पानी और खेत की मिट्टी
मिट्टी कणों (रेत, गाद, चिकनी मिट्टी) और थोड़े सड़े पौधों से बनी होती है। कणों के बीच छिद्र होते हैं, जिनमें हवा और पानी रहते हैं। अच्छी मिट्टी में लगभग आधा आयतन छिद्रों का हो सकता है।
- बलुई मिट्टी: बड़े कण, बड़े गैप। पानी जल्दी निकल जाता है और मिट्टी जल्दी सूखती है।
- चिकनी मिट्टी: बहुत छोटे कण, बहुत छोटे गैप। वह खूब पानी रोकती है और धीरे निकालती है, इसलिए जलभराव हो सकता है।
- दोमट: दोनों का मेल। वह ज़रूरत भर पानी रोकती है और फ़ालतू पानी निकलने देती है। ज़्यादातर फ़सलें इसे पसंद करती हैं।
बारिश के बाद फ़ालतू पानी नीचे चला जाता है। छोटे गैपों में जो पानी रुकता है, वही जड़ें इस्तेमाल करती हैं। जब मिट्टी पानी से पूरी भर जाए, तो गैप में हवा नहीं बचती।
पानी और फ़सलों की बढ़त
फ़सल पानी तीन तरह से इस्तेमाल करती है। वह पौधे के शरीर का हिस्सा है, वह पौधे के अंदर भोजन और खनिज ढोता है, और पत्तियों से भाप बनकर निकलता है। इस निकलने को वाष्पोत्सर्जन कहते हैं। इससे जड़ों से और पानी ऊपर खिंचता है, जैसे स्ट्रॉ से पीना।
पौधों को सही मात्रा और सही समय पर पानी चाहिए।
- बहुत कम: पौधा मुरझाता है, धीरे बढ़ता है और फ़सल कम होती है।
- बहुत ज़्यादा (जलभराव): पानी सारे गैप भर देता है। जड़ों को हवा नहीं मिलती, वे कमज़ोर होती हैं और पत्तियाँ पीली पड़ती हैं। धान जैसी कुछ फ़सलें खड़े पानी में भी चल जाती हैं।
काम की बात: 1 वर्ग मीटर ज़मीन पर 1 mm पानी का मतलब 1 लीटर। इसलिए किसान पानी की गहराई को पूरे खेत के लिए लीटर में बदल सकता है।
पानी और जंगल की मिट्टी
जंगल की ज़मीन गिरी हुई पत्तियों से ढकी होती है और उसमें बहुत जड़ें व छोटे जीव होते हैं। इससे मिट्टी ढीली और गैपों से भरी रहती है। इसलिए जंगल की मिट्टी स्पंज की तरह काम करती है।
- बारिश सोखती है। ऊपर से बहने वाला पानी कम होता है।
- मिट्टी को थामती है। जड़ें और पत्तियाँ बूँदों की चोट धीमी करती हैं, इसलिए कीचड़ नहीं बहता।
- पानी धीरे-धीरे छोड़ती है। जमा पानी धाराओं और झरनों में रिसता है, इसलिए बारिश के बीच भी वे बहते रहते हैं।
- पानी साफ़ रखने में मदद करती है। मिट्टी और जड़ें धारा तक पहुँचने से पहले गंदगी रोक लेती हैं।
पेड़ भी पानी इस्तेमाल करते हैं और भाप छोड़ते हैं। नंगी, सख़्त मिट्टी पर पानी जल्दी बह जाता है, मिट्टी को बहा ले जाता है (अपरदन) और धारा में बाढ़ ला देता है, फिर बाद में धारा सूख भी सकती है। 3D में 20% और 80% केवल विचार समझाने के लिए बनाई गई संख्याएँ हैं; असली मान मिट्टी और ढलान से बदलते हैं।
करके देखो: स्पंज परीक्षा
दो कप लो, एक में रेत और एक में बगीचे की मिट्टी, एक ही ऊँचाई तक भरो। दोनों पर बराबर पानी धीरे-धीरे डालो और देखो नीचे के छेद से कितनी जल्दी निकलता है। पहले अनुमान लगाओ कि कौन ज़्यादा पानी रोकेगा, फिर जाँचो। जिस पौधे को बहुत पानी चाहिए, उसके लिए कौन-सी मिट्टी चुनोगे?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- 1 वर्ग मीटर पर 1 mm पानी = 1 लीटर
- पानी का आयतन (L) = गहराई (mm) × क्षेत्रफल (m²)
- मिट्टी जितना पानी रोक सकती है ≈ मिट्टी का आयतन × छिद्र का अंश
- मिट्टी का भंडार कितने दिन चलेगा = उपलब्ध पानी (mm) ÷ रोज़ का उपयोग (mm)
- मुख्य शब्द: छिद्र, दोमट, वाष्पोत्सर्जन, जलभराव, अपरदन, अपवाह
हल किए गए उदाहरण
1. 100 m² के प्लॉट पर 30 mm बारिश में कितने लीटर पानी गिरता है?
लीटर = 30 × 100 = 3,000 L।
2. किसान 1 हेक्टेयर के खेत में 50 mm सिंचाई करता है (1 हेक्टेयर = 10,000 m²)। यह लीटर और m³ में कितना पानी है?
लीटर = 50 × 10,000 = 5,00,000 L। 1 m³ = 1,000 L, इसलिए यह 500 m³ है।
3. 200 cm³ मिट्टी के नमूने में 40% छिद्र हैं। वह अधिकतम कितना पानी रोक सकता है?
200 का 40% = 80 cm³ (80 mL)।
4. 50 mm बारिश में नंगी ढलान 20% और जंगल की ढलान 80% पानी सोखती है। दोनों से कितने mm पानी बहता है?
नंगी: 50 × 0.8 = 40 mm बहा। जंगल: 50 × 0.2 = 10 mm बहा।
5. फ़सल रोज़ 5 mm पानी इस्तेमाल करती है। पौधे की पहुँच में मिट्टी में 60 mm पानी है। बारिश न हो तो भंडार कितने दिन में खत्म होगा?
60 ÷ 5 = 12 दिन।
6. 1 kg चावल उगाने में मोटे तौर पर 2,500 L पानी लगता है। एक परिवार साल में 300 kg चावल खाता है। उसे उगाने में लगभग कितना पानी लगा?
300 × 2,500 = 7,50,000 L, यानी 750 m³ (मोटा अनुमान)।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि मिट्टी अंदर से ठोस है। उसमें हमेशा गैप होते हैं जिनमें हवा और पानी रहते हैं।
- यह मानना कि ज़्यादा पानी हमेशा अच्छा है। जलभराव वाली मिट्टी में जड़ों के लिए हवा नहीं होती।
- यह सोचना कि पौधे पानी सिर्फ़ भोजन के लिए लेते हैं। ज़्यादातर पानी पत्तियों से भाप बनकर निकल जाता है।
- यह कहना कि जंगल सिर्फ़ पानी पीते हैं। वे बारिश भी सोखते हैं, मिट्टी बचाते हैं और धाराओं को पानी देते हैं।