हरित रसायन क्या है और क्यों ज़रूरी है?
रसायन हमें दवाएँ, उर्वरक, प्लास्टिक, ईंधन और साफ़ पानी देता है। पर पुरानी प्रक्रियाएँ बहुत अपशिष्ट बनाती थीं, ज़हरीले रसायन इस्तेमाल करती थीं और बहुत ऊर्जा जलाती थीं। कुछ से हादसे हुए, जैसे 1984 की भोपाल गैस त्रासदी।
हरित रसायन का अर्थ है शुरू से ही ऐसे उत्पाद और प्रक्रियाएँ बनाना जो सुरक्षित हों और कम नुकसान करें। यह सतत विकास का हिस्सा है: आज की ज़रूरतें पूरी करना, पर आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती न बिगाड़ना।
मुख्य विचार: अपशिष्ट बाद में साफ़ करने के बजाय पहले ही रोकना।
12 सिद्धांत आसान शब्दों में
रसायनज्ञ पॉल अनास्तास और जॉन वॉर्नर ने 1998 में 12 सिद्धांत दिए। संक्षेप में:
- अपशिष्ट रोकिए।
- ऊँची परमाणु अर्थव्यवस्था (ज़्यादातर परमाणु उत्पाद में)।
- कम ख़तरनाक रसायन इस्तेमाल करें और बनाएँ।
- सुरक्षित उत्पाद डिज़ाइन करें।
- सुरक्षित विलायक (पानी, CO₂) या कोई नहीं।
- ऊर्जा बचाएँ: कमरे के ताप और दाब के पास काम करें।
- नवीकरणीय कच्चा माल (पौधे, अपशिष्ट)।
- फ़ालतू चरण न रखें।
- ज़्यादा अभिकर्मक की जगह उत्प्रेरक।
- ऐसे उत्पाद जो उपयोग के बाद सुरक्षित रूप से टूटें।
- अभिक्रिया पर लगातार नज़र रखें ताकि प्रदूषण जल्दी रुके।
- आग, विस्फोट और रिसाव से बचने के सुरक्षित तरीक़े।
परमाणु अर्थव्यवस्था और प्रतिशत लब्धि
परमाणु अर्थव्यवस्था = (उपयोगी उत्पाद का Mr ÷ सभी अभिकारकों का कुल Mr) × 100%।
उदाहरण: एथीन + पानी → एथेनॉल। C₂H₄ + H₂O → C₂H₅OH। सारे परमाणु एथेनॉल में जाते हैं, इसलिए 100%।
किण्वन: C₆H₁₂O₆ → 2C₂H₅OH + 2CO₂। उपयोगी = 2 × 46 = 92; कुल = 180। परमाणु अर्थव्यवस्था = 92 ÷ 180 × 100 = 51.1%। CO₂ अपशिष्ट है, जब तक उसका उपयोग न हो।
प्रतिशत लब्धि अलग है: (वास्तव में बना द्रव्यमान ÷ अधिकतम संभव द्रव्यमान) × 100%। 100% परमाणु अर्थव्यवस्था वाली अभिक्रिया की लब्धि भी कम हो सकती है।
योगात्मक अभिक्रियाएँ 100% देती हैं; प्रतिस्थापन और विलोपन अभिक्रियाएँ हमेशा उप-उत्पाद बनाती हैं।
उत्प्रेरक, सुरक्षित विलायक, नवीकरणीय कच्चा माल और जीवन-चक्र
उत्प्रेरक कम ऊर्जा वाला रास्ता देकर अभिक्रिया तेज़ करते हैं। कम ताप = कम ईंधन और कम CO₂। हैबर प्रक्रम में लोहा और दवा बनाने में एंज़ाइम इसके उदाहरण हैं।
सुरक्षित विलायक: कॉफ़ी से कैफ़ीन निकालने में सुपरक्रिटिकल CO₂। कई नई अभिक्रियाओं में पानी।
नवीकरणीय कच्चा माल: गन्ने से बायो-एथेनॉल, मक्के के स्टार्च से PLA प्लास्टिक।
जीवन-चक्र मूल्यांकन (LCA) हर चरण जाँचता है: (1) कच्चा माल लाना, (2) बनाना, (3) उपयोग, (4) निपटान या पुनर्चक्रण। यह ऊर्जा, पानी, अपशिष्ट और ग्रीनहाउस गैसें गिनता है, जैसे काग़ज़ और प्लास्टिक थैले की तुलना।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- परमाणु अर्थव्यवस्था (%) = (चाहे गए उत्पाद का Mr ÷ सभी अभिकारकों के Mr का योग) × 100
- प्रतिशत लब्धि (%) = (वास्तविक लब्धि ÷ सैद्धांतिक लब्धि) × 100
- E-गुणांक = अपशिष्ट का द्रव्यमान ÷ उत्पाद का द्रव्यमान (कम = ज़्यादा हरित)
हल किए गए उदाहरण
1. चूना बनाने की परमाणु अर्थव्यवस्था ज्ञात कीजिए: CaCO₃ → CaO + CO₂ (Ca = 40, C = 12, O = 16)।
CaCO₃ का Mr = 100, CaO का Mr = 56। परमाणु अर्थव्यवस्था = 56 ÷ 100 × 100 = 56%।
2. हाइड्रोजन: CH₄ + H₂O → CO + 3H₂। हाइड्रोजन के लिए परमाणु अर्थव्यवस्था (H = 1, C = 12, O = 16)।
अभिकारक: 16 + 18 = 34। उपयोगी: 3 × 2 = 6। 6 ÷ 34 × 100 = 17.6%। बहुत कम, जब तक CO भी इस्तेमाल न हो।
3. एक फ़ैक्टरी 2 kg दवा और 50 kg अपशिष्ट बनाती है। E-गुणांक बताइए।
E-गुणांक = 50 ÷ 2 = 25। दवाओं में यह आम है पर ज़्यादा है; हरित रास्ता इसे घटाने की कोशिश करेगा।
आम गलतियाँ
- परमाणु अर्थव्यवस्था और प्रतिशत लब्धि को एक समझना। पहली समीकरण से, दूसरी वास्तव में मिले उत्पाद से।
- Mr जोड़ते समय सूत्र के आगे की संख्या (जैसे 2C₂H₅OH) भूल जाना।
- मान लेना कि प्राकृतिक कच्चा माल हमेशा हरित है। पूरा जीवन-चक्र देखना पड़ता है।
- सोचना कि उत्प्रेरक ख़र्च हो जाता है। वह फिर से काम आता है।