Ukraine 11 клас Chemistry
अध्याय: 5
1. Periodic law and periodic table
Electron structure and periodicity
- इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और s, p, d, f ब्लॉक – आवर्त सारणी असल में इलेक्ट्रॉन-भरने का नक्शा है। आवर्त संख्या = विन्यास में सबसे बड़ा n। ब्लॉक = वह उपकोश जिसमें आख़िरी इलेक्ट्रॉन गया: s-ब्लॉक (वर्ग 1–2, ns¹⁻²), p-ब्लॉक (वर्ग 13–18, ns² np¹⁻⁶), d-ब्लॉक (वर्ग 3–12, (n−1)d¹⁻¹⁰ ns⁰⁻²), f-ब्लॉक (लैन्थेनॉयड, ऐक्टिनॉयड, (n−2)f¹⁻¹⁴ (n−1)d⁰⁻¹ ns²)। वर्ग: s-ब्लॉक = ns इलेक्ट्रॉन; p-ब्लॉक = 10 + ns + np; d-ब्लॉक = ns + (n−1)d।
2. Chemical bonding and structure
Types of chemical bonds · Solid state
- कॉसेल-लुईस उपागम और आयनिक आबंध – परमाणु आपस में इसलिए जुड़ते हैं ताकि हर एक के बाहरी कोश में 8 इलेक्ट्रॉन (अष्टक) हो जाएँ, बिल्कुल उत्कृष्ट गैस जैसे। कॉसेल ने बताया कि परमाणु इलेक्ट्रॉन देकर या लेकर आयन बनाते हैं (आयनिक आबंध)। लुईस ने बताया कि परमाणु इलेक्ट्रॉन-युग्म बाँट भी सकते हैं (सहसंयोजी आबंध)। लुईस संरचना इन इलेक्ट्रॉनों को बिंदु और रेखा से दिखाती है। फ़ॉर्मल आवेश (V − L − B/2) सबसे अच्छी संरचना चुनने में मदद करता है। आयन जुड़कर क्रिस्टल बनाते हैं; इसमें निकली ऊर्जा का संबंध जालक एन्थैल्पी से है।
- ठोस अवस्था (Solid State) – ठोस में कण पास-पास होते हैं और अपनी जगह पर सिर्फ़ कंपन करते हैं, इसलिए ठोस का आकार तय रहता है। क्रिस्टलीय ठोस में कण एक नियमित पैटर्न में दोहराते हैं; अक्रिस्टलीय ठोस (जैसे काँच) में नहीं। सबसे छोटा दोहराने वाला डिब्बा एकक कोष्ठिका है। सरल घन में 1, अंतःकेंद्रित घन में 2 और फलक-केंद्रित घन में 4 कण होते हैं। बंधन के आधार पर क्रिस्टल आयनिक, सहसंयोजक जालक, आण्विक या धात्विक होते हैं।
3. Chemical reactions
Equilibrium · Hydrolysis of salts · Galvanic cells
- रासायनिक साम्य: Kc, Kp, Q और गिब्स ऊर्जा – बंद बर्तन में उत्क्रमणीय अभिक्रिया दोनों ओर चलती है। कुछ देर बाद अग्र और पश्च अभिक्रिया का वेग बराबर हो जाता है। मात्राएँ बदलना बंद हो जाती हैं, पर अभिक्रिया रुकती नहीं। इसे गतिक साम्य कहते हैं। साम्य पर उत्पादों और अभिकारकों का अनुपात (हर एक अपने गुणांक की घात में) एक निश्चित संख्या होता है, जिसे साम्य स्थिरांक K कहते हैं। Kc सांद्रता से, Kp आंशिक दाब से, और Kp = Kc(RT)^Δn। शुद्ध ठोस और द्रव K में नहीं लिखे जाते। Q < K हो तो अभिक्रिया आगे, Q > K हो तो पीछे जाती है। ΔG° = −RT ln K।
- आयनिक साम्य: अम्ल, क्षारक, आयनन और pH – अम्ल और क्षारक की तीन परिभाषाएँ हैं: आरेनियस (पानी में H⁺ या OH⁻ देना), ब्रॉन्स्टेड–लोरी (प्रोटॉन दाता या ग्राही) और लुइस (इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही या दाता)। प्रबल अम्ल-क्षारक पूरे आयनित होते हैं; दुर्बल थोड़े, और उनका साम्य Ka या Kb से लिखा जाता है। पानी भी थोड़ा आयनित होता है: 25 °C पर Kw = [H⁺][OH⁻] = 1.0 × 10⁻¹⁴। pH = −log[H⁺], pH + pOH = 14। दुर्बल वैद्युत-अपघट्य के लिए α ≈ √(K/C), यानी तनु करने पर α बढ़ता है (ओस्टवाल्ड तनुता नियम)। संयुग्मी युग्म के लिए Ka × Kb = Kw। दुर्बल अम्ल या क्षारक से बने लवण पानी से क्रिया करते हैं (जल-अपघटन)।
- गैल्वेनी सेल और नेर्न्स्ट समीकरण – गैल्वेनी सेल अपने-आप होने वाली रेडॉक्स अभिक्रिया की ऊर्जा को बिजली में बदलता है। ऐनोड (−) पर ऑक्सीकरण और कैथोड (+) पर अपचयन होता है। हर इलेक्ट्रोड का विभव मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (0 V) से नापा जाता है। E°सेल = E°कैथोड − E°ऐनोड। नेर्न्स्ट समीकरण E = E° − (0.059/n) log Q (298 K पर) किसी भी सांद्रता पर वोल्टेज बताता है, और ΔG = −nFE वोल्टेज को ऊर्जा से जोड़ता है।
4. Inorganic substances and their properties
Non-metals · Acids · Metals · Bases and salts · Materials, fertilisers and ions
- संक्षारण, उसका बचाव और मिश्रातु – संक्षारण धातु का हवा, नमी या रसायनों से धीरे-धीरे खराब होना है। लोहे पर जंग तभी लगती है जब हवा (ऑक्सीजन) और पानी दोनों हों; जंग जलयुक्त आयरन ऑक्साइड है। इसे पेंट, तेल, यशदलेपन, क्रोमियम लेपन, ऐनोडीकरण या मिश्रातु बनाकर रोका जाता है। मिश्रातु किसी धातु का दूसरी धातुओं या अधातु के साथ समांगी मिश्रण है; यह शुद्ध धातु से प्रायः अधिक कठोर, मज़बूत और संक्षारण-रोधी होता है।
- धातुओं की प्राप्ति और निष्कर्षण – धातुएँ ज़्यादातर भू-पर्पटी में यौगिकों (खनिजों) के रूप में मिलती हैं; जिस खनिज से धातु लाभ के साथ निकाली जा सके वह अयस्क है। निष्कर्षण के तीन चरण: सांद्रण (गैंग हटाना), कच्ची धातु पाना (भर्जन या निस्तापन, फिर अपचयन या विद्युत अपघटन, जो सक्रियता श्रेणी से तय होता है), और परिष्करण (आम तौर पर विद्युत अपघटनी)।
- आयनिक यौगिक: धातु और अधातु कैसे अभिक्रिया करते हैं – धातु का परमाणु अपने बाहरी इलेक्ट्रॉन अधातु के परमाणु को दे देता है ताकि दोनों का बाहरी कोश पूरा (अष्टक) हो जाए। धातु धनायन बनती है, अधातु ऋणायन, और दोनों के बीच का प्रबल आकर्षण आयनिक (वैद्युत संयोजी) बंध है। आयनिक यौगिक कठोर क्रिस्टलीय ठोस होते हैं, उच्च गलनांक वाले, पानी में घुलनशील, और केवल पिघली या घुली अवस्था में विद्युत चालक।
- धातु और अधातु: गुण और सक्रियता श्रेणी – धातुएँ आम तौर पर चमकदार, कठोर, आघातवर्ध्य, तन्य और ऊष्मा-विद्युत की सुचालक होती हैं; अधातुएँ मंद, भंगुर और कुचालक। धातुएँ क्षारकीय ऑक्साइड बनाती हैं, जल और तनु अम्ल से हाइड्रोजन देती हैं, और अधिक सक्रिय धातु कम सक्रिय धातु को उसके लवण के विलयन से बाहर निकाल देती है। सक्रियता के क्रम में लिखी सूची सक्रियता श्रेणी कहलाती है।
- अम्ल और क्षारक: गुण, सूचक और अभिक्रियाएँ – अम्ल पानी में H⁺ आयन देता है और क्षारक OH⁻ आयन। सूचक रंग या गंध बदलकर बताता है कि कौन मौजूद है। H⁺ और OH⁻ मिलकर पानी बनाते हैं और पीछे लवण बच जाता है।
5. Chemistry and human progress
Role of chemistry
- हरित रसायन (Green Chemistry) – हरित रसायन का अर्थ है ऐसे रासायनिक उत्पाद और प्रक्रियाएँ बनाना जो कम अपशिष्ट दें, सुरक्षित पदार्थ लें, ऊर्जा बचाएँ और नवीकरणीय कच्चा माल इस्तेमाल करें। मुख्य उपाय: ऊँची परमाणु अर्थव्यवस्था, उत्प्रेरक, पानी जैसे सुरक्षित विलायक, नवीकरणीय कच्चा माल, और सुरक्षित रूप से टूटने वाले उत्पाद। जीवन-चक्र मूल्यांकन कच्चे माल से निपटान तक उत्पाद का असर जाँचता है।