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पृथ्वी एक तंत्र: मंडल और ऊर्जा

पृथ्वी एक बड़ी मशीन जैसी है, जिसके पाँच हिस्से हैं: चट्टान (भूमंडल), पानी (जलमंडल), बर्फ (हिममंडल), हवा (वायुमंडल) और जीवन (जीवमंडल)। इस मशीन को सूर्य चलाता है। सूर्य की ऊर्जा कई तरह की किरणों में आती है, जिसे विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम कहते हैं। सूर्य पृथ्वी को बराबर गर्म नहीं करता, इसी से पवनें, समीर और महासागरीय धाराएँ बनती हैं। पानी, कार्बन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन मंडलों के बीच गोल-गोल घूमते हैं। इंसान अब इन चक्रों को बदल रहा है, इसलिए हमें पृथ्वी का ध्यान रखना है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. यह पृथ्वी देखो। इसके 5 हिस्से हैं, जिन्हें मंडल कहते हैं: भूरी चट्टान, नीला पानी, सफ़ेद बर्फ, हवा की पतली परत और हरा जीवन। एक-एक करके हर मंडल चमकेगा।
  2. सूर्य ऊर्जा को किरणों के रूप में भेजता है। रंगीन पट्टी में किरणों के प्रकार हैं: रेडियो, इन्फ्रारेड, दृश्य, UV और X-किरण। हमारी आँख सिर्फ़ दृश्य हिस्सा देखती है। लगभग 30% धूप वापस अंतरिक्ष में लौट जाती है।
  3. एक जैसी किरण भूमध्य रेखा पर सीधी गिरती है और ध्रुवों पर तिरछी। तिरछी किरण बड़ी जगह पर फैल जाती है, इसलिए हर हिस्से को कम गर्मी मिलती है। देखो, धब्बा बड़ा और नीला होता जाता है।
  4. ज़मीन समुद्र से जल्दी गर्म होती है। दिन में ज़मीन के ऊपर की गर्म हवा ऊपर उठती है और समुद्र की ठंडी हवा अंदर आती है: यह समुद्री समीर है। रात में उल्टा होता है: स्थलीय समीर। दिन और रात बटन दबाओ।
  5. पदार्थ कभी ख़त्म नहीं होता, वह चक्र में घूमता है। पीले बिंदु के पीछे चलो: समुद्र से बादल, बादल से पहाड़, फिर पौधा और वापस। कार्बन, नाइट्रोजन या ऑक्सीजन चुनकर उनका चक्र देखो।
  6. इंसान कोयला और पेट्रोल जलाता है। स्लाइडर बढ़ाओ: CO₂ बढ़ती है, हवा ज़्यादा गर्मी रोकती है, बर्फ पिघलती है। अब सारे बटन खुद चलाकर खेलो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

बादल जलमंडल का हिस्सा है या वायुमंडल का?

दोनों का। बादल की पानी की बूँदें जलमंडल की हैं, और वे वायुमंडल में तैरती हैं। मंडलों की सीमाएँ आपस में मिलती हैं; इसीलिए पृथ्वी को तंत्र कहते हैं।

सूर्य इतना गर्म है, तो हम इन्फ्रारेड क्यों नहीं देख पाते?

हमारी आँख सिर्फ़ EM स्पेक्ट्रम की दृश्य पट्टी पहचानती है। इन्फ्रारेड की तरंगदैर्ध्य लाल रंग से लंबी है, इसलिए हम इसे त्वचा पर गर्मी की तरह महसूस करते हैं पर देख नहीं पाते।

क्या ध्रुव इसलिए ठंडे हैं क्योंकि वे सूर्य से दूर हैं?

नहीं। दूरी का फ़र्क बहुत छोटा है। असली कारण कोण है: ध्रुवों पर किरणें तिरछी गिरकर बड़े क्षेत्र में फैलती हैं, इसलिए हर हिस्से को कम ऊर्जा मिलती है।

जो हवा ज़मीन पर आती है उसे समुद्री समीर क्यों कहते हैं?

पवन का नाम वहाँ से पड़ता है जहाँ से वह आती है। समुद्री समीर समुद्र से आता है, स्थलीय समीर ज़मीन से।

पौधे ऑक्सीजन बनाते हैं, तो उन्हें ऑक्सीजन की ज़रूरत क्यों है?

पौधे दिन-रात श्वसन करते हैं, जिसमें ऑक्सीजन लगती है। दिन में वे जितनी ऑक्सीजन लेते हैं उससे कहीं ज़्यादा बनाते हैं, इसलिए कुल मिलाकर ऑक्सीजन छोड़ते हैं।

क्या ग्रीनहाउस प्रभाव बुरा है?

प्राकृतिक ग्रीनहाउस प्रभाव पृथ्वी को जीवन लायक गर्म रखता है। समस्या ईंधन जलाने से आई अतिरिक्त CO₂ है, जो बहुत ज़्यादा गर्मी रोककर वैश्विक ऊष्मन करती है।

पृथ्वी एक तंत्र है जिसके पाँच मंडल हैं

तंत्र (सिस्टम) यानी ऐसे हिस्से जो मिलकर काम करते हैं। पृथ्वी भी एक तंत्र है। इसे हम पाँच हिस्सों में बाँटते हैं, जिन्हें मंडल कहते हैं।

मंडल आपस में जुड़े हैं

कोई भी मंडल अकेले काम नहीं करता। पेड़ (जीवमंडल) मिट्टी (भूमंडल) में उगता है, पानी (जलमंडल) पीता है और हवा (वायुमंडल) से साँस लेता है। पिघलता हिमनद (हिममंडल) नदी (जलमंडल) भरता है। एक मंडल बदले तो बाकी भी बदलते हैं।

सौर विकिरण और विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम

पृथ्वी की सतह पर लगभग सारी ऊर्जा सूर्य से आती है। यह ऊर्जा खाली अंतरिक्ष से विकिरण के रूप में आती है। विकिरण ऐसी तरंगें हैं जिन्हें चलने के लिए हवा या पानी की ज़रूरत नहीं होती। इन्हें विद्युतचुंबकीय (EM) तरंगें कहते हैं। सब प्रकाश की चाल से चलती हैं।

इन तरंगों की तरंगदैर्ध्य (एक शिखर से अगले शिखर तक की दूरी) अलग-अलग होती है। लंबी से छोटी के क्रम में रखें तो EM स्पेक्ट्रम बनता है:

रेडियो → माइक्रोवेव → इन्फ्रारेड (अवरक्त) → दृश्य प्रकाश → पराबैंगनी (UV) → X-किरणें → गामा किरणें

धूप कहाँ जाती है?

लगभग 30% धूप बादल, बर्फ और चमकीली ज़मीन से टकराकर सीधे अंतरिक्ष में लौट जाती है। बाकी लगभग 70% हवा, ज़मीन और समुद्र सोख लेते हैं और गर्म होते हैं। गर्म पृथ्वी फिर इन्फ्रारेड छोड़ती है। कार्बन डाइऑक्साइड और जलवाष्प जैसी गैसें इसका कुछ हिस्सा रोककर पृथ्वी को गर्म रखती हैं। इसे ग्रीनहाउस प्रभाव कहते हैं। इसके बिना पृथ्वी जम जाती।

असमान गर्मी: पवनें, समीर और महासागरीय धाराएँ

सूर्य पृथ्वी को बराबर गर्म नहीं करता। दो बड़े कारण हैं:

पवन

गर्म हवा हल्की होती है, इसलिए ऊपर उठती है। नीचे कम दाब बन जाता है। ज़्यादा दाब वाली जगह से ठंडी, भारी हवा इस जगह को भरने दौड़ती है। यही चलती हवा पवन है। पवन हमेशा उच्च दाब से निम्न दाब की ओर चलती है।

समुद्री समीर और स्थलीय समीर

दिन में ज़मीन समुद्र से ज़्यादा गर्म होती है। ज़मीन के ऊपर की हवा उठती है और ठंडी हवा समुद्र से ज़मीन की ओर आती है: समुद्री समीर। रात में ज़मीन जल्दी ठंडी हो जाती है और समुद्र गर्म रहता है। अब समुद्र के ऊपर की हवा उठती है और हवा ज़मीन से समुद्र की ओर चलती है: स्थलीय समीर। मानसून इसी का पूरे मौसम चलने वाला बड़ा रूप है।

महासागरीय धाराएँ

समुद्र का पानी भी बड़ी-बड़ी नदियों की तरह बहता है, इन्हें महासागरीय धाराएँ कहते हैं। पवनें सतह के पानी को धकेलती हैं। भूमध्य रेखा का गर्म पानी ध्रुवों की ओर जाता है और ठंडा पानी वापस भूमध्य रेखा की ओर आता है। ठंडा, खारा पानी भारी होता है और नीचे डूबता है। इस तरह धाराएँ गर्मी को पूरी दुनिया में बाँटती हैं और तटों को गर्म या ठंडा बनाती हैं।

जैव-भू-रासायनिक चक्र

जैव = जीवन, भू = पृथ्वी, रासायनिक = पदार्थ। जैव-भू-रासायनिक चक्र वह रास्ता है जिस पर कोई पदार्थ जीवों और पृथ्वी के निर्जीव हिस्सों के बीच बार-बार घूमता है। ऊर्जा सूर्य से आती है और गर्मी बनकर चली जाती है, पर पदार्थ बार-बार काम आता है।

जल चक्र

सूर्य समुद्र और झीलों को गर्म करता है। पानी भाप बनता है (वाष्पन)। पौधे भी पत्तियों से भाप छोड़ते हैं (वाष्पोत्सर्जन)। ऊपर जाकर भाप ठंडी होकर बादल बनाती है (संघनन)। पानी बारिश या बर्फ बनकर गिरता है (वर्षण)। फिर नदियों से समुद्र में लौटता है या ज़मीन में रिस जाता है।

कार्बन चक्र

पौधे हवा से CO₂ लेकर प्रकाश-संश्लेषण से भोजन बनाते हैं। जंतु पौधे खाते हैं, तो कार्बन जंतुओं में पहुँचता है। सभी जीव श्वसन में CO₂ छोड़ते हैं। मरे हुए जीवों को अपघटक तोड़ते हैं और वे भी CO₂ छोड़ते हैं। कुछ कार्बन लाखों साल तक कोयला, तेल और गैस बनकर दबा रहता है; इन्हें जलाने पर यह तेज़ी से हवा में लौटता है। समुद्र भी बहुत सी CO₂ घोल लेते हैं।

नाइट्रोजन चक्र

हवा में 78% नाइट्रोजन गैस (N₂) है, पर पौधे इसे सीधे नहीं ले सकते। पहले इसका स्थिरीकरण होना चाहिए, यानी इसे नाइट्रेट या अमोनिया में बदलना। यह काम बिजली (तड़ित) और ख़ास जीवाणु करते हैं; कुछ जीवाणु मटर और चने की जड़ों की गाँठों में रहते हैं। पौधे मिट्टी से नाइट्रेट लेकर प्रोटीन बनाते हैं। जंतु पौधे खाकर नाइट्रोजन पाते हैं। जीव मरते हैं तो अपघटक उनकी नाइट्रोजन को अमोनिया में बदलते हैं, दूसरे जीवाणु उसे नाइट्रेट बनाते हैं (नाइट्रीकरण) और कुछ जीवाणु नाइट्रेट को वापस N₂ गैस बना देते हैं (विनाइट्रीकरण)।

ऑक्सीजन चक्र

पौधे और शैवाल प्रकाश-संश्लेषण में ऑक्सीजन छोड़ते हैं। जंतु और पौधे श्वसन में ऑक्सीजन लेते हैं और CO₂ छोड़ते हैं। जलना और जंग लगना भी ऑक्सीजन लेते हैं। ऊपर वायुमंडल में ऑक्सीजन से ओज़ोन परत (O₃) बनती है। ऑक्सीजन और कार्बन चक्र एक सिक्के के दो पहलू जैसे जुड़े हैं।

पृथ्वी तंत्र पर मानव का प्रभाव

इंसान जीवमंडल का हिस्सा है, पर अब हम पाँचों मंडलों को बदल रहे हैं।

हम क्या कर सकते हैं

कम ऊर्जा खर्च करें, सौर और पवन ऊर्जा ज़्यादा अपनाएँ, पेड़ लगाएँ और बचाएँ, उर्वरक सोच-समझकर डालें, प्लास्टिक कम करें, पानी बचाएँ, और पैदल, साइकिल या बस से चलें। बहुत लोगों के छोटे कदम मिलकर बड़ा असर करते हैं।

खुद करके देखो: घर पर समुद्री समीर बनाओ

सामान: दो एक जैसे कटोरे, एक में सूखी मिट्टी या रेत, दूसरे में पानी, धूप वाली खिड़की और थर्मामीटर (या सिर्फ़ अपना हाथ)।

  1. दोनों कटोरे 20 मिनट धूप में रखो। पहले अंदाज़ा लगाओ: कौन ज़्यादा गर्म होगा?
  2. छूकर या नापकर देखो। मिट्टी ज़्यादा गर्म है। ज़मीन जल्दी गर्म होती है।
  3. अब दोनों को 20 मिनट छाँव में रखो। फिर देखो। अब पानी ज़्यादा गर्म है। ज़मीन जल्दी ठंडी होती है।
  4. किसी बड़े की मदद से, धूप वाले कदम के तुरंत बाद दोनों कटोरों के बीच अगरबत्ती जलाओ। धुआँ गर्म मिट्टी की ओर खिसकता दिखेगा। यही छोटा-सा समुद्री समीर है।

ऊपर 3D में, कदम 3 में सूर्य की ऊँचाई स्लाइडर और कदम 4 में दिन/रात बटन से अपना अंदाज़ा जाँचो।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. हिमालय का एक हिमनद पिघलकर गंगा को भरता है। कौन-से दो मंडल आपस में जुड़ रहे हैं?

हिमनद हिममंडल (जमा पानी) का हिस्सा है। नदी जलमंडल (तरल पानी) का हिस्सा है। तो हिममंडल → जलमंडल। अगर किसान इस पानी से फ़सल सींचें, तो जीवमंडल भी जुड़ जाता है।

2. वायुमंडल के ऊपर 100 इकाई धूप पहुँचती है। लगभग 30% लौट जाती है। कितनी इकाई पृथ्वी और हवा को गर्म करती है?

लौटी = 100 का 30% = 30 इकाई। सोखी गई = 100 − 30 = 70 इकाई। ये 70 इकाई ज़मीन, समुद्र और हवा को गर्म करती हैं।

3. केरल के समुद्र तट पर दोपहर 3 बजे हवा किस ओर चलेगी, और क्यों?

दोपहर में ज़मीन समुद्र से ज़्यादा गर्म होती है। ज़मीन के ऊपर की गर्म हवा उठती है, निम्न दाब बनता है। समुद्र के ऊपर की ठंडी हवा (उच्च दाब) अंदर आती है। इसलिए हवा समुद्र से ज़मीन की ओर चलती है: समुद्री समीर।

4. टॉर्च सीधे नीचे चमकाने पर 1 m² हिस्सा रोशन होता है। तिरछा करने पर वही रोशनी 2 m² पर फैलती है। हर वर्ग मीटर की ऊर्जा कैसे बदली?

कुल ऊर्जा वही, पर क्षेत्र दोगुना। इसलिए हर m² की ऊर्जा आधी हो गई। इसी वजह से ध्रुवों पर तिरछी धूप भूमध्य रेखा की सीधी धूप से कम गर्मी देती है।

5. कोयला बिजलीघर से एक कार्बन परमाणु को अपने शरीर तक पहुँचाओ।

कोयला जलने पर कार्बन CO₂ बनकर हवा में जाता है। गेहूँ का पौधा प्रकाश-संश्लेषण में यह CO₂ लेता है और कार्बन को दाने (स्टार्च) में रखता है। तुम उस गेहूँ की रोटी खाते हो और कार्बन तुम्हारे शरीर का हिस्सा बन जाता है। साँस छोड़ने पर इसका कुछ हिस्सा फिर CO₂ बनकर हवा में लौटता है।

6. मटर उगाने वाले किसानों को अक्सर कम नाइट्रोजन उर्वरक चाहिए। नाइट्रोजन चक्र से समझाओ।

मटर की जड़ों की गाँठों में राइज़ोबियम जीवाणु रहते हैं। ये हवा की नाइट्रोजन गैस को अमोनिया/नाइट्रेट में बदल देते हैं, जिसे पौधा इस्तेमाल कर सकता है। इसलिए पौधा अपनी नाइट्रोजन खुद पा लेता है और अगली फ़सल के लिए मिट्टी भी उपजाऊ होती है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. हिमनद और ध्रुवीय बर्फ किस मंडल में आते हैं?
2. EM स्पेक्ट्रम का कौन-सा हिस्सा आँख देख सकती है?
3. ध्रुव भूमध्य रेखा से ठंडे क्यों हैं?
4. स्थलीय समीर चलता है:
5. कौन-सी क्रिया हवा से कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालती है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पृथ्वी के पाँच मंडल कौन-से हैं?

भूमंडल (चट्टान और मिट्टी), जलमंडल (तरल पानी), हिममंडल (बर्फ और हिम), वायुमंडल (हवा) और जीवमंडल (सारे जीव)। ये आपस में जुड़े हैं और लगातार पदार्थ और ऊर्जा का लेन-देन करते हैं।

जैव-भू-रासायनिक चक्र क्या है?

पानी, कार्बन, नाइट्रोजन या ऑक्सीजन जैसे किसी पदार्थ का जीवों (जैव) और पृथ्वी की चट्टान, पानी और हवा (भू) के बीच बार-बार घूमने का रास्ता।

पवन क्यों चलती है?

असमान गर्मी के कारण। गर्म हवा उठती है और निम्न दाब छोड़ती है; उच्च दाब की ठंडी हवा उसे भरने आती है। यही चलती हवा पवन है।

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