वायु गुणवत्ता के लिए सेंसर
सेंसर दुनिया की किसी चीज़ (प्रकाश, गर्मी, गैस) को बिजली के संकेत में बदलता है। वायु गुणवत्ता के लिए हम इन्हें इस्तेमाल करते हैं:
- धूल सेंसर (PM2.5/PM10): छोटा पंखा हवा को प्रकाश-किरण के पास से गुज़ारता है। कण प्रकाश बिखेरते हैं और डिटेक्टर चमक गिनता है। PM2.5 यानी 2.5 माइक्रोमीटर से छोटे कण, बाल से भी पतले, जो फेफड़ों में गहरे जा सकते हैं। माप µg/m³ (माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) में होता है।
- गैस सेंसर: मेटल-ऑक्साइड या इलेक्ट्रोकेमिकल सेंसर कार्बन मोनोऑक्साइड या नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसी गैसें छूते ही अपना विद्युत संकेत बदल देते हैं। कार्बन डाइऑक्साइड अवरक्त (इन्फ़्रारेड) सेंसर से नापी जाती है।
- तापमान और नमी सेंसर: ये दूसरे मापों को सुधारने में भी काम आते हैं, क्योंकि नम हवा में धूल बड़ी दिख सकती है।
कोई सेंसर पूरी तरह सही नहीं होता, इसलिए हम कैलिब्रेट करते हैं: भरोसेमंद संदर्भ से तुलना करके समायोजित करते हैं।
दिमाग़, स्क्रीन और अलार्म
माइक्रोकंट्रोलर (बोर्ड पर छोटा कंप्यूटर-चिप) हर सेंसर को सेकंड में कई बार पढ़ता है। एनालॉग संकेत को ADC (एनालॉग-से-डिजिटल कन्वर्टर) संख्या में बदलता है। फिर प्रोग्राम:
- सेंसर पढ़ता है।
- शोर कम करने के लिए कई मापों का औसत लेता है।
- संख्या के लिए रंग-पट्टी चुनता है।
- स्क्रीन पर दिखाता है और सीमा से ऊपर होने पर LED और बज़र चालू करता है।
PM2.5 के लिए उदाहरण पट्टियाँ (µg/m³): 35 से कम = अच्छा, 35 से 75 = ठीक-ठाक, 75 से 150 = ख़राब, 150 से ऊपर = बहुत ख़राब। (सरकारी पट्टियाँ हर देश में अलग होती हैं।)
स्टेशन चरण-दर-चरण जोड़ना
- योजना: तय कीजिए क्या और कहाँ नापेंगे। ब्लॉक-आरेख बनाइए: सेंसर → दिमाग़ → स्क्रीन/अलार्म।
- बिजली: बड़े की मदद से बोर्ड को सुरक्षित स्रोत (USB या बैटरी पैक) से जोड़िए।
- सेंसर जोड़िए सही पिनों से। तार छोटे और सलीके से रखिए।
- डिब्बा: सब कुछ हवा के छेदों वाले डिब्बे में रखिए। धूल सेंसर का मुँह खुला रखिए।
- प्रोग्राम और जाँच: कोड डालिए, हर माप जाँचिए, फिर सुरक्षित बदलाव से परखिए (जैसे चेहरे से दूर चॉक की धूल का छोटा झोंका)।
- जगह: साँस की ऊँचाई पर, दीवार, पंखे और रसोई के धुएँ से दूर।
स्टेशन का उपयोग और आँकड़े पढ़ना
एक हफ़्ते तक रोज़ एक ही समय माप लीजिए। तालिका में लिखिए और आलेख बनाइए। पैटर्न ढूँढिए: सुबह के ट्रैफ़िक में ज़्यादा? बारिश के बाद कम? अकेले माप के बजाय औसत लीजिए। भरोसेमंद ऐप या सरकारी स्टेशन से तुलना कीजिए कि आप कितने क़रीब हैं।
सीमाएँ: सस्ता सेंसर बहुत नम या बहुत गरम हवा में काफ़ी ग़लत हो सकता है, और वह सिर्फ़ उसी जगह को नापता है जहाँ रखा है। संख्याओं को मार्गदर्शन मानिए, चिकित्सा उपकरण नहीं।
करके देखें
3 दिन घर के अंदर और बाहर नापिए। कहाँ साफ़ है? क्यों?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- PM2.5 = 2.5 µm से छोटे कण (माप µg/m³ में)
- 1 mg/m³ = 1000 µg/m³
- औसत = (मापों का जोड़) ÷ (मापों की संख्या)
- मात्रा (µg) = सांद्रता (µg/m³) × साँस ली हवा (m³)
- अलार्म नियम: माप > थ्रेशोल्ड
हल किए गए उदाहरण
1. धूल के पाँच माप (µg/m³): 30, 34, 40, 36, 30। औसत और रंग-पट्टी निकालिए (अच्छा 35 से कम, ठीक-ठाक 35 से 75)।
जोड़ = 170। औसत = 170 ÷ 5 = 34 µg/m³। यह 35 से कम है, इसलिए पट्टी अच्छा (हरा)।
2. माप 0.12 mg/m³ है। इसे µg/m³ में लिखिए। क्या यह 75 की सीमा पार करता है?
0.12 × 1000 = 120 µg/m³। 120 > 75, इसलिए अलार्म चालू होगा।
3. एक छात्र प्रति घंटे लगभग 0.5 m³ हवा लेता है। 60 µg/m³ पर 2 घंटे में कितना PM2.5 फेफड़ों तक पहुँचेगा (अगर सब साँस में जाए)?
हवा = 0.5 × 2 = 1 m³। मात्रा = 60 × 1 = 60 µg।
आम गलतियाँ
- सिर्फ़ एक माप पर भरोसा करना। कई मापों का औसत लीजिए।
- स्टेशन रसोई के धुएँ या पंखे के पास रखकर सोचना कि वह पूरे शहर की हवा बताता है।
- इकाइयाँ मिलाना: mg/m³ और µg/m³ में 1000 गुना अंतर है।
- यह सोचना कि गैस सेंसर ठीक-ठीक बता देता है कि कौन-सी गैस है। ज़्यादातर गैसों के समूह पर प्रतिक्रिया देते हैं।