घरेलू ईंधन कैसे बदले
बहुत पहले लोग उपले, फ़सल का कचरा और लकड़ी जलाते थे। बाद में कोयला और केरोसिन आए। फिर सिलेंडर में LPG (द्रवित पेट्रोलियम गैस) और पाइप प्राकृतिक गैस (PNG) आईं। आज कई घर बिजली और इंडक्शन चूल्हे व सौर कुकर भी इस्तेमाल करते हैं।
हर बदलाव किसी ज़रूरत से आया: कम धुआँ, तेज़ खाना, ईंधन जुटाने में कम समय और कम प्रदूषण। पैसा, रहने की जगह और इलाके में क्या मिलता है, यह आज भी चुनाव तय करता है।
ईंधनों की तुलना: धुआँ और काम आने वाली गर्मी
अच्छा ईंधन पूरी तरह जलता है, खूब गर्मी देता है और कम धुआँ बनाता है। लकड़ी और उपले जैसे ठोस ईंधन साधारण चूल्हे में ठीक से नहीं जलते। वे धुआँ, कालिख और कार्बन मोनोऑक्साइड बनाते हैं।
कुशलता का मतलब है कि गर्मी का कितना भाग खाने तक पहुँचता है। ये मान केवल मोटे अनुमान हैं: खुली लकड़ी की आग लगभग 10%, कोयला लगभग 15%, केरोसिन लगभग 45%, LPG लगभग 60%, इंडक्शन लगभग 85%। ज़्यादा कुशलता से ईंधन, पैसे और समय की बचत होती है।
गैस ईंधन का सुरक्षित उपयोग
LPG में तेज़ गंध वाला रसायन मिलाया जाता है ताकि रिसाव का पता चले। LPG हवा से भारी है, इसलिए फर्श के पास जमती है। पाइप प्राकृतिक गैस (मुख्यतः मीथेन) हवा से हल्की है, इसलिए ऊपर उठती है।
गैस की गंध आए तो: 1) माचिस न जलाओ, कोई स्विच न दबाओ, 2) दरवाज़े-खिड़कियाँ खोलो, 3) रेगुलेटर या गैस वाल्व बंद करो, 4) बाहर जाकर मदद बुलाओ। जोड़ों को साबुन के घोल से जाँचो: बुलबुले रिसाव बताते हैं। सिलेंडर सीधा रखो और रात में रेगुलेटर बंद करो।
ठोस और तरल ईंधन का सुरक्षित उपयोग: कार्बन मोनोऑक्साइड
हवा कम हो तो ईंधन अपूर्ण जलता है और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) बनाता है। CO रंगहीन और गंधहीन है, और खून को ऑक्सीजन ले जाने से रोकती है। कोयला, चारकोल या लकड़ी बंद कमरे में कभी न जलाओ, और जनरेटर कमरे के अंदर न चलाओ।
हवा का रास्ता या चिमनी रखो। केरोसिन बंद डिब्बे में बच्चों से दूर रखो। बिजली के चूल्हे में हाथ सूखे हों, तार टूटे न हों और सही प्लग लगे।
छोटा ईंधन सर्वे कैसे करें
1) प्रश्न तय करो: परिवार कौन-से ईंधन क्यों इस्तेमाल करते हैं? 2) छोटी शीट बनाओ: ईंधन, कारण, धुआँ, खर्च, सुरक्षा। 3) अनुमति से 10 परिवारों से पूछो। 4) उत्तरों की गिनती टैली तालिका में करो। 5) दंड आलेख बनाओ। 6) साफ़ निष्कर्ष और एक सुझाव लिखो। नाम निजी रखो और केवल कुल संख्या बताओ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कुशलता = (बर्तन तक पहुँची गर्मी / ईंधन से मिली गर्मी) × 100%
- ईंधन + ऑक्सीजन → CO₂ + H₂O + गर्मी (पूर्ण दहन)
- ईंधन + कम ऑक्सीजन → CO + कालिख + गर्मी (अपूर्ण दहन)
हल किए गए उदाहरण
1. एक चूल्हा 1000 kJ गर्मी देता है और 600 kJ बर्तन तक पहुँचती है। कुशलता निकालो।
कुशलता = 600 / 1000 × 100 = 60%।
2. गैस रिसाव में खिड़कियाँ खोलने को कहा जाता है पर स्विच दबाने को मना क्यों किया जाता है?
खुली खिड़कियाँ गैस को बाहर निकालती हैं। स्विच की छोटी चिंगारी गैस-हवा के मिश्रण को जला सकती है और आग या विस्फोट हो सकता है।
3. एक परिवार रात में बंद कमरे में चारकोल जलाता है। मुख्य ख़तरा कौन-सी गैस है और क्यों?
कार्बन मोनोऑक्साइड। हवा कम होने से अपूर्ण दहन होता है। CO में गंध नहीं होती और वह खून को ऑक्सीजन ले जाने से रोकती है।
आम गलतियाँ
- रिसाव ढूँढने के लिए माचिस जलाना। साबुन के घोल से जाँचो।
- सोचना कि कार्बन मोनोऑक्साइड की गंध आ जाएगी। उसकी कोई गंध नहीं होती।
- बड़ी लौ को बेहतर ईंधन समझना। साफ़ नीली लौ सबसे अच्छी है।
- यह भूलना कि बिजली का चूल्हा रसोई में साफ़ है, पर बिजली कहीं और कोयले या गैस से बनी हो सकती है।