जल-उपयोग और बाढ़ नियंत्रण
जल-इंजीनियरिंग में दो काम साथ चलते हैं:
- जल-उपयोग (लाभ लेना): नदी, झील, कुएँ या जलाशय से फ़सल, पशु, घर और कारखानों के लिए पानी लेना।
- बाढ़ नियंत्रण: फ़ालतू पानी को लोगों, घरों और खेतों को नुकसान पहुँचाने से रोकना।
बाँध के पीछे का जलाशय दोनों काम करता है। बरसात में वह फ़ालतू पानी जमा करता है, इसलिए नीचे की नदी कम चढ़ती है। सूखे मौसम में वह खेतों के लिए पानी छोड़ता है। धान के खेत और तालाब भी ऐसे ही मदद करते हैं, क्योंकि वे बारिश को ज़मीन पर रोकते हैं, सारा पानी एक साथ नीचे नहीं भेजते।
बाढ़ को रोकने के तरीके: पानी जमा करना (बाँध, तालाब, खेत), नदी को सुरक्षित फैलने देना (बाढ़ का मैदान), और पानी को निकलने का रास्ता देना (नालियाँ, तटबंध)।
सिंचाई और जल-निकासी
सिंचाई यानी फ़सलों को वह पानी देना जो बारिश नहीं देती। आम तरीके:
- सतही (बाढ़ या कूँड़): पानी खेत पर या पंक्तियों के बीच बहता है। आसान है, पर काफ़ी पानी बर्बाद होता है।
- फव्वारा (स्प्रिंकलर): पाइप बारिश की तरह पानी छिड़कते हैं।
- टपक (ड्रिप): पतले पाइप जड़ों पर बूँद-बूँद पानी देते हैं। इसमें सबसे ज़्यादा पानी बचता है।
जल-निकासी यानी फ़ालतू पानी हटाना। यह इसलिए ज़रूरी है:
- बहुत पानी से जड़ों को हवा नहीं मिलती (जलभराव);
- ट्रैक्टर और हार्वेस्टर सख़्त ज़मीन पर चल पाते हैं;
- सूखे इलाकों में मिट्टी में जमा नमक बह जाता है।
सतही निकासी खुली नालियाँ हैं। भूमिगत (उप-सतही) निकासी में छेद वाले दबे पाइप मिट्टी का पानी इकट्ठा करते हैं। अच्छे खेत में सिंचाई और निकासी की योजना साथ बनती है।
सिंचाई की सुविधाएँ
पानी कई संरचनाओं की कड़ी से होकर चलता है। 3D में बाएँ से दाएँ देखो:
- बाँध और जलाशय: नदी का पानी जमा करते हैं।
- बैराज या शीर्ष-कार्य (हेडवर्क्स): नीची दीवार या गेट जो नदी का स्तर ऊँचा करके कुछ पानी नहर में भेजता है।
- मुख्य नहर और शाखा नहरें: पानी को ज़मीन पर ले जाती हैं और बँटते-बँटते छोटी होती जाती हैं।
- पाइपलाइन और पंप: जहाँ सिर्फ़ गुरुत्व से काम नहीं चलता, वहाँ पानी उठाते या धकेलते हैं।
- गेट और स्लुइस: घटाए-बढ़ाए जा सकने वाले दरवाज़े जो तय करते हैं कि कितना पानी कहाँ जाए।
- खेत तालाब और टंकी: खेतों के पास छोटे भंडार।
- निकासी नहरें: फ़ालतू पानी नदी में लौटाती हैं।
नहरें ज़्यादातर गुरुत्व से चलती हैं, इसलिए उनकी ढलान हल्की-सी नीचे की ओर होती है। इन ढाँचों की देखभाल ज़रूरी है। गाद, खरपतवार और दरारें बहाव घटाती हैं, इसलिए किसान और स्थानीय समूह हर साल सफ़ाई और मरम्मत करते हैं।
खेती के पानी के अनेक कार्य
खेती के लिए इस्तेमाल हुआ पानी फ़सल के अलावा भी फ़ायदे देता है। इन्हें बहुआयामी कार्य कहते हैं:
- बाढ़ में मदद: ऊँची मेड़ वाले धान के खेत बारिश का पानी रोकते हैं।
- भूजल भरना: खेत का कुछ पानी नीचे रिसकर कुओं को भरता है।
- ठंडक: खेतों और पौधों से भाप बनता पानी गर्मी में आसपास की हवा ठंडी करता है।
- आवास: तालाब, नहरें और गीले खेत मेंढक, मछली, कीड़ों और पक्षियों को आश्रय देते हैं।
- भू-दृश्य और संस्कृति: हरे खेत और नहरें सुंदर जगहें बनाती हैं और गाँव की परंपराएँ जीवित रखती हैं।
अगर खेत छोड़ दिए जाएँ या उन पर पक्का निर्माण हो जाए, तो ये मुफ़्त सेवाएँ भी चली जाती हैं। इसलिए खेतों और जल-नालियों की देखभाल करना ज़रूरी है।
करके देखो: पानी का रास्ता खोजो
अपने पास की नहर, तालाब या नाली देखो, या नक्शा या फ़ोटो लो। स्रोत से खेत तक और खेत से वापस नदी तक का रास्ता बनाओ। जो गेट, पंप या नालियाँ मिलें उन्हें चिह्नित करो। फिर किसी किसान या बुज़ुर्ग से पूछो: गेट कब खोले और बंद किए जाते हैं?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- पानी का आयतन (m³) = गहराई (m) × क्षेत्रफल (m²)
- 1 हेक्टेयर पर 1 mm = 10 m³
- नहर का प्रवाह Q (m³/s) = अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल (m²) × गति (m/s)
- आयतन = प्रवाह × समय
- बचत (%) = (पुराना उपयोग − नया उपयोग) ÷ पुराना उपयोग × 100
- मुख्य शब्द: सिंचाई, जल-निकासी, जलाशय, बैराज, नहर, स्लुइस, जलभराव
हल किए गए उदाहरण
1. 2 हेक्टेयर के धान के खेत को 60 mm पानी चाहिए। यह कितने m³ है? (1 हेक्टेयर = 10,000 m²)
क्षेत्रफल = 20,000 m²। गहराई = 0.06 m। आयतन = 20,000 × 0.06 = 1,200 m³।
2. एक नहर हर सेकंड 0.5 m³ पानी ले जाती है। एक घंटे में कितना बहेगा?
एक घंटा = 3,600 s। आयतन = 0.5 × 3,600 = 1,800 m³।
3. नहर 2 m चौड़ी है, पानी 1 m गहरा है और 0.5 m/s की गति से बह रहा है। प्रवाह Q निकालो।
क्षेत्रफल = 2 × 1 = 2 m²। Q = 2 × 0.5 = 1 m³/s।
4. 100 हेक्टेयर के धान के खेतों की मेड़ें अतिरिक्त 10 cm बारिश का पानी रोकती हैं। वे कितना बाढ़ का पानी जमा करते हैं? (1 हेक्टेयर = 10,000 m²)
क्षेत्रफल = 10,00,000 m²। गहराई = 0.1 m। आयतन = 1,00,000 m³।
5. खेत में 80 mm फ़ालतू पानी है। एक नाली हर घंटे 20 mm निकालती है। साफ़ होने में कितना समय लगेगा?
80 ÷ 20 = 4 घंटे।
6. बाढ़ सिंचाई एक फ़सल के लिए 900 mm पानी लेती है, जबकि टपक सिंचाई 600 mm। टपक सिंचाई कितने प्रतिशत पानी बचाती है?
बचत = (900 − 600) ÷ 900 × 100 = 33.3%, यानी लगभग एक-तिहाई।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि निकासी सिर्फ़ गीली जगहों पर चाहिए। कई सिंचित खेतों में जलभराव और नमक जमने से रोकने के लिए नालियाँ चाहिए।
- सिंचाई (पानी अंदर) और निकासी (पानी बाहर) में गड़बड़ी करना।
- यह मानना कि बाँध सिर्फ़ पानी देते हैं। वे बाढ़ का पानी भी रोकते हैं।
- भूल जाना कि 1 हेक्टेयर 10,000 m² है, जिससे आयतन का उत्तर 10 गुना ग़लत हो जाता है।