पृथ्वी के जल भंडार और बंद तंत्र
भंडार (store) पानी को कुछ समय रखता है। प्रवाह (flow) पानी को एक भंडार से दूसरे में ले जाता है। पूरी पृथ्वी के लिए जल चक्र बंद तंत्र है: पानी न जुड़ता है, न घटता है, बस घूमता है।
मोटे तौर पर: महासागर लगभग 96.5%, बर्फ़ की चादरें और हिमनद लगभग 1.7%, भूजल लगभग 1.7%, झील-नदी-मिट्टी-दलदल 0.1% से भी कम, वायुमंडल लगभग 0.001%। यानी सिर्फ़ करीब 2.5% मीठा पानी है, और उसका ज़्यादातर हिस्सा बर्फ़ या गहरी चट्टानों में बंद है।
निवास समय (residence time): पानी किसी भंडार में कितना रुकता है — हवा में करीब 9 दिन, नदियों में कुछ हफ़्ते, गहरे भूजल या अंटार्कटिक बर्फ़ में हज़ारों साल।
हिममंडल (बर्फ़), स्थलमंडल (चट्टानें), जलमंडल (महासागर, नदियाँ), वायुमंडल और जैवमंडल (जीव) — सभी भंडार हैं।
वाष्पीकरण, संघनन और वर्षण
वाष्पीकरण: सूरज की ऊर्जा से पानी भाप बनता है। गर्मी, हवा, सूखापन और खुला पानी हो तो तेज़ होता है। पत्तियों से पानी निकलना वाष्पोत्सर्जन (transpiration) है। दोनों मिलकर evapotranspiration।
संघनन: ऊपर उठती हवा ठंडी होती है। ओसांक (dew point) तक ठंडी होने पर भाप धूल या नमक के कणों (संघनन केंद्रक) पर बूँदें बनाती है — बादल बनते हैं। हवा गर्मी से (संवहन), पहाड़ों से (पर्वतीय) या ठंडी हवा से टकराकर (वाताग्र) ऊपर उठती है।
वर्षण: बूँदें जुड़कर भारी हों तो वर्षा, बर्फ़ या ओले बनकर गिरती हैं। वर्षा संवहनी, पर्वतीय या वाताग्री होती है।
हिममंडल में: बर्फ़ जमा होना (संचयन) और पिघलना (अपक्षरण); ऊर्ध्वपातन में बर्फ़ सीधे भाप बनती है।
अपवाह बेसिन: एक खुला तंत्र
अपवाह बेसिन (drainage basin) वह क्षेत्र है जिसका पानी एक नदी और उसकी सहायक नदियाँ ले जाती हैं। इसकी सीमा ऊँची ज़मीन की रेखा है — जल-विभाजक (watershed)।
- इनपुट: वर्षण।
- भंडार: अवरोधन (पत्तियों पर), सतही भंडार (गड्ढे, झील), मृदा जल, भूजल, नदी नाली में पानी।
- प्रवाह: पत्तियों से नीचे टपकना और तने से बहना, अंतःस्यंदन (मिट्टी में), अंतःस्रवण/percolation (चट्टान में नीचे), throughflow (मिट्टी में बगल की ओर), भूजल प्रवाह, सतही अपवाह और नदी प्रवाह।
- आउटपुट: वाष्पोत्सर्जन और समुद्र की ओर नदी-बहाव।
यह खुला तंत्र है क्योंकि पानी और ऊर्जा इसकी सीमा पार करते हैं।
जल संतुलन
जल संतुलन बैंक खाते जैसा है: P = Q + E ± ΔS। P = वर्षण, Q = नदी-बहाव (अपवाह), E = वाष्पोत्सर्जन, ΔS = भंडार में बदलाव।
बरसात में P, E से बड़ा होता है, तो मिट्टी और भूजल भरते हैं (जल अधिशेष)। सूखे मौसम में E, P से बड़ा हो सकता है, तो भंडार ख़ाली होते हैं (मृदा जल कमी)। बारिश लौटने पर पहले मिट्टी भरती है (पुनर्भरण), फिर नदी बढ़ती है।
यह द्रव्यमान संतुलन (mass balance) है: जो अंदर आया, वह बाहर जाएगा या जमा होगा।
अपवाह और बाढ़ हाइड्रोग्राफ़
नदी-बहाव (discharge) = अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल × वेग, घन मीटर प्रति सेकंड (m³/s, क्यूमेक) में।
बाढ़ हाइड्रोग्राफ़ वर्षा के बाद समय के साथ बहाव दिखाता है, वर्षा खंभों में। भाग: आधार प्रवाह (भूजल से धीमी आपूर्ति), चढ़ती भुजा, अधिकतम बहाव (चोटी), उतरती भुजा, और लैग टाइम (सबसे ज़्यादा वर्षा से चोटी तक)।
तेज़ या धीमा?
तेज़ (flashy) हाइड्रोग्राफ़ (छोटा लैग, ऊँची चोटी): छोटे और ढलवाँ बेसिन, अपारगम्य चट्टान (चिकनी मिट्टी, ग्रेनाइट), पहले से भीगी मिट्टी, तेज़ बारिश, कम पेड़, ज़्यादा शहर। धीमा हाइड्रोग्राफ़ (लंबा लैग, नीची चोटी): बड़े समतल बेसिन, पारगम्य चट्टान (चॉक, बलुआ पत्थर), सूखी मिट्टी, जंगल।
नदी शासन (river regime) साल भर का बहाव पैटर्न है — जैसे मानसूनी नदी जुलाई–सितंबर में सबसे ऊँची, हिमनद वाली नदी गर्मी में।
जल चक्र में प्राकृतिक और मानवीय बदलाव
प्राकृतिक बदलाव: तूफ़ान से छोटी बाढ़; मौसम से वर्षा और वाष्पीकरण बदलते हैं; एल नीनो जैसे सूखे भंडार ख़ाली करते हैं; लंबे समय का जलवायु परिवर्तन हिमनद घटाता है।
मानवीय बदलाव:
- वनों की कटाई: कम अवरोधन और वाष्पोत्सर्जन, ज़्यादा सतही अपवाह, जल्दी बाढ़, मिट्टी का कटाव।
- शहरीकरण: कंक्रीट और नाले पानी तेज़ी से बहाते हैं; अंतःस्यंदन घटता है।
- खेती: जुताई, सिंचाई और नालियाँ अंतःस्यंदन और अपवाह बदलती हैं।
- भूजल दोहन: जितना भरता है उससे ज़्यादा निकालने पर जल-स्तर गिरता है।
- बाँध और जलाशय: पानी रोकते हैं, बाढ़ घटाते हैं, वाष्पीकरण बढ़ाते हैं।
कौशल और केस स्टडी
गणना कौशल
1 m² पर 1 mm वर्षा = 1 लीटर। 1 km² पर 1 mm = 1,000 m³। 1 m³ = 1,000 लीटर। बहाव के लिए औसत चौड़ाई × औसत गहराई (क्षेत्रफल) × औसत वेग।
क्षेत्र-आँकड़े दिखाना
नदी की अनुप्रस्थ काट बनाओ, वर्षा खंभों के साथ हाइड्रोग्राफ़ खींचो, बिखराव आलेख (जैसे अंतःस्यंदन दर बनाम पौधों का आवरण) बनाओ और रुझान संख्याओं से बताओ।
केस स्टडी: उष्णकटिबंधीय वर्षावन
वर्षावनों (अमेज़न, बोर्नियो) में भारी संवहनी वर्षा, बहुत ज़्यादा अवरोधन और वाष्पोत्सर्जन होता है। आधी तक वर्षा पेड़ वापस हवा में भेज देते हैं। जंगल कटने पर अपवाह और मिट्टी का कटाव बढ़ता है, स्थानीय वर्षा घट सकती है और पेड़ों का कार्बन निकलता है। संरक्षण और नए पेड़ जल व कार्बन दोनों चक्रों को बचाते हैं।
केस स्टडी: स्थानीय नदी जलग्रहण क्षेत्र
अपने पास की नदी पढ़ो: कहाँ से शुरू होती है, चट्टान और भूमि उपयोग, शहर पीने का पानी कैसे लेता है, बाढ़ कब आती है। ऊपर का प्राकृतिक भाग और नीचे का शहरी भाग तुलना करो।
घर पर करो
एक कप पानी नंगी मिट्टी पर और एक कप घास या गमले की मल्च पर डालो। दोनों के सोखने का समय नापो। किसमें ज़्यादा 'अपवाह' हुआ?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- जल संतुलन: P = Q + E ± ΔS (वर्षण = अपवाह + वाष्पोत्सर्जन ± भंडार में बदलाव)।
- बहाव Q = अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल (m²) × वेग (m/s), m³/s में।
- लैग टाइम = अधिकतम बहाव का समय − अधिकतम वर्षा का समय।
- 1 m² पर 1 mm वर्षा = 1 लीटर; 1 m³ = 1,000 लीटर।
- वाष्पोत्सर्जन (evapotranspiration) = वाष्पीकरण + पत्तियों से वाष्पोत्सर्जन।
हल किए गए उदाहरण
1. एक बेसिन में साल में 1,200 mm वर्षा। अपवाह 500 mm, वाष्पोत्सर्जन 650 mm। भंडार में बदलाव?
ΔS = P − Q − E = 1,200 − 500 − 650 = +50 mm। भंडार 50 mm बढ़ा (मिट्टी और भूजल में पानी जुड़ा)।
2. नदी 8 m चौड़ी, औसत 1.5 m गहरी, 0.6 m/s से बहती है। बहाव?
क्षेत्रफल = 8 × 1.5 = 12 m²। Q = 12 × 0.6 = 7.2 m³/s।
3. सबसे ज़्यादा वर्षा 10:00 बजे, अधिकतम बहाव 22:00 बजे। लैग टाइम?
22:00 − 10:00 = 12 घंटे।
4. 3 km² के शहर पर 20 mm वर्षा। कितने घन मीटर पानी?
1 km² पर 20 mm = 20 × 1,000 = 20,000 m³। 3 km² पर 60,000 m³ (6 करोड़ लीटर)।
5. जंगल काटकर शहर बसाने के बाद हाइड्रोग्राफ़ तेज़ क्यों हो गया?
कम अवरोधन और वाष्पोत्सर्जन से ज़्यादा पानी ज़मीन तक पहुँचता है। कंक्रीट अंतःस्यंदन रोकता है, पानी सतह और नालों से सीधे नदी में जाता है। चोटी ऊँची, लैग छोटा।
6. सूखे मौसम में P = 20 mm, E = 80 mm, अपवाह शून्य। भंडारों का क्या होगा?
ΔS = 20 − 0 − 80 = −60 mm। मिट्टी और भूजल 60 mm घटे: मृदा जल कमी।
आम गलतियाँ
- अपवाह बेसिन को बंद तंत्र कहना। पानी अंदर-बाहर होता है, इसलिए यह खुला है; सिर्फ़ पूरी पृथ्वी का चक्र बंद है।
- अंतःस्यंदन (मिट्टी की सतह में) और percolation (चट्टान में नीचे) को एक समझना।
- लैग टाइम वर्षा शुरू होने से नापना। यह सबसे ज़्यादा वर्षा से अधिकतम बहाव तक है।
- सोचना कि सारा मीठा पानी नदियों-झीलों में है। ज़्यादातर बर्फ़ और भूजल में है।