवेशित हों तो यह बढ़ती है: MgO (≈ 3890) बनाम NaCl (788)।

वैद्युत संयोजकता

परमाणु जितने इलेक्ट्रॉन देता या लेता है, वह उसकी वैद्युत संयोजकता है: Na = 1, Mg = 2, O = 2, Cl = 1।

करके देखो: सिक्कों से आयन बनाओ

कागज़ पर Na का बड़ा घेरा बनाओ, किनारे पर 1 सिक्का। Cl का घेरा, 7 सिक्के। Na का सिक्का Cl पर रखो। गिनो: Cl के पास 8। अब Mg (2 सिक्के) और दो Cl घेरे लो: हर Cl एक सिक्का लेता है, तो सूत्र MgCl₂। 3D के आख़िरी कदम में अपना उत्तर जाँचो।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. N, O और Cl के लुईस प्रतीक लिखो और बताओ अष्टक के लिए हर एक को कितने इलेक्ट्रॉन चाहिए।

कदम 1: N के 5, O के 6, Cl के 7 संयोजकता इलेक्ट्रॉन। कदम 2: ज़रूरत = 8 − संयोजकता: N को 3, O को 2, Cl को 1। उत्तर: N (5 बिंदु, 3 चाहिए), O (6 बिंदु, 2 चाहिए), Cl (7 बिंदु, 1 चाहिए)।

2. H₂O की लुईस संरचना बनाओ।

कदम 1: इलेक्ट्रॉन = 1 + 1 + 6 = 8। कदम 2: O केंद्र में। दो O–H आबंधों में 4 इलेक्ट्रॉन लगे। कदम 3: बचे 4 → O पर 2 एकाकी युग्म। कदम 4: O के पास 2 आबंध + 2 एकाकी युग्म = 8, हर H के पास 2। उत्तर: H–O–H, O पर दो एकाकी युग्म।

3. नाइट्रेट आयन NO₃⁻ की लुईस संरचना बनाओ और कुल इलेक्ट्रॉन बताओ।

कदम 1: 5 + 3 × 6 + 1 = 24 इलेक्ट्रॉन। कदम 2: N केंद्र में, तीन N–O एकल आबंध (6 लगे), 18 बचे। कदम 3: हर O को तीन एकाकी युग्म (18 लगे)। N के पास सिर्फ़ 6। कदम 4: एक O का एकाकी युग्म द्विआबंध में बदलो: एक N=O और दो N–O। उत्तर: 24 इलेक्ट्रॉन; एक N=O, दो N–O⁻ (तीन तुल्य अनुनादी संरचनाएँ)।

4. O₃ (O=O–O) के हर परमाणु पर फ़ॉर्मल आवेश निकालो।

कदम 1: बायाँ O (द्विआबंध): V = 6, L = 4, B = 4 → 6 − 4 − 2 = 0। कदम 2: बीच का O: V = 6, L = 2, B = 6 → 6 − 2 − 3 = +1। कदम 3: दायाँ O (एकल आबंध): V = 6, L = 6, B = 2 → 6 − 6 − 1 = −1। कदम 4: जाँच: 0 + 1 − 1 = 0 = O₃ का आवेश ✓

5. NH₄⁺ में N पर फ़ॉर्मल आवेश निकालो।

कदम 1: N का V = 5। कदम 2: कोई एकाकी युग्म नहीं, L = 0। चार N–H आबंध, B = 8। कदम 3: FC = 5 − 0 − 8/2 = +1। कदम 4: हर H: 1 − 0 − 1 = 0। कुल = +1 = आयन का आवेश ✓

6. CO₂ की कौन-सी संरचना बेहतर है: O=C=O या O≡C–O? फ़ॉर्मल आवेश से बताओ।

कदम 1: O=C=O: हर O: 6 − 4 − 2 = 0; C: 4 − 0 − 4 = 0। सब शून्य। कदम 2: O≡C–O: त्रिआबंध वाला O: 6 − 2 − 3 = +1; C: 0; एकल आबंध वाला O: 6 − 6 − 1 = −1। कदम 3: कम फ़ॉर्मल आवेश वाली जीतती है। उत्तर: O=C=O बेहतर है।

7. NaCl, MgO और KCl को जालक एन्थैल्पी के बढ़ते क्रम में लगाओ और कारण बताओ।

कदम 1: MgO के आयन 2+ और 2− हैं, बाकी के 1+ और 1−। ज़्यादा आवेश → बहुत बड़ी जालक एन्थैल्पी। कदम 2: K⁺, Na⁺ से बड़ा है। बड़ा आयन → आयन दूर → जालक एन्थैल्पी कम। उत्तर: KCl (717) < NaCl (788) < MgO (≈ 3890 kJ mol⁻¹)।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. अष्टक नियम के अनुसार बाहरी कोश में कितने इलेक्ट्रॉन होने चाहिए?
2. फ़ॉर्मल आवेश =
3. किस अणु में केंद्रीय परमाणु का अष्टक अपूर्ण है?
4. सबसे अधिक जालक एन्थैल्पी किसकी है?
5. आयनिक आबंध आसानी से बनता है जब:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कॉसेल-लुईस उपागम क्या है?

1916 का विचार कि परमाणु उत्कृष्ट गैस जैसा अष्टक पाने के लिए जुड़ते हैं। कॉसेल ने आयनिक आबंध (इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण) समझाया, लुईस ने सहसंयोजी आबंध (इलेक्ट्रॉन साझा) और बिंदु संरचना दी।

फ़ॉर्मल आवेश का सूत्र क्या है?

फ़ॉर्मल आवेश = V − L − B/2: संयोजकता इलेक्ट्रॉन − एकाकी युग्म इलेक्ट्रॉन − आबंधी इलेक्ट्रॉनों का आधा।

जालक एन्थैल्पी क्यों ज़रूरी है?

यह बताती है कि क्रिस्टल में आयन कितनी मज़बूती से बँधे हैं। इसी से समझ आता है कि आयन बनाने में ऊर्जा लगने पर भी आयनिक यौगिक क्यों बनते हैं और उनके गलनांक ऊँचे क्यों होते हैं।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

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