कार्बन चक्र क्या है?
कार्बन हर जीव में है, हवा में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) के रूप में है, समुद्र में घुला है, और चूना पत्थर जैसी चट्टानों व कोयला, तेल, गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों में बंद है। पृथ्वी पर कुल कार्बन उतना ही रहता है, बस जगह बदलता है। यही कार्बन चक्र है।
यह एक जैव-भू-रासायनिक चक्र है (जल, नाइट्रोजन और फॉस्फोरस चक्र की तरह): तत्व जीवों (जैव), चट्टानों (भू) और रासायनिक बदलावों से होकर घूमता है।
इसे एक तंत्र (system) की तरह समझते हैं:
- भंडार (store): जहाँ कार्बन रखा रहता है।
- प्रवाह (flux): भंडारों के बीच कार्बन की आवाजाही, गीगाटन कार्बन प्रति वर्ष (GtC/वर्ष) में। 1 Gt = 1 अरब टन।
- सिंक (अवशोषक) जितना छोड़ता है उससे ज़्यादा लेता है; स्रोत (source) जितना लेता है उससे ज़्यादा छोड़ता है।
कार्बन के लिए पृथ्वी लगभग बंद तंत्र है: अंतरिक्ष से न के बराबर कार्बन आता या जाता है।
पृथ्वी के कार्बन भंडार
| भंडार | लगभग कितना कार्बन |
|---|---|
| अवसादी चट्टानें (चूना पत्थर, खड़िया) | 6–10 करोड़ GtC (सबसे बड़ा) |
| गहरा महासागर | लगभग 37 000 GtC |
| जीवाश्म ईंधन | ज्ञात भंडार में लगभग 1000 GtC |
| मिट्टी (पर्माफ्रॉस्ट सहित) | लगभग 1500–2400 GtC |
| वायुमंडल | आज लगभग 870 GtC (1750 से पहले लगभग 590) |
| पेड़-पौधे और जीव | लगभग 450–650 GtC |
ये गोल किए अनुमान हैं; असल बात क्रम है: चट्टानें ≫ महासागर ≫ मिट्टी > जीवाश्म ईंधन ≈ हवा > जीव।
कार्बन किसी भंडार में अलग-अलग समय तक रहता है: हवा में कुछ साल, पेड़ों-मिट्टी में दशकों से सदियों तक, गहरे महासागर में हज़ारों साल और चट्टानों में लाखों साल।
तेज़ चक्र: प्रकाश संश्लेषण, श्वसन और अपघटन
प्रकाश संश्लेषण: पौधे और शैवाल प्रकाश ऊर्जा से CO₂ और पानी को ग्लूकोज़ और ऑक्सीजन में बदलते हैं। कार्बन हवा से जीवों में जाता है (ज़मीन पर लगभग 120 GtC/वर्ष)।
6CO₂ + 6H₂O → C₆H₁₂O₆ + 6O₂ (प्रकाश, क्लोरोफ़िल)
श्वसन: पौधे, जंतु और सूक्ष्मजीव ऊर्जा के लिए ग्लूकोज़ तोड़ते हैं और CO₂ हवा में लौटाते हैं।
भोजन: जंतु पौधे या दूसरे जंतु खाते हैं, तो कार्बन खाद्य श्रृंखला में आगे बढ़ता है।
अपघटन: जीव मरने पर जीवाणु और कवक उन्हें तोड़ते हैं और CO₂ छोड़ते हैं। दलदली या बहुत ठंडी जगहों (पीट, पर्माफ्रॉस्ट) में सड़न धीमी होती है, इसलिए मिट्टी में कार्बन जमा होता जाता है।
दहन: लकड़ी या ईंधन जलाने पर कार्बन ऑक्सीजन से जुड़कर तेज़ी से CO₂ बनाता है।
प्रकृति में प्रकाश संश्लेषण और श्वसन लगभग बराबर रहते हैं। इसीलिए हज़ारों सालों तक हवा की CO₂ लगभग 280 ppm पर टिकी रही।
महासागर, चट्टानें और धीमा चक्र
महासागर का लेन-देन: CO₂ ठंडे सतही पानी में घुलकर गहरे समुद्र में पहुँचती है (भौतिक पंप)। सूक्ष्म समुद्री पौधे (पादप प्लवक) CO₂ लेते हैं; उनके और सीप वाले जीवों के मरने पर कुछ हिस्सा समुद्र तल पर बैठ जाता है (जैविक पंप)। गरम पानी कम CO₂ रख पाता है और कुछ छोड़ देता है।
कार्बन पृथक्करण (sequestration) यानी कार्बन को लंबे समय के भंडार में बंद करना: गहरा समुद्र, तलछट, चट्टानें, पीट या बढ़ते जंगल।
धीमा चक्र लाखों साल लेता है:
- सीपियाँ और कंकाल समुद्र तल पर जमकर दबते हैं और चूना पत्थर व खड़िया बनते हैं।
- दबे हुए पौधे और प्लवक, दबाव और गर्मी से, कोयला, तेल और गैस बनते हैं।
- रासायनिक अपक्षय: बारिश का पानी हल्का कार्बोनिक अम्ल है। यह चट्टानों को धीरे-धीरे घोलता है और नदियाँ कार्बन समुद्र तक ले जाती हैं।
- ज्वालामुखी गहरी चट्टानों की CO₂ हवा में लौटाते हैं (1 GtC/वर्ष से काफ़ी कम)।
मानव बदलाव, कार्बन बजट और जलवायु
प्राकृतिक बदलाव: जंगल की आग, ज्वालामुखी विस्फोट और ऋतुएँ प्रवाह बदलती हैं। उत्तरी गोलार्ध के बसंत में पौधे बढ़ते हैं और हवा की CO₂ थोड़ी घटती है; पतझड़ में फिर बढ़ती है।
मानव बदलाव:
- कोयला, तेल और गैस जलाने से वह कार्बन निकलता है जिसे जमा होने में लाखों साल लगे (लगभग 10 GtC/वर्ष)।
- जंगल, ख़ासकर उष्णकटिबंधीय वर्षावन, काटने से एक बड़ा भंडार और सिंक ख़त्म होता है (लगभग 1 GtC/वर्ष)। वर्षावन वाष्पोत्सर्जन से हवा में नमी भी भेजते हैं; पेड़ कम तो बारिश कम और मिट्टी सूखी, यानी जल और कार्बन चक्र आपस में जुड़े हैं।
- खेती, पीट सुखाना और सीमेंट बनाना भी कार्बन जोड़ते हैं।
कार्बन बजट आने और जाने वाले कार्बन की तुलना है। आज हमारे उत्सर्जन का लगभग आधा हवा में रह जाता है, लगभग एक-चौथाई महासागर में और एक-चौथाई ज़मीनी पौधों में जाता है। हवा की CO₂ 1750 से पहले लगभग 280 ppm थी, अब 420 ppm से ऊपर है।
ज़्यादा CO₂ से ग्रीनहाउस प्रभाव बढ़ता है और पृथ्वी गरम होती है। समुद्र में घुली अतिरिक्त CO₂ उसे ज़्यादा अम्लीय बनाती है, जिससे प्रवाल और सीप वाले जीवों को नुकसान होता है। गर्मी से पर्माफ्रॉस्ट पिघलकर और कार्बन छोड़ सकता है: यह धनात्मक पुनर्भरण (positive feedback) है।
कार्बन कैसे घटाएँ
- नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन, जल) अपनाएँ और ऊर्जा बचाएँ।
- जंगल बचाएँ और लगाएँ; मैंग्रोव और पीट भूमि वापस बहाल करें।
- बेहतर खेती, कम भोजन बर्बादी; सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहन।
- बिजलीघरों और कारख़ानों में कार्बन कैप्चर और भंडारण।
घर पर करके देखो
एक हफ़्ते में घर में इस्तेमाल हुए ईंधन लिखो (LPG, पेट्रोल, बिजली)। 1 kg LPG ≈ 3 kg CO₂ और 1 लीटर पेट्रोल ≈ 2.3 kg CO₂ मानकर अपने हफ़्ते का उत्सर्जन निकालो, फिर उसे घटाने का एक तरीका चुनो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रकाश संश्लेषण: 6CO₂ + 6H₂O → C₆H₁₂O₆ + 6O₂
- श्वसन: C₆H₁₂O₆ + 6O₂ → 6CO₂ + 6H₂O + ऊर्जा
- मीथेन का दहन: CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O
- किसी भंडार में शुद्ध बदलाव = आने वाला − जाने वाला (GtC/वर्ष)
- 1 GtC ≈ 3.67 Gt CO₂; लगभग 2.12 GtC से हवा की CO₂ 1 ppm बढ़ती है
हल किए गए उदाहरण
1. वह प्रक्रिया बताओ जो कार्बन को हवा से पौधों में ले जाती है।
प्रकाश संश्लेषण। पौधे CO₂ लेकर उसे ग्लूकोज़ में बदलते हैं।
2. एक भंडार में 120 GtC/वर्ष आता है और 123 GtC/वर्ष जाता है। यह सिंक है या स्रोत, और कितना?
शुद्ध = 120 − 123 = −3 GtC/वर्ष। यह कार्बन खोता है, यानी हर साल 3 GtC का स्रोत है।
3. पीट कार्बन भंडार क्यों है?
पीट दलदली, कम ऑक्सीजन वाली ज़मीन में बनता है। वहाँ अपघटक धीमे काम करते हैं, इसलिए मरे पौधों का कार्बन हवा में लौटने की बजाय जमा होता जाता है।
4. मनुष्य 11 GtC/वर्ष छोड़ते हैं। महासागर 2.9 और ज़मीनी पौधे 3.2 GtC/वर्ष लेते हैं। हवा में कितना रहता है?
11 − 2.9 − 3.2 = 4.9 GtC/वर्ष हवा में रहता है (लगभग 45%)।
5. 2.12 GtC = 1 ppm मानकर, 4.9 GtC से CO₂ कितना बढ़ेगी?
4.9 ÷ 2.12 ≈ 2.3 ppm एक साल में।
6. उष्णकटिबंधीय वर्षावन काटने से कार्बन चक्र और जल चक्र दोनों पर क्या असर होता है?
कार्बन: पेड़ों का भंडार ख़त्म (अक्सर जलाने से CO₂ निकलती है) और हर साल कार्बन लेने वाला सिंक भी गया। जल: वाष्पोत्सर्जन कम, हवा में नमी कम, स्थानीय बारिश कम, बहाव और मिट्टी का कटाव ज़्यादा।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि पौधे सिर्फ़ प्रकाश संश्लेषण करते हैं। वे दिन-रात श्वसन भी करते हैं।
- यह कहना कि वायुमंडल सबसे बड़ा कार्बन भंडार है। चट्टानें और गहरा समुद्र कहीं ज़्यादा रखते हैं।
- यह सोचना कि ईंधन जलाने से नया कार्बन बनता है। यह पुराना, बंद कार्बन तेज़ी से हवा में लौटाता है।
- ओज़ोन छिद्र और बढ़े ग्रीनहाउस प्रभाव को एक मानना। ज़्यादा CO₂ गर्मी रोकती है, ओज़ोन छिद्र नहीं बनाती।