China 九年级(初三) Chemistry
अध्याय: 12
1. Introduction
What chemistry studies
- रसायन और समाज – रसायन विज्ञान यह पढ़ता है कि परमाणु कैसे जुड़ते और बदलते हैं। कौन से परमाणु कैसे जोड़ें, यह चुनकर रसायनज्ञ नए पदार्थ, दवाएँ, खाद और ईंधन बनाते हैं। अभिक्रिया में परमाणु नष्ट नहीं होते, इसलिए हर उत्पाद का एक मूल्य और कचरा भी होता है।
2. U1 Into the world of chemistry
Physical and chemical changes and properties · Experiments and inquiry; lab safety and basic skills
- भौतिक और रासायनिक परिवर्तन – भौतिक परिवर्तन में पदार्थ का आकार, माप या अवस्था बदलती है, पर कोई नया पदार्थ नहीं बनता; कण वही रहते हैं। रासायनिक परिवर्तन में परमाणु नए ढंग से जुड़कर एक या ज़्यादा नए पदार्थ बनाते हैं। संकेत: गैस, रंग बदलना, ऊष्मा या प्रकाश, अवक्षेप और नई गंध। दोनों में कुल द्रव्यमान वही रहता है।
- प्रयोगशाला सुरक्षा और सुरक्षित प्रयोग – सुरक्षा पहनावा (गॉगल्स, कोट, बंद जूते, बँधे बाल)। लेबल और ख़तरा चिह्न पढ़ें। परखनली का मुँह दूर रखकर धीरे गरम करें। अम्ल को पानी में डालें, गंध हवा करके लें, कभी न चखें। हर दुर्घटना तुरंत बताएँ। प्रयोग की योजना बनाएँ, पहले जोखिम आँकें और कचरा सही जगह डालें।
3. U2 Air and oxygen
Air around us · Oxygen · Preparing oxygen; catalysts · Lab activity 1: preparing and testing O₂ · Interdisciplinary 1: micro air-quality station
- वायु का संघटन – हवा कई गैसों का मिश्रण है। आयतन के हिसाब से सूखी हवा में लगभग 78% नाइट्रोजन, 21% ऑक्सीजन, 0.93% आर्गन और 0.04% कार्बन डाइऑक्साइड होती है, साथ में दूसरी उत्कृष्ट गैसें बहुत थोड़ी। जलवाष्प 0 से लगभग 4% तक बदलती रहती है। बंद नली में लोहे को जंग लगने देकर (या फ़ॉस्फ़ोरस जलाकर) हम ऑक्सीजन नाप सकते हैं: पानी लगभग 1/5 ऊपर चढ़ता है। धुआँ, सल्फ़र डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे प्रदूषक हवा को हानिकारक बनाते हैं, और हम इन्हें कम कर सकते हैं।
- ऑक्सीजन – ऑक्सीजन (O, परमाणु क्रमांक 8) रंगहीन, गंधहीन गैस है जो आयतन के हिसाब से हवा का लगभग 21% है। यह O₂ अणुओं के रूप में रहती है। प्रयोगशाला में इसे मैंगनीज़ डाइऑक्साइड उत्प्रेरक की मदद से हाइड्रोजन पेरॉक्साइड को तोड़कर (2H₂O₂ → 2H₂O + O₂) या पोटैशियम परमैंगनेट गरम करके बनाते हैं; उद्योग में द्रव वायु के प्रभाजी आसवन से। यह सुलगती तीली को फिर जला देती है। ऑक्सीजन दहन और श्वसन में मदद करती है और ज़्यादातर तत्वों से ऑक्साइड बनाती है: धातु ऑक्साइड क्षारीय, अधातु ऑक्साइड ज़्यादातर अम्लीय। इसका दूसरा रूप ओज़ोन (O₃) पृथ्वी को UV किरणों से बचाता है।
- उत्प्रेरक: बिना ख़र्च हुए अभिक्रिया तेज़ करना – उत्प्रेरक वह पदार्थ है जो रासायनिक अभिक्रिया को तेज़ करता है पर ख़ुद ख़र्च नहीं होता; अंत में उसका द्रव्यमान और रासायनिक स्वभाव वही रहता है। यह अभिक्रिया को कम सक्रियण ऊर्जा वाला दूसरा रास्ता देता है। मैंगनीज़ डाइऑक्साइड हाइड्रोजन परॉक्साइड को पानी और ऑक्सीजन में तेज़ी से तोड़ता है। एंज़ाइम जीवों के उत्प्रेरक हैं।
- प्रयोग: ऑक्सीजन बनाना और जाँचना – प्रयोगशाला में ऑक्सीजन हाइड्रोजन परॉक्साइड को मैंगनीज़ डाइऑक्साइड (उत्प्रेरक) से कमरे के तापमान पर तोड़कर, या पोटैशियम परमैंगनेट को गरम करके बनती है। गैस निकास नली से गुज़रकर गैस जार में पानी के ऊपर या हवा के ऊर्ध्व विस्थापन से इकट्ठी होती है। परीक्षण सुलगती तीली से होता है: तीली फिर जल उठती है। सुरक्षा नियम: उपकरण वायुरोधी हो, पहले स्थिर बुलबुले का इंतज़ार करें, और गरम करना बंद करने से पहले नली पानी से बाहर निकालें।
- अंतर्विषयी प्रोजेक्ट: सूक्ष्म वायु-गुणवत्ता स्टेशन – सूक्ष्म वायु-गुणवत्ता स्टेशन एक छोटा डिब्बा है जो हवा नापता है। धूल सेंसर प्रकाश-किरण के बिखरने से बारीक कण (PM2.5) गिनता है। गैस और तापमान सेंसर दूसरी चीज़ें नापते हैं। एक छोटा कंप्यूटर (माइक्रोकंट्रोलर) हर सेंसर को पढ़ता है, संकेत को संख्या में बदलता है, रंग-पट्टी के साथ स्क्रीन पर दिखाता है और सीमा पार होने पर अलार्म बजाता है। अच्छे स्टेशन सही जगह लगते हैं, कैलिब्रेट होते हैं और समय के औसत से पढ़े जाते हैं।
4. U3 Composition of matter
Molecules and atoms · Atomic structure; ions · Elements; periodic table intro · Interdisciplinary 2: models of atomic discovery
- परमाणु और अणु – रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान न बनता है, न नष्ट होता है (द्रव्यमान संरक्षण), और यौगिक में तत्व हमेशा द्रव्यमान के एक ही अनुपात में होते हैं (स्थिर अनुपात)। डाल्टन ने दोनों को समझाया: पदार्थ छोटे-छोटे परमाणुओं से बना है जो पूरी संख्याओं में जुड़ते हैं। परमाणु जुड़कर अणु बनाते हैं; आवेश वाले परमाणु या समूह आयन हैं। सूत्र संयोजकता को क्रॉस करके लिखते हैं। आण्विक द्रव्यमान (आयनिक यौगिक के लिए सूत्र इकाई द्रव्यमान) सूत्र के सभी परमाणु द्रव्यमानों का योग है, u में।
- परमाणु की संरचना – परमाणु के बीच में एक बहुत छोटा, भारी और धनावेशित नाभिक होता है, जिसमें प्रोटॉन और न्यूट्रॉन रहते हैं। इलेक्ट्रॉन इसके चारों ओर तय कोशों K, L, M, N में घूमते हैं। प्रोटॉन की संख्या (Z) से तत्व तय होता है; प्रोटॉन + न्यूट्रॉन = द्रव्यमान संख्या (A)। बाहरी इलेक्ट्रॉन संयोजकता तय करते हैं।
5. U4 Water in nature
Water resources and purification · Composition of water · Chemical formulae and valence; relative formula mass · Lab activity 2: composition of water · Interdisciplinary 3: water testing and home-made filter
- जल शोधन: गंदे पानी से पीने योग्य पानी तक – पीने योग्य (potable) पानी वह है जो पीने के लिए सुरक्षित हो। यह पूरी तरह शुद्ध नहीं होता: इसमें थोड़े घुले लवण रहते हैं, पर हानिकारक कीटाणु नहीं। इसे बनाने के लिए अच्छा स्रोत चुनते हैं, ठोस कणों को बैठने देते हैं, छानते हैं और क्लोरीन, ओज़ोन या UV से कीटाणु मारते हैं। जहाँ मीठा पानी कम हो, वहाँ समुद्री पानी से आसवन या रिवर्स ऑस्मोसिस द्वारा नमक हटाते हैं। घरों और खेतों का गंदा पानी नदी में छोड़ने से पहले साफ़ किया जाता है। कठोर जल में कैल्शियम और मैग्नीशियम के लवण घुले होते हैं; उबालकर या आयन-विनिमय से इसे मृदु बनाया जाता है।
- परमाणु और अणु – रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान न बनता है, न नष्ट होता है (द्रव्यमान संरक्षण), और यौगिक में तत्व हमेशा द्रव्यमान के एक ही अनुपात में होते हैं (स्थिर अनुपात)। डाल्टन ने दोनों को समझाया: पदार्थ छोटे-छोटे परमाणुओं से बना है जो पूरी संख्याओं में जुड़ते हैं। परमाणु जुड़कर अणु बनाते हैं; आवेश वाले परमाणु या समूह आयन हैं। सूत्र संयोजकता को क्रॉस करके लिखते हैं। आण्विक द्रव्यमान (आयनिक यौगिक के लिए सूत्र इकाई द्रव्यमान) सूत्र के सभी परमाणु द्रव्यमानों का योग है, u में।
6. U5 Quantitative relations in reactions
Conservation of mass · Chemical equations and simple calculations · Interdisciplinary 4: simple oxygen supplier
- परमाणु और अणु – रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान न बनता है, न नष्ट होता है (द्रव्यमान संरक्षण), और यौगिक में तत्व हमेशा द्रव्यमान के एक ही अनुपात में होते हैं (स्थिर अनुपात)। डाल्टन ने दोनों को समझाया: पदार्थ छोटे-छोटे परमाणुओं से बना है जो पूरी संख्याओं में जुड़ते हैं। परमाणु जुड़कर अणु बनाते हैं; आवेश वाले परमाणु या समूह आयन हैं। सूत्र संयोजकता को क्रॉस करके लिखते हैं। आण्विक द्रव्यमान (आयनिक यौगिक के लिए सूत्र इकाई द्रव्यमान) सूत्र के सभी परमाणु द्रव्यमानों का योग है, u में।
- रासायनिक अभिक्रियाएँ और समीकरण संतुलन – रासायनिक अभिक्रिया में परमाणु न बनते हैं, न नष्ट होते हैं; वे सिर्फ़ अपने साथी बदलते हैं। इसलिए समीकरण के दोनों ओर हर तत्व के परमाणु बराबर होने चाहिए। हम सूत्र के आगे की संख्या बदलकर संतुलन करते हैं, सूत्र को कभी नहीं बदलते।
- सरल ऑक्सीजन सप्लायर बनाना – सरल ऑक्सीजन सप्लायर 2H₂O₂ → 2H₂O + O₂ अभिक्रिया लेता है और MnO₂ उत्प्रेरक है। गरम करने की ज़रूरत नहीं। गैस पानी की बोतल से गुज़रती है, जो उसे ठंडा करती है और बुलबुले गिनने देती है, फिर निकास नली से बाहर आती है। दहकती तीली दोबारा जल उठे तो गैस ऑक्सीजन है। यह विज्ञान का मॉडल है, चिकित्सा उपकरण नहीं।
7. U6 Carbon and its oxides
Forms of carbon · Oxides of carbon · Preparing CO₂ in the lab · Lab activity 3: CO₂ preparation and properties · Interdisciplinary 5: low-carbon action plan
- कार्बन के अपररूप: हीरा, ग्रेफ़ाइट, ग्रेफ़ीन और फ़ुलरीन – अपररूप (allotropes) एक ही तत्व के अलग-अलग रूप हैं, एक ही अवस्था में। कार्बन के कई अपररूप हैं। हीरे में हर परमाणु 4 मज़बूत सहसंयोजक बंध बनाता है, एक विशाल 3D जाल में; इसलिए यह बहुत कठोर है, गलनांक बहुत ऊँचा है और बिजली नहीं चलाता। ग्रेफ़ाइट में हर परमाणु 3 से जुड़ता है, षट्भुजों की चपटी परतों में; परतें फिसलती हैं (नरम) और हर परमाणु का एक बचा इलेक्ट्रॉन घूम सकता है, इसलिए यह बिजली चलाता है। ग्रेफ़ीन ग्रेफ़ाइट की एक परत है। फ़ुलरीन जैसे C₆₀ खोखली गेंदें हैं; नैनोट्यूब लिपटी नलियाँ हैं। सभी ऑक्सीजन में जलकर कार्बन डाइऑक्साइड बनाते हैं।
- कार्बन के ऑक्साइड: कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड – कार्बन के दो सामान्य ऑक्साइड हैं। CO₂ भारी है, जलती नहीं, पानी में थोड़ी घुलती है और हवा में ऊष्मा रोकती है। CO अपूर्ण दहन से बनी ज़हरीली गैस है; वह हीमोग्लोबिन से चिपकती है और अपचायक के रूप में धातु ऑक्साइड से ऑक्सीजन छीन लेती है।
- प्रयोगशाला में कार्बन डाइऑक्साइड बनाना – प्रयोगशाला में संगमरमर (CaCO₃) पर तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल डालकर CO₂ बनाते हैं: CaCO₃ + 2HCl → CaCl₂ + H₂O + CO₂। गैस हवा से भारी है, इसलिए जार में ऊपर की ओर वायु हटाकर इकट्ठा करते हैं। जलती तीली बुझ जाती है और चूने का पानी दूधिया हो जाता है।
- प्रयोगशाला में कार्बन डाइऑक्साइड बनाना और जाँचना – संगमरमर (कैल्सियम कार्बोनेट) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया करके कार्बन डाइऑक्साइड, कैल्सियम क्लोराइड और पानी देता है: CaCO₃ + 2HCl → CaCl₂ + H₂O + CO₂। CO₂ रंगहीन, गंधहीन और हवा से भारी है, इसलिए ऊर्ध्व विस्थापन से इकट्ठी होती है। यह चूने के पानी को दूधिया करती है, जलती तीली बुझाती है और नम नीली लिटमस को लाल करती है।
- जलवायु परिवर्तन और हरितगृह प्रभाव – जलवायु किसी जगह का लगभग 30 साल का औसत मौसम है। कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी हरितगृह गैसें पृथ्वी से निकलने वाली कुछ ऊष्मा रोक लेती हैं। मनुष्यों ने ईंधन जलाकर और जंगल काटकर ये गैसें बहुत बढ़ा दी हैं, इसलिए पृथ्वी गर्म हो रही है। इससे बर्फ़ पिघलती है, समुद्र तल बढ़ता है और मौसम उग्र होता है। हम गैसें घटा सकते हैं (शमन) और बदलाव के लिए तैयार हो सकते हैं (अनुकूलन)।
8. U7 Using and developing energy
Combustion of fuels; fire safety · Fossil fuels and their wise use · Lab activity 4: conditions for burning · Interdisciplinary 6: household fuels
- दहन (जलना) – दहन यानी जलना: एक रासायनिक बदलाव जिसमें ईंधन ऑक्सीजन से तेज़ी से क्रिया करता है और गर्मी व रोशनी देता है। इसके लिए तीन चीज़ें चाहिए: ईंधन, ऑक्सीजन और गर्मी (ज्वलन ताप तक)। कोई एक हटाओ, आग बुझ जाती है। पूरी हवा में कार्बन-हाइड्रोजन वाले ईंधन पूरी तरह जलकर CO₂ और पानी बनाते हैं (नीली लौ)। कम हवा में अपूर्ण दहन होता है: कालिख और ज़हरीली कार्बन मोनोऑक्साइड (पीली, धुएँ वाली लौ)। CO₂ चूने के पानी को दूधिया करती है। 1 ग्राम ईंधन जलने पर निकली ऊर्जा उसका ऊष्मीय मान है।
- घरेलू ईंधन: समय के साथ बदलाव और सुरक्षित उपयोग – घरों में ईंधन उपलों और लकड़ी से बदलकर कोयला, केरोसिन, LPG, पाइप प्राकृतिक गैस और बिजली या सौर चूल्हे तक आया। साफ़ ईंधन कम धुआँ देते हैं और बर्तन तक ज़्यादा गर्मी पहुँचाते हैं। हर ईंधन के लिए सुरक्षा ज़रूरी है: हवादार जगह, गैस रिसाव की जाँच, और बंद कमरे में ईंधन कभी न जलाना, क्योंकि ज़हरीली कार्बन मोनोऑक्साइड जमा होती है।
9. U8 Metals and metal materials
Metal materials and alloys · Chemical properties of metals; reactivity series · Using and protecting metal resources; rusting · Lab activity 5: properties of common metals · Interdisciplinary 7: waste sorting and recycling
- संक्षारण, उसका बचाव और मिश्रातु – संक्षारण धातु का हवा, नमी या रसायनों से धीरे-धीरे खराब होना है। लोहे पर जंग तभी लगती है जब हवा (ऑक्सीजन) और पानी दोनों हों; जंग जलयुक्त आयरन ऑक्साइड है। इसे पेंट, तेल, यशदलेपन, क्रोमियम लेपन, ऐनोडीकरण या मिश्रातु बनाकर रोका जाता है। मिश्रातु किसी धातु का दूसरी धातुओं या अधातु के साथ समांगी मिश्रण है; यह शुद्ध धातु से प्रायः अधिक कठोर, मज़बूत और संक्षारण-रोधी होता है।
- धातुओं की प्राप्ति और निष्कर्षण – धातुएँ ज़्यादातर भू-पर्पटी में यौगिकों (खनिजों) के रूप में मिलती हैं; जिस खनिज से धातु लाभ के साथ निकाली जा सके वह अयस्क है। निष्कर्षण के तीन चरण: सांद्रण (गैंग हटाना), कच्ची धातु पाना (भर्जन या निस्तापन, फिर अपचयन या विद्युत अपघटन, जो सक्रियता श्रेणी से तय होता है), और परिष्करण (आम तौर पर विद्युत अपघटनी)।
- आयनिक यौगिक: धातु और अधातु कैसे अभिक्रिया करते हैं – धातु का परमाणु अपने बाहरी इलेक्ट्रॉन अधातु के परमाणु को दे देता है ताकि दोनों का बाहरी कोश पूरा (अष्टक) हो जाए। धातु धनायन बनती है, अधातु ऋणायन, और दोनों के बीच का प्रबल आकर्षण आयनिक (वैद्युत संयोजी) बंध है। आयनिक यौगिक कठोर क्रिस्टलीय ठोस होते हैं, उच्च गलनांक वाले, पानी में घुलनशील, और केवल पिघली या घुली अवस्था में विद्युत चालक।
- धातु और अधातु: गुण और सक्रियता श्रेणी – धातुएँ आम तौर पर चमकदार, कठोर, आघातवर्ध्य, तन्य और ऊष्मा-विद्युत की सुचालक होती हैं; अधातुएँ मंद, भंगुर और कुचालक। धातुएँ क्षारकीय ऑक्साइड बनाती हैं, जल और तनु अम्ल से हाइड्रोजन देती हैं, और अधिक सक्रिय धातु कम सक्रिय धातु को उसके लवण के विलयन से बाहर निकाल देती है। सक्रियता के क्रम में लिखी सूची सक्रियता श्रेणी कहलाती है।
- ओज़ोन परत का क्षय और कचरा प्रबंधन – ऊपर आसमान में ओज़ोन (O₃) हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों को रोकती है, पर CFC इसे पतला कर देते हैं; ज़मीन पर जैव निम्नीकरणीय कचरा अपने-आप टूट जाता है और अजैव निम्नीकरणीय कचरा सालों पड़ा रहता है, इसलिए कम करें, दोबारा इस्तेमाल करें, पुनः चक्रण करें और कचरा अलग-अलग रखें।
10. U9 Solutions
Solutions and uses · Solubility · Mass fraction of solute · Lab activity 6: preparing NaCl solution · Lab activity 7: removing insoluble impurities from salt · Interdisciplinary 8: marine resources and salt making
- मिश्रण और उनका पृथक्करण – मिश्रण में दो या ज़्यादा पदार्थ किसी भी अनुपात में मिले होते हैं और हर पदार्थ अपने गुण बनाए रखता है। समांगी मिश्रण (विलयन) हर जगह एक जैसा दिखता है, विषमांगी नहीं। कण के आकार से: विलयन (< 1 nm), कोलॉइड (1–1000 nm), निलंबन (> 1000 nm)। कोलॉइड प्रकाश फैलाता है (टिंडल प्रभाव)। सांद्रता बताती है कि विलयन में कितना विलेय है। मिश्रण को उसके हिस्सों के अंतर से अलग करते हैं: वाष्पीकरण, क्रिस्टलीकरण, आसवन, क्रोमैटोग्राफी, ऊर्ध्वपातन, अपकेंद्रण और स्कंदन।
- विलयन: चीज़ें कैसे घुलती हैं और कितनी घुल सकती हैं – विलयन विलायक में घुले विलेय का समांगी मिश्रण है। पानी में (जलीय विलयन) विलेय इतने छोटे कणों में टूटता है कि दिखता नहीं, नीचे नहीं बैठता और फ़िल्टर पेपर से निकल जाता है। सांद्रता बताती है कितना विलेय है (द्रव्यमान % = विलेय ÷ विलयन × 100)। विलेयता किसी ताप पर 100 g विलायक में घुल सकने वाली अधिकतम मात्रा है; उसके बाद विलयन संतृप्त है। वाष्पीकरण, क्रिस्टलीकरण और आसवन से विलयन अलग होता है।
- प्रयोग: दिए गए द्रव्यमान % का नमक (NaCl) घोल बनाना – तय प्रतिशत का घोल बनाने के लिए पहले हिसाब लगाओ: नमक = कुल द्रव्यमान × प्रतिशत ÷ 100 और पानी = कुल − नमक। नमक को तराज़ू पर तौलो, पानी को मापक जार में मापो (1 g पानी = 1 mL), दोनों बीकर में डालो और दाने घुलने तक हिलाओ।
- समुद्री पानी से नमक और सागर के संसाधन – समुद्री पानी में लगभग 3.5% नमक घुला होता है। नमक की क्यारियों में धूप और हवा सिर्फ़ पानी को उड़ाती है। घोल गाढ़ा होता जाता है और जब नमक घुला नहीं रह पाता तो क्रिस्टल बनते हैं। कच्चे नमक को घोलकर, छानकर और वाष्पित करके साफ़ करते हैं। सागर से भोजन, खनिज, ऊर्जा और मीठा पानी भी मिलता है, जिनका सोच-समझकर उपयोग करना चाहिए।
11. U10 Common acids, bases and salts
Acidity/alkalinity; pH; indicators · Common acids and bases; neutralisation · Common salts; double decomposition; fertilisers · Lab activity 8: acids and bases · Interdisciplinary 9: soil acidity and plants
- pH स्केल: अम्ल या क्षारक कितना प्रबल है? – pH 0 से 14 तक की एक संख्या है जो बताती है कि घोल कितना अम्लीय या क्षारीय है। 7 उदासीन, 7 से कम अम्लीय और 7 से ज़्यादा क्षारीय। pH में 1 कम होने का अर्थ है 10 गुना ज़्यादा H⁺।
- अम्ल और क्षारक: गुण, सूचक और अभिक्रियाएँ – अम्ल पानी में H⁺ आयन देता है और क्षारक OH⁻ आयन। सूचक रंग या गंध बदलकर बताता है कि कौन मौजूद है। H⁺ और OH⁻ मिलकर पानी बनाते हैं और पीछे लवण बच जाता है।
- लवण और साधारण नमक से बनने वाले रसायन – अम्ल और क्षारक की उदासीनीकरण अभिक्रिया से लवण बनता है। लवण उदासीन, अम्लीय या क्षारीय हो सकते हैं। साधारण नमक से सोडियम हाइड्रॉक्साइड, विरंजक चूर्ण, खाने का सोडा और धोने का सोडा बनते हैं, और कुछ लवणों के क्रिस्टलों में पानी छिपा रहता है।
- मिट्टी की अम्लता और पौधों की बढ़त: एक प्रोजेक्ट – मिट्टी का pH बताता है कि मिट्टी अम्लीय (7 से कम), उदासीन (लगभग 7) या क्षारीय (7 से अधिक) है। पौधे मिट्टी के पानी से भोजन लेते हैं और pH तय करता है कि कौन-से पोषक तत्व घुलते हैं। ज़्यादातर फ़सलें pH 6 से 7.5 के बीच अच्छी बढ़ती हैं, चाय को pH 5 के आसपास अम्लीय मिट्टी पसंद है, और बहुत अम्लीय या बहुत क्षारीय मिट्टी में कई पौधे ख़राब उगते हैं। pH नापने के लिए मिट्टी को आसुत जल में मिलाकर बैठने देते हैं और साफ़ पानी को सूचक कागज़, सूचक घोल या pH मीटर से जाँचते हैं। अम्लीय मिट्टी में चूना (क्षार) और क्षारीय मिट्टी में गंधक, खाद या अम्लीय उर्वरक डालते हैं। प्रोजेक्ट में हम जाँच करते हैं, निष्पक्ष परीक्षण से पौधों की तुलना करते हैं और तय करते हैं कि मिट्टी का उपचार कैसे हो।
12. U11 Chemistry and society
Chemistry and human health (nutrients, elements) · Chemistry and sustainable development (materials, green chemistry) · Interdisciplinary 10: new materials and energy in aerospace
- पोषण (Nutrition) – पोषण वह तरीक़ा है जिससे हम भोजन के पदार्थ पाते और इस्तेमाल करते हैं। शरीर को छह तरह के पोषक तत्व चाहिए: कार्बोहाइड्रेट और वसा (मुख्य रूप से ऊर्जा), प्रोटीन (वृद्धि और मरम्मत), विटामिन और खनिज (थोड़ी मात्रा, शरीर को सही चलाने के लिए), और पानी; साथ में पाचन के लिए रेशा। कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन लगभग 17 kJ प्रति ग्राम, वसा लगभग 37 kJ प्रति ग्राम देते हैं। संतुलित आहार सब पोषक तत्व सही मात्रा में देता है, और अंदर आई ऊर्जा लगभग ख़र्च ऊर्जा के बराबर होनी चाहिए।
- हरित रसायन (Green Chemistry) – हरित रसायन का अर्थ है ऐसे रासायनिक उत्पाद और प्रक्रियाएँ बनाना जो कम अपशिष्ट दें, सुरक्षित पदार्थ लें, ऊर्जा बचाएँ और नवीकरणीय कच्चा माल इस्तेमाल करें। मुख्य उपाय: ऊँची परमाणु अर्थव्यवस्था, उत्प्रेरक, पानी जैसे सुरक्षित विलायक, नवीकरणीय कच्चा माल, और सुरक्षित रूप से टूटने वाले उत्पाद। जीवन-चक्र मूल्यांकन कच्चे माल से निपटान तक उत्पाद का असर जाँचता है।
- अंतरिक्ष तकनीक में नए पदार्थ और ऊर्जा – रॉकेट को भारी गर्मी सहनी होती है, उसे बहुत हल्का पर मज़बूत होना होता है, उसमें अधिक ऊर्जा वाला ईंधन चाहिए और उपग्रह को धूप से बिजली बनानी होती है। इसलिए इंजीनियर ऊष्मा-कवच के लिए ऊँचे गलनांक वाले पदार्थ (टाइटेनियम मिश्रधातु, सिरेमिक), ढाँचे के लिए कम घनत्व और अधिक मज़बूती वाले पदार्थ (ऐल्युमिनियम मिश्रधातु, कार्बन-रेशा मिश्रित पदार्थ) और प्रति किलोग्राम अधिक ऊर्जा वाले ईंधन चुनते हैं, जैसे द्रव हाइड्रोजन (लगभग 120 MJ/kg) के साथ द्रव ऑक्सीजन, जो जलकर केवल भाप देता है। उपग्रह सौर पैनल लेते हैं, जिनकी शक्ति लगभग धूप की तीव्रता × क्षेत्रफल × दक्षता × झुकाव कोण का cos होती है। इस प्रोजेक्ट में तुम एक पदार्थ या ऊर्जा स्रोत पर शोध करते हो, तालिका में तथ्य मिलाते हो, साफ़ ज़रूरत के हिसाब से परखते हो और स्रोतों के साथ अपनी बात रखते हो।